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एक संवाददाता, दादरी : जीटी रोड स्थित केआरबीएल कंपनी के पास एक ट्रैक्टर चालक अचानक रॉन्ग साइड चलने लगा, इससे वाहन तेज स्पीड में आ रही स्कूटी से टकरा गया। इस हादसे में स्कूटी सवार गंभीर रूप से घायल हो गया। आरोपित ट्रैक्टर चालक वाहन लेकर फरार हो गया। पूरी घटना एक दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। मौके पर मौजूद लोगों का आरोप है घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मी घायल को तड़पता देखते रहे। राहगीर ने एम्बुलेंस से घायल को अस्पताल पहुंचाया। मंगलवार की शाम करीब 4:15 बजे एक स्कूटी सवार दादरी की तरफ से गाजियाबाद की ओर जा रहा था। जीटी रोड पर केआरबीएल कंपनी के पास कट पर एक ट्रैक्टर दूसरी साइड में जाने के लिए खड़ा था। इस दौरान एक और ट्रैक्टर पीछे से आया और बगैर देखे रोड क्रॉस कर रॉन्ग साइड चलने लगा। अचानक ट्रैक्टर सामने आने पर एक बाइक सवार ने ब्रेक मारकर अपनी बाइक को कंट्रोल किया, लेकिन उसके पीछे आ रही तेज स्कूटी ट्रैक्टर के पीछे ट्रॉली से टकरा गई। इससे स्कूटी सवार गंभीर रूप से घायल हो गया। लोगों का आरोप है कि घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने घायल की कोई मदद नही थी। करीब 30 मिनट तक घायल सड़क के किनारे तड़पता रहा। बादलपुर कोतवाली के प्रभारी विजय कुमार ने बताया कि इस प्रकार का काई मामला संज्ञान में नही आया है। पुलिस अगर घटनास्थल पर मौजूद होती तो घायल की जरूर मदद करती।
एक संवाददाता, दादरी : जीटी रोड स्थित केआरबीएल कंपनी के पास एक ट्रैक्टर चालक अचानक रॉन्ग साइड चलने लगा, इससे वाहन तेज स्पीड में आ रही स्कूटी से टकरा गया। इस हादसे में स्कूटी सवार गंभीर रूप से घायल हो गया। आरोपित ट्रैक्टर चालक वाहन लेकर फरार हो गया। पूरी घटना एक दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। मौके पर मौजूद लोगों का आरोप है घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मी घायल को तड़पता देखते रहे। राहगीर ने एम्बुलेंस से घायल को अस्पताल पहुंचाया। मंगलवार की शाम करीब चार:पंद्रह बजे एक स्कूटी सवार दादरी की तरफ से गाजियाबाद की ओर जा रहा था। जीटी रोड पर केआरबीएल कंपनी के पास कट पर एक ट्रैक्टर दूसरी साइड में जाने के लिए खड़ा था। इस दौरान एक और ट्रैक्टर पीछे से आया और बगैर देखे रोड क्रॉस कर रॉन्ग साइड चलने लगा। अचानक ट्रैक्टर सामने आने पर एक बाइक सवार ने ब्रेक मारकर अपनी बाइक को कंट्रोल किया, लेकिन उसके पीछे आ रही तेज स्कूटी ट्रैक्टर के पीछे ट्रॉली से टकरा गई। इससे स्कूटी सवार गंभीर रूप से घायल हो गया। लोगों का आरोप है कि घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने घायल की कोई मदद नही थी। करीब तीस मिनट तक घायल सड़क के किनारे तड़पता रहा। बादलपुर कोतवाली के प्रभारी विजय कुमार ने बताया कि इस प्रकार का काई मामला संज्ञान में नही आया है। पुलिस अगर घटनास्थल पर मौजूद होती तो घायल की जरूर मदद करती।
बिग बॉस 10 के घर में लगातार अपनी हरकतों से प्रतियोगियों को परेशान करने वाले स्वामी ओम एक और वजह से चर्चा में आ गए हैं। दरअसल, उन्होंने सैफ अली खान, शाहरुख खान और आमिर खान काे एक धमकी दी है। धमकी देते हुए स्वामी ओम का वीडियो भी सामने आया है। स्वामी ओम का ये वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में स्वामी ओम कहते नजर आ रहे हैं, 'अगर बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान, शाहरुख खान और आमिर खान हिंदू धर्म कबूल नहीं करते हैं तो वो इन तीनों को किडनैप करके हिंदू बनाएंगे। ' स्वामी ने इसके पीछे ये तर्क दिया कि तीनों खान ने हिंदू लड़कियों को प्यार का झांसा देकर शादी की है। उनके मुताबिक यह लव जिहाद है। स्वामी वीडियो में कह रहे हैं, 'मुस्लिम लड़के हिंदू लड़कियों को यह दिखाते हैं कि वो उनसे प्यार करते हैं लेकिन वो लव नहीं लस्ट होता है। हम इस लस्ट के खिलाफ हैं। ' स्वामी ओम ने आगे कहा, 'मैं उनको बता दूं कि हम इन लोगों को हिंदू बनाकर शादी कराएंगे। शाहरुख खान, आमिर खान और सैफ अली खान ने नाटक करके शादी की है। अब ये लोग यहां आकर शादी करें और हिंदू धर्म स्वीकार करें। ' स्वामी ओम यहीं नहीं रुके इसके आगे उन्होंने यह धमकी तक दे डाली कि अगर ये तीनों अगले वैलेंटाइन तक यहां नहीं आए तो हम इन्हें किडनैप करके यहां लाएंगे। वो खुद इन तीनों को किडनैप करेंगे। अब बाबा बिग बॉस के घर में खूब धमाल मचा रहे हैं। वो घर में लड़कियों के छोटे कपड़ों पर कई बार कमेंट कर चुके हैं।
बिग बॉस दस के घर में लगातार अपनी हरकतों से प्रतियोगियों को परेशान करने वाले स्वामी ओम एक और वजह से चर्चा में आ गए हैं। दरअसल, उन्होंने सैफ अली खान, शाहरुख खान और आमिर खान काे एक धमकी दी है। धमकी देते हुए स्वामी ओम का वीडियो भी सामने आया है। स्वामी ओम का ये वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में स्वामी ओम कहते नजर आ रहे हैं, 'अगर बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान, शाहरुख खान और आमिर खान हिंदू धर्म कबूल नहीं करते हैं तो वो इन तीनों को किडनैप करके हिंदू बनाएंगे। ' स्वामी ने इसके पीछे ये तर्क दिया कि तीनों खान ने हिंदू लड़कियों को प्यार का झांसा देकर शादी की है। उनके मुताबिक यह लव जिहाद है। स्वामी वीडियो में कह रहे हैं, 'मुस्लिम लड़के हिंदू लड़कियों को यह दिखाते हैं कि वो उनसे प्यार करते हैं लेकिन वो लव नहीं लस्ट होता है। हम इस लस्ट के खिलाफ हैं। ' स्वामी ओम ने आगे कहा, 'मैं उनको बता दूं कि हम इन लोगों को हिंदू बनाकर शादी कराएंगे। शाहरुख खान, आमिर खान और सैफ अली खान ने नाटक करके शादी की है। अब ये लोग यहां आकर शादी करें और हिंदू धर्म स्वीकार करें। ' स्वामी ओम यहीं नहीं रुके इसके आगे उन्होंने यह धमकी तक दे डाली कि अगर ये तीनों अगले वैलेंटाइन तक यहां नहीं आए तो हम इन्हें किडनैप करके यहां लाएंगे। वो खुद इन तीनों को किडनैप करेंगे। अब बाबा बिग बॉस के घर में खूब धमाल मचा रहे हैं। वो घर में लड़कियों के छोटे कपड़ों पर कई बार कमेंट कर चुके हैं।
उन दिनों तोप एक बड़ी कीमती चीज्र समझी जाती थी। रणजीत सिंह ने शाह जमान से कहा कि यदि आप मुझे लाहौर का शासक स्वीकार कर ले तो मैं आपकी तोपे निकलवा कर पेशावर भेज दूँगा । शाह ज़मान ने उनकी शर्त मान ली और जुलाई सन् १७९९ मे लाहौर पर रणजीतसिंह का अधिकार हो गया । इसके तीन वर्प वाद उन्होंने अमृतत्तर पर चढ़ाई कर दी। उस समय अमृतसर भङ्गियों की मिसल के हाथ में था। रणजीतसिंह ने उनसे 'जमजुमा" नाम की तोप माँगी। यही "भडियों की तोप" कहलाती है। यह तोप हिन्दुओं से जजिया के रूप मे कॉसे के वर्तन लेकर बनाई गई थी । यह किसी समय रणजीत के दादा चढ़तसिंह के पास भी रही थी । रणजीतसिह को तोपों और घोड़ियों से बड़ा प्रेम था । भङ्गी लड़ाई में ठहर न सके । उनकी हार से अमृतसर और "जमजमा" दोनों रणजीतसिह के हाथ आ गये। अव रणजीतसिंह पजाव मे सर्वोपरि शासक हो गये और उन्होंने महाराजा की उपाधि धारण कर ली । अब रणजीतसिह का संपर्क अँगरेजों से हुआ । लार्ड लेक के होलकर को हरा देने से अँगरेजों के राज्य को सीमा सतलुज के किनारे तक आ पहुॅची थी। उन्होंने सतलुज के उस पार के सभी फुलकियन सिक्ख राज्यों को अपने संरक्षण मे ले लिया था। परन्तु रणजीतसिंह उन सब सिक्ख राज्यों को रखना चाहते थे । सन् १८०६ मे जीन्द और पटियाला के सिक्स शासकों में कुछ झगड़ा हो गया। राजा रणजीतसिंह उनके मध्यस्थ बनने के लिए एक बड़ी सेना के साथ सतलुज के पार जा पहुॅचे । कुछ समय तक तो ऐसा जान पढा कि रणजीतसिंह मे मुठभेड़ हो जायगी । परन्तु अँगरेजों को उत्तर-पश्चिम से फरांसीसियों या रूसियों के आक्रमण का डर था इसलिए वे टक्कर से बचने के लिए अपने और उनके बीच क्खिों को रखना चाहते थे। दूसरी रणजीतसिंह भी अंगरेजों की प्रबल शक्ति को जानते थे । इस लिये वे भी उन से लड़ना नहीं चाहते थे। उन्हें यह भी डर था कि में जब सतलुज के पार लड़ रहा हूँगा तो कहीं पीछे से में अफगान या गुरले मुझ पर याक्रमण न कर दें या दूसरी मिसलों के सिक्ख ही मेरे विरुद्ध न उठ खड़े हों। इसलिए जब सन् १८०८ में लार्ड मिण्टो ने चार्लस मटकाफ को रणजीतसिंह के पास मधि करने अमृतसर भेजा तो वे बहुत प्रसन्न हुए। इस संधि के अनुसार सतलुज नही अंग्रेजों और रणजीतसिंह के साम्राज्यों में सीमा मानी गई । इन्हीं दिनों एक घटना हो गई। मटकाफ के साथ जो थोड़ी आई थी उसकी टक्कर सिक्खों के साथ हो गई। इस मुठभेड़ में महाराजा ने अनुभव किया कि योरोपियन रीति से सधी हुई थोड़ी सी सेना के सामने वड़ी सेना भी ठहर नहीं सकती । इसलिए उन्होंने कुछ विदेशी अफ़सर नौकर रखकर अपनी सेना को सधाने का निश्चय किया। इन में सबसे अधिक महत्त्व के अफ़सर जनरल वेन्तूरा और जनरल एलाई थे । ये पहले नेपोरणजीतसिंह लियन की सेना मे थे । परन्तु उसके पतन के उपरान्त ये फारस के शाह के यहाँ नौकर हो गये थे। इनके अतिरिक्त कर्नल कोर्ट और गार्डनर नाम का एक आयरिश तोपची भी थे । इनके बाद अवीवाईल नाम का एक और फ्रेज जनरल भी आ गया । तक सभी सिक्स सिपाही घुड़सवार होते थे । वे पैदल सिपाही बनने को नीच काम समझते थे । वेन्तूरा ने सिपाहियो को नियमपूर्वक सधा कर एक ब्रिगेड तैयार की । इसी नमूने पर महाराजा ने २६००० युवको और १९२ तोपों की एक प्रवल खालसा फौज संगठित की । इस सेना को वे धीरे-धीरे बढ़ाते रहे । इस प्रबल सेना के साथ अब उन्होंने सारे पंजाब का महाराजा बनने की ठानी । उनका पहला वज्र मुलतान पर गिरा । वहाँ के शासक नवाव मुजफ्फर खाँ ने कर देने से इनकार कर दिया था । सन् १८१८ मे रणजीतसिंह ने मुलतान को घेर लिया । "जमज़मा" तोप से पत्थर के गोले वरसा कर वे दुर्ग की दीवारों को तोड़ने लगे। परन्तु ज्यों ही दीवार से कोई छेद हो जाता, कट दुर्ग वाले उसकी मरम्मत कर देते, और हाथों हाथ लड़ाई मे आक्रमणकारियों को पीछे हटा देते । घेरा कई मास तक पड़ा रहा । अन्त मे दुर्ग की सेना घटते घटते केवल ३०० मनुष्य रह गये । २ जून को कुछ अकालियों ने एक महत्त्वपूर्ण बुर्ज पर अधिकार करके भीतर जाने के लिए मार्ग बना लिया । परन्तु फिर भी सफेद दाढ़ी वाला चूडा नवाब अपने और बचे खुचे सिपाहियों के साथ युद्ध करता ही रहा । सिक्खों ने मुज़फ्फर खाँ और उसके पाँच लड़कों को बन्दूक का निशाना चना दिया। तब वाकी तीन वेटों ने हथियार रख दिए । मुलतानविजय से महाराजा के हाथ कोई तीन करोड़ रुपये का माल आया । महाराजा ने काश्मीर-विजय का विचार किया । मूलतः उनका विचार अफगानों के साथ मिल कर काश्मीर पर चढ़ाई करने का था, क्योंकि सिक्ख लोग पहाड़ की लड़ाई में अधिक अच्छे न थे । परन्तु अफगान सेनापति ने चुपके से आप ही काश्मीर पर अधिकार कर लिया और महाराजा को लूट का भाग देने से इनकार कर दिया। इसका बदला लेने के लिए रणजीतसिंह ने अटक के दुर्ग पर अधिकार कर लिया । फलतः १३ जुलाई सन् १८९३ को हजरो पर सिक्खों और के वीच घमासान युद्ध हुआ । युवराज दोस्त मुहम्मद खाँ ने, जो पीछे से कावुल का शासक बना, रिसाले के साथ धावा बोल कर सिक्खों की पंक्ति को तोड़ डाला। परन्तु वाद को सिक्खों के सेनापति दीवान मुहकमचन्द ने उसे भगा दिया । सन् १८२३ में महाराजा के सेनापति सरदार हरिसिंह नलवा ने काश्मीर को जीत लिया । परन्तु उसके बाद भी हजारा आदि पहाड़ी जातियाँ महाराजा के विरुद्ध लड़ती रहीं। पेशावर पर अधिकार हो जाने से रणजीत सिंह की पंजाबविजय संपूर्ण हो गई । पेशावर का शासक उस समय यार मुहम्मद खाँ नाम का एक अफगान जनरल था। महाराजा का पेशावर पर आक्रमण करने का एक कारण यह भी था कि वे लैली नाम की एक सुन्दर अरवी घोड़ी लेना चाहते थे । कहते है उस जैसी सुन्दर कोई दूसरी घोड़ी सारे एशिया में नहीं थी । महाराजा ने यार मुहम्मद को पकड़ कर कैद कर दिया और कहा कि जब तक तुम घोड़ी न दोगे, कैद से छूट न सकोगे । महाराजा गर्व से कहा करते थे कि इस घोड़ी के लिए मुझे साठ लाख रुपया और १२,००० सैनिकों की बलि देनी पड़ी है । वैरनवान हूगल नाम का जर्मन पर्यटक लिखता है कि लैली का रंग मटियाला था, उस पर काली वुन्दकियाँ थीं। वह सोलह हाथ ऊँची थो । उस पर बड़ो कोमतो भूत थी । उसके अस्तबल में चाँदी का पतरा मढ़ा था । उस के गामचों मे सोने की चूड़ियाँ थीं। शिवाजी और कर की भाँति रणजीतसिंह भी कुछ पढे लिखे न थे । परन्तु वे बड़े प्रबुद्ध थे । उन के मन में नई नई बातें जानने की जिज्ञासा सदा बनी रहती थी। उनकी राजसभा मे सभी धर्मों और सभी राष्ट्रों के लोग रहते थे। उनका प्रधान मंत्री बुखारा निवासी फ़कर अजीजुद्दीन था । वह चिकित्सक था । सभी महत्वपूर्ण अवसरों पर महाराजा उस से परामर्श लिया करते थे । किसी मुहिम पर जाते समय महाराजा शासन की वागडोर उसी के हाथ मे दे जाया करते थे। अजीजुद्दीन सूफी मत का अनुयायी था। तुम हिन्दू हो या मुसलमान ? इस प्रश्न के उत्तर मे वह कहा करता था - "मैं एक ऐसा मनुष्य हूँ जो नदी की प्रबल धारा मे वहता जा रहा है। मैं स्थल पर दृष्टिपात करता हूँ, परन्तु नदी के दोनों किनारों मे भेद नहीं कर सकता ।" वह फारसी और वो का वडा भारी विद्वान था । फकीर अजीजुहीन ही परराष्ट्र सचिव था। अयंसचिव राजा दीनानाथ था । इस ने राजस्व का बहुत अच्छा प्रबंध किया था । अँगरेजों की बढ़ती हुई प्रभुता को देख पहले तो महाराजा को वड़ा संदेह हुआ । एक दिन भारत के मानचित्र को देख उन्होंने दुःख से कहा - "एक दिन यह सत्र लाल हो जायगा ।" परन्तु फकीर अजीजुद्दीन के समझाने का फल यह हुआ कि महाराजा के जीवन काल में अँगरेजों के साथ कोई मुठभेड़ नहीं हुई। रणजीतसिंह का तीसरा प्रसिद्ध दरबारी लहनासिंह था । वह खालसा के लिए तोंपें ढलवाया करता था । नागरिक प्रबंध और सेना-विभाग के लिए विभिन्न श्रेणियों और राष्ट्रों से मंत्री और दरबारी चुनने का फल यह हुआ कि महाराजा के विरुद्ध कोई पड्यंत्र न खड़ा हो सका । महाराजा के पास योरोपीय सेनापति तो थे ही, समय समय पर और योरपीय पर्यटक भी रहते थे । जब सन् १८३१ मे लार्ड विलियम वेंटिंक भारत आया, तव ब्रिटिश गवर्नमेट मध्य एशिया में रूस के बढ़ने से चिन्तातुर हो रही थी। इसलिए नए गवर्नर जनरल को पंजाब केसरी के साथ संधि करने का आदेश हुआ। दोनों शासक रोपड़ मे मिले । एक बड़ा दरवार किया गया । कई दिन तक चहल पहल रही। फलतः दोनों राष्ट्रों में संधि हो गई । त्रिटिश गवर्नमेंट को अभी तक भी रूस की हौआ तंग कर रहा था । उस ने दोस्त मुहम्मद को अफगानिस्तान की गही से उतार कर उसकी जगह शाह शुजा को बैठाने का संकल्प किया । शाहशुजा एक कठपुतली था । वह अपने देश से निर्वासित होकर चिरकाल तक पंजाब मे रह चुका था। उसके संबध मे रणजीतसिंह की राय अच्छी न थी। जब उसने पहले लाहौर में शरण ली थी तो उसके पास इतिहास- प्रसिद्ध "कोहेनूर" अर्थात् "प्रकाश-पर्वत" नाम का होरा था। महाराजा ने वह उससे वरजोरी छीन लिया । लार्ड विलियम वेटिक जा चुका था और उसकी जगह लार्ड कलेंड गवर्नर जनरल होकर आया था। पहली संधि के सात वर्ष बाढ़ आलेड और महाराजा मे दुवारा संधि हुई । श्रव के इस संधि मे शाह शुजा भी सम्मिलित था। इसी के अनुसार वह कावुल की गद्दी पर बैठने जा रहा था । यह सारी योजना मूलत. गलत थी । महाराजा इसको बड़ी संदेह की दृष्टि से देखता था । परन्तु उन्होंने अपने साथी अँगरेजों का पूरी तरह समर्थन किया । महाराजा का स्वास्थ्य उस समय बहुत गिर रहा था । जून सन् १८३९ मे उनकी मृत्यु हो गई। एक तो जीवन भर रणक्षेत्र में निरन्तर प्रयास करने और दूसरे चिकित्सक के मना करने पर भी बहुत अधिक सुरापान करने से उनकी लोहे जैसी पुष्ट देह को धुन लग गया था। उन्हें कई चार मिरगी के दौरे हो चुके थे। मृत्यु से पहले उन्होंने अपने सव रत्न और राजकीय घोड़े विभिन्न धर्म-स्थानों को दान कर दिये । दो रानियाँ उनके साथ सती हो गई । मृत्यु के समय उनकी आयु केवल उनसठ वर्ष की थी । महाराजा रणजीतसिंह अपने समय का सबसे बड़ा भारतीय था। उसके प्रादुर्भाव के समय पंजाब में अराजकता फैली हुई थी; लोग आपस में लड़ रहे थे, अफगान और मराठे इसे दवा रहे थे, और वह अंगरेजों के हाथ में जाने को तैयार था । रणजीतसिंह ने बहुत से छोटे-छोटे रजवाड़ों को संयुक्त करके एक राज्य बनाया। उन्होंने काबुल से उसका सब से सुन्दर प्रान्त छीन लिया, और अँगरेज़ों जैसी प्रबल शक्ति के साथ भी बना कर रक्खी। उन्होंने अपनी सेना को नियम-पूर्वक युद्ध-कला को शिक्षा दिलाई । मरते समय उनके पास पचास सहस्र सधे हुए सिपाही, पचास सहस्र शस्त्रास्त्र से सुसज्जित स्वयंसेवक, और तीन सौ से अधिक तोपें थीं । विक्टर जैक्यूमाएट नामक पर्यटक लिखता है कि रणजीतसिंह एक असाधारण व्यक्ति थे, छोटे पैमाने पर वोनापार्ट थे; सर्वतोमुखी प्रतिभा, धार्मिक और वंशगत सहिष्णुता एवं प्रबंध-योग्यता में वे अकबर के समान थे । उनका डील छोटा था । अपने वस्त्रों पर वे ध्यान नहीं देते थे, उनके चेहरे पर झुर्रियाँ और चेचक के गहरे द्वारा थे । लार्ड आकलेंड की पुत्री मिस ईडन महाराजा के विषय में लिखती है - "उन्होंने अपने पराक्रम से अपने को एक बड़ा राजा बना लिया; वे बड़े ही न्यायप्रिय हैं, क्वचित ही प्राण्ड देते हैं। और उनकी प्रजा उन पर बहुत प्रेम रखती है।" पंजाव की युद्ध-प्रिय और उद्धत जातियों पर नर्मी से शासन करना संभव न था । इस लिए महाराजा के उत्तरी प्रदेश का अध्यक्ष जनरल अवीतावाइल लुटेरों को उनके गाँव के द्वार पर फाँसी लगा कर लटका देता या उनको तोप से उड़ा देता था । रणजीतसिंह किसानों से उतना ही लेता था जितना चे आसानी से दे सकते थे । उसने लूट-मार को दवा दिया । सिक्ख किसान उससे बहुत सन्तुष्ट थे । महाराजा आप देश में दौरा किया करते थे। जो अफसर प्रजा को दुःख देता था उसे दण्ड दिया जाता था। जिस गाँव के निकट डाका पड़ता था, उस गाँव के लोगों को पकड़ कर उनसे लूटे गये माल का मूल्य भर लिया जाता था; सिपाहियो द्वारा लूटा गया माल उनसे वापस दिला दिया जाता था। एक समय था जब सिक्स को धाड़वी ( लुटेरे ) का पर्यायवाची समझा जाता था, परन्तु अब बहुत कम चोरियाँ सुनी जाती थीं; सरदारों द्वारा लूट-मार तो बिलकुल ही बंद हो गई थी। अकाल के दिनों में महाराजा भूमि का राजस्त्र किसानों को माफ कर देते थे और दरिद्रों को अपने पास से नाज बाँटते थे । महाराजा का व्यक्तित्व वड़ा प्रभावशाली था। बचपन मे चेचक से उनकी एक आँख नष्ट हो गई थी। जब गवर्नर जनरल ने अजीजुद्दीन से पूछा कि महाराजा की कौनसी ची हैं, तो उसने उत्तर दिया- "महाराजा के मुखमण्डल का तेज इतना प्रचण्ड है कि मुझे उसकी ओर आँख उठाकर देखने का कभी साहस भी नहीं हुआ।" महर्षि दयानन्द ( संवत् १८८१ विक्रमी - संवत् १९४० विक्रमी ) संसार में बड़े-बड़े राजे-महाराजे, बड़े-बड़े सेठ-साहूकार, और बड़े-बड़े चली योद्धा हो गये, और आज कोई उनका नाम तक नहीं जानता । किन्तु जिन लोगों ने अपने जीवन को परोपकार में लगाया, जिन्होंने आप कष्ट उठा कर दूसरों को सुख पहुँचाया, उनका नाम है। संसार तक उनका गुणगान करता है । वास्तव मे ऐसे ही नर-नारियों का जीवन धन्य है। से सौ वर्ष पहले इस देश की धार्मिक और सामाजिक दशा बहुत बुरी थी । धर्म का वास्तविक तत्त्व बिलकुल लुम हो चुका था। सारा वल बाहरी चिह्नों पर ही था । माथे पर टीका लगाना, कान फड़वा कर मुद्रा डालना, किसी के हाथ का न खाना, छोटी जाति के मनुष्य के साथ छू जाने पर स्नान करना इत्यादि बातों को ही धर्म समझा जाता था। स्त्रियों को पैर की जूती समझा जाता था । शूद्रों की छाया तक से घृरणा थी। लड़के और लड़कियों के विवाह बहुत छोटी आयु में कर दिये जाते थे । इस से बहुत वड़ी संख्या में लड़कियाँ विधवा हो जाती थीं। हिन्दुओं का संगठन बिलकुल टूट चुका था । उनको एक राष्ट्रीयता के सूत्र में पिरोने वाली कोई भी चीज़ न थी । पादरी लोग इसाई धर्म का सूत्र प्रचार कर रहे थे। देश का सर्वनाश मूर्तिमान होकर चारों ओर डरा रहा था। इस विद्या और अंक के समय इस देश में एक महापुरुष आया। उसका आगमन अमावस्या की अंधकारमयी रजनी में चंचला की चमके के समान या नूफान से ठाठें मारते हुए महासागर में प्रकाश-स्तम्भ के समान था । वह था वाल- ब्रह्मचारी स्वानी दयानन्द । श्रीयुत अरविन्द ने इनके बारे में लिखा है"दयानन्द का व्यक्ति अपनी प्रणाली और के कारण, अद्भुत था । दृटान्त से य सकिए कि कोई व्यक्ति देर तक एक पर्वतमाला के बीचों-बीच चला जा रहा है । पर्वतों में से कोई बहुत ऊंचे हैं और कोई क्न । परन्तु अतीव सुन्दर, रमणीय और अपनी विशेष ऊँचाई के कारण सबके सब चित्ताकर्षक हैं। फिर उनमें एक पर्वत बिलकुल अलग खड़ा है । बड़ा महत्त्वशाली और सुस्तरमय है। उसकी चोटी पर हरियाली दीख पड़ती हैं और एक अकेला देवदार का वृक्ष आकाश से बाते कर रहा है। इस वन के भीतर से स्वच्छ और उपजाऊ जल का नवल स्रोत वेग से बहता हुआ उपत्यका की ओर दौड़ रहा है. मानो वह उस उग्त्यका का जीवनमृल है। यही संस्कार है जो दयानन्द का व्यक्तिक मेरे मन पर डालता है।" काठियावाड़ में मोरवी एक छोटा सा राज्य है। उसने टङ्कारा नाम का एक गाँव है। इससे कर्मनी नाम का एक बड़ा ज़मींदार रहता था। उसी के घर में संवत् १८८१ विक्रमी में दयानन्द का जन्म हुआ था । माता-पिता ने पहले इनका नाम मूलजी रक्खा । कुछ लोग उन्हें दयाल जो भी कहते थे । मूल जी के पिता शिवजी के उपासक थे। वे शिवरात्रि को उपवास किया करते थे । शिव की मूर्ति के सामने बैठ कर वे रात भर जागते थे । जब मूल जी चौदह वर्ष के हुए तो पिता ने उन्हें भी व्रत रखने पर बाध्य किया। माता ने बहुतेरा कहा कि लड़का छोटा है, यह भूखा न रह सकेगा, परन्तु पिता ने एक न मानी। रात को शिवजी के सारे भक्त मन्दिर में इकट्ठे हुए । कुछ देर तक तो वे शिव का मूर्ति के सामने बैठे रहे। परन्तु आधी रात होने पर निद्रा ने उन्हें श्रा दवाया । एक एक करके सब सो गये । कर्सन जी ऊँघते ऊँघते खुर्राटे लेने लगे । केवल एक मूलजी जागते रहे। सबके सो जाने से जब मंदिर में सन्नाटा छा गया तो एक चुहिया बिल से निकली और शिव की मूर्ति पर चढ़ कर चढ़ावे की मिठाई खाने लगी । वालक मूल जी यह देख कर बड़े चकित हुए। वे सोचने लगे कि यह पत्थर की प्रतिमा त्रिलोक का स्वामी शिव नहीं हो सकती, क्योंकि यह तो अपने ऊपर से एक छोटी सी चुहिया को भी नहीं हटा सकती। उन्होंने अपने पिता को जगा कर अपना संदेह उन पर प्रकट किया। पिता ने पुत्र को समझाने का बहुतेरा यत्न किया परन्तु वह उसे मूर्ति के शिव होने का विश्वास न करा सका । इस घटना के कुछ काल उपरान्त मूलजी की वहन और चाचा का देहान्त हो गया। मूलजी का इन दोनों पर वडा प्रेम था । इनकी मृत्यु से उन्हें बड़ा दुःख हुआ। संसार की ता मूर्त्तिमान होकर उनको आँखों के सामने नाचने लगी। वे एक विद्वान से संस्कृत पढ़ा करते थे। उन्होंने उस से पूछा कि मृत्यु से बचने का भी कोई उपाय है ? गुरुजी ने बताया कि मृत्यु सबके लिए अनिवार्य है। केवल ब्रह्मचर्य और योगाभ्यास से ही उसे जीता जा सकता है। यह सुन मूलजी ने योग सीखने का निश्चय किया। उधर उनके पिता को जब उनके ऐसे विचारों का पता लगा तो उन्होंने चटपट पुत्र का विवाह कर देने की ठानी, जिस से पुत्र कहीं साधु न हो जाय । यह देख मूलजी घवराए। उन्होंने देखा कि घर में रह कर विवाह से बचना कठिन है। बस उन्नीस वर्ष की आयु में एक दिन, रात के समय, वे घर से निकल पड़े। वे सड़क छोड़कर पगडंडियों से चलने लगे और दिन-रात चलते-चलते सिद्धपुर नामक स्थान पर जा पहुॅचे। सिद्धपुर में एक बड़ा मेला था। मूलजी वहाँ साधु-महात्माओ से मिल कर मृत्यु से छूटने के उपाय सीखना चाहते थे । वहाँ उन्हें एक साधु मिला। वह उनके परिवार से परिचित था । उसने टङ्कारा जाकर उनके पिता से सारी बात कह दी। उधर पिता पुत्र की तलाश में हैरान हो रहे थे । समाचार पाते ही वे कुछ सिपाही लेकर पुत्र को पकड़ने के लिए सिद्धपुर जा पहुॅचे। इस समय मूल जी विधिपूर्वक ब्रह्मचारी बन चुके थे। उनके हाथ में हुण्ड और कमण्डलु था । वस्त्र भी ब्रह्मचारी के से थे । उनका नाम शुद्ध चैतन्य ब्रह्मचारी रक्खा जा चुका था । अपने प्रिय पुत्र की यह भिखारियों की-सी दशा देख धनवान पिता को बड़ा दुःख हुआ। उसने उनका कमण्डलु तोड़ डाला कपड़े फाड़ डाले। जब रात हुई तब उन पर सिपाहियों का पहरा लगा दिया जिस से वे कहीं भाग न जाँय । ब्रह्मचारी शुद्ध चैतन्य ने उनके इस काम में तनिक भी बाधा न दी। सिपाही समझे, यह नहीं भागेगा। परंतु उनको ग्राफ़िल पाकर शुद्ध चैतन्य चुपके से वहाँ से चल दिए और फिर उनके हाथ न आए । पिता और पुत्र का यह अन्तिम मिलाप था । दयानंद ने जन-जननी और भाई-बंधु के प्रेम को, पिता की सारी संपत्ति को, और संसार के सारे भोग-विलास को, अमर जीवन प्राप्त करने के उद्देश्य से, त्याग दिया । किसी पूर्णयोगी की तलाश में वन और पर्वतों मे फिरने लगे। परंतु उनका अभीष्ट कहीं सिद्ध न हुआ । अंत में नर्मदा नदी के किनारे चारणोढ़ कर्नाली नामक स्थान मे, ज्यालानंद पुरी और शिवानंद पुरी नाम के दो साधु उन्हें मिले। उन्होंने उनको योग की सारी क्रियाएँ सिखाकर निहाल कर दिया । ब्रह्मचारी होने के कारण उन्हें अपना भोजन आप बनाना पड़ता था। इसमें बहुत सा समय नष्ट हो जाता था । योगाभ्यास और विद्याध्ययन के लिए उनके पास बहुत थोड़ा समय रह जाता था । इसलिए उन्होंने पूर्णानन्द नाम के एक महात्मा से संन्यास ले लिया । अब उनका नाम दयानन्द हो गया । दयानन्द सदा सत्य की खोज में रहते थे। वे प्रत्येक वात की परीक्षा स्वयं करते थे। एक बार उन्होंने एक ग्रन्थ में मनुष्य मे की हड्डियों और नस-नाड़ियों का कुछ वर्णन पढ़ा । इस वर्णन में उन्हें कुछ गड़बड़ मालूम हुई । एक दिन गङ्गा से एक लाश बहती जा रही थी। स्वामीजी भट नड़ी ने छलॉग मार कर उसे बाहर निकाल लाये फिर उन्होंने उसे चीर कर उस की नस-नाडियाँ देखीं । परन्तु जो कुछ उसमे लिखा था उसके बिलकुल उल्टा पाया। स्वामी जी ने पुस्तक को झूठी समझ कर उसी समय फाड़ डाला और लाश के साथ ही उसे भी नदी में बहा दिया । स्वामी जी किसी ऐले महात्मा की तलाश में घूमने लगे जो उन्हें सच्चे शिव के दर्शन करा सके। उन्होंने सुना कि गढ़वाल की अलखनन्दा नदी के पार कोई बड़ा महात्मा रहना है । वे बीहड़ वनों और दुर्गम पर्वतों को पार करके अलखनन्द्रा पर पहुँचे। उस समय नदी बर्फ से भरी हुई थी। स्वामीजी का शरीर और पाँव नगे थे । बर्फ से चलने से उनके पाँव लहूलुहान हो गये । शीत से उन का शरीर ठिठुर गया। वे अचेत हो कर बर्फ पर गिर पड़े। पहाड़ी लोगों ने उनको उठाकर उनके प्राण बचाए । पहाड़ों और जंगलों में भटकने और अपार कष्ट सहने पर भी उन्हें कोई पूर्ण गुरु नहीं मिला। अंत में उन्हें पता लगा कि मथुरा में विरजानन्द नाम के एक नेत्रहीन महात्मा रहते हैं। वे व्याकरण के पारदर्शी पण्डित और बेढ़ के पूर्ण ज्ञाता हैं। स्वामी दयानंद इन्हीं महत्मा के पास मथुरा में पहुँचे और उनसे पढ़ने लगे । महात्मा विरजानंद स्वामी दयानंद को जो पाठ एक वार पढ़ा देते थे उसे दुवारा नहीं पढाते थे। सच तो यह है कि दयानन्द को दुवारा पूछने की आवश्यकता ही न होती थी। वे गुरु-मुख से सुनते ही कट उसे स्मरण कर लेते थे । इसलिए गुरु जी उन पर बहुत प्रसन्न थे । एक दिन की बात है, पाठ बहुत लंचा और कठिन था। स्वामी जी को वह सारा याद न रहा । वे गुरु जी से दुधारा पूछने गये । गुरुजी ने बताने से इनकार कर दिया । वे बोले" आजतक तुमने पहले कभी दुवारा पाठ नहीं पूछा । मालम होता है, कल तुमने ध्यान से नहीं सुना । जाओ, मैं नहीं बताऊँ - गा।" स्वामी जी ने बहुतेरी अनुनय-विनय की, पर गुरु जी ने एक न मानी । वरन् वे कहने लगे- "यदि सारा पाठ याद न हो तो यमुना में भले ही डूब मरो, परन्तु मेरे पास मत आना ।" अन्त में हताश होकर स्वामी जी चले आए। वे यमुना तट पर एक पेड़ के नीचे बैठकर उस भूले हुए पाठ को याद करने का यत्न करने लगे। परन्तु वह याद न आया । इस पर उन्होंने सचमुच ही नदी में डूब मरने का संकल्प कर लिया । वे इस विचार में इतने डूब से गये कि उन्हें वहाँ बैठे बैठे निद्रा-सी आ गई । इस निद्रा में उन्होंने क्या देखा कि एक व्यक्ति खड़ा वही पाठ सुना रहा है। वस, फिर क्या था । उन्हें सारा पाठ स्मरण हो आया । वे हर्ष से उछल पड़े और भट गुरु जी के पास जा कर उन्होंने सारा पाठ सुना दिया। गुरुजी सुनकर बहुत प्रसन्न हुए। महात्मा विरजानन्द के पास स्वामी दयानन्द कोई ढाई साल रहे । इस काल में उन्होंने उनसे बहुत कुछ सीखा । सव से बहुमूल्य वात जो उन्होंने सीखी वह वेदार्थ की सच्ची रीति थी । इससे वे वेद-वारणी का सच्चा अर्थ समझने में समर्थ हो गये । इससे परमात्मा का सत्य स्वरूप उन पर प्रकट हो गया। अ गुरु से शिष्य के जुदा होने का समय आया। दयानन्द के पास था ही क्या जो गुरु-दक्षिणा मे देते । मुट्ठी भर लौंग लेकर गुरुजी की सेवा में उपस्थित हुए और उनके चरणों में सीस नवा कर बोले - भगवन, आप ने मुझे ज्ञान-चक्षु दिये हैः वेद के प्रकाश से मेरे मन-मन्दिर को प्रकाशित किया है। मैं आपके उपकारों का बदला किसी प्रकार भी नहीं चुका सकना । मैं निर्धन हूँ । धन-दौलत पास नहीं जो श्रीचरणों में भेट कर सकूँ । केवल ये लौंग ही हैं। स्वीकार कीजिए । गुरुदेव का हृदय प्रिय शिष्य की जुदाई के विचार से भर आया। वे उनके सिर पर हाथ रख कर बोले- "पुत्र, मैं तुम्हारे लिये परमेश्वर से मंगलकामना करता हूँ । भगवान् तुम्हारी विद्या को सफल करे ! परन्तु मैं इन लोगो की दक्षिणा नहीं चाहता । मुझे तो एक दूसरी वस्तु की आवश्यकता है और वह वस्तु तुम्हारे पास है । "
उन दिनों तोप एक बड़ी कीमती चीज्र समझी जाती थी। रणजीत सिंह ने शाह जमान से कहा कि यदि आप मुझे लाहौर का शासक स्वीकार कर ले तो मैं आपकी तोपे निकलवा कर पेशावर भेज दूँगा । शाह ज़मान ने उनकी शर्त मान ली और जुलाई सन् एक हज़ार सात सौ निन्यानवे मे लाहौर पर रणजीतसिंह का अधिकार हो गया । इसके तीन वर्प वाद उन्होंने अमृतत्तर पर चढ़ाई कर दी। उस समय अमृतसर भङ्गियों की मिसल के हाथ में था। रणजीतसिंह ने उनसे 'जमजुमा" नाम की तोप माँगी। यही "भडियों की तोप" कहलाती है। यह तोप हिन्दुओं से जजिया के रूप मे कॉसे के वर्तन लेकर बनाई गई थी । यह किसी समय रणजीत के दादा चढ़तसिंह के पास भी रही थी । रणजीतसिह को तोपों और घोड़ियों से बड़ा प्रेम था । भङ्गी लड़ाई में ठहर न सके । उनकी हार से अमृतसर और "जमजमा" दोनों रणजीतसिह के हाथ आ गये। अव रणजीतसिंह पजाव मे सर्वोपरि शासक हो गये और उन्होंने महाराजा की उपाधि धारण कर ली । अब रणजीतसिह का संपर्क अँगरेजों से हुआ । लार्ड लेक के होलकर को हरा देने से अँगरेजों के राज्य को सीमा सतलुज के किनारे तक आ पहुॅची थी। उन्होंने सतलुज के उस पार के सभी फुलकियन सिक्ख राज्यों को अपने संरक्षण मे ले लिया था। परन्तु रणजीतसिंह उन सब सिक्ख राज्यों को रखना चाहते थे । सन् एक हज़ार आठ सौ छः मे जीन्द और पटियाला के सिक्स शासकों में कुछ झगड़ा हो गया। राजा रणजीतसिंह उनके मध्यस्थ बनने के लिए एक बड़ी सेना के साथ सतलुज के पार जा पहुॅचे । कुछ समय तक तो ऐसा जान पढा कि रणजीतसिंह मे मुठभेड़ हो जायगी । परन्तु अँगरेजों को उत्तर-पश्चिम से फरांसीसियों या रूसियों के आक्रमण का डर था इसलिए वे टक्कर से बचने के लिए अपने और उनके बीच क्खिों को रखना चाहते थे। दूसरी रणजीतसिंह भी अंगरेजों की प्रबल शक्ति को जानते थे । इस लिये वे भी उन से लड़ना नहीं चाहते थे। उन्हें यह भी डर था कि में जब सतलुज के पार लड़ रहा हूँगा तो कहीं पीछे से में अफगान या गुरले मुझ पर याक्रमण न कर दें या दूसरी मिसलों के सिक्ख ही मेरे विरुद्ध न उठ खड़े हों। इसलिए जब सन् एक हज़ार आठ सौ आठ में लार्ड मिण्टो ने चार्लस मटकाफ को रणजीतसिंह के पास मधि करने अमृतसर भेजा तो वे बहुत प्रसन्न हुए। इस संधि के अनुसार सतलुज नही अंग्रेजों और रणजीतसिंह के साम्राज्यों में सीमा मानी गई । इन्हीं दिनों एक घटना हो गई। मटकाफ के साथ जो थोड़ी आई थी उसकी टक्कर सिक्खों के साथ हो गई। इस मुठभेड़ में महाराजा ने अनुभव किया कि योरोपियन रीति से सधी हुई थोड़ी सी सेना के सामने वड़ी सेना भी ठहर नहीं सकती । इसलिए उन्होंने कुछ विदेशी अफ़सर नौकर रखकर अपनी सेना को सधाने का निश्चय किया। इन में सबसे अधिक महत्त्व के अफ़सर जनरल वेन्तूरा और जनरल एलाई थे । ये पहले नेपोरणजीतसिंह लियन की सेना मे थे । परन्तु उसके पतन के उपरान्त ये फारस के शाह के यहाँ नौकर हो गये थे। इनके अतिरिक्त कर्नल कोर्ट और गार्डनर नाम का एक आयरिश तोपची भी थे । इनके बाद अवीवाईल नाम का एक और फ्रेज जनरल भी आ गया । तक सभी सिक्स सिपाही घुड़सवार होते थे । वे पैदल सिपाही बनने को नीच काम समझते थे । वेन्तूरा ने सिपाहियो को नियमपूर्वक सधा कर एक ब्रिगेड तैयार की । इसी नमूने पर महाराजा ने छब्बीस हज़ार युवको और एक सौ बानवे तोपों की एक प्रवल खालसा फौज संगठित की । इस सेना को वे धीरे-धीरे बढ़ाते रहे । इस प्रबल सेना के साथ अब उन्होंने सारे पंजाब का महाराजा बनने की ठानी । उनका पहला वज्र मुलतान पर गिरा । वहाँ के शासक नवाव मुजफ्फर खाँ ने कर देने से इनकार कर दिया था । सन् एक हज़ार आठ सौ अट्ठारह मे रणजीतसिंह ने मुलतान को घेर लिया । "जमज़मा" तोप से पत्थर के गोले वरसा कर वे दुर्ग की दीवारों को तोड़ने लगे। परन्तु ज्यों ही दीवार से कोई छेद हो जाता, कट दुर्ग वाले उसकी मरम्मत कर देते, और हाथों हाथ लड़ाई मे आक्रमणकारियों को पीछे हटा देते । घेरा कई मास तक पड़ा रहा । अन्त मे दुर्ग की सेना घटते घटते केवल तीन सौ मनुष्य रह गये । दो जून को कुछ अकालियों ने एक महत्त्वपूर्ण बुर्ज पर अधिकार करके भीतर जाने के लिए मार्ग बना लिया । परन्तु फिर भी सफेद दाढ़ी वाला चूडा नवाब अपने और बचे खुचे सिपाहियों के साथ युद्ध करता ही रहा । सिक्खों ने मुज़फ्फर खाँ और उसके पाँच लड़कों को बन्दूक का निशाना चना दिया। तब वाकी तीन वेटों ने हथियार रख दिए । मुलतानविजय से महाराजा के हाथ कोई तीन करोड़ रुपये का माल आया । महाराजा ने काश्मीर-विजय का विचार किया । मूलतः उनका विचार अफगानों के साथ मिल कर काश्मीर पर चढ़ाई करने का था, क्योंकि सिक्ख लोग पहाड़ की लड़ाई में अधिक अच्छे न थे । परन्तु अफगान सेनापति ने चुपके से आप ही काश्मीर पर अधिकार कर लिया और महाराजा को लूट का भाग देने से इनकार कर दिया। इसका बदला लेने के लिए रणजीतसिंह ने अटक के दुर्ग पर अधिकार कर लिया । फलतः तेरह जुलाई सन् एक हज़ार आठ सौ तिरानवे को हजरो पर सिक्खों और के वीच घमासान युद्ध हुआ । युवराज दोस्त मुहम्मद खाँ ने, जो पीछे से कावुल का शासक बना, रिसाले के साथ धावा बोल कर सिक्खों की पंक्ति को तोड़ डाला। परन्तु वाद को सिक्खों के सेनापति दीवान मुहकमचन्द ने उसे भगा दिया । सन् एक हज़ार आठ सौ तेईस में महाराजा के सेनापति सरदार हरिसिंह नलवा ने काश्मीर को जीत लिया । परन्तु उसके बाद भी हजारा आदि पहाड़ी जातियाँ महाराजा के विरुद्ध लड़ती रहीं। पेशावर पर अधिकार हो जाने से रणजीत सिंह की पंजाबविजय संपूर्ण हो गई । पेशावर का शासक उस समय यार मुहम्मद खाँ नाम का एक अफगान जनरल था। महाराजा का पेशावर पर आक्रमण करने का एक कारण यह भी था कि वे लैली नाम की एक सुन्दर अरवी घोड़ी लेना चाहते थे । कहते है उस जैसी सुन्दर कोई दूसरी घोड़ी सारे एशिया में नहीं थी । महाराजा ने यार मुहम्मद को पकड़ कर कैद कर दिया और कहा कि जब तक तुम घोड़ी न दोगे, कैद से छूट न सकोगे । महाराजा गर्व से कहा करते थे कि इस घोड़ी के लिए मुझे साठ लाख रुपया और बारह,शून्य सैनिकों की बलि देनी पड़ी है । वैरनवान हूगल नाम का जर्मन पर्यटक लिखता है कि लैली का रंग मटियाला था, उस पर काली वुन्दकियाँ थीं। वह सोलह हाथ ऊँची थो । उस पर बड़ो कोमतो भूत थी । उसके अस्तबल में चाँदी का पतरा मढ़ा था । उस के गामचों मे सोने की चूड़ियाँ थीं। शिवाजी और कर की भाँति रणजीतसिंह भी कुछ पढे लिखे न थे । परन्तु वे बड़े प्रबुद्ध थे । उन के मन में नई नई बातें जानने की जिज्ञासा सदा बनी रहती थी। उनकी राजसभा मे सभी धर्मों और सभी राष्ट्रों के लोग रहते थे। उनका प्रधान मंत्री बुखारा निवासी फ़कर अजीजुद्दीन था । वह चिकित्सक था । सभी महत्वपूर्ण अवसरों पर महाराजा उस से परामर्श लिया करते थे । किसी मुहिम पर जाते समय महाराजा शासन की वागडोर उसी के हाथ मे दे जाया करते थे। अजीजुद्दीन सूफी मत का अनुयायी था। तुम हिन्दू हो या मुसलमान ? इस प्रश्न के उत्तर मे वह कहा करता था - "मैं एक ऐसा मनुष्य हूँ जो नदी की प्रबल धारा मे वहता जा रहा है। मैं स्थल पर दृष्टिपात करता हूँ, परन्तु नदी के दोनों किनारों मे भेद नहीं कर सकता ।" वह फारसी और वो का वडा भारी विद्वान था । फकीर अजीजुहीन ही परराष्ट्र सचिव था। अयंसचिव राजा दीनानाथ था । इस ने राजस्व का बहुत अच्छा प्रबंध किया था । अँगरेजों की बढ़ती हुई प्रभुता को देख पहले तो महाराजा को वड़ा संदेह हुआ । एक दिन भारत के मानचित्र को देख उन्होंने दुःख से कहा - "एक दिन यह सत्र लाल हो जायगा ।" परन्तु फकीर अजीजुद्दीन के समझाने का फल यह हुआ कि महाराजा के जीवन काल में अँगरेजों के साथ कोई मुठभेड़ नहीं हुई। रणजीतसिंह का तीसरा प्रसिद्ध दरबारी लहनासिंह था । वह खालसा के लिए तोंपें ढलवाया करता था । नागरिक प्रबंध और सेना-विभाग के लिए विभिन्न श्रेणियों और राष्ट्रों से मंत्री और दरबारी चुनने का फल यह हुआ कि महाराजा के विरुद्ध कोई पड्यंत्र न खड़ा हो सका । महाराजा के पास योरोपीय सेनापति तो थे ही, समय समय पर और योरपीय पर्यटक भी रहते थे । जब सन् एक हज़ार आठ सौ इकतीस मे लार्ड विलियम वेंटिंक भारत आया, तव ब्रिटिश गवर्नमेट मध्य एशिया में रूस के बढ़ने से चिन्तातुर हो रही थी। इसलिए नए गवर्नर जनरल को पंजाब केसरी के साथ संधि करने का आदेश हुआ। दोनों शासक रोपड़ मे मिले । एक बड़ा दरवार किया गया । कई दिन तक चहल पहल रही। फलतः दोनों राष्ट्रों में संधि हो गई । त्रिटिश गवर्नमेंट को अभी तक भी रूस की हौआ तंग कर रहा था । उस ने दोस्त मुहम्मद को अफगानिस्तान की गही से उतार कर उसकी जगह शाह शुजा को बैठाने का संकल्प किया । शाहशुजा एक कठपुतली था । वह अपने देश से निर्वासित होकर चिरकाल तक पंजाब मे रह चुका था। उसके संबध मे रणजीतसिंह की राय अच्छी न थी। जब उसने पहले लाहौर में शरण ली थी तो उसके पास इतिहास- प्रसिद्ध "कोहेनूर" अर्थात् "प्रकाश-पर्वत" नाम का होरा था। महाराजा ने वह उससे वरजोरी छीन लिया । लार्ड विलियम वेटिक जा चुका था और उसकी जगह लार्ड कलेंड गवर्नर जनरल होकर आया था। पहली संधि के सात वर्ष बाढ़ आलेड और महाराजा मे दुवारा संधि हुई । श्रव के इस संधि मे शाह शुजा भी सम्मिलित था। इसी के अनुसार वह कावुल की गद्दी पर बैठने जा रहा था । यह सारी योजना मूलत. गलत थी । महाराजा इसको बड़ी संदेह की दृष्टि से देखता था । परन्तु उन्होंने अपने साथी अँगरेजों का पूरी तरह समर्थन किया । महाराजा का स्वास्थ्य उस समय बहुत गिर रहा था । जून सन् एक हज़ार आठ सौ उनतालीस मे उनकी मृत्यु हो गई। एक तो जीवन भर रणक्षेत्र में निरन्तर प्रयास करने और दूसरे चिकित्सक के मना करने पर भी बहुत अधिक सुरापान करने से उनकी लोहे जैसी पुष्ट देह को धुन लग गया था। उन्हें कई चार मिरगी के दौरे हो चुके थे। मृत्यु से पहले उन्होंने अपने सव रत्न और राजकीय घोड़े विभिन्न धर्म-स्थानों को दान कर दिये । दो रानियाँ उनके साथ सती हो गई । मृत्यु के समय उनकी आयु केवल उनसठ वर्ष की थी । महाराजा रणजीतसिंह अपने समय का सबसे बड़ा भारतीय था। उसके प्रादुर्भाव के समय पंजाब में अराजकता फैली हुई थी; लोग आपस में लड़ रहे थे, अफगान और मराठे इसे दवा रहे थे, और वह अंगरेजों के हाथ में जाने को तैयार था । रणजीतसिंह ने बहुत से छोटे-छोटे रजवाड़ों को संयुक्त करके एक राज्य बनाया। उन्होंने काबुल से उसका सब से सुन्दर प्रान्त छीन लिया, और अँगरेज़ों जैसी प्रबल शक्ति के साथ भी बना कर रक्खी। उन्होंने अपनी सेना को नियम-पूर्वक युद्ध-कला को शिक्षा दिलाई । मरते समय उनके पास पचास सहस्र सधे हुए सिपाही, पचास सहस्र शस्त्रास्त्र से सुसज्जित स्वयंसेवक, और तीन सौ से अधिक तोपें थीं । विक्टर जैक्यूमाएट नामक पर्यटक लिखता है कि रणजीतसिंह एक असाधारण व्यक्ति थे, छोटे पैमाने पर वोनापार्ट थे; सर्वतोमुखी प्रतिभा, धार्मिक और वंशगत सहिष्णुता एवं प्रबंध-योग्यता में वे अकबर के समान थे । उनका डील छोटा था । अपने वस्त्रों पर वे ध्यान नहीं देते थे, उनके चेहरे पर झुर्रियाँ और चेचक के गहरे द्वारा थे । लार्ड आकलेंड की पुत्री मिस ईडन महाराजा के विषय में लिखती है - "उन्होंने अपने पराक्रम से अपने को एक बड़ा राजा बना लिया; वे बड़े ही न्यायप्रिय हैं, क्वचित ही प्राण्ड देते हैं। और उनकी प्रजा उन पर बहुत प्रेम रखती है।" पंजाव की युद्ध-प्रिय और उद्धत जातियों पर नर्मी से शासन करना संभव न था । इस लिए महाराजा के उत्तरी प्रदेश का अध्यक्ष जनरल अवीतावाइल लुटेरों को उनके गाँव के द्वार पर फाँसी लगा कर लटका देता या उनको तोप से उड़ा देता था । रणजीतसिंह किसानों से उतना ही लेता था जितना चे आसानी से दे सकते थे । उसने लूट-मार को दवा दिया । सिक्ख किसान उससे बहुत सन्तुष्ट थे । महाराजा आप देश में दौरा किया करते थे। जो अफसर प्रजा को दुःख देता था उसे दण्ड दिया जाता था। जिस गाँव के निकट डाका पड़ता था, उस गाँव के लोगों को पकड़ कर उनसे लूटे गये माल का मूल्य भर लिया जाता था; सिपाहियो द्वारा लूटा गया माल उनसे वापस दिला दिया जाता था। एक समय था जब सिक्स को धाड़वी का पर्यायवाची समझा जाता था, परन्तु अब बहुत कम चोरियाँ सुनी जाती थीं; सरदारों द्वारा लूट-मार तो बिलकुल ही बंद हो गई थी। अकाल के दिनों में महाराजा भूमि का राजस्त्र किसानों को माफ कर देते थे और दरिद्रों को अपने पास से नाज बाँटते थे । महाराजा का व्यक्तित्व वड़ा प्रभावशाली था। बचपन मे चेचक से उनकी एक आँख नष्ट हो गई थी। जब गवर्नर जनरल ने अजीजुद्दीन से पूछा कि महाराजा की कौनसी ची हैं, तो उसने उत्तर दिया- "महाराजा के मुखमण्डल का तेज इतना प्रचण्ड है कि मुझे उसकी ओर आँख उठाकर देखने का कभी साहस भी नहीं हुआ।" महर्षि दयानन्द संसार में बड़े-बड़े राजे-महाराजे, बड़े-बड़े सेठ-साहूकार, और बड़े-बड़े चली योद्धा हो गये, और आज कोई उनका नाम तक नहीं जानता । किन्तु जिन लोगों ने अपने जीवन को परोपकार में लगाया, जिन्होंने आप कष्ट उठा कर दूसरों को सुख पहुँचाया, उनका नाम है। संसार तक उनका गुणगान करता है । वास्तव मे ऐसे ही नर-नारियों का जीवन धन्य है। से सौ वर्ष पहले इस देश की धार्मिक और सामाजिक दशा बहुत बुरी थी । धर्म का वास्तविक तत्त्व बिलकुल लुम हो चुका था। सारा वल बाहरी चिह्नों पर ही था । माथे पर टीका लगाना, कान फड़वा कर मुद्रा डालना, किसी के हाथ का न खाना, छोटी जाति के मनुष्य के साथ छू जाने पर स्नान करना इत्यादि बातों को ही धर्म समझा जाता था। स्त्रियों को पैर की जूती समझा जाता था । शूद्रों की छाया तक से घृरणा थी। लड़के और लड़कियों के विवाह बहुत छोटी आयु में कर दिये जाते थे । इस से बहुत वड़ी संख्या में लड़कियाँ विधवा हो जाती थीं। हिन्दुओं का संगठन बिलकुल टूट चुका था । उनको एक राष्ट्रीयता के सूत्र में पिरोने वाली कोई भी चीज़ न थी । पादरी लोग इसाई धर्म का सूत्र प्रचार कर रहे थे। देश का सर्वनाश मूर्तिमान होकर चारों ओर डरा रहा था। इस विद्या और अंक के समय इस देश में एक महापुरुष आया। उसका आगमन अमावस्या की अंधकारमयी रजनी में चंचला की चमके के समान या नूफान से ठाठें मारते हुए महासागर में प्रकाश-स्तम्भ के समान था । वह था वाल- ब्रह्मचारी स्वानी दयानन्द । श्रीयुत अरविन्द ने इनके बारे में लिखा है"दयानन्द का व्यक्ति अपनी प्रणाली और के कारण, अद्भुत था । दृटान्त से य सकिए कि कोई व्यक्ति देर तक एक पर्वतमाला के बीचों-बीच चला जा रहा है । पर्वतों में से कोई बहुत ऊंचे हैं और कोई क्न । परन्तु अतीव सुन्दर, रमणीय और अपनी विशेष ऊँचाई के कारण सबके सब चित्ताकर्षक हैं। फिर उनमें एक पर्वत बिलकुल अलग खड़ा है । बड़ा महत्त्वशाली और सुस्तरमय है। उसकी चोटी पर हरियाली दीख पड़ती हैं और एक अकेला देवदार का वृक्ष आकाश से बाते कर रहा है। इस वन के भीतर से स्वच्छ और उपजाऊ जल का नवल स्रोत वेग से बहता हुआ उपत्यका की ओर दौड़ रहा है. मानो वह उस उग्त्यका का जीवनमृल है। यही संस्कार है जो दयानन्द का व्यक्तिक मेरे मन पर डालता है।" काठियावाड़ में मोरवी एक छोटा सा राज्य है। उसने टङ्कारा नाम का एक गाँव है। इससे कर्मनी नाम का एक बड़ा ज़मींदार रहता था। उसी के घर में संवत् एक हज़ार आठ सौ इक्यासी विक्रमी में दयानन्द का जन्म हुआ था । माता-पिता ने पहले इनका नाम मूलजी रक्खा । कुछ लोग उन्हें दयाल जो भी कहते थे । मूल जी के पिता शिवजी के उपासक थे। वे शिवरात्रि को उपवास किया करते थे । शिव की मूर्ति के सामने बैठ कर वे रात भर जागते थे । जब मूल जी चौदह वर्ष के हुए तो पिता ने उन्हें भी व्रत रखने पर बाध्य किया। माता ने बहुतेरा कहा कि लड़का छोटा है, यह भूखा न रह सकेगा, परन्तु पिता ने एक न मानी। रात को शिवजी के सारे भक्त मन्दिर में इकट्ठे हुए । कुछ देर तक तो वे शिव का मूर्ति के सामने बैठे रहे। परन्तु आधी रात होने पर निद्रा ने उन्हें श्रा दवाया । एक एक करके सब सो गये । कर्सन जी ऊँघते ऊँघते खुर्राटे लेने लगे । केवल एक मूलजी जागते रहे। सबके सो जाने से जब मंदिर में सन्नाटा छा गया तो एक चुहिया बिल से निकली और शिव की मूर्ति पर चढ़ कर चढ़ावे की मिठाई खाने लगी । वालक मूल जी यह देख कर बड़े चकित हुए। वे सोचने लगे कि यह पत्थर की प्रतिमा त्रिलोक का स्वामी शिव नहीं हो सकती, क्योंकि यह तो अपने ऊपर से एक छोटी सी चुहिया को भी नहीं हटा सकती। उन्होंने अपने पिता को जगा कर अपना संदेह उन पर प्रकट किया। पिता ने पुत्र को समझाने का बहुतेरा यत्न किया परन्तु वह उसे मूर्ति के शिव होने का विश्वास न करा सका । इस घटना के कुछ काल उपरान्त मूलजी की वहन और चाचा का देहान्त हो गया। मूलजी का इन दोनों पर वडा प्रेम था । इनकी मृत्यु से उन्हें बड़ा दुःख हुआ। संसार की ता मूर्त्तिमान होकर उनको आँखों के सामने नाचने लगी। वे एक विद्वान से संस्कृत पढ़ा करते थे। उन्होंने उस से पूछा कि मृत्यु से बचने का भी कोई उपाय है ? गुरुजी ने बताया कि मृत्यु सबके लिए अनिवार्य है। केवल ब्रह्मचर्य और योगाभ्यास से ही उसे जीता जा सकता है। यह सुन मूलजी ने योग सीखने का निश्चय किया। उधर उनके पिता को जब उनके ऐसे विचारों का पता लगा तो उन्होंने चटपट पुत्र का विवाह कर देने की ठानी, जिस से पुत्र कहीं साधु न हो जाय । यह देख मूलजी घवराए। उन्होंने देखा कि घर में रह कर विवाह से बचना कठिन है। बस उन्नीस वर्ष की आयु में एक दिन, रात के समय, वे घर से निकल पड़े। वे सड़क छोड़कर पगडंडियों से चलने लगे और दिन-रात चलते-चलते सिद्धपुर नामक स्थान पर जा पहुॅचे। सिद्धपुर में एक बड़ा मेला था। मूलजी वहाँ साधु-महात्माओ से मिल कर मृत्यु से छूटने के उपाय सीखना चाहते थे । वहाँ उन्हें एक साधु मिला। वह उनके परिवार से परिचित था । उसने टङ्कारा जाकर उनके पिता से सारी बात कह दी। उधर पिता पुत्र की तलाश में हैरान हो रहे थे । समाचार पाते ही वे कुछ सिपाही लेकर पुत्र को पकड़ने के लिए सिद्धपुर जा पहुॅचे। इस समय मूल जी विधिपूर्वक ब्रह्मचारी बन चुके थे। उनके हाथ में हुण्ड और कमण्डलु था । वस्त्र भी ब्रह्मचारी के से थे । उनका नाम शुद्ध चैतन्य ब्रह्मचारी रक्खा जा चुका था । अपने प्रिय पुत्र की यह भिखारियों की-सी दशा देख धनवान पिता को बड़ा दुःख हुआ। उसने उनका कमण्डलु तोड़ डाला कपड़े फाड़ डाले। जब रात हुई तब उन पर सिपाहियों का पहरा लगा दिया जिस से वे कहीं भाग न जाँय । ब्रह्मचारी शुद्ध चैतन्य ने उनके इस काम में तनिक भी बाधा न दी। सिपाही समझे, यह नहीं भागेगा। परंतु उनको ग्राफ़िल पाकर शुद्ध चैतन्य चुपके से वहाँ से चल दिए और फिर उनके हाथ न आए । पिता और पुत्र का यह अन्तिम मिलाप था । दयानंद ने जन-जननी और भाई-बंधु के प्रेम को, पिता की सारी संपत्ति को, और संसार के सारे भोग-विलास को, अमर जीवन प्राप्त करने के उद्देश्य से, त्याग दिया । किसी पूर्णयोगी की तलाश में वन और पर्वतों मे फिरने लगे। परंतु उनका अभीष्ट कहीं सिद्ध न हुआ । अंत में नर्मदा नदी के किनारे चारणोढ़ कर्नाली नामक स्थान मे, ज्यालानंद पुरी और शिवानंद पुरी नाम के दो साधु उन्हें मिले। उन्होंने उनको योग की सारी क्रियाएँ सिखाकर निहाल कर दिया । ब्रह्मचारी होने के कारण उन्हें अपना भोजन आप बनाना पड़ता था। इसमें बहुत सा समय नष्ट हो जाता था । योगाभ्यास और विद्याध्ययन के लिए उनके पास बहुत थोड़ा समय रह जाता था । इसलिए उन्होंने पूर्णानन्द नाम के एक महात्मा से संन्यास ले लिया । अब उनका नाम दयानन्द हो गया । दयानन्द सदा सत्य की खोज में रहते थे। वे प्रत्येक वात की परीक्षा स्वयं करते थे। एक बार उन्होंने एक ग्रन्थ में मनुष्य मे की हड्डियों और नस-नाड़ियों का कुछ वर्णन पढ़ा । इस वर्णन में उन्हें कुछ गड़बड़ मालूम हुई । एक दिन गङ्गा से एक लाश बहती जा रही थी। स्वामीजी भट नड़ी ने छलॉग मार कर उसे बाहर निकाल लाये फिर उन्होंने उसे चीर कर उस की नस-नाडियाँ देखीं । परन्तु जो कुछ उसमे लिखा था उसके बिलकुल उल्टा पाया। स्वामी जी ने पुस्तक को झूठी समझ कर उसी समय फाड़ डाला और लाश के साथ ही उसे भी नदी में बहा दिया । स्वामी जी किसी ऐले महात्मा की तलाश में घूमने लगे जो उन्हें सच्चे शिव के दर्शन करा सके। उन्होंने सुना कि गढ़वाल की अलखनन्दा नदी के पार कोई बड़ा महात्मा रहना है । वे बीहड़ वनों और दुर्गम पर्वतों को पार करके अलखनन्द्रा पर पहुँचे। उस समय नदी बर्फ से भरी हुई थी। स्वामीजी का शरीर और पाँव नगे थे । बर्फ से चलने से उनके पाँव लहूलुहान हो गये । शीत से उन का शरीर ठिठुर गया। वे अचेत हो कर बर्फ पर गिर पड़े। पहाड़ी लोगों ने उनको उठाकर उनके प्राण बचाए । पहाड़ों और जंगलों में भटकने और अपार कष्ट सहने पर भी उन्हें कोई पूर्ण गुरु नहीं मिला। अंत में उन्हें पता लगा कि मथुरा में विरजानन्द नाम के एक नेत्रहीन महात्मा रहते हैं। वे व्याकरण के पारदर्शी पण्डित और बेढ़ के पूर्ण ज्ञाता हैं। स्वामी दयानंद इन्हीं महत्मा के पास मथुरा में पहुँचे और उनसे पढ़ने लगे । महात्मा विरजानंद स्वामी दयानंद को जो पाठ एक वार पढ़ा देते थे उसे दुवारा नहीं पढाते थे। सच तो यह है कि दयानन्द को दुवारा पूछने की आवश्यकता ही न होती थी। वे गुरु-मुख से सुनते ही कट उसे स्मरण कर लेते थे । इसलिए गुरु जी उन पर बहुत प्रसन्न थे । एक दिन की बात है, पाठ बहुत लंचा और कठिन था। स्वामी जी को वह सारा याद न रहा । वे गुरु जी से दुधारा पूछने गये । गुरुजी ने बताने से इनकार कर दिया । वे बोले" आजतक तुमने पहले कभी दुवारा पाठ नहीं पूछा । मालम होता है, कल तुमने ध्यान से नहीं सुना । जाओ, मैं नहीं बताऊँ - गा।" स्वामी जी ने बहुतेरी अनुनय-विनय की, पर गुरु जी ने एक न मानी । वरन् वे कहने लगे- "यदि सारा पाठ याद न हो तो यमुना में भले ही डूब मरो, परन्तु मेरे पास मत आना ।" अन्त में हताश होकर स्वामी जी चले आए। वे यमुना तट पर एक पेड़ के नीचे बैठकर उस भूले हुए पाठ को याद करने का यत्न करने लगे। परन्तु वह याद न आया । इस पर उन्होंने सचमुच ही नदी में डूब मरने का संकल्प कर लिया । वे इस विचार में इतने डूब से गये कि उन्हें वहाँ बैठे बैठे निद्रा-सी आ गई । इस निद्रा में उन्होंने क्या देखा कि एक व्यक्ति खड़ा वही पाठ सुना रहा है। वस, फिर क्या था । उन्हें सारा पाठ स्मरण हो आया । वे हर्ष से उछल पड़े और भट गुरु जी के पास जा कर उन्होंने सारा पाठ सुना दिया। गुरुजी सुनकर बहुत प्रसन्न हुए। महात्मा विरजानन्द के पास स्वामी दयानन्द कोई ढाई साल रहे । इस काल में उन्होंने उनसे बहुत कुछ सीखा । सव से बहुमूल्य वात जो उन्होंने सीखी वह वेदार्थ की सच्ची रीति थी । इससे वे वेद-वारणी का सच्चा अर्थ समझने में समर्थ हो गये । इससे परमात्मा का सत्य स्वरूप उन पर प्रकट हो गया। अ गुरु से शिष्य के जुदा होने का समय आया। दयानन्द के पास था ही क्या जो गुरु-दक्षिणा मे देते । मुट्ठी भर लौंग लेकर गुरुजी की सेवा में उपस्थित हुए और उनके चरणों में सीस नवा कर बोले - भगवन, आप ने मुझे ज्ञान-चक्षु दिये हैः वेद के प्रकाश से मेरे मन-मन्दिर को प्रकाशित किया है। मैं आपके उपकारों का बदला किसी प्रकार भी नहीं चुका सकना । मैं निर्धन हूँ । धन-दौलत पास नहीं जो श्रीचरणों में भेट कर सकूँ । केवल ये लौंग ही हैं। स्वीकार कीजिए । गुरुदेव का हृदय प्रिय शिष्य की जुदाई के विचार से भर आया। वे उनके सिर पर हाथ रख कर बोले- "पुत्र, मैं तुम्हारे लिये परमेश्वर से मंगलकामना करता हूँ । भगवान् तुम्हारी विद्या को सफल करे ! परन्तु मैं इन लोगो की दक्षिणा नहीं चाहता । मुझे तो एक दूसरी वस्तु की आवश्यकता है और वह वस्तु तुम्हारे पास है । "
तेजस्वी यादव ने पूछा है कि क्या नीतीश कुमार को इस बात का डर है कि बिहार में राष्ट्रपति शासन रहते चुनाव हो जाएगा? इतना ही नहीं नेता प्रतिपक्ष ने बिहार में जदयू की तरफ से की जा रही चुनावी तैयारी और वर्चुअल रैली पर भी तंज कसा है. पटनाः बिहार में कोरोना संक्रमण के बिगड़ते हालात को देखते हुए विधानसभा चुनाव पर अब सवाल उठने लगा है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा है कि बिहार में हालात विधानसभा चुनाव कराने लायक नहीं है. उन्होंने कहा कि बाकी बात चुनाव आयोग देखेगा. तेजस्वी यादव ने कहा कि जांच बिलकुल नहीं हो रही है। मुख्यमंत्री की जांच की रिपोर्ट 2 घंटे में आ जाती है। जब खुद पर आपदा आती है तो अपने घर में डॉक्टर भी है, वेंटिलेटर भी और नर्सें भी। CM के आवास पर 6 डॉक्टर,3 नर्सें और वेंटिलेटर भी है। इस बीच बिहार भाजपा अध्यक्ष के पूर्व अध्यक्ष गोपाल नारायण सिंह ने कहा कि तेजस्वी यादव ने कोई काम नहीं किया। खाली CM (बिहार) पर उंगली उठा रहे हैं। ये कहना कि 2 घंटे में CM की टेस्ट रिपोर्ट आ जाती है गलत है। एक रिपोर्ट आने में कम से कम 6 घंटे तक लगते हैं। बिहार की जितनी क्षमता है उतने टेस्ट किए जा रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष ने बिहार में चुनावी तैयारी को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जोरदार हमला बोला है. तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश कुमार बिहार में लाशों के ढेर पर चुनाव करना चाहते हैं पता नहीं नीतीश कुमार को किस बात की जल्दबाजी है. तेजस्वी यादव ने पूछा है कि क्या नीतीश कुमार को इस बात का डर है कि बिहार में राष्ट्रपति शासन रहते चुनाव हो जाएगा? इतना ही नहीं नेता प्रतिपक्ष ने बिहार में जदयू की तरफ से की जा रही चुनावी तैयारी और वर्चुअल रैली पर भी तंज कसा है. उन्होंने कहा कि आप डिजिटल रैली कर रहे हैं, जबकि लोगों का आज ठीक से इलाज तक नहीं हो पा रहा. मुख्यमंत्री आवास तक कोरोना का है असर. ऐसी बीमारी जिससे पूरी दुनिया परेशान है, उसे सरकार हल्के में ले रही है. तेजस्वी यादव ने कहा है कि पता नहीं नीतीश कुमार को चुनाव की इतनी जल्दबाजी क्यों है? तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा कि बिहार में कोरोना कंट्रोल से बाहर हो गया है. बिहार में सब कुछ भगवान भरोसे हैं. नीतीश कुमार ने स्वास्थ्य विभाग को बर्बाद कर दिया है. स्वास्थ्य विभाग खुद आईसीयू में हैं. तेजस्वी ने कहा कि सबकी जांच हो और रिपोर्ट आने में तेजी हो. बिहार में डॉक्टर और नर्स की कमी से जूझ रहा है. सिंतबर तक कोरोना बिहार में और गंभीर हो जाएगा. तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार की सरकार पर निशाना साधने हुए कहा कि मुख्यमंत्री की जांच रिपोर्ट दो घंटे में बाकी जनता भगवान् भरोसे है. तेजस्वी ने राजद दफ्तर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि हमारे यहां सबसे बीमार लोग प्राईवेट अस्पताल में भर्ती होते हैं. यहां सरकारी अस्पताल में कोई व्यवस्था नहीं है. उन्होंने कहा कि कोरोना से पूरा विश्व जूझ रहा है, बिहार में भी स्थिति भयावह है. हमलोगों ने सरकार से गुजारिश की रैंडम टेस्ट की व्यवस्था की जाए. लेकिन सरकार गंभीर नहीं है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की रिपोर्ट 2 घंटे में आ जाती है. ऐसे में हम चाहते हैं कि सबका रिपोर्ट जल्द से जल्द आ जाए. तेजस्वी ने कहा कि हमलोगों को चिंता करनी चाहिए की बिहार सरकार ने कोरोना से लड़ने में हाथ खडा कर लिया है. सरकार तो कहती है कि 15 साल में हमने खूब विकास किया है, लेकिन हकीकत है कि सरकार ने जनता को ठगा है. चमकी बुखार से सैकड़ों बच्चों की मौत हो जाती है, बेड, डॉक्टर, नर्स की कमी है. स्वास्थ्य सेवा में बिहार सबसे निचले स्तर पर है. बिहार में 2005 में कुल 101 पीएचसी थे, लेकिन आज 15 साल में 49 केंद्र स्थापित किए गए. एक साल में मात्र तीन बना. लेकिन दो साल के अंदर कोई भी पीएचसी की स्थापना नहीं की है. यह रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग और नीति आयोग की है. बिहार में शिशु मृत्युदर में एक हजार बच्चों पर 42 है. तेजस्वी यादव ने आगे कहा कि नीतीश कुमार का 15 साल पूरी तरह रहा बदहाल रहा है. इसका उदाहरण यही है कि बिहार कोरोना जांच में सबसे फिसड्डी साबित हुआ है. कोरोना मामले में बिहार में भयावह स्थिति. तेजस्वी ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने बिहार को भगवान भरोसे छोडा. अब पॉजिटिव मामले सीएम हाउस तृक पहुच गया.
तेजस्वी यादव ने पूछा है कि क्या नीतीश कुमार को इस बात का डर है कि बिहार में राष्ट्रपति शासन रहते चुनाव हो जाएगा? इतना ही नहीं नेता प्रतिपक्ष ने बिहार में जदयू की तरफ से की जा रही चुनावी तैयारी और वर्चुअल रैली पर भी तंज कसा है. पटनाः बिहार में कोरोना संक्रमण के बिगड़ते हालात को देखते हुए विधानसभा चुनाव पर अब सवाल उठने लगा है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा है कि बिहार में हालात विधानसभा चुनाव कराने लायक नहीं है. उन्होंने कहा कि बाकी बात चुनाव आयोग देखेगा. तेजस्वी यादव ने कहा कि जांच बिलकुल नहीं हो रही है। मुख्यमंत्री की जांच की रिपोर्ट दो घंटाटे में आ जाती है। जब खुद पर आपदा आती है तो अपने घर में डॉक्टर भी है, वेंटिलेटर भी और नर्सें भी। CM के आवास पर छः डॉक्टर,तीन नर्सें और वेंटिलेटर भी है। इस बीच बिहार भाजपा अध्यक्ष के पूर्व अध्यक्ष गोपाल नारायण सिंह ने कहा कि तेजस्वी यादव ने कोई काम नहीं किया। खाली CM पर उंगली उठा रहे हैं। ये कहना कि दो घंटाटे में CM की टेस्ट रिपोर्ट आ जाती है गलत है। एक रिपोर्ट आने में कम से कम छः घंटाटे तक लगते हैं। बिहार की जितनी क्षमता है उतने टेस्ट किए जा रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष ने बिहार में चुनावी तैयारी को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जोरदार हमला बोला है. तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश कुमार बिहार में लाशों के ढेर पर चुनाव करना चाहते हैं पता नहीं नीतीश कुमार को किस बात की जल्दबाजी है. तेजस्वी यादव ने पूछा है कि क्या नीतीश कुमार को इस बात का डर है कि बिहार में राष्ट्रपति शासन रहते चुनाव हो जाएगा? इतना ही नहीं नेता प्रतिपक्ष ने बिहार में जदयू की तरफ से की जा रही चुनावी तैयारी और वर्चुअल रैली पर भी तंज कसा है. उन्होंने कहा कि आप डिजिटल रैली कर रहे हैं, जबकि लोगों का आज ठीक से इलाज तक नहीं हो पा रहा. मुख्यमंत्री आवास तक कोरोना का है असर. ऐसी बीमारी जिससे पूरी दुनिया परेशान है, उसे सरकार हल्के में ले रही है. तेजस्वी यादव ने कहा है कि पता नहीं नीतीश कुमार को चुनाव की इतनी जल्दबाजी क्यों है? तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा कि बिहार में कोरोना कंट्रोल से बाहर हो गया है. बिहार में सब कुछ भगवान भरोसे हैं. नीतीश कुमार ने स्वास्थ्य विभाग को बर्बाद कर दिया है. स्वास्थ्य विभाग खुद आईसीयू में हैं. तेजस्वी ने कहा कि सबकी जांच हो और रिपोर्ट आने में तेजी हो. बिहार में डॉक्टर और नर्स की कमी से जूझ रहा है. सिंतबर तक कोरोना बिहार में और गंभीर हो जाएगा. तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार की सरकार पर निशाना साधने हुए कहा कि मुख्यमंत्री की जांच रिपोर्ट दो घंटे में बाकी जनता भगवान् भरोसे है. तेजस्वी ने राजद दफ्तर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि हमारे यहां सबसे बीमार लोग प्राईवेट अस्पताल में भर्ती होते हैं. यहां सरकारी अस्पताल में कोई व्यवस्था नहीं है. उन्होंने कहा कि कोरोना से पूरा विश्व जूझ रहा है, बिहार में भी स्थिति भयावह है. हमलोगों ने सरकार से गुजारिश की रैंडम टेस्ट की व्यवस्था की जाए. लेकिन सरकार गंभीर नहीं है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की रिपोर्ट दो घंटाटे में आ जाती है. ऐसे में हम चाहते हैं कि सबका रिपोर्ट जल्द से जल्द आ जाए. तेजस्वी ने कहा कि हमलोगों को चिंता करनी चाहिए की बिहार सरकार ने कोरोना से लड़ने में हाथ खडा कर लिया है. सरकार तो कहती है कि पंद्रह साल में हमने खूब विकास किया है, लेकिन हकीकत है कि सरकार ने जनता को ठगा है. चमकी बुखार से सैकड़ों बच्चों की मौत हो जाती है, बेड, डॉक्टर, नर्स की कमी है. स्वास्थ्य सेवा में बिहार सबसे निचले स्तर पर है. बिहार में दो हज़ार पाँच में कुल एक सौ एक पीएचसी थे, लेकिन आज पंद्रह साल में उनचास केंद्र स्थापित किए गए. एक साल में मात्र तीन बना. लेकिन दो साल के अंदर कोई भी पीएचसी की स्थापना नहीं की है. यह रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग और नीति आयोग की है. बिहार में शिशु मृत्युदर में एक हजार बच्चों पर बयालीस है. तेजस्वी यादव ने आगे कहा कि नीतीश कुमार का पंद्रह साल पूरी तरह रहा बदहाल रहा है. इसका उदाहरण यही है कि बिहार कोरोना जांच में सबसे फिसड्डी साबित हुआ है. कोरोना मामले में बिहार में भयावह स्थिति. तेजस्वी ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने बिहार को भगवान भरोसे छोडा. अब पॉजिटिव मामले सीएम हाउस तृक पहुच गया.
24 अप्रैल 1996 को जन्मी एश्ले बार्टी प्रोफेशन से एक क्रिकेटर और टेनिस खिलाड़ी दोनों ही रह चुकी हैं। महिला सिंगल्स और डबल्स दोनों ही प्रारूप में बार्टी ने अपने करियर के कई बड़े आयाम हासिल किये। एश्ले बार्टी इस समय वर्ल्ड टेनिस एसोसिएशन की रैंकिंग में नंबर 1 पर काबिज हैं और यह मुकाम हासिल करने वाली दूसरी ऑस्ट्रलियाई हैं। बार्टी से पहले इवोन गलागोंग ने ही यह कारनामा किया था। बार्टी ने डबल्स में भी अपने करियर की बेस्ट रैंकिंग हासिल करते हुए नंबर 5 पर जगह बनाई है। बार्टी ने अपने टेनिस करियर में अब तक 12 सिंगल्स और 11 डबल्स का खिताब जीता है। इस दौरान बार्टी ने 3 ग्रैंड स्लैम जीते हैं जिसमें विंबलडन 2021 (सिंगल्स), फ्रेंच ओपन 2019 (सिंगल्स) और यूएस ओपन 2018 (डबल्स) शामिल है। बार्टी ने महज 4 साल की उम्र में ही टेनिस खेलना शुरू कर दिया था और जूनियर बैंडमिंटन रैंकिंग में शानदार प्रदर्शन करते हुए नंबर 2 की रैंकिंग पर पहुंची थी। एश्ले बार्टी ने 2011 के जूनियर विंबलडन (सिंगल्स) का खिताब जीतकर साफ कर दिया कि वो अपने करियर में काफी कुछ हासिल करने वाली हैं। बार्टी ने अपने जूनियर करियर के दौरान डबल्स में भी काफी सफलता हासिल की। केसी डेलिक्वा के साथ बार्टी ने WTA टूर 2013 के 3 ग्रैंडस्लैम इवेंट के फाइनल में जगह बनाई, हालांकि बतौर रनर अप ही उन्होंने टूर्नामेंट में अपना सफर खत्म किया, इसमें ऑस्ट्रेलियन ओपन भी शामिल रहा। हालांकि 2014 के आखिरी महीनों में बार्टी ने टेनिस अनिश्चितकालीन समय के लिये ब्रेक लेने का फैसला किया और टेनिस खेलना छोड़ दिया। एश्ले बार्टी ने ब्रेक लेने के बाद क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया और क्वीन्सलैंड की घरेलू टीम के साथ ट्रेनिंग शुरू कर दी। इसके चलते बार्टी को क्वीन्सलैंड फायर के लिये खेलने का मौका मिला और अपने प्रदर्शन के दम पर इस महिला खिलाड़ी ने ब्रिसबेन हीट के साथ बिग बैश लीग के 2015-16 सीजन का कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया। हालांकि क्रिकेट में बार्टी का करियर कुछ खास नहीं रहा और बीबीएल के 9 मैचों में वो सिर्फ 68 रन ही बना सकी, इसमें उनका सर्वोच्च स्कोर 39 रन रहा। लगभग 2 साल तक क्रिकेट खेलने के बाद एश्ले बार्टी ने अपने क्रिकेट करियर से ब्रेक लेने का फैसला कर दोबारा से टेनिस में कदम रखने का फैसला किया। बार्टी ने 2016 में टेनिस में लौटने का ऐलान किया और पहले दो महीने में जिन 5 टूर्नामेंट में हिस्सा लिया उसमें से 3 में जीत हासिल की। 2017 में बार्टी ने डेलिका के साथ फिर से जोड़ी बनाई और साल के अंत तक 250वीं रैकिंग से टॉप 20 में जगह बनाने में कामयाब हो गई। इसके बाद बार्टी रुकी नहीं और आज विंबलडन का खिताब जीतने वाली दूसरी ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी बनी। बार्टी ने फाइनल मैच में कैरोलीना को 6-3, 6-7 (4) और 6-3 के सेटों में हराकर जीत हासिल की और अपना पहला विंबलडन खिताब जीता।
चौबीस अप्रैल एक हज़ार नौ सौ छियानवे को जन्मी एश्ले बार्टी प्रोफेशन से एक क्रिकेटर और टेनिस खिलाड़ी दोनों ही रह चुकी हैं। महिला सिंगल्स और डबल्स दोनों ही प्रारूप में बार्टी ने अपने करियर के कई बड़े आयाम हासिल किये। एश्ले बार्टी इस समय वर्ल्ड टेनिस एसोसिएशन की रैंकिंग में नंबर एक पर काबिज हैं और यह मुकाम हासिल करने वाली दूसरी ऑस्ट्रलियाई हैं। बार्टी से पहले इवोन गलागोंग ने ही यह कारनामा किया था। बार्टी ने डबल्स में भी अपने करियर की बेस्ट रैंकिंग हासिल करते हुए नंबर पाँच पर जगह बनाई है। बार्टी ने अपने टेनिस करियर में अब तक बारह सिंगल्स और ग्यारह डबल्स का खिताब जीता है। इस दौरान बार्टी ने तीन ग्रैंड स्लैम जीते हैं जिसमें विंबलडन दो हज़ार इक्कीस , फ्रेंच ओपन दो हज़ार उन्नीस और यूएस ओपन दो हज़ार अट्ठारह शामिल है। बार्टी ने महज चार साल की उम्र में ही टेनिस खेलना शुरू कर दिया था और जूनियर बैंडमिंटन रैंकिंग में शानदार प्रदर्शन करते हुए नंबर दो की रैंकिंग पर पहुंची थी। एश्ले बार्टी ने दो हज़ार ग्यारह के जूनियर विंबलडन का खिताब जीतकर साफ कर दिया कि वो अपने करियर में काफी कुछ हासिल करने वाली हैं। बार्टी ने अपने जूनियर करियर के दौरान डबल्स में भी काफी सफलता हासिल की। केसी डेलिक्वा के साथ बार्टी ने WTA टूर दो हज़ार तेरह के तीन ग्रैंडस्लैम इवेंट के फाइनल में जगह बनाई, हालांकि बतौर रनर अप ही उन्होंने टूर्नामेंट में अपना सफर खत्म किया, इसमें ऑस्ट्रेलियन ओपन भी शामिल रहा। हालांकि दो हज़ार चौदह के आखिरी महीनों में बार्टी ने टेनिस अनिश्चितकालीन समय के लिये ब्रेक लेने का फैसला किया और टेनिस खेलना छोड़ दिया। एश्ले बार्टी ने ब्रेक लेने के बाद क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया और क्वीन्सलैंड की घरेलू टीम के साथ ट्रेनिंग शुरू कर दी। इसके चलते बार्टी को क्वीन्सलैंड फायर के लिये खेलने का मौका मिला और अपने प्रदर्शन के दम पर इस महिला खिलाड़ी ने ब्रिसबेन हीट के साथ बिग बैश लीग के दो हज़ार पंद्रह-सोलह सीजन का कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया। हालांकि क्रिकेट में बार्टी का करियर कुछ खास नहीं रहा और बीबीएल के नौ मैचों में वो सिर्फ अड़सठ रन ही बना सकी, इसमें उनका सर्वोच्च स्कोर उनतालीस रन रहा। लगभग दो साल तक क्रिकेट खेलने के बाद एश्ले बार्टी ने अपने क्रिकेट करियर से ब्रेक लेने का फैसला कर दोबारा से टेनिस में कदम रखने का फैसला किया। बार्टी ने दो हज़ार सोलह में टेनिस में लौटने का ऐलान किया और पहले दो महीने में जिन पाँच टूर्नामेंट में हिस्सा लिया उसमें से तीन में जीत हासिल की। दो हज़ार सत्रह में बार्टी ने डेलिका के साथ फिर से जोड़ी बनाई और साल के अंत तक दो सौ पचासवीं रैकिंग से टॉप बीस में जगह बनाने में कामयाब हो गई। इसके बाद बार्टी रुकी नहीं और आज विंबलडन का खिताब जीतने वाली दूसरी ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी बनी। बार्टी ने फाइनल मैच में कैरोलीना को छः-तीन, छः-सात और छः-तीन के सेटों में हराकर जीत हासिल की और अपना पहला विंबलडन खिताब जीता।
महोबा (एजेंसी/वार्ता): उत्तर प्रदेश में महोबा जिले के सदर कोतवाली क्षेत्र में एक व्यापारी के आवास से हुई करोड़ो की संपत्ति की चोरी होने की घटना का पुलिस ने महज 13 घण्टे के भीतर खुलासा कर दिया। पुलिस अधीक्षक अपर्णा गुप्ता ने बताया कि नगर के प्रतिष्ठित व बड़े ब्यापारी संदीप कुमार साहू के गांधी नगर स्थित आवास में सोमवार रात हुई चोरी की बड़ी वारदात के खुलासे के लिए पुलिस द्वारा चलाये गए अभियान को महज 13 घण्टे के भीतर सफलता हासिल हुई है। प्रकरण के खुलासे के लिए लगाई गई पुलिस की चार टीमो और सर्विलांस शाखा ने कड़ी मेहनत कर घटना को अंजाम देने वाले एक संगठित गिरोह के चार बदमाशो को चोरी की 92 लाख रुपये नकदी और करीब 500 ग्राम वजन के स्वर्ण आभूषणों के साथ दबोचा है। पकड़े गए बदमाश सीमावर्ती हमीरपुर जिले के राठ कस्बे के निवासी है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि चोरी की इस बड़ी वारदात को लेकर ब्यापारी संदीप द्वारा पुलिस को दी गई तहरीर में 98 लाख रुपये की नकदी ओर करीब 75 लाख रुपये मूल्य के आभूषण चोरों द्वारा उड़ा दिए जाने की जानकारी दी गई थी। इस घटना से शहर में हड़कम्प मच गया था। वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस इसे बड़ी चुनौती मान घटना के अनावरण के लिए सक्रिय हो गई थी। जिसके परिणाम सकारात्मक रहे और बदमाशों को चोरी के माल सहित दबोच लिया गया। पकड़े गए बदमाश एक बड़ी आपराधिक गैंग के सदस्य है। इनमें अनिल राजपूत,राम औतार साहू, अन्नी सोनी व बसीम है। जिनका लम्बा आपराधिक रिकार्ड है। हमीरपुर एवं महोबा जिले के विभिन्न थानों में इनके विरुद्ध दर्जनों केस पंजीकृत है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश की तत्कालीन सपा सरकार में खनिज मंत्री रहे सिद्ध गोपाल साहू के छोटे भाई संदीप साहू का नगर के पाश इलाके गांधीनगर के घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित इस मकान में कुछ दिन पहले तक स्थाई निवास था। लेकिन कानपुर. सागर राजमार्ग में विजय सागर पक्षी बिहार तिराहे के निकट अपनी नई कोठी तैयार हो जाने पर वह कोई एक पखवारा पहले इसे खाली कर गए थे। उनके व्यापारिक कामकाज का कार्यालय उक्त मकान में ही संचालित था। इस मकान के आगे के हिस्से में बैंक आफ बड़ौदा एवम पंजाब नेशनल बैंक की शाखाएं स्थित होने के कारण घटना को काफी संवेदनशील माना जा रहा है। -(एजेंसी/वार्ता) यह भी पढ़ें :- सेहत के लिए बेहद गुणकारी होते है दूध और अंजीर, जानें इनके स्वास्थ्य लाभ!
महोबा : उत्तर प्रदेश में महोबा जिले के सदर कोतवाली क्षेत्र में एक व्यापारी के आवास से हुई करोड़ो की संपत्ति की चोरी होने की घटना का पुलिस ने महज तेरह घण्टे के भीतर खुलासा कर दिया। पुलिस अधीक्षक अपर्णा गुप्ता ने बताया कि नगर के प्रतिष्ठित व बड़े ब्यापारी संदीप कुमार साहू के गांधी नगर स्थित आवास में सोमवार रात हुई चोरी की बड़ी वारदात के खुलासे के लिए पुलिस द्वारा चलाये गए अभियान को महज तेरह घण्टे के भीतर सफलता हासिल हुई है। प्रकरण के खुलासे के लिए लगाई गई पुलिस की चार टीमो और सर्विलांस शाखा ने कड़ी मेहनत कर घटना को अंजाम देने वाले एक संगठित गिरोह के चार बदमाशो को चोरी की बानवे लाख रुपये नकदी और करीब पाँच सौ ग्राम वजन के स्वर्ण आभूषणों के साथ दबोचा है। पकड़े गए बदमाश सीमावर्ती हमीरपुर जिले के राठ कस्बे के निवासी है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि चोरी की इस बड़ी वारदात को लेकर ब्यापारी संदीप द्वारा पुलिस को दी गई तहरीर में अट्ठानवे लाख रुपये की नकदी ओर करीब पचहत्तर लाख रुपये मूल्य के आभूषण चोरों द्वारा उड़ा दिए जाने की जानकारी दी गई थी। इस घटना से शहर में हड़कम्प मच गया था। वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस इसे बड़ी चुनौती मान घटना के अनावरण के लिए सक्रिय हो गई थी। जिसके परिणाम सकारात्मक रहे और बदमाशों को चोरी के माल सहित दबोच लिया गया। पकड़े गए बदमाश एक बड़ी आपराधिक गैंग के सदस्य है। इनमें अनिल राजपूत,राम औतार साहू, अन्नी सोनी व बसीम है। जिनका लम्बा आपराधिक रिकार्ड है। हमीरपुर एवं महोबा जिले के विभिन्न थानों में इनके विरुद्ध दर्जनों केस पंजीकृत है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश की तत्कालीन सपा सरकार में खनिज मंत्री रहे सिद्ध गोपाल साहू के छोटे भाई संदीप साहू का नगर के पाश इलाके गांधीनगर के घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित इस मकान में कुछ दिन पहले तक स्थाई निवास था। लेकिन कानपुर. सागर राजमार्ग में विजय सागर पक्षी बिहार तिराहे के निकट अपनी नई कोठी तैयार हो जाने पर वह कोई एक पखवारा पहले इसे खाली कर गए थे। उनके व्यापारिक कामकाज का कार्यालय उक्त मकान में ही संचालित था। इस मकान के आगे के हिस्से में बैंक आफ बड़ौदा एवम पंजाब नेशनल बैंक की शाखाएं स्थित होने के कारण घटना को काफी संवेदनशील माना जा रहा है। - यह भी पढ़ें :- सेहत के लिए बेहद गुणकारी होते है दूध और अंजीर, जानें इनके स्वास्थ्य लाभ!
कासगंजः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की जान पर उस समय बन आई जब उनके हैलीकॉप्टर को लैंड कराने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। वहीं प्रशासन की ऐसी लापरवाही से अधिकारियों के होश उड़ गए। वहीं पायलट की सूझबूझ से किसी तरह सीएम योगी के हैलीकॉप्टर को सुरक्षित जगह पर लैंड किया गया। प्रमुख सचिव (गृह) अरविन्द कुमार ने लखनऊ में बताया कि योगी हालांकि सुरक्षित हैं और अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुरूप वह आगे बढ़ गये हैं। अरविन्द कुमार ने को बताया,"हां, मुख्यमंत्री सुरक्षित हैं।" हेलीकॉप्टर जिस खेत में उतरा, वह अस्थायी रूप से बनाये गये हेलीपैड से करीब एक किलोमीटर दूर था। मुख्यमंत्री कासगंज के एक दिवसीय दौरे पर आये थे। उन्होंने सहावर तहसील के फरौली गांव में उस परिवार के लोगों से मुलाकात की, जिनके तीन सदस्यों की हत्या हो गयी थी। योगी ने कानून व्यवस्था के अलावा जिले के विकास कार्यों की भी समीक्षा की। कासगंज के पुलिस अधीक्षक पीयूष ने भाषा को बताया कि मुख्यमंत्री ने चेक वितरण किये और उनके सभी कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुए।
कासगंजः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की जान पर उस समय बन आई जब उनके हैलीकॉप्टर को लैंड कराने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। वहीं प्रशासन की ऐसी लापरवाही से अधिकारियों के होश उड़ गए। वहीं पायलट की सूझबूझ से किसी तरह सीएम योगी के हैलीकॉप्टर को सुरक्षित जगह पर लैंड किया गया। प्रमुख सचिव अरविन्द कुमार ने लखनऊ में बताया कि योगी हालांकि सुरक्षित हैं और अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुरूप वह आगे बढ़ गये हैं। अरविन्द कुमार ने को बताया,"हां, मुख्यमंत्री सुरक्षित हैं।" हेलीकॉप्टर जिस खेत में उतरा, वह अस्थायी रूप से बनाये गये हेलीपैड से करीब एक किलोमीटर दूर था। मुख्यमंत्री कासगंज के एक दिवसीय दौरे पर आये थे। उन्होंने सहावर तहसील के फरौली गांव में उस परिवार के लोगों से मुलाकात की, जिनके तीन सदस्यों की हत्या हो गयी थी। योगी ने कानून व्यवस्था के अलावा जिले के विकास कार्यों की भी समीक्षा की। कासगंज के पुलिस अधीक्षक पीयूष ने भाषा को बताया कि मुख्यमंत्री ने चेक वितरण किये और उनके सभी कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुए।
कितनी ही स्त्रियों का उल्लेख है जो बड़ी विदुषी थीं, जैसे मैत्रेयी, गार्गी, आत्रेयी इत्यादि ! इससे यह बात तो स्पष्ट है कि स्त्रियों को ऊँची शिक्षा का अवसर मिलता था । यह बहुत बाद की बात है कि स्त्रियों का स्थान नीचा हो गया। तीसरी बात, जिसके ऊपर हमारे यहाँ बहुत जोर दिया गया है, कौटुम्बिक जीवन और उसका सुख है। मनुष्य स्त्री और बच्चे के बिना अधूरा रहता है। तीनो के मिलने से ही मनुष्य अपनी पूर्णता को पाता है। अपनी संस्कृति की इन प्रधान बातों का ध्यान में रखते हुए हम सह-शिक्षा की प्रणाली की परीक्षा कर सकते हैं । हमारे लिए देखने की बात यह है कि भारतीय संस्कृति के आदर्शों को अपने सामने रखते हुए नवयुग की आवश्यकताओं को हमारे वालक और बालिकाएँ किस तरह पूरा कर सकते हैं । सह-शिक्षा की प्रथा अमेरिका में सबसे अधिक प्रचलित है । अमेरिका के यूनाइटेड स्टेट्स में प्रायः सभी स्कूलों में लड़के और लड़कियों साथ पढ़ते हैं। पर अमेरिका में सह-शिक्षा का ध्येय लेकर शिक्षा की प्रणाली नहीं चलाई गई थी। वहां तो अनिवार्य कारणों से उनका सह-शिक्षा की बच्चों की कुछ समस्याएं प्रणाली ग्रहण करनी पड़ी। अमेरिका-निवासो अपनी सभ्यता को बनाने की जल्दी में थे। वहाँ लड़कियों के लिए अलग स्कूल स्थापित करने का समय नहीं था । पहिले वहाँ लोग लड़कियों की शिक्षा को महत्त्व भी नहीं देते थे और जो थोड़ीबहुत लड़कियाँ पढ़ने आती थीं वे लड़कों ही के स्कूलों में भरती कर ली जाती थीं। धीरे-धीरे जब लड़कियों की शिक्षा की जरूरत समझी जाने लगी तब भी वे ही स्कूल कायम रहे और लड़के और लड़कियाँ साथ पढ़ते रहे। इस तरह वहाँ सहशिक्षा की प्रणाली प्रचलित हुई । अमेरिका की सभ्यता में, वहाँ के सामाजिक और कौटुम्बिक जीवन में एक जे खास बात है, जो वहाँ के सारे जीवन में संचार करती है, वह समता की लहर है। ईसी लहर का फल है कि अमेरिका ने सह-शिक्षा की प्रणाली को अपनाया और इसको कायम भी रक्खा । सह-शिक्षा में खास बात यह है कि यह लड़कों और लड़कियों को शिक्षा उपार्जन का बराबर अवसर देती है। योरप में भी प्रत्येक देश इस समस्या पर विचार कर रहा है और इसको हल करने का प्रयत्न कर इंग्लैंड ने अपने सेकंडरी (माध्यमिक) स्कूलों में सह· शिक्षा को नहीं अपनाया है, पर वहाँ कई स्कूल ऐसे हैं जो लड़के और लड़कियों को साथ पढ़ाते हैं और उनकी सरकार से सहायता मिलती है। ऐसे स्कूलों में लड़के और लड़कियाँ साथ पढ़ाये तो जाते हैं पर पढ़ने के अलावा उनको साथ मिलने का या परस्पर सम्पर्क स्थापित करने का कोई मौका नहीं मिलता है। इस तरह के स्कूल सह शिक्षा के ध्येय को लेकर नहीं खोले गये हैं, इस कारण वे सह-शिक्षा के सिद्धान्तों पर बहुत ध्यान नहीं देते। इन स्कूलों में लड़के और लड़कियां बस खर्चे की बचत के कारण भर्ती कर दिये जाते हैं। इस कारण इनके यहाँ के परिणामों का कोई अधिक मूल्य नहीं है। लड़के और लड़कियाँ एक ही इमारत में लिखते पढ़ते हैं, लेकिन शिक्षकों की उनपर कड़ी निगरानी रहती है; काम करते वक्त द्वाराम वक्त और खेल में उनकी परस्पर मिलने का बहुत कम मौका दिया जाता है। पर वहाँ कुछ ऐसे अगुआ स्कूल भी हैं जहाँ सह-शिक्षा के सिद्धान्त पूरी तरह से काम में लाये जाते हैं, जैसे चीडेल्स का स्कूल, हार्पेन्डन में सेंट जार्ज स्कूल, मिडिल सेक्स में कुछ स्कूल और डार्टि ग्टन हाल स्कूल । इन स्कूलों के होते हुए भी यह मानना पड़ेगा कि इंगलैंड की सरकार ने भी सह-शिक्षा को अपनाया नहीं है । स्काटलैंड की भी हालत कुछ ऐसी ही है। वहाँ प्रायः सभी स्कूलों में लड़के-लड़कियाँ साथ पढ़ते हैं, पर क्लासों में और उनके बाहर भी उनके ऊपर कड़ी निगरानी रक्खी जाती है । वेल्स में यथार्थ सह - शिक्षा का पालन करनेवाले कुछ अच्छे स्कूल हैं । वहाँ लड़के-लड़कियाँ साधारणतः साथ पढ़ते हैं और उनको मिलनेजुलने का भी काफी मौका दिया जाता है। इसका परिणाम अच्छा ही होता है । योरप में बल्गेरिया ही एक ऐसा देश है जिसने सह-शिक्षा को सिद्धान्त रूप से मान लिया है। बल्गेरिया में अधिकारी वर्ग, शिक्षा के आचार्य और पितृगण सभी सह-शिक्षा में पूरा विश्वास करते हैं । बल्गेरिया के जितने भी एलिमेंटरी ( प्रारंभिक) स्कूल हैं वे सह-शिक्षा का पालन करते हैं और ७० फी सदी सेकंडरी (माध्यमिक स्कूलों में लड़के और लड़कियाँ साथ पढ़ते हैं । पोलेंड भी धीरे-धीरे सह-शिक्षा को अपना रहा फ्रांस, जर्मनी और इटली सह-शिक्षा के विरोधो फ्रांस में तो गाँवों के प्रारंभिक स्कूलों में भी जहाँ तक हो सकता है लड़के और लड़कियाँ अलग रक्खे जाते हैं। पश्चिम के देशों की शिक्षा पद्धति को एक दृष्टि से देखने से तो यह मालूम होता है कि अधिकतर देशों ने सह-शिक्षा को अभी तक अपनाया नहीं है । इसका मुख्य कारण यह मालूम होना है कि राज्य अपनी सत्ता स्थिर रखने के लिए नये सुधारों का सन्देह की दृष्टि से देखते हैं और संभलसँभलकर चलना चाहते है । अन्य देशों में और हमारे देश में भी सहशिक्षा को युद्ध ऐसी ही स्थिति है । भारतवर्ष में कुछ स्कूल ऐसे है-जैसे बंगाल में शान्तिनियंतन और उपाग्राम, बंबई में न्यू एरा स्कूल और न्यू एज्यूशन फेलोशिप स्कूल और उदयपुर में विद्याभवन - जो सह-शिक्षा के आदर्श को लेकर चलाये गये है । इस प्रकार के मिथ स्कूल बहुत कम है । उनके कामों का और उनके परिणामों का कोई व्योग हमारे पास नहीं है, इससे उनकी साधारण निक स्कूलों से तुलना करना पड़ा कठिन है । इस समय जब हमारे देशवासी शिक्षा में सुधार के विचार में लगे हैं, यह भी आवश्यक है कि वे यह पता लगाये कि हमारे बालकों तथा बालिकाओं का पूर्ण विकास भिन्न स्कूलों में संभव है या मिश्र स्कूलों में । पता लगाने का ठीक तरीका तो यह है कि प्रत्येक प्रान्त में सह-शिक्षा की प्रणाली पर कुछ मिश्र स्कूल चलाये जायें और फिर उनके परिणामों की भिन्न स्कूलों के परिणामों से तुलना की जाय । यहाँ यह उचित है कि सह-शिक्षा के विरुद्ध जो आप किये गये हैं, उन पर विचार किया जाय। इसके पहिले यह ठीक होगा कि सह-शिक्षा के विषय में एक भ्रम दूर कर दिया जाय। कुछ लोगों का ऐसा खयाल है कि सह-शिक्षा स्त्री और पुरुष के भेद को बिल्कुल मिटाना चाहती है। यह समझना बड़ी भूल है। सह-शिक्षा के समर्थक स्त्री और पुरुष के भिन्न गुणों को और उनकी भिन्न आवश्यकताओं को पूरी तरह से पहिचानने की कोशिश करते हैं और इस बात का पूरा प्रयत्न करते हैं कि स्कूल में तथा बाहर स्त्री और पुरुष दोनों के गुणों का पूर्ण विकास हो । सह-शिक्षा की प्रणाली पर चलनेवाले स्कूल का सारा संगठन - उसकी
कितनी ही स्त्रियों का उल्लेख है जो बड़ी विदुषी थीं, जैसे मैत्रेयी, गार्गी, आत्रेयी इत्यादि ! इससे यह बात तो स्पष्ट है कि स्त्रियों को ऊँची शिक्षा का अवसर मिलता था । यह बहुत बाद की बात है कि स्त्रियों का स्थान नीचा हो गया। तीसरी बात, जिसके ऊपर हमारे यहाँ बहुत जोर दिया गया है, कौटुम्बिक जीवन और उसका सुख है। मनुष्य स्त्री और बच्चे के बिना अधूरा रहता है। तीनो के मिलने से ही मनुष्य अपनी पूर्णता को पाता है। अपनी संस्कृति की इन प्रधान बातों का ध्यान में रखते हुए हम सह-शिक्षा की प्रणाली की परीक्षा कर सकते हैं । हमारे लिए देखने की बात यह है कि भारतीय संस्कृति के आदर्शों को अपने सामने रखते हुए नवयुग की आवश्यकताओं को हमारे वालक और बालिकाएँ किस तरह पूरा कर सकते हैं । सह-शिक्षा की प्रथा अमेरिका में सबसे अधिक प्रचलित है । अमेरिका के यूनाइटेड स्टेट्स में प्रायः सभी स्कूलों में लड़के और लड़कियों साथ पढ़ते हैं। पर अमेरिका में सह-शिक्षा का ध्येय लेकर शिक्षा की प्रणाली नहीं चलाई गई थी। वहां तो अनिवार्य कारणों से उनका सह-शिक्षा की बच्चों की कुछ समस्याएं प्रणाली ग्रहण करनी पड़ी। अमेरिका-निवासो अपनी सभ्यता को बनाने की जल्दी में थे। वहाँ लड़कियों के लिए अलग स्कूल स्थापित करने का समय नहीं था । पहिले वहाँ लोग लड़कियों की शिक्षा को महत्त्व भी नहीं देते थे और जो थोड़ीबहुत लड़कियाँ पढ़ने आती थीं वे लड़कों ही के स्कूलों में भरती कर ली जाती थीं। धीरे-धीरे जब लड़कियों की शिक्षा की जरूरत समझी जाने लगी तब भी वे ही स्कूल कायम रहे और लड़के और लड़कियाँ साथ पढ़ते रहे। इस तरह वहाँ सहशिक्षा की प्रणाली प्रचलित हुई । अमेरिका की सभ्यता में, वहाँ के सामाजिक और कौटुम्बिक जीवन में एक जे खास बात है, जो वहाँ के सारे जीवन में संचार करती है, वह समता की लहर है। ईसी लहर का फल है कि अमेरिका ने सह-शिक्षा की प्रणाली को अपनाया और इसको कायम भी रक्खा । सह-शिक्षा में खास बात यह है कि यह लड़कों और लड़कियों को शिक्षा उपार्जन का बराबर अवसर देती है। योरप में भी प्रत्येक देश इस समस्या पर विचार कर रहा है और इसको हल करने का प्रयत्न कर इंग्लैंड ने अपने सेकंडरी स्कूलों में सह· शिक्षा को नहीं अपनाया है, पर वहाँ कई स्कूल ऐसे हैं जो लड़के और लड़कियों को साथ पढ़ाते हैं और उनकी सरकार से सहायता मिलती है। ऐसे स्कूलों में लड़के और लड़कियाँ साथ पढ़ाये तो जाते हैं पर पढ़ने के अलावा उनको साथ मिलने का या परस्पर सम्पर्क स्थापित करने का कोई मौका नहीं मिलता है। इस तरह के स्कूल सह शिक्षा के ध्येय को लेकर नहीं खोले गये हैं, इस कारण वे सह-शिक्षा के सिद्धान्तों पर बहुत ध्यान नहीं देते। इन स्कूलों में लड़के और लड़कियां बस खर्चे की बचत के कारण भर्ती कर दिये जाते हैं। इस कारण इनके यहाँ के परिणामों का कोई अधिक मूल्य नहीं है। लड़के और लड़कियाँ एक ही इमारत में लिखते पढ़ते हैं, लेकिन शिक्षकों की उनपर कड़ी निगरानी रहती है; काम करते वक्त द्वाराम वक्त और खेल में उनकी परस्पर मिलने का बहुत कम मौका दिया जाता है। पर वहाँ कुछ ऐसे अगुआ स्कूल भी हैं जहाँ सह-शिक्षा के सिद्धान्त पूरी तरह से काम में लाये जाते हैं, जैसे चीडेल्स का स्कूल, हार्पेन्डन में सेंट जार्ज स्कूल, मिडिल सेक्स में कुछ स्कूल और डार्टि ग्टन हाल स्कूल । इन स्कूलों के होते हुए भी यह मानना पड़ेगा कि इंगलैंड की सरकार ने भी सह-शिक्षा को अपनाया नहीं है । स्काटलैंड की भी हालत कुछ ऐसी ही है। वहाँ प्रायः सभी स्कूलों में लड़के-लड़कियाँ साथ पढ़ते हैं, पर क्लासों में और उनके बाहर भी उनके ऊपर कड़ी निगरानी रक्खी जाती है । वेल्स में यथार्थ सह - शिक्षा का पालन करनेवाले कुछ अच्छे स्कूल हैं । वहाँ लड़के-लड़कियाँ साधारणतः साथ पढ़ते हैं और उनको मिलनेजुलने का भी काफी मौका दिया जाता है। इसका परिणाम अच्छा ही होता है । योरप में बल्गेरिया ही एक ऐसा देश है जिसने सह-शिक्षा को सिद्धान्त रूप से मान लिया है। बल्गेरिया में अधिकारी वर्ग, शिक्षा के आचार्य और पितृगण सभी सह-शिक्षा में पूरा विश्वास करते हैं । बल्गेरिया के जितने भी एलिमेंटरी स्कूल हैं वे सह-शिक्षा का पालन करते हैं और सत्तर फी सदी सेकंडरी (माध्यमिक स्कूलों में लड़के और लड़कियाँ साथ पढ़ते हैं । पोलेंड भी धीरे-धीरे सह-शिक्षा को अपना रहा फ्रांस, जर्मनी और इटली सह-शिक्षा के विरोधो फ्रांस में तो गाँवों के प्रारंभिक स्कूलों में भी जहाँ तक हो सकता है लड़के और लड़कियाँ अलग रक्खे जाते हैं। पश्चिम के देशों की शिक्षा पद्धति को एक दृष्टि से देखने से तो यह मालूम होता है कि अधिकतर देशों ने सह-शिक्षा को अभी तक अपनाया नहीं है । इसका मुख्य कारण यह मालूम होना है कि राज्य अपनी सत्ता स्थिर रखने के लिए नये सुधारों का सन्देह की दृष्टि से देखते हैं और संभलसँभलकर चलना चाहते है । अन्य देशों में और हमारे देश में भी सहशिक्षा को युद्ध ऐसी ही स्थिति है । भारतवर्ष में कुछ स्कूल ऐसे है-जैसे बंगाल में शान्तिनियंतन और उपाग्राम, बंबई में न्यू एरा स्कूल और न्यू एज्यूशन फेलोशिप स्कूल और उदयपुर में विद्याभवन - जो सह-शिक्षा के आदर्श को लेकर चलाये गये है । इस प्रकार के मिथ स्कूल बहुत कम है । उनके कामों का और उनके परिणामों का कोई व्योग हमारे पास नहीं है, इससे उनकी साधारण निक स्कूलों से तुलना करना पड़ा कठिन है । इस समय जब हमारे देशवासी शिक्षा में सुधार के विचार में लगे हैं, यह भी आवश्यक है कि वे यह पता लगाये कि हमारे बालकों तथा बालिकाओं का पूर्ण विकास भिन्न स्कूलों में संभव है या मिश्र स्कूलों में । पता लगाने का ठीक तरीका तो यह है कि प्रत्येक प्रान्त में सह-शिक्षा की प्रणाली पर कुछ मिश्र स्कूल चलाये जायें और फिर उनके परिणामों की भिन्न स्कूलों के परिणामों से तुलना की जाय । यहाँ यह उचित है कि सह-शिक्षा के विरुद्ध जो आप किये गये हैं, उन पर विचार किया जाय। इसके पहिले यह ठीक होगा कि सह-शिक्षा के विषय में एक भ्रम दूर कर दिया जाय। कुछ लोगों का ऐसा खयाल है कि सह-शिक्षा स्त्री और पुरुष के भेद को बिल्कुल मिटाना चाहती है। यह समझना बड़ी भूल है। सह-शिक्षा के समर्थक स्त्री और पुरुष के भिन्न गुणों को और उनकी भिन्न आवश्यकताओं को पूरी तरह से पहिचानने की कोशिश करते हैं और इस बात का पूरा प्रयत्न करते हैं कि स्कूल में तथा बाहर स्त्री और पुरुष दोनों के गुणों का पूर्ण विकास हो । सह-शिक्षा की प्रणाली पर चलनेवाले स्कूल का सारा संगठन - उसकी
श्री गिरिराज सिंह ने आज सूक्ष्म, लघु और मझौले उद्यम मंत्रालय में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रुप में अपना कामकाज संभाला। इससे पहले श्री गिरिराज सिंह इसी मंत्रालय में राज्यमंत्री थे। इस मौके पर पूर्व सूक्ष्म, लघु और मझौले उद्यम मंत्री श्री कलराज मिश्र को विदाई दी गई। इस अवसर पर कॉयर बोर्ड के चेयरमैन श्री सी पी राधाकृष्णन, एमएसएमई के सचिव श्री अरुण कुमार पांडा और विकास आयुक्त श्री सुरेंद्रनाथ त्रिपाठी भी मौजूद थे। इस मौके पर सूक्ष्म, लघु और मझौले उद्यम मंत्रालय में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि वह एमएसएमई के तहत रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने यह आश्वासन भी दिया कि एमएसएमई को उसके कामकाज में किसी तरह की अड़चन नहीं आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने पूर्ववर्ती के किए काम को आगे तार्किक अंजाम तक पहुंचाएंगे। पूर्व सूक्ष्म, लघु और मझौले उद्यम मंत्री श्री कलराज मिश्र ने कहा कि वह मंत्रालय में अपने काम से संतुष्ट हैं और उम्मीद करते हैं कि उनके उत्तराधिकारी लंबित रह गए कार्यों को अंजाम तक पहुंचाएंगे और प्रधानमंत्री के सपने साकार करेंगे। श्री गिरिराज सिंह का जन्म 8 सितंबर 1952 को हुआ। श्री सिंह अभी लोकसभा में नवादा, बिहार संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। श्री सिंह सांसदों के वेतन और भत्ता पर संयुक्त समिति (2 सितंबर, 2014 - 9 नवंबर, 2014) के सदस्य रह चुके हैं। वह बिहार विधान परिषद के (2002 - मई 2014) सदस्य रह चुके हैं। श्री सिंह बिहार सरकार में 2008-2010 के दौरान सहकारिता मंत्री और उसके बाद 2010-2013 के दौरान पशुपालन एवं मत्स्य संसाधन विकास मंत्री रहे हैं। श्री गिरिराज सिंह मई 2014 में सोलहवीं लोकसभा के लिए चुने गए।
श्री गिरिराज सिंह ने आज सूक्ष्म, लघु और मझौले उद्यम मंत्रालय में राज्यमंत्री के रुप में अपना कामकाज संभाला। इससे पहले श्री गिरिराज सिंह इसी मंत्रालय में राज्यमंत्री थे। इस मौके पर पूर्व सूक्ष्म, लघु और मझौले उद्यम मंत्री श्री कलराज मिश्र को विदाई दी गई। इस अवसर पर कॉयर बोर्ड के चेयरमैन श्री सी पी राधाकृष्णन, एमएसएमई के सचिव श्री अरुण कुमार पांडा और विकास आयुक्त श्री सुरेंद्रनाथ त्रिपाठी भी मौजूद थे। इस मौके पर सूक्ष्म, लघु और मझौले उद्यम मंत्रालय में राज्यमंत्री श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि वह एमएसएमई के तहत रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने यह आश्वासन भी दिया कि एमएसएमई को उसके कामकाज में किसी तरह की अड़चन नहीं आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने पूर्ववर्ती के किए काम को आगे तार्किक अंजाम तक पहुंचाएंगे। पूर्व सूक्ष्म, लघु और मझौले उद्यम मंत्री श्री कलराज मिश्र ने कहा कि वह मंत्रालय में अपने काम से संतुष्ट हैं और उम्मीद करते हैं कि उनके उत्तराधिकारी लंबित रह गए कार्यों को अंजाम तक पहुंचाएंगे और प्रधानमंत्री के सपने साकार करेंगे। श्री गिरिराज सिंह का जन्म आठ सितंबर एक हज़ार नौ सौ बावन को हुआ। श्री सिंह अभी लोकसभा में नवादा, बिहार संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। श्री सिंह सांसदों के वेतन और भत्ता पर संयुक्त समिति के सदस्य रह चुके हैं। वह बिहार विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं। श्री सिंह बिहार सरकार में दो हज़ार आठ-दो हज़ार दस के दौरान सहकारिता मंत्री और उसके बाद दो हज़ार दस-दो हज़ार तेरह के दौरान पशुपालन एवं मत्स्य संसाधन विकास मंत्री रहे हैं। श्री गिरिराज सिंह मई दो हज़ार चौदह में सोलहवीं लोकसभा के लिए चुने गए।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय को थोड़ी राहत देते हुए अंतरिम जमानत की तारीख को अगले साल की 6 फरवरी तक बढ़ा दी है, इसके साथ ही अदालते ने यह भी कहा है कि 6 फरवरी के पहले सहारा प्रमुख को 600 करोड़ रुपए जमा कराने होंगे। आपको बता दें कि सुब्रत रॉय पर निवेशकों के 24 हजार करोड़ रुपए ना चुकाने के मामले में 4 मार्च 2014 से दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद रखा गया है। आपको बता दें कि इससे पहले सुब्रत रॉय की अंतरिम जमानत को 28 नवंबर तक बढ़ा दिया गया था, जिसको लेकर आज सुनवाई होनी थी, इसके साथ ही ज्ञात हो कि पिछली सुनवाई में निवेशकों का पैसा लौटाने का शेड्यूल देने को कहा था। सहारा की ओर से निवेशकों की रकम को लौटाने के कई प्रस्तावों को सुप्रीम कोर्ट में खारिज भी किया जा चुका है। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच कर रही है। बता दें कि सहारा प्रमुख को 6 मई से पेरोल पर बाहर हैं, उनकी मां की निधन के बाद से उन्हे पेरोल दिया गया था, जिसपर सुनवाई करते हुए तीन बार क्रमशः 11 जुलाई, 3 अगस्त और 28 नवंबर तक के लिए पेरोल को बढ़ा दिया गया था। इससे पहले 3 सिंतबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में कहा गया था कि उन्होंने इनवेस्टर्स के 25 हजार करोड़ लौटा दिए हैं।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय को थोड़ी राहत देते हुए अंतरिम जमानत की तारीख को अगले साल की छः फरवरी तक बढ़ा दी है, इसके साथ ही अदालते ने यह भी कहा है कि छः फरवरी के पहले सहारा प्रमुख को छः सौ करोड़ रुपए जमा कराने होंगे। आपको बता दें कि सुब्रत रॉय पर निवेशकों के चौबीस हजार करोड़ रुपए ना चुकाने के मामले में चार मार्च दो हज़ार चौदह से दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद रखा गया है। आपको बता दें कि इससे पहले सुब्रत रॉय की अंतरिम जमानत को अट्ठाईस नवंबर तक बढ़ा दिया गया था, जिसको लेकर आज सुनवाई होनी थी, इसके साथ ही ज्ञात हो कि पिछली सुनवाई में निवेशकों का पैसा लौटाने का शेड्यूल देने को कहा था। सहारा की ओर से निवेशकों की रकम को लौटाने के कई प्रस्तावों को सुप्रीम कोर्ट में खारिज भी किया जा चुका है। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच कर रही है। बता दें कि सहारा प्रमुख को छः मई से पेरोल पर बाहर हैं, उनकी मां की निधन के बाद से उन्हे पेरोल दिया गया था, जिसपर सुनवाई करते हुए तीन बार क्रमशः ग्यारह जुलाई, तीन अगस्त और अट्ठाईस नवंबर तक के लिए पेरोल को बढ़ा दिया गया था। इससे पहले तीन सिंतबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में कहा गया था कि उन्होंने इनवेस्टर्स के पच्चीस हजार करोड़ लौटा दिए हैं।
राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत कई दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों को ₹10 हजार रुपए मासिक वेतन भी नहीं मिल रहा था। कर्मचारी संघ सरकार से कुशल, अर्ध कुशल, अकुशल श्रमिक के रूप में कार्यरत फिल्म कर्मचारियों के वेतन में वर्तमान महंगाई के अनुपात में वेतन वृद्धि की मांग कर रहे थे। कर्मचारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष अशोक पांडे ने बताया कि संगठन ने इसका खाका तैयार करके मंडल को सौंपा था। विभिन्न विभागों में ज्ञापन भी सौंपे गए थे। यह वेतन वृद्धि 1 अप्रैल से सितंबर तक के लिए लागू होगी। इससे करीब प्रदेश के 50 हजार दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियाें काे फायदा होगा। अर्द्ध शासकीय विभागों में सिर्फ भोपाल दुग्ध संघ है, जिसने दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की सभी श्रेणियों के लिए पहले ही वेतन बढ़ा दिया था।
राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत कई दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों को दस रुपया हजार रुपए मासिक वेतन भी नहीं मिल रहा था। कर्मचारी संघ सरकार से कुशल, अर्ध कुशल, अकुशल श्रमिक के रूप में कार्यरत फिल्म कर्मचारियों के वेतन में वर्तमान महंगाई के अनुपात में वेतन वृद्धि की मांग कर रहे थे। कर्मचारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष अशोक पांडे ने बताया कि संगठन ने इसका खाका तैयार करके मंडल को सौंपा था। विभिन्न विभागों में ज्ञापन भी सौंपे गए थे। यह वेतन वृद्धि एक अप्रैल से सितंबर तक के लिए लागू होगी। इससे करीब प्रदेश के पचास हजार दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियाें काे फायदा होगा। अर्द्ध शासकीय विभागों में सिर्फ भोपाल दुग्ध संघ है, जिसने दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की सभी श्रेणियों के लिए पहले ही वेतन बढ़ा दिया था।
रूप से व्यक्त किया था और विभेदक कारणों को दूर करने के लिये प्रत्येक पूर्व-सम्प्रदाय में एक-दूसरे सम्प्रदाय के मुनिराजों का संयुक्त रूप में चातुर्मास कराना आवश्यक समझते थे और इस प्रवृत्ति को आपने अपने से ही प्रारम्भ किया। पूज्य उपाचार्यश्रीजी का सं. 2009 का चातुर्मास उदयपुर था और आपके साथ ही सहमन्त्री श्री प्यारचन्दजी म.सा., जो जैन- दिवाकर श्री चौथमलजी म. के शिष्य थे, का भी चातुर्मास हुआ। इस चातुर्मास की ऐतिहासिक महत्ता थी। वैसे तो पूज्यश्री हुक्मीचन्दजी म.सा. की संप्रदाय के आचार्य के रूप में पहले भी आपश्री के अनेक चातुर्मास उदयपुर में हो चुके थे, लेकिन समस्त स्थानकवासी जैन साधु-साध्वियों के सर्वसत्ता सम्पन्न उपाचार्य के रूप में यह प्रथम चातुर्मास था । उदयपुर श्रीसंघ में अभूतपूर्व उत्साह व्याप्त था । उपाचार्यश्रीजी के दर्शनार्थ एवं प्रवचन- प्रसाद की प्राप्ति के लिये प्रतिदिन बाहर के सैकड़ों भाई बहिन आते रहते थे और कितने तो समस्त चातुर्मास काल को यहां ही व्यतीत करने के लिये बस गये थे। श्रावण कृष्णा तृतीया को पूज्य उपाचार्यश्री का जन्मोत्सव बड़े उत्साह से मनाया गया। सन्त- सतियों एवं श्रावक-श्राविकाओं के अलावा स्वयं उपाचार्यश्रीजी ने जन्मदिन पर क्या करना चाहिए- इस विषय पर मार्मिक प्रवचन फरमाया । पूज्यश्री ने कहा- गत वर्ष के जीवन पर दृष्टिपात कर अपनी भूलों के लिये पश्चात्ताप करना चाहिए और आगे के लिए सत्कार्य करने की प्रतिज्ञा करनी चाहिए। उपाचार्यश्री के 63वें वर्षप्रवेश पर धर्म, ध्यान, त्याग, तप के अलावा श्रीसंघ ने हर्षोत्साह के साथ दीन, अनाथजनों को भोजन दिया तथा पशुओं को भी तृप्त किया। चातुर्मास काल में सहमन्त्री श्री प्यारचन्दजी म. ने अपने भाव व्यक्त किये थे कि हमारे इतने वर्ष दूर रहने से मनों में कई तरह की भ्रान्तियां थीं। लेकिन निकट में रहने से वे सब भ्रांतियां दूर हुईं और उपाचार्यश्रीजी के हृदय को नजदीक से समझ पाया हूँ। आपश्री बर्ताव ने मुझे श्री जैनदिवाकरजी म. को भुला दिया है। अब चाहे कुछ भी हो, हम कभी अलग नहीं होंगे। कदाचित् श्रमण संघ बिखर सकता है, किन्तु पूज्यश्री हुक्मीचन्दजी म. की सम्प्रदाय नहीं विखर सकती। आपश्री जो भी हुक्म देंगे, हम उसको शिरोधार्य करेंगे। यदि गुझे धूप में खड़ा कर देंगे तो भी मैं कोई तर्क नहीं करूंगा। हमारी आप पर पूर्ण श्रद्धा हो गई है। उपाचार्य श्री और उपाध्यायश्री का परस्पर व्यवहार देखकर कोई यह नहीं कह सकता था कि पूज्य हुक्मीचंदजी म.सा. के सम्प्रदाय की दो धाराओं के सन्तों का यहां विराजना हो रहा है। उपाध्यायश्री विनयावनत थे तो उपाचार्यश्री प्रेमपयोधि थे। पूज्यश्री के अथाह प्रेममय व्यवहार से सभी अभिभूत हो जाते थे। श्रावक संघ भी एक हुआ उदयपुर में स्थानकवासी समाज बहुत बड़ा है। यहां श्री जवाहर मित्र मण्डल एवं श्री महावीर मित्र मण्डल के नाम से दो सांप्रदायिक संस्थाएं चल रही थीं। घाणेराव सादडी सम्मेलन के पश्चात् दोनों संस्थाओं के विलीनीकरण के अनेक प्रयत्न हुए, परन्तु सफलता नहीं मिली। उपाचार्यश्री गणेशलालजी म.सा. एवं उपाध्यायश्री प्यारचंदजी म.सा. के इस चातुर्मास में एकता का वातावरण बना। श्री जवाहर मित्र मण्डल के कार्यकर्ता प्रजातन्त्र सिद्धान्तानुसार निर्वाचन चाहते थे जबकि श्री महावीर मित्र मण्डल के कार्यकर्ता अपना समान प्रतिनिधित्व चाहते थे। कॉन्फरेंस के मंत्री श्री जवाहरलालजी मुणोत, संघ-ऐक्य समिति के मंत्री श्री धीरजभाई तुरखिया, कॉन्फरेंस प्रमुख श्री चम्पालालजी बांठिया के प्रभावी भाषणों से समस्याएं सुलझने लगीं। श्री जवाहर मित्र मण्डल की ओर से श्री हिम्मतसिंहजी बाबेल ने यह घोषणा करके एकता का मार्ग प्रशस्त कर दिया कि श्री जवाहर मित्र मण्डल अपना पृथक् अस्तित्व समाप्त करता है और श्री महावीर मित्र मण्डल के कार्यकर्ताओं को कार्यकारिणी बनाने का पूरा अधिकार देता है। इस समाचार का उदयपुर की समस्त जनता ने हर्ष के साथ अभिनन्दन किया। प्रवचन सभा में स्वयं पूज्यश्री एवं अन्य मुनिवरों ने इन हर्षद समाचारों पर सन्तोष प्रगट कर एकता के महत्त्व को रेखांकित किया। पूज्यप्रवर के आभामण्डल का प्रभाव ही कुछ ऐसा था कि उनकी उपस्थिति मात्र समस्याओं को सुलझाने में कारगर सिद्ध होती थी। उदयपुर का श्रावक संघ एक हो गया। पूरे देश में इसका प्रभावक सन्देश गया। सोजत में मन्त्रिमण्डल के सम्मेलन का निश्चय नवनिर्मित श्रमण संघ की व्यवस्था में दृढ़ता लाने के लिये विचार-विमर्श की आवश्यकता थी। अतः वर्षावास काल में भी सहमंत्री मुनिश्री प्यारचन्दजी म. से व्यवस्थाक-विषयक अनेक बातों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ था। इसी प्रसंग में यह भी विचार किया गया कि मन्त्रिमण्डल की एक बैठक होनी चाहिये, जिससे संघ व्यवस्था में रही हुई कमियों का परिमार्जन किया जा सके और संगठन के आदर्श की पूर्ति हो सके। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये प्रयत्न प्रारम्भ हुए और निर्णय किया गया कि चातुर्मास समाप्ति के पश्चात् मन्त्रिमण्डल का सम्मेलन आयोजित किया जाये। अतः अधिकारी मुनिवरों के रूप से व्यक्त किया था और विभेदक कारणों को दूर करने के लिये प्रत्येक पूर्व-सम्प्र एक-दूसरे सम्प्रदाय के मुनिराजों का संयुक्त रूप में चातुर्मास कराना आवश्यक समझ और इस प्रवृत्ति को आपने अपने से ही प्रारम्भ किया। पूज्य उपाचार्यश्रीजी का सं. 2009 का चातुर्मास उदयपुर था और आपके सा सहमन्त्री श्री प्यारचन्दजी म.सा., जो जैन - दिवाकर श्री चौथमलजी म. के शिष्य थे, चातुर्मास हुआ। इस चातुर्मास की ऐतिहासिक महत्ता थी। वैसे तो पूज्यश्री हुक्मीचन्दजी की संप्रदाय के आचार्य के रूप में पहले भी आपश्री के अनेक चातुर्मास उदयपुर में ह थे, लेकिन समस्त स्थानकवासी जैन साधु-साध्वियों के सर्वसत्ता सम्पन्न उपाचार्य के यह प्रथम चातुर्मास था । उदयपुर श्रीसंघ में अभूतपूर्व उत्साह व्याप्त था । उपाचार्यश्री दर्शनार्थ एवं प्रवचन - प्रसाद की प्राप्ति के लिये प्रतिदिन बाहर के सैकड़ों भाई-बहिन रहते थे और कितने तो समस्त चातुर्मास काल को यहां ही व्यतीत करने के लिये बस ग श्रावण कृष्णा तृतीया को पूज्य उपाचार्यश्री का जन्मोत्सव बड़े उत्साह से मनाया सन्त- सतियों एवं श्रावक-श्राविकाओं के अलावा स्वयं उपाचार्यश्रीजी ने जन्मदिन पर करना चाहिए- इस विषय पर मार्मिक प्रवचन फरमाया । पूज्यश्री ने कहा- गत वर्ष के पर दृष्टिपात कर अपनी भूलो के लिये पश्चात्ताप करना चाहिए और आगे के लिए स करने की प्रतिज्ञा करनी चाहिए। उपाचार्यश्री के 63वें वर्षप्रवेश पर धर्म, ध्यान, त्याग, अलावा श्रीसंघ ने हर्षोत्साह के साथ दीन, अनाथजनों को भोजन दिया तथा पशुओं व तृप्त किया। चातुर्मास काल में सहमन्त्री श्री प्यारचन्दजी म. ने अपने भाव व्यक्त किये थे कि । इतने वर्ष दूर रहने से मनों में कई तरह की भ्रान्तियां थीं। लेकिन निकट में रहने से भ्रांतियां दूर हुईं और उपाचार्यश्रीजी के हृदय को नजदीक से समझ पाया हूँ। आप बर्ताव ने मुझे श्री जैनदिवाकरजी म. को भुला दिया है। अब चाहे कुछ भी हो, हम कभी नहीं होंगे। कदाचित् श्रमण संघ विखर सकता है, किन्तु पूज्यश्री हुक्मीचन्दजी म. की सम नहीं विखर सकती। आपश्री जो भी हुक्म देंगे, हम उसको शिरोधार्य करेंगे। यदि मुझे खड़ा कर देंगे तो भी मैं कोई तर्क नहीं करूंगा। हमारी आप पर पूर्ण श्रद्धा हो गई है उपाचार्यश्री और उपाध्यायश्री का परस्पर व्यवहार देखकर कोई यह नहीं कह र था कि पूज्य हुक्मीचंदजी म.सा. के सम्प्रदाय की दो धाराओं के सन्तों का यहां विराज रहा है। उपाध्यायश्री विनयावनत थे तो उपाचार्यश्री प्रेमपयोधि थे। पूज्यश्री के अथाह प्रे व्यवहार से सभी अभिभूत हो जाते थे।
रूप से व्यक्त किया था और विभेदक कारणों को दूर करने के लिये प्रत्येक पूर्व-सम्प्रदाय में एक-दूसरे सम्प्रदाय के मुनिराजों का संयुक्त रूप में चातुर्मास कराना आवश्यक समझते थे और इस प्रवृत्ति को आपने अपने से ही प्रारम्भ किया। पूज्य उपाचार्यश्रीजी का सं. दो हज़ार नौ का चातुर्मास उदयपुर था और आपके साथ ही सहमन्त्री श्री प्यारचन्दजी म.सा., जो जैन- दिवाकर श्री चौथमलजी म. के शिष्य थे, का भी चातुर्मास हुआ। इस चातुर्मास की ऐतिहासिक महत्ता थी। वैसे तो पूज्यश्री हुक्मीचन्दजी म.सा. की संप्रदाय के आचार्य के रूप में पहले भी आपश्री के अनेक चातुर्मास उदयपुर में हो चुके थे, लेकिन समस्त स्थानकवासी जैन साधु-साध्वियों के सर्वसत्ता सम्पन्न उपाचार्य के रूप में यह प्रथम चातुर्मास था । उदयपुर श्रीसंघ में अभूतपूर्व उत्साह व्याप्त था । उपाचार्यश्रीजी के दर्शनार्थ एवं प्रवचन- प्रसाद की प्राप्ति के लिये प्रतिदिन बाहर के सैकड़ों भाई बहिन आते रहते थे और कितने तो समस्त चातुर्मास काल को यहां ही व्यतीत करने के लिये बस गये थे। श्रावण कृष्णा तृतीया को पूज्य उपाचार्यश्री का जन्मोत्सव बड़े उत्साह से मनाया गया। सन्त- सतियों एवं श्रावक-श्राविकाओं के अलावा स्वयं उपाचार्यश्रीजी ने जन्मदिन पर क्या करना चाहिए- इस विषय पर मार्मिक प्रवचन फरमाया । पूज्यश्री ने कहा- गत वर्ष के जीवन पर दृष्टिपात कर अपनी भूलों के लिये पश्चात्ताप करना चाहिए और आगे के लिए सत्कार्य करने की प्रतिज्ञा करनी चाहिए। उपाचार्यश्री के तिरेसठवें वर्षप्रवेश पर धर्म, ध्यान, त्याग, तप के अलावा श्रीसंघ ने हर्षोत्साह के साथ दीन, अनाथजनों को भोजन दिया तथा पशुओं को भी तृप्त किया। चातुर्मास काल में सहमन्त्री श्री प्यारचन्दजी म. ने अपने भाव व्यक्त किये थे कि हमारे इतने वर्ष दूर रहने से मनों में कई तरह की भ्रान्तियां थीं। लेकिन निकट में रहने से वे सब भ्रांतियां दूर हुईं और उपाचार्यश्रीजी के हृदय को नजदीक से समझ पाया हूँ। आपश्री बर्ताव ने मुझे श्री जैनदिवाकरजी म. को भुला दिया है। अब चाहे कुछ भी हो, हम कभी अलग नहीं होंगे। कदाचित् श्रमण संघ बिखर सकता है, किन्तु पूज्यश्री हुक्मीचन्दजी म. की सम्प्रदाय नहीं विखर सकती। आपश्री जो भी हुक्म देंगे, हम उसको शिरोधार्य करेंगे। यदि गुझे धूप में खड़ा कर देंगे तो भी मैं कोई तर्क नहीं करूंगा। हमारी आप पर पूर्ण श्रद्धा हो गई है। उपाचार्य श्री और उपाध्यायश्री का परस्पर व्यवहार देखकर कोई यह नहीं कह सकता था कि पूज्य हुक्मीचंदजी म.सा. के सम्प्रदाय की दो धाराओं के सन्तों का यहां विराजना हो रहा है। उपाध्यायश्री विनयावनत थे तो उपाचार्यश्री प्रेमपयोधि थे। पूज्यश्री के अथाह प्रेममय व्यवहार से सभी अभिभूत हो जाते थे। श्रावक संघ भी एक हुआ उदयपुर में स्थानकवासी समाज बहुत बड़ा है। यहां श्री जवाहर मित्र मण्डल एवं श्री महावीर मित्र मण्डल के नाम से दो सांप्रदायिक संस्थाएं चल रही थीं। घाणेराव सादडी सम्मेलन के पश्चात् दोनों संस्थाओं के विलीनीकरण के अनेक प्रयत्न हुए, परन्तु सफलता नहीं मिली। उपाचार्यश्री गणेशलालजी म.सा. एवं उपाध्यायश्री प्यारचंदजी म.सा. के इस चातुर्मास में एकता का वातावरण बना। श्री जवाहर मित्र मण्डल के कार्यकर्ता प्रजातन्त्र सिद्धान्तानुसार निर्वाचन चाहते थे जबकि श्री महावीर मित्र मण्डल के कार्यकर्ता अपना समान प्रतिनिधित्व चाहते थे। कॉन्फरेंस के मंत्री श्री जवाहरलालजी मुणोत, संघ-ऐक्य समिति के मंत्री श्री धीरजभाई तुरखिया, कॉन्फरेंस प्रमुख श्री चम्पालालजी बांठिया के प्रभावी भाषणों से समस्याएं सुलझने लगीं। श्री जवाहर मित्र मण्डल की ओर से श्री हिम्मतसिंहजी बाबेल ने यह घोषणा करके एकता का मार्ग प्रशस्त कर दिया कि श्री जवाहर मित्र मण्डल अपना पृथक् अस्तित्व समाप्त करता है और श्री महावीर मित्र मण्डल के कार्यकर्ताओं को कार्यकारिणी बनाने का पूरा अधिकार देता है। इस समाचार का उदयपुर की समस्त जनता ने हर्ष के साथ अभिनन्दन किया। प्रवचन सभा में स्वयं पूज्यश्री एवं अन्य मुनिवरों ने इन हर्षद समाचारों पर सन्तोष प्रगट कर एकता के महत्त्व को रेखांकित किया। पूज्यप्रवर के आभामण्डल का प्रभाव ही कुछ ऐसा था कि उनकी उपस्थिति मात्र समस्याओं को सुलझाने में कारगर सिद्ध होती थी। उदयपुर का श्रावक संघ एक हो गया। पूरे देश में इसका प्रभावक सन्देश गया। सोजत में मन्त्रिमण्डल के सम्मेलन का निश्चय नवनिर्मित श्रमण संघ की व्यवस्था में दृढ़ता लाने के लिये विचार-विमर्श की आवश्यकता थी। अतः वर्षावास काल में भी सहमंत्री मुनिश्री प्यारचन्दजी म. से व्यवस्थाक-विषयक अनेक बातों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ था। इसी प्रसंग में यह भी विचार किया गया कि मन्त्रिमण्डल की एक बैठक होनी चाहिये, जिससे संघ व्यवस्था में रही हुई कमियों का परिमार्जन किया जा सके और संगठन के आदर्श की पूर्ति हो सके। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये प्रयत्न प्रारम्भ हुए और निर्णय किया गया कि चातुर्मास समाप्ति के पश्चात् मन्त्रिमण्डल का सम्मेलन आयोजित किया जाये। अतः अधिकारी मुनिवरों के रूप से व्यक्त किया था और विभेदक कारणों को दूर करने के लिये प्रत्येक पूर्व-सम्प्र एक-दूसरे सम्प्रदाय के मुनिराजों का संयुक्त रूप में चातुर्मास कराना आवश्यक समझ और इस प्रवृत्ति को आपने अपने से ही प्रारम्भ किया। पूज्य उपाचार्यश्रीजी का सं. दो हज़ार नौ का चातुर्मास उदयपुर था और आपके सा सहमन्त्री श्री प्यारचन्दजी म.सा., जो जैन - दिवाकर श्री चौथमलजी म. के शिष्य थे, चातुर्मास हुआ। इस चातुर्मास की ऐतिहासिक महत्ता थी। वैसे तो पूज्यश्री हुक्मीचन्दजी की संप्रदाय के आचार्य के रूप में पहले भी आपश्री के अनेक चातुर्मास उदयपुर में ह थे, लेकिन समस्त स्थानकवासी जैन साधु-साध्वियों के सर्वसत्ता सम्पन्न उपाचार्य के यह प्रथम चातुर्मास था । उदयपुर श्रीसंघ में अभूतपूर्व उत्साह व्याप्त था । उपाचार्यश्री दर्शनार्थ एवं प्रवचन - प्रसाद की प्राप्ति के लिये प्रतिदिन बाहर के सैकड़ों भाई-बहिन रहते थे और कितने तो समस्त चातुर्मास काल को यहां ही व्यतीत करने के लिये बस ग श्रावण कृष्णा तृतीया को पूज्य उपाचार्यश्री का जन्मोत्सव बड़े उत्साह से मनाया सन्त- सतियों एवं श्रावक-श्राविकाओं के अलावा स्वयं उपाचार्यश्रीजी ने जन्मदिन पर करना चाहिए- इस विषय पर मार्मिक प्रवचन फरमाया । पूज्यश्री ने कहा- गत वर्ष के पर दृष्टिपात कर अपनी भूलो के लिये पश्चात्ताप करना चाहिए और आगे के लिए स करने की प्रतिज्ञा करनी चाहिए। उपाचार्यश्री के तिरेसठवें वर्षप्रवेश पर धर्म, ध्यान, त्याग, अलावा श्रीसंघ ने हर्षोत्साह के साथ दीन, अनाथजनों को भोजन दिया तथा पशुओं व तृप्त किया। चातुर्मास काल में सहमन्त्री श्री प्यारचन्दजी म. ने अपने भाव व्यक्त किये थे कि । इतने वर्ष दूर रहने से मनों में कई तरह की भ्रान्तियां थीं। लेकिन निकट में रहने से भ्रांतियां दूर हुईं और उपाचार्यश्रीजी के हृदय को नजदीक से समझ पाया हूँ। आप बर्ताव ने मुझे श्री जैनदिवाकरजी म. को भुला दिया है। अब चाहे कुछ भी हो, हम कभी नहीं होंगे। कदाचित् श्रमण संघ विखर सकता है, किन्तु पूज्यश्री हुक्मीचन्दजी म. की सम नहीं विखर सकती। आपश्री जो भी हुक्म देंगे, हम उसको शिरोधार्य करेंगे। यदि मुझे खड़ा कर देंगे तो भी मैं कोई तर्क नहीं करूंगा। हमारी आप पर पूर्ण श्रद्धा हो गई है उपाचार्यश्री और उपाध्यायश्री का परस्पर व्यवहार देखकर कोई यह नहीं कह र था कि पूज्य हुक्मीचंदजी म.सा. के सम्प्रदाय की दो धाराओं के सन्तों का यहां विराज रहा है। उपाध्यायश्री विनयावनत थे तो उपाचार्यश्री प्रेमपयोधि थे। पूज्यश्री के अथाह प्रे व्यवहार से सभी अभिभूत हो जाते थे।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
अपनी मायाका विस्तार कर उन्होंने लोगोंको अनेक प्रकारको शिक्षा देने का प्रयत्न किया । बाल लीला - कंसको अष चैन कहां ? उसे योग मायाकी बातपर पूरा पूरा विश्वास हो गया था। प्रति 'पल वह अपने शत्रुको खोज, उसे मार डालनेकी चिन्तामें व्यश् रहता था। राक्षसोंने चारों ओर अत्याचार करना आरम्भ कर दिया था। केवल सन्देह वश, सैकड़ों सुकुमार बच्चे निर्दयता पूर्वक मार डाले जाते थे और अनेक अभागे दम्पतियोंके -लाल जबर्दस्ती उनके हाथोंसे छीन लिये जाते थे। लाख यह करने परभी कृष्ण और बलदेव उन दानवोंको दृष्टिसे न वच सके। कंसको तुरन्त सूचना दी गयीं, क्योंकि नन्दके प्रभाव, उनके व्यक्तित्व और प्रवन्धके कारण वहां हरएककी दाल न गलती थी । कंसने सोचविचार करनेके बाद इस कार्य का भार पूतना नामक राक्षसीको दिया । वह एक सुन्दर ग्वालिनका वेश धारणकर नन्दके घर गयी । यशोदाने उसका यथोचित सत्कार कर बैठनेको आसन दिया। पूतनाने बड़े प्रेमसे कृष्णको उठा लिया और उन्हें स्तनपान कराने लगी। उस दुष्टाने स्तनोंपर विष लगा रक्खा था। उसने समझ रक्खा था, कि विषपान करते ही कृष्णका अन्त हो जायगा, परन्तु मायापतिले दी उसकी यह माया कैसे चल सकती थी ! कृष्ण स्तनपान करते हुए उसकी जीवनी शक्तिका हरण करने लगे। पूननाको घ्याकुलता चढ़ने लगी। अङ्गप्रत्यङ्गमें असहा वेदना होने लगी और अन्त में उसकी आंखें उलट गयीं। उसने अपने आपको छुड़ाना चाहा, परन्तु कृष्णने न छोड़ा। वह चिल्लाती हुई वहां से भगी और निर्जीव हो' गिर पड़ी । नन्द वहांसे कृष्णको उठा लाये और उनकी रक्षापर परमात्माको धन्यवाद देने लगे । इस घटनाको देख कंसको दृढ़ विश्वास हो गया, कि कृष्णही मेरा शत्रु है। अग्नि, रोग, ऋण और रिपुको बढ़नेका अवसर न दे आरम्भहीमें नाश करना चाहिये । यह सोच वह उनके मारनेकी प्राणपणसे चेष्टा करने लगा। प्रतिदिन एक न एक वधिक इस कार्यके लिये गोकुल जाता और यथाशक्ति प्रयत्न करता । एक दिन एक राक्षस ब्राह्मण के वेशमें वहां गया, उसने यशोदासे कृष्णके दर्शनकी अभिलाषा प्रकट की। यशोदा जल भरने जा रहीं थीं, अतः लौट आनेतक बैठनेकी प्राथना की। कृष्ण भी उस समय सो रहे थे । यशोदाकी अनुपस्थिति देख उस राक्षसने उन्हें मार डालना चाहा और उनके पास गया । कृष्णने उसकी जीभ पकड़कर ऐंठ दी और मुहमें दहीभर दिया। आसपास जो पात्र पड़े थे वह भी तोड़ फोड़ डाले। यशोदाने आकर देखा, कि मटुकियां फूटी पड़ी हैं, वही दूधफा कीचड़ मच रहा है और ब्राह्मण देवता खड़े घबड़ा रहे है। उन्होंने उससे पूछा, "दही खाया तो खाया यह बरतन क्यों फोड़ ढाले ?" श्रीकृष्ण ल राक्षसमें बोलने की शक्ति न थी । उसने कृष्ण की ओर उ'गली उठादी । यशोदाको विश्वास न हुआ। एक अबोध चालक यह सब कैसे कर सकता है ? उन्होंने उसे ही दोषी समझा, परन्तु ब्राह्मण जान केवल घरसे निकाल दिया और कोई सजा न दी । इसके बाद कागासुर पहुंचा। कृष्ण ने उसकी गरदन ऐंठ फेंक दिया और वह निर्जीव हो कंसके सम्मुख जा गिरा । फिर शकटासुरकी बारी आई और उसको भी यही दशा हुई । 'एक दिन तृणावर्त्त आया और वह यशोदा सहित कृष्णको उठा ले जाने की बात सोचने लगा। इतने में बड़े जोरले आँधी आयी । कृष्णने अपना वजन बढ़ा दिया। यशोदा उन्हें उठाकर अन्दर न लेजा सकीं। समझाने पर भी वह आँगा न उडे । यशोदा ज्योंही वहाँले स्थानान्तरित हुई त्योंही कृष्ण ने उस दुष्ट का गला घोट डाला। वह निर्जीव हो, वहीं गिर गया। यह देख यशोदादिके आश्चध्यका चारापारन रहा । उन्होंने कृण की बलैया ले बहुत कुछ दान पुण्य किये । एक दिन किसीने शिकायत कर दो, कि कृष्ण ने मिट्टी खा ली है । यशोदाने उन्हें धमका कर मुह दिखाने को कहा । कृष्णने अपनी निर्दोषिता सिद्ध करने के लिये उनके सम्मुख अपना मुंह खोल दिया। यशोदाका उसमें तीनो लोक दिखायो पड़ने लगे और उनके आश्चध्यको सीमा न रहो । शुक्ल पक्षके चन्द्रकी तरह कृष्णचन्द्रकी कला मीर बढ़ती जा रही थी। ज्यों ज्यों वह बड़े होते गये त्यों त्यों अपनी बाल लीलाका विस्तार करने लगे। गोकुलकी समस्त जनता उनको अधिकाधिक चाहने लगी। सबका स्नेह भाव उनपर बढ़ताही गया। यहांतक कि, वह उत्पात करें, दही दूध नष्ट करदें, वरतन फोड़ दे, तब भी वह उन्हें उसी भावसे बुलाते, बैठाते और खिलाते । गोकुलका एक भी घर ऐसा न था। जहां कृष्णका आवागमन न हो । वह प्रत्येक. घरमें जाते, खेल कूद करते, दही दूध खाते और मौज उड़ाते थे । कहीं कहीं उत्पात कर बैठते और हसो खेलमें मटुकियां फोड़ डालते थे । क्षणमात्रमें वह उत्पात वर इधरसे उधर हो आते। उनमें इतनी चञ्चलता, इतनी स्फूर्त्ति, इतना चिलबिलापन था, कि उन्हें स्थानान्तरित होते देरही न लगती थी। एक दिन मुहल्ले में बड़ा उत्पात मचाया। प्रत्येक घरमें कुछ न कुछ तोड़ फोड़ दिया। चारों ओरसे यशोदाके पास उलाहन आने लगे। यशोदाने कहा, कृष्णतो कहीं गयाही नहीं। वास्तव में बात कुछ ऐसीही थी। उन्हें इसका पताही न रहता था कि कृष्ण कथ बाहर जाते है और कब लौट आते हैं। वह इधर उधर काम करके आतों, तो उन्हें घरमेंही पातीं । कृष्णको अनेकस्थानों में देख लोगोंको भ्रम हो जाता था। उन्हें मालूम पड़ता कि अनेक कृष्ण एकही समय अनेक स्थानों में विचरण कर रहे ।। इसका कारण उनका बिलबिलापन ही था। एक दिन कृष्ण ने अपनेहो घरमें उत्पात मचाया। वह और उनके बाल मित्रोंने खूब दही दूध और माखन उड़ाया । अन्तमें मटुकियां फोड़ डालीं और घर भरमें दही दूधकी नदियां वहा दीं। यशोदाने आकर यह देखा और बड़ा क्रोध प्रकट किया। सब लड़के तो भाग गये, परन्तु कृष्ण पकड़ लिये गये । यशोदाने उनकी कमर एक दामनसे बांध दी और उसका सिरा एक वजनदार ऊखलमेंः अटका दिया। कृष्ण बैठे बैठे रोते और विनय अनुनय करते रहे, परन्तु छूट न सके । यशोदाने आज 'कठोर दण्ड देनेका निश्चय किया था अतः मुहल्लेको कितनीही स्त्रियोंके समझाने बुझाने पर भी, उन्हें न छोड़ा । कृष्णने खड़े हो उस ऊखलको आँगनकी ओर घसीटना आरम्भ किया। वह बड़े हृष्ट पुष्ट और बलिष्ट थे । फिर भी यह काम : साधारण बच्च की शक्तिके बाहर था । कृष्ण जमीन पर पैर अड़ा अड़ा कर उसे दामनके सहारे खींचते और कुछ न कुछ खिसका ही ले जाते। उनके आँगन में दो वृक्ष थे। वह दोनों पासही पास थे।. कृष्णने उस ऊखलको उन दोनोके बीच में फंसा कर ऐसा जोर लगाया, कि वह उखड़ कर गिर पड़े। लोगोंके आश्चर्यका वार पार न रहा । उन वृक्षोंको गिरा देना आसान काम न था। यशोदाने विस्मित हो, सहर्ष उन्हें बन्धन मुक्त कर दिया। कुबेरके दो पुत्र नारदके शापसे इन वृक्षोंके रूपमें परिवर्तित हो गये थे वृक्षोंके उखड़तेही उन दोनोंका उद्धार हुआ। उन्होंने दिव्य रूपमें प्रकट हो कृष्णकी स्तुति की और फिर अन्तर्द्धान हो गये 1 कृष्णकी यह लीला देख, गोकुलके लोगोंको मितना होता था, कंसको उसका सौगुना संताप होता था। उसने अब "तक कृष्ण को मार डालनेके लिये जितनी चालें चली थीं वह सब बेकार हो गयी थीं। जितनी चेष्टायें की थीं घे सभी निष्फल : सिद्ध हुई थीं। उसका एक भी प्रयत्न सफल न हुआ था। कंसने - अब असुरोंको बड़ी कड़ी आज्ञा दी, खूब प्रलोभन भी दिया । कहा - किसी न किसी तरह कृष्ण को अवश्य मार डालो। इसी लिये राक्षसोंका उत्पात अब बहुत बढ़ गया । गोकुलमें आये दिन एक न एक अनर्थ होने लंगा। नन्दको बड़ी चिन्ता हुई। बह गोकुलको छोड़ वृन्दावन में जा बसे । वह समझे, कि अब सुरक्षित स्थानमें आ गये, परन्तु कंसके अनुचरोंने यहां भी पीछा नःछोडा । वह तो कृष्ण की घातमें थे । नन्द चाहे घरमें रहें या जङ्गलमें, गोकुलमें रहें या वृन्दावन में उन्हें तो अपने कामसे काम था । जब कृष्ण की अवस्था पांच वर्ष की हुई, तब वह अपन बालमित्रोंके साथ बछड़ोंको चरानेके लिये जङ्गलमें जाने लगे। एक : दिन एक राक्षस बछड़ेका रूप धारण कर उन्हें मारनेको चेष्टा करने लगा। कृष्णको यह रहस्य मालूम होगया। उन्होंने पैर पकड़ उसे इस जोरसे पटका कि उसके प्राण निकल गये। दूसरे दिन बकासुर आ पहुंचा। वह बड़ेही भयानक पक्षोके रूप में, था । कृष्ण के निकट वह चोंच फैलाकर बैठ गया । कृष्ण उसके उदरमें प्रवेश कर गये । ज्योंही वह अन्दर पहुंचे त्योंही उसके पेटमें दाह होने लगा। उसने कृष्ण को उसी क्षण बाहर निकाल दिया। वृष्णने ररु. की चोन पकड़ कर चीर डाली । सब लड़के उसके विकसित मुखमें बैठ, खेल करने लगे। कृष्ण भी उन्होंमें जा भिले। परन्तु राक्षसका प्राण अभी निकला नथा । उसने सबको अपने मुख में बैठे देख, वडे वेगसे सांस ली। सांसके साथही सबके सव उसके पेट में चले गये। राक्षस. प्रसन्न हुआ, परन्तु लड़कोंके प्राण सक्टमें जापढ़े। कृष्णने तुरन्त अपना शरीर बढ़ाना आरम्भ किया, यहां तक कि वत्सासुरका पेट फट गया और सबके सबबाहर निकल पड़े। एक दिन बछड़े चर रहे थे । ग्वाल-चालोंको क्षुधा लग रही थी। सबके सब एक साथ भोजन करने बैठ गये । कृष्ण मे भी उनका साथ दिया। देवताओंको यह देख सन्देह हुआ। उन्होंने कृष्णकी परीक्षा लेनेका निश्चय किया और बछड़े कहीं स्थानान्तरित कर दिये । ग्वाल-चाल खा पीकर उठे तो बछड़े गायव ! वे घवड़ाने और रोने लगे । कृष्णने उन्हें आश्वासन दिया और उसी रूप रडके बछड़े तय्यार कर दिये। बछड़ोंको पाकर ग्वाल बाल बड़े प्रसन्न हुए और देवताओंको भी विश्वास हो गया कि कृष्ण सभी कुछ करनेमें समर्थ हैं। इसी प्रकार श्रीकृष्ण अनेक लीलाओंका विस्तार कर रहे थे। एक दिन गायोंको खोजते खोजते गोपगण श्रीकृष्णसे विलग हो गये। परिश्रम करनेके कारण उन्होंने अत्यन्त तृषित होकर यमुनाका जल पी लिया। यमुनाका इस स्थानका जल विषाक था। उसे पीतेही सबके सब व्याकुल हो उठे। अचा६
अपनी मायाका विस्तार कर उन्होंने लोगोंको अनेक प्रकारको शिक्षा देने का प्रयत्न किया । बाल लीला - कंसको अष चैन कहां ? उसे योग मायाकी बातपर पूरा पूरा विश्वास हो गया था। प्रति 'पल वह अपने शत्रुको खोज, उसे मार डालनेकी चिन्तामें व्यश् रहता था। राक्षसोंने चारों ओर अत्याचार करना आरम्भ कर दिया था। केवल सन्देह वश, सैकड़ों सुकुमार बच्चे निर्दयता पूर्वक मार डाले जाते थे और अनेक अभागे दम्पतियोंके -लाल जबर्दस्ती उनके हाथोंसे छीन लिये जाते थे। लाख यह करने परभी कृष्ण और बलदेव उन दानवोंको दृष्टिसे न वच सके। कंसको तुरन्त सूचना दी गयीं, क्योंकि नन्दके प्रभाव, उनके व्यक्तित्व और प्रवन्धके कारण वहां हरएककी दाल न गलती थी । कंसने सोचविचार करनेके बाद इस कार्य का भार पूतना नामक राक्षसीको दिया । वह एक सुन्दर ग्वालिनका वेश धारणकर नन्दके घर गयी । यशोदाने उसका यथोचित सत्कार कर बैठनेको आसन दिया। पूतनाने बड़े प्रेमसे कृष्णको उठा लिया और उन्हें स्तनपान कराने लगी। उस दुष्टाने स्तनोंपर विष लगा रक्खा था। उसने समझ रक्खा था, कि विषपान करते ही कृष्णका अन्त हो जायगा, परन्तु मायापतिले दी उसकी यह माया कैसे चल सकती थी ! कृष्ण स्तनपान करते हुए उसकी जीवनी शक्तिका हरण करने लगे। पूननाको घ्याकुलता चढ़ने लगी। अङ्गप्रत्यङ्गमें असहा वेदना होने लगी और अन्त में उसकी आंखें उलट गयीं। उसने अपने आपको छुड़ाना चाहा, परन्तु कृष्णने न छोड़ा। वह चिल्लाती हुई वहां से भगी और निर्जीव हो' गिर पड़ी । नन्द वहांसे कृष्णको उठा लाये और उनकी रक्षापर परमात्माको धन्यवाद देने लगे । इस घटनाको देख कंसको दृढ़ विश्वास हो गया, कि कृष्णही मेरा शत्रु है। अग्नि, रोग, ऋण और रिपुको बढ़नेका अवसर न दे आरम्भहीमें नाश करना चाहिये । यह सोच वह उनके मारनेकी प्राणपणसे चेष्टा करने लगा। प्रतिदिन एक न एक वधिक इस कार्यके लिये गोकुल जाता और यथाशक्ति प्रयत्न करता । एक दिन एक राक्षस ब्राह्मण के वेशमें वहां गया, उसने यशोदासे कृष्णके दर्शनकी अभिलाषा प्रकट की। यशोदा जल भरने जा रहीं थीं, अतः लौट आनेतक बैठनेकी प्राथना की। कृष्ण भी उस समय सो रहे थे । यशोदाकी अनुपस्थिति देख उस राक्षसने उन्हें मार डालना चाहा और उनके पास गया । कृष्णने उसकी जीभ पकड़कर ऐंठ दी और मुहमें दहीभर दिया। आसपास जो पात्र पड़े थे वह भी तोड़ फोड़ डाले। यशोदाने आकर देखा, कि मटुकियां फूटी पड़ी हैं, वही दूधफा कीचड़ मच रहा है और ब्राह्मण देवता खड़े घबड़ा रहे है। उन्होंने उससे पूछा, "दही खाया तो खाया यह बरतन क्यों फोड़ ढाले ?" श्रीकृष्ण ल राक्षसमें बोलने की शक्ति न थी । उसने कृष्ण की ओर उ'गली उठादी । यशोदाको विश्वास न हुआ। एक अबोध चालक यह सब कैसे कर सकता है ? उन्होंने उसे ही दोषी समझा, परन्तु ब्राह्मण जान केवल घरसे निकाल दिया और कोई सजा न दी । इसके बाद कागासुर पहुंचा। कृष्ण ने उसकी गरदन ऐंठ फेंक दिया और वह निर्जीव हो कंसके सम्मुख जा गिरा । फिर शकटासुरकी बारी आई और उसको भी यही दशा हुई । 'एक दिन तृणावर्त्त आया और वह यशोदा सहित कृष्णको उठा ले जाने की बात सोचने लगा। इतने में बड़े जोरले आँधी आयी । कृष्णने अपना वजन बढ़ा दिया। यशोदा उन्हें उठाकर अन्दर न लेजा सकीं। समझाने पर भी वह आँगा न उडे । यशोदा ज्योंही वहाँले स्थानान्तरित हुई त्योंही कृष्ण ने उस दुष्ट का गला घोट डाला। वह निर्जीव हो, वहीं गिर गया। यह देख यशोदादिके आश्चध्यका चारापारन रहा । उन्होंने कृण की बलैया ले बहुत कुछ दान पुण्य किये । एक दिन किसीने शिकायत कर दो, कि कृष्ण ने मिट्टी खा ली है । यशोदाने उन्हें धमका कर मुह दिखाने को कहा । कृष्णने अपनी निर्दोषिता सिद्ध करने के लिये उनके सम्मुख अपना मुंह खोल दिया। यशोदाका उसमें तीनो लोक दिखायो पड़ने लगे और उनके आश्चध्यको सीमा न रहो । शुक्ल पक्षके चन्द्रकी तरह कृष्णचन्द्रकी कला मीर बढ़ती जा रही थी। ज्यों ज्यों वह बड़े होते गये त्यों त्यों अपनी बाल लीलाका विस्तार करने लगे। गोकुलकी समस्त जनता उनको अधिकाधिक चाहने लगी। सबका स्नेह भाव उनपर बढ़ताही गया। यहांतक कि, वह उत्पात करें, दही दूध नष्ट करदें, वरतन फोड़ दे, तब भी वह उन्हें उसी भावसे बुलाते, बैठाते और खिलाते । गोकुलका एक भी घर ऐसा न था। जहां कृष्णका आवागमन न हो । वह प्रत्येक. घरमें जाते, खेल कूद करते, दही दूध खाते और मौज उड़ाते थे । कहीं कहीं उत्पात कर बैठते और हसो खेलमें मटुकियां फोड़ डालते थे । क्षणमात्रमें वह उत्पात वर इधरसे उधर हो आते। उनमें इतनी चञ्चलता, इतनी स्फूर्त्ति, इतना चिलबिलापन था, कि उन्हें स्थानान्तरित होते देरही न लगती थी। एक दिन मुहल्ले में बड़ा उत्पात मचाया। प्रत्येक घरमें कुछ न कुछ तोड़ फोड़ दिया। चारों ओरसे यशोदाके पास उलाहन आने लगे। यशोदाने कहा, कृष्णतो कहीं गयाही नहीं। वास्तव में बात कुछ ऐसीही थी। उन्हें इसका पताही न रहता था कि कृष्ण कथ बाहर जाते है और कब लौट आते हैं। वह इधर उधर काम करके आतों, तो उन्हें घरमेंही पातीं । कृष्णको अनेकस्थानों में देख लोगोंको भ्रम हो जाता था। उन्हें मालूम पड़ता कि अनेक कृष्ण एकही समय अनेक स्थानों में विचरण कर रहे ।। इसका कारण उनका बिलबिलापन ही था। एक दिन कृष्ण ने अपनेहो घरमें उत्पात मचाया। वह और उनके बाल मित्रोंने खूब दही दूध और माखन उड़ाया । अन्तमें मटुकियां फोड़ डालीं और घर भरमें दही दूधकी नदियां वहा दीं। यशोदाने आकर यह देखा और बड़ा क्रोध प्रकट किया। सब लड़के तो भाग गये, परन्तु कृष्ण पकड़ लिये गये । यशोदाने उनकी कमर एक दामनसे बांध दी और उसका सिरा एक वजनदार ऊखलमेंः अटका दिया। कृष्ण बैठे बैठे रोते और विनय अनुनय करते रहे, परन्तु छूट न सके । यशोदाने आज 'कठोर दण्ड देनेका निश्चय किया था अतः मुहल्लेको कितनीही स्त्रियोंके समझाने बुझाने पर भी, उन्हें न छोड़ा । कृष्णने खड़े हो उस ऊखलको आँगनकी ओर घसीटना आरम्भ किया। वह बड़े हृष्ट पुष्ट और बलिष्ट थे । फिर भी यह काम : साधारण बच्च की शक्तिके बाहर था । कृष्ण जमीन पर पैर अड़ा अड़ा कर उसे दामनके सहारे खींचते और कुछ न कुछ खिसका ही ले जाते। उनके आँगन में दो वृक्ष थे। वह दोनों पासही पास थे।. कृष्णने उस ऊखलको उन दोनोके बीच में फंसा कर ऐसा जोर लगाया, कि वह उखड़ कर गिर पड़े। लोगोंके आश्चर्यका वार पार न रहा । उन वृक्षोंको गिरा देना आसान काम न था। यशोदाने विस्मित हो, सहर्ष उन्हें बन्धन मुक्त कर दिया। कुबेरके दो पुत्र नारदके शापसे इन वृक्षोंके रूपमें परिवर्तित हो गये थे वृक्षोंके उखड़तेही उन दोनोंका उद्धार हुआ। उन्होंने दिव्य रूपमें प्रकट हो कृष्णकी स्तुति की और फिर अन्तर्द्धान हो गये एक कृष्णकी यह लीला देख, गोकुलके लोगोंको मितना होता था, कंसको उसका सौगुना संताप होता था। उसने अब "तक कृष्ण को मार डालनेके लिये जितनी चालें चली थीं वह सब बेकार हो गयी थीं। जितनी चेष्टायें की थीं घे सभी निष्फल : सिद्ध हुई थीं। उसका एक भी प्रयत्न सफल न हुआ था। कंसने - अब असुरोंको बड़ी कड़ी आज्ञा दी, खूब प्रलोभन भी दिया । कहा - किसी न किसी तरह कृष्ण को अवश्य मार डालो। इसी लिये राक्षसोंका उत्पात अब बहुत बढ़ गया । गोकुलमें आये दिन एक न एक अनर्थ होने लंगा। नन्दको बड़ी चिन्ता हुई। बह गोकुलको छोड़ वृन्दावन में जा बसे । वह समझे, कि अब सुरक्षित स्थानमें आ गये, परन्तु कंसके अनुचरोंने यहां भी पीछा नःछोडा । वह तो कृष्ण की घातमें थे । नन्द चाहे घरमें रहें या जङ्गलमें, गोकुलमें रहें या वृन्दावन में उन्हें तो अपने कामसे काम था । जब कृष्ण की अवस्था पांच वर्ष की हुई, तब वह अपन बालमित्रोंके साथ बछड़ोंको चरानेके लिये जङ्गलमें जाने लगे। एक : दिन एक राक्षस बछड़ेका रूप धारण कर उन्हें मारनेको चेष्टा करने लगा। कृष्णको यह रहस्य मालूम होगया। उन्होंने पैर पकड़ उसे इस जोरसे पटका कि उसके प्राण निकल गये। दूसरे दिन बकासुर आ पहुंचा। वह बड़ेही भयानक पक्षोके रूप में, था । कृष्ण के निकट वह चोंच फैलाकर बैठ गया । कृष्ण उसके उदरमें प्रवेश कर गये । ज्योंही वह अन्दर पहुंचे त्योंही उसके पेटमें दाह होने लगा। उसने कृष्ण को उसी क्षण बाहर निकाल दिया। वृष्णने ररु. की चोन पकड़ कर चीर डाली । सब लड़के उसके विकसित मुखमें बैठ, खेल करने लगे। कृष्ण भी उन्होंमें जा भिले। परन्तु राक्षसका प्राण अभी निकला नथा । उसने सबको अपने मुख में बैठे देख, वडे वेगसे सांस ली। सांसके साथही सबके सव उसके पेट में चले गये। राक्षस. प्रसन्न हुआ, परन्तु लड़कोंके प्राण सक्टमें जापढ़े। कृष्णने तुरन्त अपना शरीर बढ़ाना आरम्भ किया, यहां तक कि वत्सासुरका पेट फट गया और सबके सबबाहर निकल पड़े। एक दिन बछड़े चर रहे थे । ग्वाल-चालोंको क्षुधा लग रही थी। सबके सब एक साथ भोजन करने बैठ गये । कृष्ण मे भी उनका साथ दिया। देवताओंको यह देख सन्देह हुआ। उन्होंने कृष्णकी परीक्षा लेनेका निश्चय किया और बछड़े कहीं स्थानान्तरित कर दिये । ग्वाल-चाल खा पीकर उठे तो बछड़े गायव ! वे घवड़ाने और रोने लगे । कृष्णने उन्हें आश्वासन दिया और उसी रूप रडके बछड़े तय्यार कर दिये। बछड़ोंको पाकर ग्वाल बाल बड़े प्रसन्न हुए और देवताओंको भी विश्वास हो गया कि कृष्ण सभी कुछ करनेमें समर्थ हैं। इसी प्रकार श्रीकृष्ण अनेक लीलाओंका विस्तार कर रहे थे। एक दिन गायोंको खोजते खोजते गोपगण श्रीकृष्णसे विलग हो गये। परिश्रम करनेके कारण उन्होंने अत्यन्त तृषित होकर यमुनाका जल पी लिया। यमुनाका इस स्थानका जल विषाक था। उसे पीतेही सबके सब व्याकुल हो उठे। अचाछः
WWE का अब नया मेन इवेंट एलिमेनिशन चैम्बर आने वाला है. जिसमे रॉ ब्रांड के रेसलर हिस्सा लेने वाले है. आपकों बता दे, की एलिमिनेशन चैम्बर मैच में 6 रेसलर हिस्सा लेते है और दो रेसलर एलिमेनिशन चैम्बर मैच की शुरूआत करते है. वही बाकि के चार रेसलर चैम्बर में बंद होते है और अपनी बारी के आने का इंतजार करते है. आपकों यह भी बता दे, की रॉ के जरनल मैनजर कर्ट एंगल इस बात की पुष्टि कर चुके है, कि जो भी रेसलर एलिमेनिशन चैम्बर 2018 जीतेगा उसे रेस्लमेनिया 34 में यूनिवर्सल चैंपियनशिप के लिए ब्राक लेसनर के साथ मैच लड़ने को मिलेगा. एलिमेनिशन चैम्बर 25 फरवरी को होने वाली है और इसके लिए कुल पांच रेसलर अबतक क्वालीफाई कर चुके है और अब बस मात्र एक और रेसलर को इस मैच के लिए क्वालीफाई करना है. जॉन सीना, ब्राउन स्ट्रोमैन, एलायस, रोमन रेन्स और द मिज इस मैच के लिए क्वालीफाई कर चुके है, लेकिन अभी इस मैच में भाग लेने वाले छठे रेसलर का खुलासा नहीं हो पाया है, लेकिन अगली रॉ में छठे रेसलर के लिए भी क्वालीफाई मैच होने वाला है और बताया जा रहा है कि छठे रेसलर के लिए सेथ रोलिंस और जेसन जोर्डन के बीच मैच हो सकता है. अगर मीडिया रिपोर्ट्स व WWE के जानकारों की माने तो यह एलिमेनिशन चेम्बर मैच रोमन रेन्स जीत सकते है, क्योंकि कंपनी रोमन रेन्स और लेसनर के बीच एक ड्रीम मैच करवाना चाहती है. इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि साल 2015 की रेस्लमेनिया में रोमन रेन्स और ब्रोक लेस्नर का मैच अधुरा रह गया था. यह मैच काफी शानदार चल रहा था, लेकिन इस मैच पर सेथ रोलिंस ने दखलंदाजी कर अपना मनी इन द बैंक कैश कराया था और WWE चैंपियन बने थे. लेकिन इस मैच में रोमन रेन्स और ब्राक लेसनर के मैच को एक अच्छा अंत नहीं मिल पाया था, इसलिए कंपनी अब चाहती है, कि एक बार फिर से इन दोनों दिग्गज रेसलरों के बीच मैच करवाया जाए और इस बार इस मैच का अंत भी अच्छे से किया जाये.
WWE का अब नया मेन इवेंट एलिमेनिशन चैम्बर आने वाला है. जिसमे रॉ ब्रांड के रेसलर हिस्सा लेने वाले है. आपकों बता दे, की एलिमिनेशन चैम्बर मैच में छः रेसलर हिस्सा लेते है और दो रेसलर एलिमेनिशन चैम्बर मैच की शुरूआत करते है. वही बाकि के चार रेसलर चैम्बर में बंद होते है और अपनी बारी के आने का इंतजार करते है. आपकों यह भी बता दे, की रॉ के जरनल मैनजर कर्ट एंगल इस बात की पुष्टि कर चुके है, कि जो भी रेसलर एलिमेनिशन चैम्बर दो हज़ार अट्ठारह जीतेगा उसे रेस्लमेनिया चौंतीस में यूनिवर्सल चैंपियनशिप के लिए ब्राक लेसनर के साथ मैच लड़ने को मिलेगा. एलिमेनिशन चैम्बर पच्चीस फरवरी को होने वाली है और इसके लिए कुल पांच रेसलर अबतक क्वालीफाई कर चुके है और अब बस मात्र एक और रेसलर को इस मैच के लिए क्वालीफाई करना है. जॉन सीना, ब्राउन स्ट्रोमैन, एलायस, रोमन रेन्स और द मिज इस मैच के लिए क्वालीफाई कर चुके है, लेकिन अभी इस मैच में भाग लेने वाले छठे रेसलर का खुलासा नहीं हो पाया है, लेकिन अगली रॉ में छठे रेसलर के लिए भी क्वालीफाई मैच होने वाला है और बताया जा रहा है कि छठे रेसलर के लिए सेथ रोलिंस और जेसन जोर्डन के बीच मैच हो सकता है. अगर मीडिया रिपोर्ट्स व WWE के जानकारों की माने तो यह एलिमेनिशन चेम्बर मैच रोमन रेन्स जीत सकते है, क्योंकि कंपनी रोमन रेन्स और लेसनर के बीच एक ड्रीम मैच करवाना चाहती है. इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि साल दो हज़ार पंद्रह की रेस्लमेनिया में रोमन रेन्स और ब्रोक लेस्नर का मैच अधुरा रह गया था. यह मैच काफी शानदार चल रहा था, लेकिन इस मैच पर सेथ रोलिंस ने दखलंदाजी कर अपना मनी इन द बैंक कैश कराया था और WWE चैंपियन बने थे. लेकिन इस मैच में रोमन रेन्स और ब्राक लेसनर के मैच को एक अच्छा अंत नहीं मिल पाया था, इसलिए कंपनी अब चाहती है, कि एक बार फिर से इन दोनों दिग्गज रेसलरों के बीच मैच करवाया जाए और इस बार इस मैच का अंत भी अच्छे से किया जाये.
Faridabad/Alive News: क्राइम ब्रांच बॉर्डर प्रभारी संदीप कुमार की टीम ने लड़ाई झगड़े व स्नेचिंग के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान फरीदाबाद निवासी मोहम्मद उमर के रूप में हुई है। आरोपी से एक बटुआ और कैंची बरामद कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस प्रवक्ता सूबे सिंह ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपी का नाम मोहम्मद उमर है जो फरीदाबाद के पल्ला एरिया का रहने वाला है। 2 दिन पहले आरोपी की राहुल नाम के व्यक्ति के साथ किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई थी जिसमें आरोपी ने उस व्यक्ति के कैंची से हमला करके चोट पहुंचाई और उसका बटुआ व जरूरी कागजात और पैसे लेकर मौके से फरार हो गया। पीड़ित ने इसकी शिकायत थाने में दी जिसके पश्चात आरोपी के खिलाफ लड़ाई झगड़ा व स्नैचिंग की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करके आरोपी की तलाश शुरू की गई। क्राइम ब्रांच की टीम ने मामले में आगे कार्रवाई करते हुए गुप्त सूत्रों की सूचना के आधार पर आरोपी को काबू कर लिया। आरोपी के कब्जे से 1 कैंची, 1 बटुआ, कागजात व 1800 रुपए बरामद किया गया। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी नाई की दुकान पर गया हुआ था और दुकान के बाहर उसका राहुल के साथ किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया और उसने गुस्से में आकर राहुल पर कैंची से हमला कर दिया। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी बहुत ही खतरनाक किस्म का अपराधी है उसके खिलाफ इससे पहले भी स्नेचिंग के 11 मुकदमे दर्ज है और वह अभी हाल ही में जेल से छूट कर आया था। पुलिस पूछताछ पूरी होने के पश्चात आरोपी को अदालत में पेश करके जेल भेज दिया गया है।
Faridabad/Alive News: क्राइम ब्रांच बॉर्डर प्रभारी संदीप कुमार की टीम ने लड़ाई झगड़े व स्नेचिंग के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान फरीदाबाद निवासी मोहम्मद उमर के रूप में हुई है। आरोपी से एक बटुआ और कैंची बरामद कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस प्रवक्ता सूबे सिंह ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपी का नाम मोहम्मद उमर है जो फरीदाबाद के पल्ला एरिया का रहने वाला है। दो दिन पहले आरोपी की राहुल नाम के व्यक्ति के साथ किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई थी जिसमें आरोपी ने उस व्यक्ति के कैंची से हमला करके चोट पहुंचाई और उसका बटुआ व जरूरी कागजात और पैसे लेकर मौके से फरार हो गया। पीड़ित ने इसकी शिकायत थाने में दी जिसके पश्चात आरोपी के खिलाफ लड़ाई झगड़ा व स्नैचिंग की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करके आरोपी की तलाश शुरू की गई। क्राइम ब्रांच की टीम ने मामले में आगे कार्रवाई करते हुए गुप्त सूत्रों की सूचना के आधार पर आरोपी को काबू कर लिया। आरोपी के कब्जे से एक कैंची, एक बटुआ, कागजात व एक हज़ार आठ सौ रुपयापए बरामद किया गया। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी नाई की दुकान पर गया हुआ था और दुकान के बाहर उसका राहुल के साथ किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया और उसने गुस्से में आकर राहुल पर कैंची से हमला कर दिया। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी बहुत ही खतरनाक किस्म का अपराधी है उसके खिलाफ इससे पहले भी स्नेचिंग के ग्यारह मुकदमे दर्ज है और वह अभी हाल ही में जेल से छूट कर आया था। पुलिस पूछताछ पूरी होने के पश्चात आरोपी को अदालत में पेश करके जेल भेज दिया गया है।
अजमेर जिले में खुद को IAS अधिकारी बताकर हाईप्रोफाइल युवतियों को रेप का शिकार बनाने वाले युवक नवीन गुप्ता को पुलिस खोज रही है. पुलिस का कहना है आरोपी ने दिल्ली से लेकर लखनऊ, भोपाल तक की लड़कियों के साथ धोखाधड़ी की वारदातों को अंजाम दिया है. राजस्थान (Rajasthan) में अजमेर जिले (Ajmer) में पुलिस इन दिनों एक फर्जी IAS अधिकारी (fake IAS officer) की तलाश में कोने हांक रही है. खुद को IAS अधिकारी बताकर हाईप्रोफाइल युवतियों को रेप का शिकार बनाने वाले इस युवक का पुलिस को अभी तक कोई सुराग नहीं लगा है. अजमेर पुलिस (ajmer police) के मुताबिक युवक का नाम नवीन कुमार गुप्ता है जिसनें दिल्ली से लेकर लखनऊ, भोपाल तक की लड़कियों के साथ धोखाधड़ी की वारदातों को अंजाम दिया है. पुलिस का कहना है कि आरोपी नवीन (fake ias naveen gupta) पूरा जाल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए फैलाता है. वहीं नवीन पर आईएएस अधिकारी बन दिल्ली की एक एनजीओ डायरेक्टर से भी रेप करने का आरोप है. फिलहाल अजमेर पुलिस लगातार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही लेकिन अभी तक आरोपी आजाद है. जानकारी के मुताबिक गुजरात का रहने वाला नवीन सोशल मीडिया पर खुद को केंद्रीय सचिवालय का अधिकारी बताता है और लड़कियों को झांसे में लाकर उनसे दोस्ती कर रेप करता है और पैसे हड़पने का भी काम करता है. बता दें कि अजमेर पुलिस इस मामले में जब शामिल हुई तब नवीन ने फेसबुक के जरिए दिल्ली की युवती को IAS बताकर 9 मार्च को अजमेर में रेप की वारदात को अंजाम दिया और फरार हो गया. इसके बाद युवती ने अजमेर में ही रेप का मामला दर्ज करवाया. पुलिस को शुरूआती जांच में पता चला है कि आरोपी ने भोपाल में तीन लड़कियों से भी ठगी की है। वहीं आरोपी के खिलाफ जयपुर के सिंधी कैंप थाने में एक लड़के को नौकरी का झांसा देकर लाखों रुपए हड़पने का भी मामला दर्ज है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नवीन लैब टेक्नीशियन है और उसके पिता बाड़मेर में रहते हैं. नवीन आईएएस अधिकारी बन ठगी की वारदातों को काफी समय से अंजाम दे रहा है. इसके अलावा नवीन की तलाश गुजरात में भी की जा रही है. गुजरात का रहने वाला नवीन गुप्ता फेसबुक के जरिए लड़कियों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजकर बात शुरू करता है और खुद को IAS अफसर बताता है. इसके बाद लड़कियां उससे बात करना शुरू कर देती है और वह सोशल मीडिया पर खुद की ऑफिस में बैठे हुए की फोटो भेजता है. वहीं लड़कियों के बातचीत कर वह उनको मिलने या शादी का वादा करता है.
अजमेर जिले में खुद को IAS अधिकारी बताकर हाईप्रोफाइल युवतियों को रेप का शिकार बनाने वाले युवक नवीन गुप्ता को पुलिस खोज रही है. पुलिस का कहना है आरोपी ने दिल्ली से लेकर लखनऊ, भोपाल तक की लड़कियों के साथ धोखाधड़ी की वारदातों को अंजाम दिया है. राजस्थान में अजमेर जिले में पुलिस इन दिनों एक फर्जी IAS अधिकारी की तलाश में कोने हांक रही है. खुद को IAS अधिकारी बताकर हाईप्रोफाइल युवतियों को रेप का शिकार बनाने वाले इस युवक का पुलिस को अभी तक कोई सुराग नहीं लगा है. अजमेर पुलिस के मुताबिक युवक का नाम नवीन कुमार गुप्ता है जिसनें दिल्ली से लेकर लखनऊ, भोपाल तक की लड़कियों के साथ धोखाधड़ी की वारदातों को अंजाम दिया है. पुलिस का कहना है कि आरोपी नवीन पूरा जाल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए फैलाता है. वहीं नवीन पर आईएएस अधिकारी बन दिल्ली की एक एनजीओ डायरेक्टर से भी रेप करने का आरोप है. फिलहाल अजमेर पुलिस लगातार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही लेकिन अभी तक आरोपी आजाद है. जानकारी के मुताबिक गुजरात का रहने वाला नवीन सोशल मीडिया पर खुद को केंद्रीय सचिवालय का अधिकारी बताता है और लड़कियों को झांसे में लाकर उनसे दोस्ती कर रेप करता है और पैसे हड़पने का भी काम करता है. बता दें कि अजमेर पुलिस इस मामले में जब शामिल हुई तब नवीन ने फेसबुक के जरिए दिल्ली की युवती को IAS बताकर नौ मार्च को अजमेर में रेप की वारदात को अंजाम दिया और फरार हो गया. इसके बाद युवती ने अजमेर में ही रेप का मामला दर्ज करवाया. पुलिस को शुरूआती जांच में पता चला है कि आरोपी ने भोपाल में तीन लड़कियों से भी ठगी की है। वहीं आरोपी के खिलाफ जयपुर के सिंधी कैंप थाने में एक लड़के को नौकरी का झांसा देकर लाखों रुपए हड़पने का भी मामला दर्ज है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नवीन लैब टेक्नीशियन है और उसके पिता बाड़मेर में रहते हैं. नवीन आईएएस अधिकारी बन ठगी की वारदातों को काफी समय से अंजाम दे रहा है. इसके अलावा नवीन की तलाश गुजरात में भी की जा रही है. गुजरात का रहने वाला नवीन गुप्ता फेसबुक के जरिए लड़कियों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजकर बात शुरू करता है और खुद को IAS अफसर बताता है. इसके बाद लड़कियां उससे बात करना शुरू कर देती है और वह सोशल मीडिया पर खुद की ऑफिस में बैठे हुए की फोटो भेजता है. वहीं लड़कियों के बातचीत कर वह उनको मिलने या शादी का वादा करता है.
1. ऊपर से खींचने पर इस तस्वीर की खूबसूरती और बढ़ गई है। यह एक ऐसी तस्वीर है जिससे नजर हटेगी ही नहीं। 2. बर्फ के बीच खड़े कुछ लोगों की तस्वीर यह पहली नजर में भले ही साधारण लगे, लेकिन ड्रोन से खींचने पर यह फोटो काफी लाजवाब लगती है। 3. ओवरब्रिज की यह तस्वीर काफी अच्छी लगती है। 4. आसमान में इस तरह की तस्वीरें खींचना आसान नहीं होता, इसकी खूबसूरती का अंदाजा आप खुद ही लगा सकते हें। 5. शहर के ऊपर बादलों का घेरा हो और इसके ऊपर से तस्वीर खींची जाई तो इसे देखने का अंदाज ही अलग होता है। 6. पीली रेत की तस्वीरें तो काफी देखी होंगी, मगर ऐसी पहली बार नजर आई। 7. समुद्र में नावों की खूबसूरती इससे बेहतर क्या होगी। 8. नीचे से खींची गईं ड्रोन की तस्वीर भी कुछ कम नहीं। 9. शहर की चकाचौंध वाली यह तस्वीर कुछ ज्यादा ही रोचक लगती है। 10. हरे-भरे खेतों वाली यह तस्वीर आपको प्रकृति के करीब ला देती है।
एक. ऊपर से खींचने पर इस तस्वीर की खूबसूरती और बढ़ गई है। यह एक ऐसी तस्वीर है जिससे नजर हटेगी ही नहीं। दो. बर्फ के बीच खड़े कुछ लोगों की तस्वीर यह पहली नजर में भले ही साधारण लगे, लेकिन ड्रोन से खींचने पर यह फोटो काफी लाजवाब लगती है। तीन. ओवरब्रिज की यह तस्वीर काफी अच्छी लगती है। चार. आसमान में इस तरह की तस्वीरें खींचना आसान नहीं होता, इसकी खूबसूरती का अंदाजा आप खुद ही लगा सकते हें। पाँच. शहर के ऊपर बादलों का घेरा हो और इसके ऊपर से तस्वीर खींची जाई तो इसे देखने का अंदाज ही अलग होता है। छः. पीली रेत की तस्वीरें तो काफी देखी होंगी, मगर ऐसी पहली बार नजर आई। सात. समुद्र में नावों की खूबसूरती इससे बेहतर क्या होगी। आठ. नीचे से खींची गईं ड्रोन की तस्वीर भी कुछ कम नहीं। नौ. शहर की चकाचौंध वाली यह तस्वीर कुछ ज्यादा ही रोचक लगती है। दस. हरे-भरे खेतों वाली यह तस्वीर आपको प्रकृति के करीब ला देती है।
नई दिल्ली,। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दिल्ली में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) सोसायटी की बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं। बैठक में सीएसआईआर सोसायटी के सभी सदस्यों को आमंत्रित किया गया है। बैठक में केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमन, पीयूष गोयल और जितेंद्र सिंह मौजूद हैं। सीएसआईआर वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत एक सोसायटी है और प्रधानमंत्री सोसायटी के अध्यक्ष हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कानून मंत्रियों और कानून सचिवों के अखिल भारतीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- देश के लोगों को सरकार का अभाव भी नहीं लगना चाहिए और देश के लोगों को सरकार का दबाव भी महसूस नहीं होना चाहिए। पीएम मोदी ने इस मौके पर आगे कहा, 'हमारे समाज की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि वो प्रगति के पथ पर बढ़ते हुए खुद में आंतरिक सुधार भी करता चलता है। हमारा समाज अप्रासंगिक हो चुके कायदे-कानूनों, गलत रिवाजों को हटाता भी चलता है। ' इसके अलावा, हरियाणा के गुरुग्राम के बिलासपुर इंडस्ट्रियल एरिया में ऑटो पार्ट्स बनाने वाली एक कंपनी में आग लग गई। मौके पर दमकल की गाड़ियां मौजूद हैं। Hindi Breaking News Today Updates; केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिरमौर में आयोजित एक सार्वजनिक रैली में हिस्सा लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी मौजूद रहे। हिमाचल प्रदेश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज सिरमौर में एक जनसभा को संबोधित करेंगे। बता दें कि हिमाचल प्रदेश में 12 नवंबर को होंगे विधानसभा चुनाव होगा और 8 दिसंबर को वोटों की गिनती होगी। अमूल ने सभी राज्यों में फुल क्रीम दूध और भैंस के दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर बढाया है। गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड के एमडी आरएस सोढ़ी ने कहा -अमूल ने गुजरात को छोड़कर सभी राज्यों में फुल क्रीम दूध और भैंस के दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन(ललन) सिंह के PM मोदी पर पिछड़ा वर्ग और अति पिछड़ा वर्ग वाले टिप्पणी पर BJP सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा - PM मोदी के बारे में ऐसी भाषा का प्रयोग करना शर्मनाक है, नीतीश कुमार जी से मैं पूछूंगा कि आपके राष्ट्रीय अध्यक्ष की यही शालीनता है? आज तक आजाद भारत के इतिहास में किसी ने PM के बारे में इस तरह की बात नहीं की। ये देश के गरीबों और पिछड़ों का अपमान है। तेलंगाना के टीआरएस के पूर्व सांसद डॉ बूरा नरसैय्या गौड़ ने पार्टी प्रमुख और तेलंगाना के सीएम केसी राव को लिखे पत्र में पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। बैठक में सीएसआईआर सोसायटी के सभी सदस्यों को आमंत्रित किया गया है। बैठक में केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमन, पीयूष गोयल और जितेंद्र सिंह मौजूद हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) सोसायटी की बैठक की अध्यक्षता की । लखनऊ में सीएम योगी ने 12वीं राज्य स्तरीय डाक टिकट प्रदर्शनी UPHILEX-2022 के मौके पर कहा- डाक टिकटों का संग्रह एक समय में काफी रुचि का क्षेत्र था। आज यहां 300 से ज्यादा फ्रेम्स लगे हैं। आजादी के अभी तक कौन-कौन से डाक टिकट और कवर जारी हुए हैं उन सबको देखने का अवसर आज मिला है। कानून मंत्रियों और कानून सचिवों के अखिल भारतीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा- युवाओं के लिए मातृभाषा में एकेडमिक सिस्टम भी बनाना होगा, कानून से जुड़े कोर्सेस मातृभाषा में हो,हमारे कानून सरल, सहज भाषा में लिखे जाएं, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण केसेस की डिजिटल लाइब्रेरी स्थानीय भाषा में हो,इसके लिए हमें काम करना होगा। कानून मंत्रियों और कानून सचिवों के अखिल भारतीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते पीएम मोदी ने कहा- आज जब देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है तब लोकहित को लेकर सरदार पटेल की प्रेरणा हमें सही दिशा में भी ले जाएगी और हमें लक्ष्य तक भी पहुंचाएगी। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कानून मंत्रियों और कानून सचिवों के अखिल भारतीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर भी बल दिया कि देश ने डेढ़ हज़ार से ज्यादा पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को रद्द कर दिया है इनमें से अनेक कानून तो गुलामी के समय से चले आ रहे थे। कानून मंत्रियों और कानून सचिवों के अखिल भारतीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- कानून बनाते हुए हमारा फोकस होना चाहिए कि गरीब से गरीब भी नए बनने वाले कानून को अच्छी तरह समझ पाएं। किसी भी नागरिक के लिए कानून की भाषा बाधा न बने, हर राज्य इसके लिए भी काम करे, इसके लिए हमें लॉजिस्टिक और इंफ्रास्ट्रक्चर का सपोर्ट भी चाहिए होगा। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कानून मंत्रियों और कानून सचिवों के अखिल भारतीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- देश के लोगों को सरकार का अभाव भी नहीं लगना चाहिए और देश के लोगों को सरकार का दबाव भी महसूस नहीं होना चाहिए। पीएम मोदी ने इस मौके पर आगे कहा, हमारे समाज की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि वो प्रगति के पथ पर बढ़ते हुए खुद में आंतरिक सुधार भी करता चलता है। हमारा समाज अप्रासंगिक हो चुके कायदे-कानूनों, गलत रिवाजों को हटाता भी चलता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कानून मंत्रियों और कानून सचिवों के अखिल भारतीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे हैं। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा -भारत के समाज की विकास यात्रा हजारों वर्षों की है। तमाम चुनौतियों के बावजूद भारतीय समाज ने निरंतर प्रगति की है। देश के लोगों को सरकार का अभाव भी नहीं लगना चाहिए और देश के लोगों को सरकार का दबाव भी महसूस नहीं होना चाहिए। JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन(ललन) सिंह ने कहा- 2014 में PM मोदी कह रहे थे वे अति पिछड़ा हैं। गुजरात में अति पिछड़ा नहीं पिछड़ा वर्ग है और ये पिछड़ा वर्ग में भी नहीं थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद इन्होंने अपने समाज को पिछड़ा वर्ग में शामिल कर लिया। ये तो डुप्लीकेट हैं। दुष्कर्म के दोषी डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को 40 दिन की पैरोल मिली। गुरमीत राम रहीम बरनावा में डेरा सच्चा सौदा आश्रम पहुंचे। दिल्ली में जर्मन दूतावास ने जलवायु परिवर्तन के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए साइकिलिंग 4 फ्यूचर कार्यक्रम का आयोजन किया। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में UPSSSC PET परीक्षा में प्रत्येक उम्मीदवार को मेटल डिटेक्टर से स्कैन करने के बाद परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने की अनुमति दी जा रही है। देश में कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी आई है। कोरोना के केस लगातार तीन दिन तक बढ़े, लेकिन शनिवार को मामलों में कमी दर्ज की गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि बीते 24 घंटे में कोरोना के कुल 2430 मामले सामने आए हैं। देश में अब कोरोना के एक्टिव मामले 26,618 हो गए हैं। जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले के बड़ियारा और कंबाथी गांव क्षेत्र के बीच बांदीपोरा-सोपोर सड़क पर IED का पता चला। मौके पर बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया है। एहतियात के तौर पर सड़क पर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। काशीपुर में यूपी पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प में जान गंवाने वाली महिला के पति गुरताज सिंह ने कहा- मेरी पत्नी सरकारी कर्मचारी थी। जो मेरे साथ हुआ किसी और के साथ ऐसा न हो। दोनों राज्यों में BJP की सरकार है। दोनों जगह पुलिस सरकार के अंदर है। मैं सरकार से CBI जांच की मांग करता हूं। मुरादाबाद पुलिस ने मुठभेड़ के बाद जफर नाम के एक अपराधी को गिरफ्तार किया है। उस पर एक लाख रुपये का इनाम था। मुरादाबाद के एसपी अखिलेश भदौरिया ने कहा- वह उत्तराखंड के उधम सिंह नगर के भरतपुर से भाग गया (जहां कुछ दिन पहले यूपी पुलिस उसे गिरफ्तार करने गई थी)। कर्नाटक में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पार्टी की भारत जोड़ो यात्रा के 38वें दिन की शुरुआत हलाकुंडी गांव से की। वहीं भारत जोड़ो यात्रा में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के साथ पार्टी अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मल्लिकार्जुन खड़गे और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शामिल हुए। कर्नाटक में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पार्टी की भारत जोड़ो यात्रा के 38वें दिन की शुरुआत हलाकुंडी गांव से की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कानून मंत्रियों और कानून सचिवों के अखिल भारतीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे। दो दिवसीय सम्मेलन की मेजबानी एकता नगर, गुजरात में कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा की जा रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, इस सम्मेलन का आयोजन गुजरात के कानून और न्याय मंत्रालय ने किया है।
नई दिल्ली,। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दिल्ली में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद सोसायटी की बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं। बैठक में सीएसआईआर सोसायटी के सभी सदस्यों को आमंत्रित किया गया है। बैठक में केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमन, पीयूष गोयल और जितेंद्र सिंह मौजूद हैं। सीएसआईआर वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत एक सोसायटी है और प्रधानमंत्री सोसायटी के अध्यक्ष हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कानून मंत्रियों और कानून सचिवों के अखिल भारतीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- देश के लोगों को सरकार का अभाव भी नहीं लगना चाहिए और देश के लोगों को सरकार का दबाव भी महसूस नहीं होना चाहिए। पीएम मोदी ने इस मौके पर आगे कहा, 'हमारे समाज की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि वो प्रगति के पथ पर बढ़ते हुए खुद में आंतरिक सुधार भी करता चलता है। हमारा समाज अप्रासंगिक हो चुके कायदे-कानूनों, गलत रिवाजों को हटाता भी चलता है। ' इसके अलावा, हरियाणा के गुरुग्राम के बिलासपुर इंडस्ट्रियल एरिया में ऑटो पार्ट्स बनाने वाली एक कंपनी में आग लग गई। मौके पर दमकल की गाड़ियां मौजूद हैं। Hindi Breaking News Today Updates; केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिरमौर में आयोजित एक सार्वजनिक रैली में हिस्सा लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी मौजूद रहे। हिमाचल प्रदेश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज सिरमौर में एक जनसभा को संबोधित करेंगे। बता दें कि हिमाचल प्रदेश में बारह नवंबर को होंगे विधानसभा चुनाव होगा और आठ दिसंबर को वोटों की गिनती होगी। अमूल ने सभी राज्यों में फुल क्रीम दूध और भैंस के दूध की कीमतों में दो रुपयापये प्रति लीटर बढाया है। गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड के एमडी आरएस सोढ़ी ने कहा -अमूल ने गुजरात को छोड़कर सभी राज्यों में फुल क्रीम दूध और भैंस के दूध की कीमतों में दो रुपयापये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह के PM मोदी पर पिछड़ा वर्ग और अति पिछड़ा वर्ग वाले टिप्पणी पर BJP सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा - PM मोदी के बारे में ऐसी भाषा का प्रयोग करना शर्मनाक है, नीतीश कुमार जी से मैं पूछूंगा कि आपके राष्ट्रीय अध्यक्ष की यही शालीनता है? आज तक आजाद भारत के इतिहास में किसी ने PM के बारे में इस तरह की बात नहीं की। ये देश के गरीबों और पिछड़ों का अपमान है। तेलंगाना के टीआरएस के पूर्व सांसद डॉ बूरा नरसैय्या गौड़ ने पार्टी प्रमुख और तेलंगाना के सीएम केसी राव को लिखे पत्र में पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। बैठक में सीएसआईआर सोसायटी के सभी सदस्यों को आमंत्रित किया गया है। बैठक में केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमन, पीयूष गोयल और जितेंद्र सिंह मौजूद हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद सोसायटी की बैठक की अध्यक्षता की । लखनऊ में सीएम योगी ने बारहवीं राज्य स्तरीय डाक टिकट प्रदर्शनी UPHILEX-दो हज़ार बाईस के मौके पर कहा- डाक टिकटों का संग्रह एक समय में काफी रुचि का क्षेत्र था। आज यहां तीन सौ से ज्यादा फ्रेम्स लगे हैं। आजादी के अभी तक कौन-कौन से डाक टिकट और कवर जारी हुए हैं उन सबको देखने का अवसर आज मिला है। कानून मंत्रियों और कानून सचिवों के अखिल भारतीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा- युवाओं के लिए मातृभाषा में एकेडमिक सिस्टम भी बनाना होगा, कानून से जुड़े कोर्सेस मातृभाषा में हो,हमारे कानून सरल, सहज भाषा में लिखे जाएं, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण केसेस की डिजिटल लाइब्रेरी स्थानीय भाषा में हो,इसके लिए हमें काम करना होगा। कानून मंत्रियों और कानून सचिवों के अखिल भारतीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते पीएम मोदी ने कहा- आज जब देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है तब लोकहित को लेकर सरदार पटेल की प्रेरणा हमें सही दिशा में भी ले जाएगी और हमें लक्ष्य तक भी पहुंचाएगी। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कानून मंत्रियों और कानून सचिवों के अखिल भारतीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर भी बल दिया कि देश ने डेढ़ हज़ार से ज्यादा पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को रद्द कर दिया है इनमें से अनेक कानून तो गुलामी के समय से चले आ रहे थे। कानून मंत्रियों और कानून सचिवों के अखिल भारतीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- कानून बनाते हुए हमारा फोकस होना चाहिए कि गरीब से गरीब भी नए बनने वाले कानून को अच्छी तरह समझ पाएं। किसी भी नागरिक के लिए कानून की भाषा बाधा न बने, हर राज्य इसके लिए भी काम करे, इसके लिए हमें लॉजिस्टिक और इंफ्रास्ट्रक्चर का सपोर्ट भी चाहिए होगा। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कानून मंत्रियों और कानून सचिवों के अखिल भारतीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- देश के लोगों को सरकार का अभाव भी नहीं लगना चाहिए और देश के लोगों को सरकार का दबाव भी महसूस नहीं होना चाहिए। पीएम मोदी ने इस मौके पर आगे कहा, हमारे समाज की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि वो प्रगति के पथ पर बढ़ते हुए खुद में आंतरिक सुधार भी करता चलता है। हमारा समाज अप्रासंगिक हो चुके कायदे-कानूनों, गलत रिवाजों को हटाता भी चलता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कानून मंत्रियों और कानून सचिवों के अखिल भारतीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे हैं। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा -भारत के समाज की विकास यात्रा हजारों वर्षों की है। तमाम चुनौतियों के बावजूद भारतीय समाज ने निरंतर प्रगति की है। देश के लोगों को सरकार का अभाव भी नहीं लगना चाहिए और देश के लोगों को सरकार का दबाव भी महसूस नहीं होना चाहिए। JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह ने कहा- दो हज़ार चौदह में PM मोदी कह रहे थे वे अति पिछड़ा हैं। गुजरात में अति पिछड़ा नहीं पिछड़ा वर्ग है और ये पिछड़ा वर्ग में भी नहीं थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद इन्होंने अपने समाज को पिछड़ा वर्ग में शामिल कर लिया। ये तो डुप्लीकेट हैं। दुष्कर्म के दोषी डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को चालीस दिन की पैरोल मिली। गुरमीत राम रहीम बरनावा में डेरा सच्चा सौदा आश्रम पहुंचे। दिल्ली में जर्मन दूतावास ने जलवायु परिवर्तन के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए साइकिलिंग चार फ्यूचर कार्यक्रम का आयोजन किया। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में UPSSSC PET परीक्षा में प्रत्येक उम्मीदवार को मेटल डिटेक्टर से स्कैन करने के बाद परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने की अनुमति दी जा रही है। देश में कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी आई है। कोरोना के केस लगातार तीन दिन तक बढ़े, लेकिन शनिवार को मामलों में कमी दर्ज की गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि बीते चौबीस घंटाटे में कोरोना के कुल दो हज़ार चार सौ तीस मामले सामने आए हैं। देश में अब कोरोना के एक्टिव मामले छब्बीस,छः सौ अट्ठारह हो गए हैं। जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले के बड़ियारा और कंबाथी गांव क्षेत्र के बीच बांदीपोरा-सोपोर सड़क पर IED का पता चला। मौके पर बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया है। एहतियात के तौर पर सड़क पर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। काशीपुर में यूपी पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प में जान गंवाने वाली महिला के पति गुरताज सिंह ने कहा- मेरी पत्नी सरकारी कर्मचारी थी। जो मेरे साथ हुआ किसी और के साथ ऐसा न हो। दोनों राज्यों में BJP की सरकार है। दोनों जगह पुलिस सरकार के अंदर है। मैं सरकार से CBI जांच की मांग करता हूं। मुरादाबाद पुलिस ने मुठभेड़ के बाद जफर नाम के एक अपराधी को गिरफ्तार किया है। उस पर एक लाख रुपये का इनाम था। मुरादाबाद के एसपी अखिलेश भदौरिया ने कहा- वह उत्तराखंड के उधम सिंह नगर के भरतपुर से भाग गया । कर्नाटक में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पार्टी की भारत जोड़ो यात्रा के अड़तीसवें दिन की शुरुआत हलाकुंडी गांव से की। वहीं भारत जोड़ो यात्रा में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के साथ पार्टी अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मल्लिकार्जुन खड़गे और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शामिल हुए। कर्नाटक में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पार्टी की भारत जोड़ो यात्रा के अड़तीसवें दिन की शुरुआत हलाकुंडी गांव से की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कानून मंत्रियों और कानून सचिवों के अखिल भारतीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे। दो दिवसीय सम्मेलन की मेजबानी एकता नगर, गुजरात में कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा की जा रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, इस सम्मेलन का आयोजन गुजरात के कानून और न्याय मंत्रालय ने किया है।
एक प्रतिलेख एक कानून या एक दस्तावेज है? क्या "अपने पिछले पैरों पर खड़े हो" है? एक बतख एक प्रकार का व्यवहार व्यक्त करने वाला एक वस्तु या शब्द है? अंतर्राष्ट्रीय रेड बुकः पशु अंतरराष्ट्रीय रेड बुक कौन लेता है? लेनिन लेनिन क्यों है, और स्टालिन स्टालिन है? भाषा का कार्य इसका क्या मतलब है? "लक्ष्यों का पेड़"
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Delhi Flood Update: Yamuna का बढ़ा जलस्तर, दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला- भारी वाहनों की एंट्री पर रोकDelhi Flood Update: Flood situation has arisen due to rise in the water level of Yamuna in Delhi. Water has filled in places. In such a situation, taking a big decision, the Delhi government has banned the entry of heavy vehicles. Vehicles carrying essential goods from Singhu, Loni border were banned. Delhi Flood Update: दिल्ली में यमुना का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है. जगह- जगह पानी भर चुका है. ऐसे में दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए भारी वाहनों की एंट्री पर रोक लगा दी है. सिंघु, लोनी बॉर्डर से जरुरी सामान लाने वाले वाहनों पर रोक लगा दी गई. Lucknow News : CM Yogi Adityanath ने बांटे नियुक्ति पत्र, बोले "पूरी पारदर्शिता से हो रही भर्ती" Bihar Lathicharge News : बिहार में बीजेपी विधायकों पर लाठीचार्ज, दौड़ा-दौड़ाकर पीटा । Bihar BJP Protest Live: Patna बन गया जंग का मैदान! Bihar Police और BJP कार्यकर्ताओं में भयंकर झड़प !
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देश के ज्यादातर राज्यों में भीषण गर्मी का कहर जारी है। देश के कई राज्यों को इन दिनों भीषण गर्मी की मार झेलने पड़ रही है। इस बीच मौसम विभाग ने 20 से 22 मई के बीच कई राज्यों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग की मानें तो दक्षिण उत्तर प्रदेश के इलाकों में 20 मई से 22 मई तक हीटवेव की स्थिति रहेगी। इसके अलावा पश्चिमी राजस्थान, मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में 20 और 21 मई को लोगों को हीटवेव की मार झेलने पड़ सकती है। साथ ही उत्तरी छत्तीसगढ़ और झारखंड में 21 से 23 मई के बीच हीटवेव की स्थिति देखने को मिलेगी। वहीं, दिल्ली-NCR में भी लोगों को भीषण गर्मी की मार झेलने पड़ रही है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिन गर्मी अधिक रहेगी। इस वजह से तापमान 42 डिग्री सेल्सियस पहुंच सकती है। इसके बाद अगले सप्ताह एक बार फिर वर्षा हो सकती है। मौसम विभाग ने कहा कि शनिवार को आकाश साफ रहेगा और तापमान 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। रविवार से एक बार फिर पश्चिम विक्षोभ सक्रिय होने से आकाश में बादल छा सकते हैं। दक्षिण-पश्चिमी मानसून ने शुक्रवार को दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी, निकोबार द्वीपसमूह और दक्षिणी अंडमान सागर में बढ़त ले ली है। इससे देश में चार महीने के बरसात के मौसम के लिए माहौल बन गया है। भारतीय मौसम विभाग ने कहा कि दक्षिण-पश्चिमी मानसून ने दक्षिणी-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों, निकोबार द्वीपसमूह और दक्षिणी अंडमान सागर पर गरज-बरस दिखाई है। अगले 3-4 दिनों में इन क्षेत्रों में दक्षिणी-पश्चिमी मानसून के बढ़ने की उम्मीद है। अलनीनो के मौसम पैटर्न की आपात स्थिति को देखते हुए इस साल मानसून की बारिश को लेकर चिंता जताई गई है। ध्यान रहे कि इस हफ्ते की शुरुआत में मौसम कार्यालय ने कहा था कि इस बार मानसून में कुछ देरी हो सकती है। क्योंकि केरल में मानसून के आने में देरी के आसार हैं जबकि आमतौर पर मानसून एक जून को केरल के तटों को छू लेता है। अल नीनो में दक्षिण अमेरिका के नजदीक प्रशांत महासागर के जल की सतह बेहद गर्म हो जाती है और इससे आसपास का वातावरण प्रभावित होता है।
देश के ज्यादातर राज्यों में भीषण गर्मी का कहर जारी है। देश के कई राज्यों को इन दिनों भीषण गर्मी की मार झेलने पड़ रही है। इस बीच मौसम विभाग ने बीस से बाईस मई के बीच कई राज्यों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग की मानें तो दक्षिण उत्तर प्रदेश के इलाकों में बीस मई से बाईस मई तक हीटवेव की स्थिति रहेगी। इसके अलावा पश्चिमी राजस्थान, मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बीस और इक्कीस मई को लोगों को हीटवेव की मार झेलने पड़ सकती है। साथ ही उत्तरी छत्तीसगढ़ और झारखंड में इक्कीस से तेईस मई के बीच हीटवेव की स्थिति देखने को मिलेगी। वहीं, दिल्ली-NCR में भी लोगों को भीषण गर्मी की मार झेलने पड़ रही है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिन गर्मी अधिक रहेगी। इस वजह से तापमान बयालीस डिग्री सेल्सियस पहुंच सकती है। इसके बाद अगले सप्ताह एक बार फिर वर्षा हो सकती है। मौसम विभाग ने कहा कि शनिवार को आकाश साफ रहेगा और तापमान इकतालीस डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। रविवार से एक बार फिर पश्चिम विक्षोभ सक्रिय होने से आकाश में बादल छा सकते हैं। दक्षिण-पश्चिमी मानसून ने शुक्रवार को दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी, निकोबार द्वीपसमूह और दक्षिणी अंडमान सागर में बढ़त ले ली है। इससे देश में चार महीने के बरसात के मौसम के लिए माहौल बन गया है। भारतीय मौसम विभाग ने कहा कि दक्षिण-पश्चिमी मानसून ने दक्षिणी-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों, निकोबार द्वीपसमूह और दक्षिणी अंडमान सागर पर गरज-बरस दिखाई है। अगले तीन-चार दिनों में इन क्षेत्रों में दक्षिणी-पश्चिमी मानसून के बढ़ने की उम्मीद है। अलनीनो के मौसम पैटर्न की आपात स्थिति को देखते हुए इस साल मानसून की बारिश को लेकर चिंता जताई गई है। ध्यान रहे कि इस हफ्ते की शुरुआत में मौसम कार्यालय ने कहा था कि इस बार मानसून में कुछ देरी हो सकती है। क्योंकि केरल में मानसून के आने में देरी के आसार हैं जबकि आमतौर पर मानसून एक जून को केरल के तटों को छू लेता है। अल नीनो में दक्षिण अमेरिका के नजदीक प्रशांत महासागर के जल की सतह बेहद गर्म हो जाती है और इससे आसपास का वातावरण प्रभावित होता है।
१ दिसंबर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का ३३५वॉ (लीप वर्ष मे ३३६वॉ) दिन है। साल में अभी और ३० दिन बाकी है। . 22 संबंधोंः एशियाई खेल, तमिल नाडु के राज्यपालों की सूची, दिसम्बर, बांग्लादेश के राष्ट्रपति, बांग्लादेश के राष्ट्रपतिगण की सूची, भारत में रेल दुर्घटना, भारत के राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की स्थापना तिथि अनुसार सूची, भारतीय पुनर्नामकरण विवाद, महत्त्वपूर्ण दिवस, मेरी तुसाद, यूनानी विकिपीडिया, राजभवन (नागालैण्ड), रोज़ा पार्क्स, सुचेता कृपलानी, हिन्दी विकिपीडिया, ज़ख्म (1989 फ़िल्म), जॉर्ज एवरेस्ट, वुडी एलन, आइसलैण्ड, इस्क्रा, १४५५, २००६ एशियाई खेल। एशियाई खेलों को एशियाड के नाम से भी जाना जाता है। यह प्रत्येक चार वर्ष बाद आयोजित होने वाली बहु-खेल प्रतियोगिता है जिसमें केवल एशिया के विभिन्न देशों के खिलाडी भाग लेते हैं। इन खेलों का नियामन एशियाई ओलम्पिक परिषद द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय ओलम्पिक परिषद के पर्यवेक्षण में किया जाता है। प्रत्येक प्रतियोगिता में प्रथम स्थान के लिए स्वर्ण, दूसरे के लिए रजत और तीसरे के लिए कांस्य पदक दिए जाते हैं, जिस परम्परा का शुभारम्भ १९५१ में हुआ था। प्रथम एशियाई खेलों का आयोजन दिल्ली, भारत में किया गया था, जिसने १९८२ में पुनः इन खेलों की मेज़बानी की। १५वें एशियाई खेल १ दिसंबर से १५ दिसंबर, २००६ के बीच दोहा, कतर में आयोजित हुए थे। सोलहवें एशियाई खेलों का आयिजन १२ नवंबर से २७ नवंबर, २०१० के बीच किया गया, जिनकी मेज़बानी ग्वांगझोउ, चीन ने की। १७वें एशियाई खेलों का आयोजन २०१४ में दक्षिण कोरिया के इंचेयान में होगा। . यह सूची सन् १९४६ से भारत के तमिल नाडु राज्य के राज्यपालों की है। तमिल नाडु के राज्यपाल का आधिकारिक आवास राजभवन राज्य की राजधानी चेन्नई में है। . दिसंबर ग्रेगोरियन कैलेंडर के हिसाब से वर्ष का बारहवां और आखिरी महीना है, साथ ही यह उन सात ग्रेगोरी महीनो में से एक है जिनमे 31 दिन होते हैं। लैटिन में, दिसेम (decem) का मतलब "दस" होता है। दिसम्बर भी रोमन कैलेंडर का दसवां महीना था जब तक कि मासविहीन सर्दियों की अवधि को जनवरी और फरवरी के बीच विभाजित नहीं कर दिया गया। दिसंबर से संबंधित फूल हॉली या नारसीसस है। दिसंबर के रत्न फीरोज़ा, लापीस लाजुली, जि़रकॉन, पुखराज (नीला), या टैन्जानाईट रहे हैं। दिसंबर माह में उत्तरी गोलार्द्ध में दिन के (सूर्य की रोशनी का समय) सबसे कम और दक्षिणी गोलार्द्ध में सबसे अधिक घंटे होते हैं। दिसंबर और सितम्बर सप्ताह के एक ही दिन से शुरू होते हैं। . बांग्लादेश के राष्ट्रपति का पद गणप्रजातंत्री बांग्लादेश का सर्वोच्च संवैधानिक पद है। वर्तमान नियमों के अनुसार, राष्ट्रपति को बांग्लादेश की राष्ट्रीय संसद द्वारा, खुले चुनाव प्रक्रिया द्वारा निर्वाचित होते हैं। राष्ट्रपति, बांग्लादेश की कार्यपालिका न्यायपालिका एवं विधानपालिका के सर्व शाखाओं के, पारंपरिक, प्रमुख एवं बांग्लादेश के सारे सशस्त्र बलों के सर्वादिनायक हैं। इस पद पर नियुक्त प्रत्येक राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष होता है। संसदीय बहुमत द्वारा निर्वाचित होने के कारण इस पद पर साधारण तौर पर शासक दल के प्रतिनिधि ही चुने जाते हैं। हालाँकि, एक बार निर्वाचित हो चुके पदाधिकारी चुनाव में पुनः खड़े होने के लिए मुक्त होते हैं। वर्ष 1991 में संसदीय गणतंत्र की शुरुआत से पूर्व, राष्ट्रपति का चुनाव जनता के मतों द्वारा होता था। संसदीय प्रणाली के पुनर्स्थापन के पश्चात से यह पद मूलतः एक पारंपरिक पद रह गया है, जिसकी, विशेषतः कोई सार्थक कार्यकारी शक्तियाँ नहीं हैं। प्रत्येक संसदीय साधारण चुनाव के पश्चात संसद की प्रथम अधिवेशन में राष्ट्रपति अपना उद्घाधाटनी अभिभाषण देते हैं। प्रत्येक वर्ष के प्रथम संसदीय अधिवेशन में भी राष्ट्रपति अपना उद्घाटनी अभिभाषण देते हैं। इसके अतिरिक्त, संसद में पारित हुई किसी भी अधिनियम को कानून बनने के लिए राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त करना आवश्यक होता है। इसके अलावा राष्ट्रपति अपने विवेक पर क्षमादान भी दे सकते हैं। सन 1956 में संसद में नए कानून पारित किए, जिनके द्वारा राष्ट्रपति की, संसद के भंग होने के बाद की कार्यकारी शक्तियों को, संवैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत बढ़ाया गया था। बांग्लादेश के राष्ट्रपति आधिकारिक तौर पर ढाका के बंगभवन में निवास करते हैं। कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी वह अपने पद पर तब तक विराजमान रहते हैं जब तक उनका उत्तराधिकारी पद पर स्थापित नहीं हो जाता। . बांग्लादेश के राष्ट्रपतियों की सूची . भारत का रेल तन्त्र दुनिया के सबसे बड़े तन्त्रों में से एक हैं। भारतीय रेलगाड़ियों में हर दिन सवा करोड़ से अधिक लोग यात्रा करते हैं। एक अनुमान के अनुसार देश में प्रति वर्ष औसतन ३०० छोटी-बड़ी रेल दुर्घटनाएँ होती हैं। भारत में वर्ष २००० से बाद घटित हुई रेल दुर्घटनाओं का घटनाक्रम इस प्रकार हैः- . भारत के राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की स्थापना तिथि अनुसार सूची में भारत के राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश अपनी स्थापना तिथि के साथ दिए गए हैं। . भारत के शहरों का पुनर्नामकरण, स्न 1947 में, अंग्रेज़ोंके भारत छोड़ कर जाने के बाद आरंभ हुआ था, जो आज तक जारी है। कई पुनर्नामकरणों में राजनैतिक विवाद भी हुए हैं। सभी प्रस्ताव लागू भी नहीं हुए हैं। प्रत्येक शहर पुनर्नामकरण को केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित होना चाहिये। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद पुनर्नामांकित हुए, मुख्य शहरों में हैंः तिरुवनंतपुरम (पूर्व त्रिवेंद्रम), मुंबई (पूर्व बंबई, या बॉम्बे), चेन्नई (पूर्व मद्रास), कोलकाता (पूर्व कलकत्ता), पुणे (पूर्व पूना) एवं बेंगलुरु (पूर्व बंगलौर)। . कोई विवरण नहीं। thumb मेरी तुसाद (१ दिसंबर, १७६१ - १६ अप्रैल, १८५०) एक फ्रांसीसी कलाकार थी। वे उनके द्वारा बनाए गए मोम के आदमकद पुतलों के लिए विख्यात हैं। उन्होने लन्दन में मैडम तुसाद संग्राहलय की स्थापना की। . यूनानी विकिपीडिया विकिपीडिया का यूनानी भाषा का संकरण है। यह १ दिसंबर, २००२ में आरंभ किया गया था और इस पर लेखों की कुल संख्या २५ मई, २००९ तक ४२,०००+ है। यह विकिपीडिया का चौवालीसवां सबसे बड़ा संकरण है।. राजभवन (नागालैण्ड) राजभवन कोहिमा भारत के नागालैण्ड राज्य के राज्यपाल का आधिकारिक आवास है। यह राज्य की राजधानी कोहिमा में स्थित है और निखिल कुमार यहाँ के वर्तमान राज्यपाल हैं जिन्होंने १५ अक्टूबर २००९ को राज्यपाल का पदभार ग्रहण किया था। . रोज़ा लुईज़ मक्कॉली पार्क्स (४ फ़रवरी १९१३ - २४ अक्टूबर २००५) अफ़्रीकी-अमेरिकी नागरिक अधिकार कार्यकर्त्ता थीं जिन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका की कांग्रेस ने "द फ़र्स्ट लेडी ऑफ़ सिविल राइट्स" (नागरिक अधिकारों की पहली औरत) और "द मदर ऑफ़ द फ्रीडम मूवमंट" (आज़ादी लहर की माँ) नामों से पुकारा। रोजा लुईज़ मक्कॉली का जन्म टस्कागी, अलाबामा पर 4 फ़रबरी 1913 को हुआ था। 1 दिसंबर 1955 को मोंटगोमेरी, अलाबामा में जब बस में काम से घर वापस आ रही थी और अपनी सीट पर बस में बैठी हुई थी। एक गोरे ने उसको सीट छोड़ने को कहा। रोज़ा अपनी सीट पर बैठी रही। उसको पुलिस ने पकड़ लिया परन्तु अगले दिन उसको चढ़ा लिया गया। अदालत ने उसपर 5 दिसंबर को जुर्माना कर दिया। इसी दिन को अफ़्रीकी-अमरीकी समुदाय ने मिलकर बसों का बॉयकॉट किया। . सुचेता कृपलानी (जन्म सुचेता मजूमदार) (२५ जून,१९०८ - १ दिसम्बर, १९७४) एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनीतिज'ज थीं। ये उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री बनीं और भारत की प्रथम महिला मुख्य मंत्री थीं। स्वतंत्रता आंदोलन में श्रीमती सुचेता कृपलानी के योगदान को भी हमेशा याद किया जाएगा। १९०८ में जन्मी सुचेता जी की शिक्षा लाहौर और दिल्ली में हुई थी। आजादी के आंदोलन में भाग लेने के लिए उन्हें जेल की सजा हुई। १९४६ में वह संविधान सभा की सदस्य चुनी गई। १९५८ से १९६० तक वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महासचिव थी। १९६३ से १९६७ तक वह उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं। 1 दिसम्बर १९७४ को उनका निधन हो गया। अपने शोक संदेश में श्रीमती इंदिरा गांधी ने कहा कि "सुचेता जी ऐसे दुर्लभ साहस और चरित्र की महिला थीं, जिनसे भारतीय महिलाओं को सम्मान मिलता है।" सुचेता कृपलानी देश की पहली महिला मुख्य मंत्री थीं। ये बंटवारे की त्रासदी में महात्मा गांधी के बेहद करीब रहीं। सुचेता कृपलानी उन चंद महिलाओं में शामिल हैं, जिन्होंने बापू के करीब रहकर देश की आजादी की नींव रखी। वह नोवाखली यात्रा में बापू के साथ थीं। वर्ष 1963 में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनने से पहले वह लगातार दो बार लोकसभा के लिए चुनी गई। सुचेता दिल की कोमल तो थीं, लेकिन प्रशासनिक फैसले लेते समय वह दिल की नहीं, दिमाग की सुनती थीं। उनके मुख्यमंत्रित्व काल में राज्य के कर्मचारियों ने लगातार 62 दिनों तक हड़ताल जारी रखी, लेकिन वह कर्मचारी नेताओं से सुलह को तभी तैयार हुई, जब उनके रुख में नरमी आई। जबकि सुचेता के पति आचार्य कृपलानी खुद समाजवादी थे। . हिन्दी विकिपीडिया, विकिपीडिया का हिन्दी भाषा का संस्करण है, जिसका स्वामित्व विकिमीडिया संस्थापन के पास है। हिन्दी संस्करण जुलाई २००३ में आरम्भ किया गया था और १ दिसम्बर २०१६ तक इस पर लेख और लगभग पंजीकृत सदस्य हैं। ३० अगस्त २०११ के दिन यह एक लाख लेखों का आँकड़ा पार करने वाला प्रथम भारतीय भाषा विकिपीडिया बना। यह लेखों की संख्या, सक्रिय सदस्यों, प्रयोक्ताओं की संख्या, सम्पादनों इत्यादि के आधार पर भारतीय भाषाओं में उपलब्ध विकिपीडिया का सबसे बड़ा संस्करण है और सभी संस्करणों में पचपनवाँ। और इसे मुख्यतः हिन्दी भाषी लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिया बनाया गया था। चूँकि हिन्दी विकिपीडिया इण्डिक स्क्रिप्ट (देवनागरी) का प्रयोग करता है इसलिए इसमें जटिल पाठ प्रतिपादन सहायक की आवश्यकता पड़ती है। विकिपीडिया पर ध्वन्यात्मक रोमन वर्णमाला परिवर्तक उपलब्ध है, इसलिए बिना किसी विशेष हिन्दी टाइपिंग सॉफ्टवेर डाउनलोड किये रोमन कुंजीपटल का उपयोग देवनागरी में टंकण करने के लिए किया जा सकता है। . ज़ख्म (1989 फ़िल्म) ज़ख्म 1989 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। . कर्नल सर जॉर्ज एवरेस्ट (४ जुलाई, १७९० - १ दिसंबर, १८६६) एक सर्वेक्षणकर्ता, भूगोलज्ञ और १८३०-१८४३ तक भारत के महा सर्वेयर रहे थे। . वुडी एलन १ दिसंबर १९३५ को ब्रुकलीन में जन्में वुडी एलन लेखक, निर्देशक, हास्य अभिनेता तथा संगीतकार के रूप में सुपरिचित हैं। एनी हाल तथा हाना एंड हर सिस्टर्स नामक इनकी दो फिल्में मौलिक पटकथा के लिए अकादमी पुरस्कार से पुरस्कृत हुई हैं। एनी हाल में श्रेष्ट निर्देशन के लिए १९७७ में इन्हे अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ। वुडी एलेन (एलेन स्टूवर्ट कोनिगसबेर्ग) एक अमेरिकी पटकथा लेखक, निर्देशक, अभिनेता, हास्य अभिनेता, लेखक, नाटककार और संगीतकार है। उनका व्यावसायिक जीवन पचास से अधिक वर्षों तक फैला है। १९५० दशक में वे हास्य लेखन किया करते थे। उन्होनें कई चुटकुले, दूरदर्शन के लिए लिपियान और कई हास्य लघुकथाएँ के किताबें प्रकाशित की थी। १९६० दशक के शुरुआत में एलन परंपरागत चुटकुलों पर बल डालने के बजाए एकालाप पर बल डाले और उन्होनें एक स्टैंड अप हास्य के रूप में प्रदर्शन शुरू कर दिया था। एक हास्य के रूप में उन्होनें अपने आप को एक असुरक्षित, बौद्धिक और चिड़चिड़ा व्यक्तित्व प्रदर्शित किया और उसका विकास किया, परंतु उन्होनें यह भी कहा कि वह उनके वास्तविक जीवन व्यक्तित्व से काफी अलग है। 2004 में, कॉमेडी सेंट्रल के 100 महानतम स्टैंड अप की सूची मे एलन को चौथे स्थान पर रखा गया और ब्रिटेन के एक सर्वेक्षण में उन्हे तीसरे सबसे बड़े हास्य अभिनेता के रूप में स्थान दिया गया। मध्य 1960 में एलन ने लेखन और चलचित्र का निर्देशन करना शुरू कर दिया था। उन्होनें पहले तमाशा हास्य में विशेषज्ञता प्राप्त की फिर 1970 के दशक के दौरान यूरोपीय कला सिनेमा से प्रभावित उन्होने कई नाटकीय विषयवास्तु में योगदान दिया। वह अक्सर चलचित्र निर्माताओं की नई हॉलीवुड लहर (१९६०-१९७०) के हिस्से के रूप में पहचाने जाते है। वे अक्सर स्वयं के चलचित्रों में खुद अभिनय करते थे वो भी अपने स्टँड उप हास्य के ही व्यक्तिव में। चालीस से अधिक फिल्मों में कुछ प्रासिद फिल्में है- आनी हॉल (१९७७), मनहट्टान (१९७९), हॅने आंड हेर सिस्टर्स (१९८६) और मिडनाइट इन पॅरिस (२०११)। आलोचक रोजर एबर्ट ने एलन को सिनेमा का एक खजाना बुलाया है। एलेन 24 बार नामांकित किया और चार अकादमी पुरस्कार जीते हैं, सर्वश्रेष्ठ मूल पटकथा के लिए तीन और सर्वश्रेष्ठ निर्देशक (एनी हॉल) के लिए एक. आइसलैण्ड या आइसलैण्ड गणराज्य (आइस्लैंडिकः Ísland या Lýðveldið Ísland) उत्तर पश्चिमी यूरोप में उत्तरी अटलांटिक में ग्रीनलैंड, फ़रो द्वीप समूह और नार्वे के मध्य बसा एक द्विपीय देश है। आइसलैण्ड का क्षेत्रफल लगभग 1,03,000 किमी2 है और अनुमानित जनसंख्या 3,13,000 (2009) है। यह यूरोप में ब्रिटेन के बाद दूसरा और विश्व में अठारहवा सबसे बड़ा द्वीप है। यहाँ की राजधानी है रेक्जाविक और देश की आधी जनसंख्या यहीं निवास करती है। अवस्थापन साक्ष्यों से यह ज्ञात होता है कि आइसलैण्ड में अवस्थापन 874 ईस्वी में आरंभ हुआ था जब इंगोल्फ़र आर्नार्सन लोग यहाँ पर पहुँचे, यद्यपि इससे पहले भी कई लोग इस देश में अस्थाई रूप से रुके थे। आने वाले कई दशकों और शताब्दियों में अवस्थापन काल के दौरान अन्य बहुत से लोग आइसलैण्ड में आए। 1262 में आइसलैण्ड, नार्वे के ओल्ड कोवेनेन्ट के अधीन आया और 1918 में संप्रभुता मिलने तक नार्वे और डेनमार्क द्वारा शासित रहा। डेनमार्क और आइसलैण्ड के बीच हुई एक संधि के अनुसार आइसलैण्ड की विदेश नीति का नियामन डेनमार्क के द्वारा किया जाना तय हुआ और दोनों देशों का राजा एक ही था जब तक की 1944 में आइसलैण्ड गणराज्य की स्थापना नहीं हो गई। इस देश को विभिन्न नामों से पुकारा गया, विशेषरूप से कवियों द्वारा। बीसवीं सदी के उत्तरार्ध में आइसलैण्डवासियों ने अपने देश के विकास पर पुरजोर ध्यान दिया और देश के आधारभूत ढाँचे को सुधारने और अन्य कई कल्याणकारी कामों पर ध्यान दिया जिसके परिणामस्वरूप आइसलैण्ड, संयुक्त राष्ट्र के जीवन गुणवत्ता सूचकांक के आधार पर विश्व का सर्वाधिक रहने योग्य देश है। आइसलैण्ड, सयुंक्त राष्ट्र, नाटो, एफ़्टा, ईईए समेत विश्व की बहुत सी संस्थाओं का सदस्य है। . इस्क्रा का प्रथम अंक इस्क्रा (रूसीः Искра), यानि चिंगारी, प्रवासी रूसी समाजवादियों द्वारा स्थापित एक राजनीतिक समाचारपत्र था, जिसे उन्होने रूसी सामाजिक जनवादी मजदूर पार्टी (रशियन सोशल डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी) के आधिकारिक मुखपत्र के रूप में स्थापित किया था। इसका पहला संस्करण स्टटगार्ट में 1 दिसम्बर 1900 को प्रकाशित किया गया था। इसके अन्य संस्करण म्यूनिख, लंदन और जिनेवा में प्रकाशित किए गए थे। इसका शुरूआती प्रबंधन व्लादिमीर लेनिन द्वारा किया गया था। 1903 में, रूसी सामाजिक जनवादी मजदूर पार्टी के विभाजन के बाद, लेनिन ने इससे खुद को अलग कर लिया क्योंकि उनके इस प्रस्ताव कि, इसके संपादकीय बोर्ड मे सिर्फ तीन सदस्य होने चाहिए एक वो खुद, दूसरा मार्तोव तथा तीसरा प्लेखानोव, का भारी विरोध किया गया था। समाचारपत्र को मेंशेविक द्वारा जब्त कर लिया गया और प्लेखानोव के नियंत्रण में 1905 तक प्रकाशित किया गया। अखबार का औसत प्रसार 8000 प्रतियों का था। इस्क्रा का आदर्श वाक्य था, "искры Из пламя возгорится" यानि "एक चिंगारी भड़क कर आग बनती है" . 1455 ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। . पन्द्रहवें एशियाई खेल १ दिसंबर से १५ दिसंबर, २००६ के बीच क़तर की राजधानी दोहा में आयोजित किए गए थे। इन खेलों का आयोजन करने वाला दोहा इस क्षेत्र का पहला और पूरे पश्चिम एशिया में दूसरा महानगर था। इससे पहले तेहरान में १९७४ में एशियाई खेलों का आयोजन किया गया था। यही वे एशियाई खेल भी थे, जिसमें एशियाई ओलम्पिक परिषद के सभी ४५ सदस्य राष्ट्रों ने भागीदारी की। युरोस्पोर्ट द्वारा इन खेलों का पहली बार यूरोप में प्रसारण किया गया। इस खेलों में दक्षिण कोरियाई घुड़सवार किम ह्युंग की मृत्यु की अप्रिय घटना भी हुई जब वे एक घुड़सवारी की प्रतिस्पर्धा के दौरान ही मारे गए। .
एक दिसंबर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का तीन सौ पैंतीसवॉ दिन है। साल में अभी और तीस दिन बाकी है। . बाईस संबंधोंः एशियाई खेल, तमिल नाडु के राज्यपालों की सूची, दिसम्बर, बांग्लादेश के राष्ट्रपति, बांग्लादेश के राष्ट्रपतिगण की सूची, भारत में रेल दुर्घटना, भारत के राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की स्थापना तिथि अनुसार सूची, भारतीय पुनर्नामकरण विवाद, महत्त्वपूर्ण दिवस, मेरी तुसाद, यूनानी विकिपीडिया, राजभवन , रोज़ा पार्क्स, सुचेता कृपलानी, हिन्दी विकिपीडिया, ज़ख्म , जॉर्ज एवरेस्ट, वुडी एलन, आइसलैण्ड, इस्क्रा, एक हज़ार चार सौ पचपन, दो हज़ार छः एशियाई खेल। एशियाई खेलों को एशियाड के नाम से भी जाना जाता है। यह प्रत्येक चार वर्ष बाद आयोजित होने वाली बहु-खेल प्रतियोगिता है जिसमें केवल एशिया के विभिन्न देशों के खिलाडी भाग लेते हैं। इन खेलों का नियामन एशियाई ओलम्पिक परिषद द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय ओलम्पिक परिषद के पर्यवेक्षण में किया जाता है। प्रत्येक प्रतियोगिता में प्रथम स्थान के लिए स्वर्ण, दूसरे के लिए रजत और तीसरे के लिए कांस्य पदक दिए जाते हैं, जिस परम्परा का शुभारम्भ एक हज़ार नौ सौ इक्यावन में हुआ था। प्रथम एशियाई खेलों का आयोजन दिल्ली, भारत में किया गया था, जिसने एक हज़ार नौ सौ बयासी में पुनः इन खेलों की मेज़बानी की। पंद्रहवें एशियाई खेल एक दिसंबर से पंद्रह दिसंबर, दो हज़ार छः के बीच दोहा, कतर में आयोजित हुए थे। सोलहवें एशियाई खेलों का आयिजन बारह नवंबर से सत्ताईस नवंबर, दो हज़ार दस के बीच किया गया, जिनकी मेज़बानी ग्वांगझोउ, चीन ने की। सत्रहवें एशियाई खेलों का आयोजन दो हज़ार चौदह में दक्षिण कोरिया के इंचेयान में होगा। . यह सूची सन् एक हज़ार नौ सौ छियालीस से भारत के तमिल नाडु राज्य के राज्यपालों की है। तमिल नाडु के राज्यपाल का आधिकारिक आवास राजभवन राज्य की राजधानी चेन्नई में है। . दिसंबर ग्रेगोरियन कैलेंडर के हिसाब से वर्ष का बारहवां और आखिरी महीना है, साथ ही यह उन सात ग्रेगोरी महीनो में से एक है जिनमे इकतीस दिन होते हैं। लैटिन में, दिसेम का मतलब "दस" होता है। दिसम्बर भी रोमन कैलेंडर का दसवां महीना था जब तक कि मासविहीन सर्दियों की अवधि को जनवरी और फरवरी के बीच विभाजित नहीं कर दिया गया। दिसंबर से संबंधित फूल हॉली या नारसीसस है। दिसंबर के रत्न फीरोज़ा, लापीस लाजुली, जि़रकॉन, पुखराज , या टैन्जानाईट रहे हैं। दिसंबर माह में उत्तरी गोलार्द्ध में दिन के सबसे कम और दक्षिणी गोलार्द्ध में सबसे अधिक घंटे होते हैं। दिसंबर और सितम्बर सप्ताह के एक ही दिन से शुरू होते हैं। . बांग्लादेश के राष्ट्रपति का पद गणप्रजातंत्री बांग्लादेश का सर्वोच्च संवैधानिक पद है। वर्तमान नियमों के अनुसार, राष्ट्रपति को बांग्लादेश की राष्ट्रीय संसद द्वारा, खुले चुनाव प्रक्रिया द्वारा निर्वाचित होते हैं। राष्ट्रपति, बांग्लादेश की कार्यपालिका न्यायपालिका एवं विधानपालिका के सर्व शाखाओं के, पारंपरिक, प्रमुख एवं बांग्लादेश के सारे सशस्त्र बलों के सर्वादिनायक हैं। इस पद पर नियुक्त प्रत्येक राष्ट्रपति का कार्यकाल पाँच वर्ष होता है। संसदीय बहुमत द्वारा निर्वाचित होने के कारण इस पद पर साधारण तौर पर शासक दल के प्रतिनिधि ही चुने जाते हैं। हालाँकि, एक बार निर्वाचित हो चुके पदाधिकारी चुनाव में पुनः खड़े होने के लिए मुक्त होते हैं। वर्ष एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में संसदीय गणतंत्र की शुरुआत से पूर्व, राष्ट्रपति का चुनाव जनता के मतों द्वारा होता था। संसदीय प्रणाली के पुनर्स्थापन के पश्चात से यह पद मूलतः एक पारंपरिक पद रह गया है, जिसकी, विशेषतः कोई सार्थक कार्यकारी शक्तियाँ नहीं हैं। प्रत्येक संसदीय साधारण चुनाव के पश्चात संसद की प्रथम अधिवेशन में राष्ट्रपति अपना उद्घाधाटनी अभिभाषण देते हैं। प्रत्येक वर्ष के प्रथम संसदीय अधिवेशन में भी राष्ट्रपति अपना उद्घाटनी अभिभाषण देते हैं। इसके अतिरिक्त, संसद में पारित हुई किसी भी अधिनियम को कानून बनने के लिए राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त करना आवश्यक होता है। इसके अलावा राष्ट्रपति अपने विवेक पर क्षमादान भी दे सकते हैं। सन एक हज़ार नौ सौ छप्पन में संसद में नए कानून पारित किए, जिनके द्वारा राष्ट्रपति की, संसद के भंग होने के बाद की कार्यकारी शक्तियों को, संवैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत बढ़ाया गया था। बांग्लादेश के राष्ट्रपति आधिकारिक तौर पर ढाका के बंगभवन में निवास करते हैं। कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी वह अपने पद पर तब तक विराजमान रहते हैं जब तक उनका उत्तराधिकारी पद पर स्थापित नहीं हो जाता। . बांग्लादेश के राष्ट्रपतियों की सूची . भारत का रेल तन्त्र दुनिया के सबसे बड़े तन्त्रों में से एक हैं। भारतीय रेलगाड़ियों में हर दिन सवा करोड़ से अधिक लोग यात्रा करते हैं। एक अनुमान के अनुसार देश में प्रति वर्ष औसतन तीन सौ छोटी-बड़ी रेल दुर्घटनाएँ होती हैं। भारत में वर्ष दो हज़ार से बाद घटित हुई रेल दुर्घटनाओं का घटनाक्रम इस प्रकार हैः- . भारत के राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की स्थापना तिथि अनुसार सूची में भारत के राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश अपनी स्थापना तिथि के साथ दिए गए हैं। . भारत के शहरों का पुनर्नामकरण, स्न एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में, अंग्रेज़ोंके भारत छोड़ कर जाने के बाद आरंभ हुआ था, जो आज तक जारी है। कई पुनर्नामकरणों में राजनैतिक विवाद भी हुए हैं। सभी प्रस्ताव लागू भी नहीं हुए हैं। प्रत्येक शहर पुनर्नामकरण को केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित होना चाहिये। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद पुनर्नामांकित हुए, मुख्य शहरों में हैंः तिरुवनंतपुरम , मुंबई , चेन्नई , कोलकाता , पुणे एवं बेंगलुरु । . कोई विवरण नहीं। thumb मेरी तुसाद एक फ्रांसीसी कलाकार थी। वे उनके द्वारा बनाए गए मोम के आदमकद पुतलों के लिए विख्यात हैं। उन्होने लन्दन में मैडम तुसाद संग्राहलय की स्थापना की। . यूनानी विकिपीडिया विकिपीडिया का यूनानी भाषा का संकरण है। यह एक दिसंबर, दो हज़ार दो में आरंभ किया गया था और इस पर लेखों की कुल संख्या पच्चीस मई, दो हज़ार नौ तक बयालीस,शून्य+ है। यह विकिपीडिया का चौवालीसवां सबसे बड़ा संकरण है।. राजभवन राजभवन कोहिमा भारत के नागालैण्ड राज्य के राज्यपाल का आधिकारिक आवास है। यह राज्य की राजधानी कोहिमा में स्थित है और निखिल कुमार यहाँ के वर्तमान राज्यपाल हैं जिन्होंने पंद्रह अक्टूबर दो हज़ार नौ को राज्यपाल का पदभार ग्रहण किया था। . रोज़ा लुईज़ मक्कॉली पार्क्स अफ़्रीकी-अमेरिकी नागरिक अधिकार कार्यकर्त्ता थीं जिन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका की कांग्रेस ने "द फ़र्स्ट लेडी ऑफ़ सिविल राइट्स" और "द मदर ऑफ़ द फ्रीडम मूवमंट" नामों से पुकारा। रोजा लुईज़ मक्कॉली का जन्म टस्कागी, अलाबामा पर चार फ़रबरी एक हज़ार नौ सौ तेरह को हुआ था। एक दिसंबर एक हज़ार नौ सौ पचपन को मोंटगोमेरी, अलाबामा में जब बस में काम से घर वापस आ रही थी और अपनी सीट पर बस में बैठी हुई थी। एक गोरे ने उसको सीट छोड़ने को कहा। रोज़ा अपनी सीट पर बैठी रही। उसको पुलिस ने पकड़ लिया परन्तु अगले दिन उसको चढ़ा लिया गया। अदालत ने उसपर पाँच दिसंबर को जुर्माना कर दिया। इसी दिन को अफ़्रीकी-अमरीकी समुदाय ने मिलकर बसों का बॉयकॉट किया। . सुचेता कृपलानी एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनीतिज'ज थीं। ये उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री बनीं और भारत की प्रथम महिला मुख्य मंत्री थीं। स्वतंत्रता आंदोलन में श्रीमती सुचेता कृपलानी के योगदान को भी हमेशा याद किया जाएगा। एक हज़ार नौ सौ आठ में जन्मी सुचेता जी की शिक्षा लाहौर और दिल्ली में हुई थी। आजादी के आंदोलन में भाग लेने के लिए उन्हें जेल की सजा हुई। एक हज़ार नौ सौ छियालीस में वह संविधान सभा की सदस्य चुनी गई। एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन से एक हज़ार नौ सौ साठ तक वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महासचिव थी। एक हज़ार नौ सौ तिरेसठ से एक हज़ार नौ सौ सरसठ तक वह उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं। एक दिसम्बर एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर को उनका निधन हो गया। अपने शोक संदेश में श्रीमती इंदिरा गांधी ने कहा कि "सुचेता जी ऐसे दुर्लभ साहस और चरित्र की महिला थीं, जिनसे भारतीय महिलाओं को सम्मान मिलता है।" सुचेता कृपलानी देश की पहली महिला मुख्य मंत्री थीं। ये बंटवारे की त्रासदी में महात्मा गांधी के बेहद करीब रहीं। सुचेता कृपलानी उन चंद महिलाओं में शामिल हैं, जिन्होंने बापू के करीब रहकर देश की आजादी की नींव रखी। वह नोवाखली यात्रा में बापू के साथ थीं। वर्ष एक हज़ार नौ सौ तिरेसठ में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनने से पहले वह लगातार दो बार लोकसभा के लिए चुनी गई। सुचेता दिल की कोमल तो थीं, लेकिन प्रशासनिक फैसले लेते समय वह दिल की नहीं, दिमाग की सुनती थीं। उनके मुख्यमंत्रित्व काल में राज्य के कर्मचारियों ने लगातार बासठ दिनों तक हड़ताल जारी रखी, लेकिन वह कर्मचारी नेताओं से सुलह को तभी तैयार हुई, जब उनके रुख में नरमी आई। जबकि सुचेता के पति आचार्य कृपलानी खुद समाजवादी थे। . हिन्दी विकिपीडिया, विकिपीडिया का हिन्दी भाषा का संस्करण है, जिसका स्वामित्व विकिमीडिया संस्थापन के पास है। हिन्दी संस्करण जुलाई दो हज़ार तीन में आरम्भ किया गया था और एक दिसम्बर दो हज़ार सोलह तक इस पर लेख और लगभग पंजीकृत सदस्य हैं। तीस अगस्त दो हज़ार ग्यारह के दिन यह एक लाख लेखों का आँकड़ा पार करने वाला प्रथम भारतीय भाषा विकिपीडिया बना। यह लेखों की संख्या, सक्रिय सदस्यों, प्रयोक्ताओं की संख्या, सम्पादनों इत्यादि के आधार पर भारतीय भाषाओं में उपलब्ध विकिपीडिया का सबसे बड़ा संस्करण है और सभी संस्करणों में पचपनवाँ। और इसे मुख्यतः हिन्दी भाषी लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिया बनाया गया था। चूँकि हिन्दी विकिपीडिया इण्डिक स्क्रिप्ट का प्रयोग करता है इसलिए इसमें जटिल पाठ प्रतिपादन सहायक की आवश्यकता पड़ती है। विकिपीडिया पर ध्वन्यात्मक रोमन वर्णमाला परिवर्तक उपलब्ध है, इसलिए बिना किसी विशेष हिन्दी टाइपिंग सॉफ्टवेर डाउनलोड किये रोमन कुंजीपटल का उपयोग देवनागरी में टंकण करने के लिए किया जा सकता है। . ज़ख्म ज़ख्म एक हज़ार नौ सौ नवासी में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। . कर्नल सर जॉर्ज एवरेस्ट एक सर्वेक्षणकर्ता, भूगोलज्ञ और एक हज़ार आठ सौ तीस-एक हज़ार आठ सौ तैंतालीस तक भारत के महा सर्वेयर रहे थे। . वुडी एलन एक दिसंबर एक हज़ार नौ सौ पैंतीस को ब्रुकलीन में जन्में वुडी एलन लेखक, निर्देशक, हास्य अभिनेता तथा संगीतकार के रूप में सुपरिचित हैं। एनी हाल तथा हाना एंड हर सिस्टर्स नामक इनकी दो फिल्में मौलिक पटकथा के लिए अकादमी पुरस्कार से पुरस्कृत हुई हैं। एनी हाल में श्रेष्ट निर्देशन के लिए एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर में इन्हे अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ। वुडी एलेन एक अमेरिकी पटकथा लेखक, निर्देशक, अभिनेता, हास्य अभिनेता, लेखक, नाटककार और संगीतकार है। उनका व्यावसायिक जीवन पचास से अधिक वर्षों तक फैला है। एक हज़ार नौ सौ पचास दशक में वे हास्य लेखन किया करते थे। उन्होनें कई चुटकुले, दूरदर्शन के लिए लिपियान और कई हास्य लघुकथाएँ के किताबें प्रकाशित की थी। एक हज़ार नौ सौ साठ दशक के शुरुआत में एलन परंपरागत चुटकुलों पर बल डालने के बजाए एकालाप पर बल डाले और उन्होनें एक स्टैंड अप हास्य के रूप में प्रदर्शन शुरू कर दिया था। एक हास्य के रूप में उन्होनें अपने आप को एक असुरक्षित, बौद्धिक और चिड़चिड़ा व्यक्तित्व प्रदर्शित किया और उसका विकास किया, परंतु उन्होनें यह भी कहा कि वह उनके वास्तविक जीवन व्यक्तित्व से काफी अलग है। दो हज़ार चार में, कॉमेडी सेंट्रल के एक सौ महानतम स्टैंड अप की सूची मे एलन को चौथे स्थान पर रखा गया और ब्रिटेन के एक सर्वेक्षण में उन्हे तीसरे सबसे बड़े हास्य अभिनेता के रूप में स्थान दिया गया। मध्य एक हज़ार नौ सौ साठ में एलन ने लेखन और चलचित्र का निर्देशन करना शुरू कर दिया था। उन्होनें पहले तमाशा हास्य में विशेषज्ञता प्राप्त की फिर एक हज़ार नौ सौ सत्तर के दशक के दौरान यूरोपीय कला सिनेमा से प्रभावित उन्होने कई नाटकीय विषयवास्तु में योगदान दिया। वह अक्सर चलचित्र निर्माताओं की नई हॉलीवुड लहर के हिस्से के रूप में पहचाने जाते है। वे अक्सर स्वयं के चलचित्रों में खुद अभिनय करते थे वो भी अपने स्टँड उप हास्य के ही व्यक्तिव में। चालीस से अधिक फिल्मों में कुछ प्रासिद फिल्में है- आनी हॉल , मनहट्टान , हॅने आंड हेर सिस्टर्स और मिडनाइट इन पॅरिस । आलोचक रोजर एबर्ट ने एलन को सिनेमा का एक खजाना बुलाया है। एलेन चौबीस बार नामांकित किया और चार अकादमी पुरस्कार जीते हैं, सर्वश्रेष्ठ मूल पटकथा के लिए तीन और सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के लिए एक. आइसलैण्ड या आइसलैण्ड गणराज्य उत्तर पश्चिमी यूरोप में उत्तरी अटलांटिक में ग्रीनलैंड, फ़रो द्वीप समूह और नार्वे के मध्य बसा एक द्विपीय देश है। आइसलैण्ड का क्षेत्रफल लगभग एक,तीन,शून्य किमीदो है और अनुमानित जनसंख्या तीन,तेरह,शून्य है। यह यूरोप में ब्रिटेन के बाद दूसरा और विश्व में अठारहवा सबसे बड़ा द्वीप है। यहाँ की राजधानी है रेक्जाविक और देश की आधी जनसंख्या यहीं निवास करती है। अवस्थापन साक्ष्यों से यह ज्ञात होता है कि आइसलैण्ड में अवस्थापन आठ सौ चौहत्तर ईस्वी में आरंभ हुआ था जब इंगोल्फ़र आर्नार्सन लोग यहाँ पर पहुँचे, यद्यपि इससे पहले भी कई लोग इस देश में अस्थाई रूप से रुके थे। आने वाले कई दशकों और शताब्दियों में अवस्थापन काल के दौरान अन्य बहुत से लोग आइसलैण्ड में आए। एक हज़ार दो सौ बासठ में आइसलैण्ड, नार्वे के ओल्ड कोवेनेन्ट के अधीन आया और एक हज़ार नौ सौ अट्ठारह में संप्रभुता मिलने तक नार्वे और डेनमार्क द्वारा शासित रहा। डेनमार्क और आइसलैण्ड के बीच हुई एक संधि के अनुसार आइसलैण्ड की विदेश नीति का नियामन डेनमार्क के द्वारा किया जाना तय हुआ और दोनों देशों का राजा एक ही था जब तक की एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस में आइसलैण्ड गणराज्य की स्थापना नहीं हो गई। इस देश को विभिन्न नामों से पुकारा गया, विशेषरूप से कवियों द्वारा। बीसवीं सदी के उत्तरार्ध में आइसलैण्डवासियों ने अपने देश के विकास पर पुरजोर ध्यान दिया और देश के आधारभूत ढाँचे को सुधारने और अन्य कई कल्याणकारी कामों पर ध्यान दिया जिसके परिणामस्वरूप आइसलैण्ड, संयुक्त राष्ट्र के जीवन गुणवत्ता सूचकांक के आधार पर विश्व का सर्वाधिक रहने योग्य देश है। आइसलैण्ड, सयुंक्त राष्ट्र, नाटो, एफ़्टा, ईईए समेत विश्व की बहुत सी संस्थाओं का सदस्य है। . इस्क्रा का प्रथम अंक इस्क्रा , यानि चिंगारी, प्रवासी रूसी समाजवादियों द्वारा स्थापित एक राजनीतिक समाचारपत्र था, जिसे उन्होने रूसी सामाजिक जनवादी मजदूर पार्टी के आधिकारिक मुखपत्र के रूप में स्थापित किया था। इसका पहला संस्करण स्टटगार्ट में एक दिसम्बर एक हज़ार नौ सौ को प्रकाशित किया गया था। इसके अन्य संस्करण म्यूनिख, लंदन और जिनेवा में प्रकाशित किए गए थे। इसका शुरूआती प्रबंधन व्लादिमीर लेनिन द्वारा किया गया था। एक हज़ार नौ सौ तीन में, रूसी सामाजिक जनवादी मजदूर पार्टी के विभाजन के बाद, लेनिन ने इससे खुद को अलग कर लिया क्योंकि उनके इस प्रस्ताव कि, इसके संपादकीय बोर्ड मे सिर्फ तीन सदस्य होने चाहिए एक वो खुद, दूसरा मार्तोव तथा तीसरा प्लेखानोव, का भारी विरोध किया गया था। समाचारपत्र को मेंशेविक द्वारा जब्त कर लिया गया और प्लेखानोव के नियंत्रण में एक हज़ार नौ सौ पाँच तक प्रकाशित किया गया। अखबार का औसत प्रसार आठ हज़ार प्रतियों का था। इस्क्रा का आदर्श वाक्य था, "искры Из пламя возгорится" यानि "एक चिंगारी भड़क कर आग बनती है" . एक हज़ार चार सौ पचपन ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। . पन्द्रहवें एशियाई खेल एक दिसंबर से पंद्रह दिसंबर, दो हज़ार छः के बीच क़तर की राजधानी दोहा में आयोजित किए गए थे। इन खेलों का आयोजन करने वाला दोहा इस क्षेत्र का पहला और पूरे पश्चिम एशिया में दूसरा महानगर था। इससे पहले तेहरान में एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर में एशियाई खेलों का आयोजन किया गया था। यही वे एशियाई खेल भी थे, जिसमें एशियाई ओलम्पिक परिषद के सभी पैंतालीस सदस्य राष्ट्रों ने भागीदारी की। युरोस्पोर्ट द्वारा इन खेलों का पहली बार यूरोप में प्रसारण किया गया। इस खेलों में दक्षिण कोरियाई घुड़सवार किम ह्युंग की मृत्यु की अप्रिय घटना भी हुई जब वे एक घुड़सवारी की प्रतिस्पर्धा के दौरान ही मारे गए। .
इस लेख में हम आपको बताएंगे कि आप कैसे अपने नवजात शिशु का आधार कार्ड बनवा सकती हैं और यह आधार कार्ड बनवाते समय किन बातों का ध्यान रखना होगा। आधार कार्ड सभी के लिए आज के समय में एक बेहद जरूरी डॉक्यूमेंट बन चुका है। हमारे देश के हर नागरिक के पास आधार कार्ड अवश्य होना चाहिए क्योंकि आधार कार्ड की जरूरत अब कई सरकारी और प्राइवेट कामों में सबसे अधिक लगती है। भारत में बुजुर्ग से लेकर नवजात शिशु तक सभी का आधार कार्ड उनकी भारतीय पहचान को भी दर्शाता है। आपको बता दें कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने अब बच्चों के लिए भी आधार कार्ड को बनवाना अनिवार्य कर दिया है अगर आप भी अपने बच्चे के लिए आधार कार्ड बनवाना चाहती हैं तो यह लेख जरूर पढ़ें। कैसे बनवा सकती हैं नवजात शिशु के लिए आधार कार्ड? आपको बता दें कि आप अपने नवजात शिशु के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से अप्लाई कर सकती हैं। आपको अप्लाई करने के लिए सबसे पहले यूआईडीएआई की वेबसाइट पर जाना होगा और फिर आपको रजिस्टर करना होगा। इसके बाद आपको होम पेज पर दिए गए आधार कार्ड के फॉर्म में सारी जानकारी को भरना होता है। आपको अपने बच्चे का नाम फिर माता पिता का फोन नंबर और ईमेल आईडी की जानकारी को भरना होता है। इसके बाद आपको फिक्स अपॉइंटमेंट पर क्लिक करके एक डेट को सेलेक्ट करना होगा और फिर आपको अपने नजदीकी आधार नामांकन केंद्र में जाकर वेरिफिकेशन करवाना होता है। Everyone can enrol for #Aadhaar, even a newborn child. All you need is the child's birth certificate, Aadhaar Number and the biometrics of the parents. अगर आपको अपने नवजात शिशु का आधार कार्ड अपडेट करवाना भी होता है। आपको बता दें कि बच्चों के आधार कार्ड के बायोमेट्रिक डाटा को 5 साल और 15 साल की उम्र होने पर अपडेट कराना जरूरी होता है इसके लिए आपसे अलग से कोई चार्ज नहीं लिया जाता है। अगर आप 5 साल से कम उम्र में अपने बच्चे का आधार कार्ड बनवाती हैं तो आपको ब्लू कलर का आधार कार्ड मिलता है। इस आधार कार्ड को बाल आधार कार्ड कहते हैं। इसके साथ ही आपको फॉर्म भरते वक्त सारी जानकारी को सही से भरना चाहिए क्योंकि नवजात शिशु के आधार कार्ड में अगर बर्थ डेट में कोई गलती होती है तो वह सिर्फ एक बार ही सही की जा सकती है यानी सिर्फ एक बार ही उसे अपडेट किया जा सकेगा। आपको अपने बच्चे के आधार कार्ड को उसे 5 साल के बाद जरूर अपडेट करवाना चाहिए क्योंकि उस समय में ही बायोमेट्रिक डाटा से रजिस्ट्रेशन किया जाता है। इन बातों का ध्यान रखकर आपको अपने नवजात शिशु का आधार कार्ड बनवाना चाहिए। उम्मीद है कि आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आया होगा। इसी तरह के अन्य आर्टिकल पढ़ने के लिए हमें कमेंट कर जरूर बताएं और जुड़े रहें हमारी वेबसाइट हरजिंदगी के साथ। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
इस लेख में हम आपको बताएंगे कि आप कैसे अपने नवजात शिशु का आधार कार्ड बनवा सकती हैं और यह आधार कार्ड बनवाते समय किन बातों का ध्यान रखना होगा। आधार कार्ड सभी के लिए आज के समय में एक बेहद जरूरी डॉक्यूमेंट बन चुका है। हमारे देश के हर नागरिक के पास आधार कार्ड अवश्य होना चाहिए क्योंकि आधार कार्ड की जरूरत अब कई सरकारी और प्राइवेट कामों में सबसे अधिक लगती है। भारत में बुजुर्ग से लेकर नवजात शिशु तक सभी का आधार कार्ड उनकी भारतीय पहचान को भी दर्शाता है। आपको बता दें कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने अब बच्चों के लिए भी आधार कार्ड को बनवाना अनिवार्य कर दिया है अगर आप भी अपने बच्चे के लिए आधार कार्ड बनवाना चाहती हैं तो यह लेख जरूर पढ़ें। कैसे बनवा सकती हैं नवजात शिशु के लिए आधार कार्ड? आपको बता दें कि आप अपने नवजात शिशु के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से अप्लाई कर सकती हैं। आपको अप्लाई करने के लिए सबसे पहले यूआईडीएआई की वेबसाइट पर जाना होगा और फिर आपको रजिस्टर करना होगा। इसके बाद आपको होम पेज पर दिए गए आधार कार्ड के फॉर्म में सारी जानकारी को भरना होता है। आपको अपने बच्चे का नाम फिर माता पिता का फोन नंबर और ईमेल आईडी की जानकारी को भरना होता है। इसके बाद आपको फिक्स अपॉइंटमेंट पर क्लिक करके एक डेट को सेलेक्ट करना होगा और फिर आपको अपने नजदीकी आधार नामांकन केंद्र में जाकर वेरिफिकेशन करवाना होता है। Everyone can enrol for #Aadhaar, even a newborn child. All you need is the child's birth certificate, Aadhaar Number and the biometrics of the parents. अगर आपको अपने नवजात शिशु का आधार कार्ड अपडेट करवाना भी होता है। आपको बता दें कि बच्चों के आधार कार्ड के बायोमेट्रिक डाटा को पाँच साल और पंद्रह साल की उम्र होने पर अपडेट कराना जरूरी होता है इसके लिए आपसे अलग से कोई चार्ज नहीं लिया जाता है। अगर आप पाँच साल से कम उम्र में अपने बच्चे का आधार कार्ड बनवाती हैं तो आपको ब्लू कलर का आधार कार्ड मिलता है। इस आधार कार्ड को बाल आधार कार्ड कहते हैं। इसके साथ ही आपको फॉर्म भरते वक्त सारी जानकारी को सही से भरना चाहिए क्योंकि नवजात शिशु के आधार कार्ड में अगर बर्थ डेट में कोई गलती होती है तो वह सिर्फ एक बार ही सही की जा सकती है यानी सिर्फ एक बार ही उसे अपडेट किया जा सकेगा। आपको अपने बच्चे के आधार कार्ड को उसे पाँच साल के बाद जरूर अपडेट करवाना चाहिए क्योंकि उस समय में ही बायोमेट्रिक डाटा से रजिस्ट्रेशन किया जाता है। इन बातों का ध्यान रखकर आपको अपने नवजात शिशु का आधार कार्ड बनवाना चाहिए। उम्मीद है कि आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आया होगा। इसी तरह के अन्य आर्टिकल पढ़ने के लिए हमें कमेंट कर जरूर बताएं और जुड़े रहें हमारी वेबसाइट हरजिंदगी के साथ। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
पंजाब कांग्रेस में कैप्टन अमरिंदर सिंह के बाद अब चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) पंजाब का नए मुख्यमंत्री (New Chief Minister of Punjab) बनाया जाएगा। पंजाब कांग्रेस में कैप्टन अमरिंदर सिंह के बाद अब चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) पंजाब का नए मुख्यमंत्री (New Chief Minister of Punjab) बनाया जाएगा। इसकी जानकारी पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत ने खुद ट्वीट कर दी है। हरीश रावत ने ट्वीट कर लिखा कि चरणजीत सिंह चन्नी विधायक दल के नेता चुने गए हैं। पंजाब को विधानसभा चुनाव से पहले अपना पहला दलित मुख्यमंत्री मिल गया है। इससे पहले रेस में सुखजिंदर सिंह रंधावा का नाम सबसे आगे था। कहा जाता है कि चन्नी जमीनी स्तर के नेता हैं। चन्नी दिसंबर 2010 में अमरिंदर की मदद से कांग्रेस में शामिल हो गए थे। कैप्टन की सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे। चन्नी चमकौर साहिब विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। इसके अलावा कैप्टन की सरकार से पहले साल 2015 से 2016 के बीच पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका भी निभाई। उन्होंने सुनील जाखड़ की जगह ली थी। चन्नी रामदसिया सिख समुदाय से आते हैं। 2017 में कैप्टन अमरिंदर सिंह कैबिनेट में कैबिनेट मंत्री नियुक्त किया गया। चमकौर साहिब विधानसभा से तीसरी बार विधायक हैं। वह कांग्रेस आलाकमान द्वारा घोषित पहले अनुसूचित जाति के मुख्यमंत्री हैं। इसके अलावा उन्हें गांधी परिवार का बेहद करीबी माना जाता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सीपी जोशी के संपर्क में थे, जब वह चुनाव प्रभारी थे। जोशी ने ही उन्हें राहुल गांधी से मिलवाया था। भारत में सबसे ज्यादा दलित सिख पंजाब में हैं। इनकी संख्या करीब 32 फीसदी बताई जाती है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दलित सिख चेहरा होने के नाते उन्हें मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में रहा है।
पंजाब कांग्रेस में कैप्टन अमरिंदर सिंह के बाद अब चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब का नए मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। पंजाब कांग्रेस में कैप्टन अमरिंदर सिंह के बाद अब चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब का नए मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। इसकी जानकारी पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत ने खुद ट्वीट कर दी है। हरीश रावत ने ट्वीट कर लिखा कि चरणजीत सिंह चन्नी विधायक दल के नेता चुने गए हैं। पंजाब को विधानसभा चुनाव से पहले अपना पहला दलित मुख्यमंत्री मिल गया है। इससे पहले रेस में सुखजिंदर सिंह रंधावा का नाम सबसे आगे था। कहा जाता है कि चन्नी जमीनी स्तर के नेता हैं। चन्नी दिसंबर दो हज़ार दस में अमरिंदर की मदद से कांग्रेस में शामिल हो गए थे। कैप्टन की सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे। चन्नी चमकौर साहिब विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। इसके अलावा कैप्टन की सरकार से पहले साल दो हज़ार पंद्रह से दो हज़ार सोलह के बीच पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका भी निभाई। उन्होंने सुनील जाखड़ की जगह ली थी। चन्नी रामदसिया सिख समुदाय से आते हैं। दो हज़ार सत्रह में कैप्टन अमरिंदर सिंह कैबिनेट में कैबिनेट मंत्री नियुक्त किया गया। चमकौर साहिब विधानसभा से तीसरी बार विधायक हैं। वह कांग्रेस आलाकमान द्वारा घोषित पहले अनुसूचित जाति के मुख्यमंत्री हैं। इसके अलावा उन्हें गांधी परिवार का बेहद करीबी माना जाता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सीपी जोशी के संपर्क में थे, जब वह चुनाव प्रभारी थे। जोशी ने ही उन्हें राहुल गांधी से मिलवाया था। भारत में सबसे ज्यादा दलित सिख पंजाब में हैं। इनकी संख्या करीब बत्तीस फीसदी बताई जाती है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दलित सिख चेहरा होने के नाते उन्हें मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में रहा है।
साथ ही उन्होनेें कहा कि कुछ लोग इस फैसले से खुश भी होंगे। सोनू निगम ने ट्वीट करते हुए लिखा कि वे एकतरफा ढोंगी लोगों को चुनौती देते हुए ट्विटर छोड रहे हैं। साथ ही उन्होनें लिखा कि सभी तार्किक, देशभक्त और मानवतावादी को ऐसा करना चाहिए। सोनू ने कहा कि अभिजीत की भाषा से कोई असहमत हो सकता है। लेकिन शेहला के बीजेपी के सेक्स रैकिट के आरोप कैसी भाषा है। यह समर्थकों को भडकाने के लिए काफी है। क्या है मामलाः ज्ञातव्य है कि बॉलीवुड सिंगर अभिजीत ने जेएनयू छात्रसंघ की नेता शेहला राशिद पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
साथ ही उन्होनेें कहा कि कुछ लोग इस फैसले से खुश भी होंगे। सोनू निगम ने ट्वीट करते हुए लिखा कि वे एकतरफा ढोंगी लोगों को चुनौती देते हुए ट्विटर छोड रहे हैं। साथ ही उन्होनें लिखा कि सभी तार्किक, देशभक्त और मानवतावादी को ऐसा करना चाहिए। सोनू ने कहा कि अभिजीत की भाषा से कोई असहमत हो सकता है। लेकिन शेहला के बीजेपी के सेक्स रैकिट के आरोप कैसी भाषा है। यह समर्थकों को भडकाने के लिए काफी है। क्या है मामलाः ज्ञातव्य है कि बॉलीवुड सिंगर अभिजीत ने जेएनयू छात्रसंघ की नेता शेहला राशिद पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
अनूपा । अहंकार अभिमान स्वरूंपा । शरीरा । पंद्रह तत्व स्थूल गंभीरा ॥ ८ ॥ ये चौबीस तत्व वंधानं । भिन्न भिन्न करि कियौ वषानं । सब को प्रेरक कहिये जीवा । सो क्षेत्रज्ञ निरन्तर शीवा ॥ ६ ॥ सकल वियापक अरु सवंगा । दीसै संगी आहि असंगा । साक्षी रूप सनि तँ यारा । ताहि कछू नहिं लिपै विकारा ॥ १० ॥ यह आतम अन आतम निरना । समझे ताकौं जरा न मरना । सांख्य सु मत याही सौं कहिये । सत गुरु बिना कहौ क्यौं लहिये ॥ ११ ॥ सांख्य योग सो यह कह्यौ, भिन्न हि भिन्न प्रकार । आतम नित्य स्वरूप है, देह अनित्य विचार ॥ १२ ॥ ज्ञानयोग चौपई ज्ञानयोग अव ऐसें जानें । कारण अरु कारय पहिचानें । कारण आतम आहि अखंडा । कारय भयौ सकल ब्रह्मण्डा ॥ १३ ॥ ज्यौं अंकुरु तं तरु विस्तारा । बहुत भाँति करि निकसी डारा । और अनात्म का भेद जो 'विवेक के नाम से वेदान्त में बड़े समारोह से वर्णित है वह सांख्य में वैसा नहीं है। वहां तो प्रकृति विकृति आदि से अधिक काम रहता है जो प्रधान के नाम से वर्णित है । वेदान्त इसका खण्डन करता है । १३ से २३ तक - ज्ञानयोग का अति संक्षेप से वर्णन है । इस प्रकार का वर्णन "ज्ञानसमुद्र" में भी आया है। सुन्दरदासजी ने ज्ञानयोग, ब्रह्मयोग और अद्वैतयोग तीन नाम के प्रकरणों को भी सांख्य के उपदेश ही में वर्णित किया है। इनमें से ज्ञानयोग का सम्बन्ध कुछ न्याय और कुछ उपनिषदों के वेदान्त से मिलता है । सांख्य ईश्वर को कारण नहीं बताता न : सृष्टि का लम्य पुरुष में ही मानता है। "ज्ञानसमुद्र" में स्वामी ने ऐसा वर्णन अद्वैत के पंचम उल्लास में अभावों के निरू
अनूपा । अहंकार अभिमान स्वरूंपा । शरीरा । पंद्रह तत्व स्थूल गंभीरा ॥ आठ ॥ ये चौबीस तत्व वंधानं । भिन्न भिन्न करि कियौ वषानं । सब को प्रेरक कहिये जीवा । सो क्षेत्रज्ञ निरन्तर शीवा ॥ छः ॥ सकल वियापक अरु सवंगा । दीसै संगी आहि असंगा । साक्षी रूप सनि तँ यारा । ताहि कछू नहिं लिपै विकारा ॥ दस ॥ यह आतम अन आतम निरना । समझे ताकौं जरा न मरना । सांख्य सु मत याही सौं कहिये । सत गुरु बिना कहौ क्यौं लहिये ॥ ग्यारह ॥ सांख्य योग सो यह कह्यौ, भिन्न हि भिन्न प्रकार । आतम नित्य स्वरूप है, देह अनित्य विचार ॥ बारह ॥ ज्ञानयोग चौपई ज्ञानयोग अव ऐसें जानें । कारण अरु कारय पहिचानें । कारण आतम आहि अखंडा । कारय भयौ सकल ब्रह्मण्डा ॥ तेरह ॥ ज्यौं अंकुरु तं तरु विस्तारा । बहुत भाँति करि निकसी डारा । और अनात्म का भेद जो 'विवेक के नाम से वेदान्त में बड़े समारोह से वर्णित है वह सांख्य में वैसा नहीं है। वहां तो प्रकृति विकृति आदि से अधिक काम रहता है जो प्रधान के नाम से वर्णित है । वेदान्त इसका खण्डन करता है । तेरह से तेईस तक - ज्ञानयोग का अति संक्षेप से वर्णन है । इस प्रकार का वर्णन "ज्ञानसमुद्र" में भी आया है। सुन्दरदासजी ने ज्ञानयोग, ब्रह्मयोग और अद्वैतयोग तीन नाम के प्रकरणों को भी सांख्य के उपदेश ही में वर्णित किया है। इनमें से ज्ञानयोग का सम्बन्ध कुछ न्याय और कुछ उपनिषदों के वेदान्त से मिलता है । सांख्य ईश्वर को कारण नहीं बताता न : सृष्टि का लम्य पुरुष में ही मानता है। "ज्ञानसमुद्र" में स्वामी ने ऐसा वर्णन अद्वैत के पंचम उल्लास में अभावों के निरू
दबंग सलमान खान इन दिनों बिग बॉस के सीजन 14 को लेकर खूब सुर्खियों में बने हुए है। वैसे सलमान खान ने लॉकडाउन का पूरा समय अपना पनवेल फार्महाउस में बिताया। सलमान खान की अपकमिंग फिल्म राधे सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियों में है। हाल ही में फिल्म के सेट से कुछ ऐसी खबर आयी है, जिससे फैंस को थोड़ी चिंता हो सकती है। खबर आ रही है कि फिल्म में अहम रोल निभा रहे एक्टर रणदीप हुड्डा शूटिंग के दौरान चोटिल हो गए है। फिल्म 'वांटेड' के बाद सलमान इस नई फिल्म के साथ निर्देशक प्रभुदेवा के साथ वापसी करने जा रहे हैं, फिल्म में सलमान एक खुफिया पुलिस अधिकारी की भूमिका में दर्शकों का मनोरंजन करते नजर आएंगे।
दबंग सलमान खान इन दिनों बिग बॉस के सीजन चौदह को लेकर खूब सुर्खियों में बने हुए है। वैसे सलमान खान ने लॉकडाउन का पूरा समय अपना पनवेल फार्महाउस में बिताया। सलमान खान की अपकमिंग फिल्म राधे सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियों में है। हाल ही में फिल्म के सेट से कुछ ऐसी खबर आयी है, जिससे फैंस को थोड़ी चिंता हो सकती है। खबर आ रही है कि फिल्म में अहम रोल निभा रहे एक्टर रणदीप हुड्डा शूटिंग के दौरान चोटिल हो गए है। फिल्म 'वांटेड' के बाद सलमान इस नई फिल्म के साथ निर्देशक प्रभुदेवा के साथ वापसी करने जा रहे हैं, फिल्म में सलमान एक खुफिया पुलिस अधिकारी की भूमिका में दर्शकों का मनोरंजन करते नजर आएंगे।
Don't Miss! - Travel क्या होता है टिकट पर छपा PNR नंबर और कब तक यह वैध रहता है? पिछले साल बिकी 2,09,966 मारुति बलेनो - जानें क्यों हिट है यह प्रीमियम हैचबैक? मारुति सुजुकी भारत की सबसे बड़ी कार कंपनी है और देश में सबसे ज्यादा उसी की कारें बिकती हैं। पिछले साल मारुति बलेनो की कुल 2,09,966 युनिट की बिक्री हुई है और इसी के साथ ये देश की बेस्ट सेलिंग प्रीमयम हैचबैक कार बन गई है। इस हिसाब से पिछले साल हर महिने करीब 16,000 मारुति बलेनो की सेल हुई है। जल्द ही मारुति बलेनो का फेसलिफ्ट वर्जन भी लॉन्च होने वाला है और इसके बाद संभव है कि मारुति बलेनो की बिक्री में और तेजी आए। नई 2019 मारुति बलेनो फेसलिफ्ट में कई बदलाव किये गए हैं। जैसे की इसमें नए डिजाइन का बंपर लगाया गया है और साथ ही इसमें नए प्रोजेक्टर हेडलैंप लगे हैं जो कि स्मोक्ड इफेक्ट के साथ आते हैं। MOST READ: टाटा हैरियर रिव्यू और टेस्ट ड्राइव - कंपनी के लिए हो सकता गेम चेंजर! वैसे इन बदलावों के बावजूद भी नई 2019 मारुति बलेनो फेसलिफ्ट के लुक में कोई खास बदलाव नहीं आया है। ये पहले की तरह ही दिख रही है। हालांकि नए बंपर, फॉग लैंप हाउसिंग और नए रेक्टैंग्यूलर एयर डैम डिजाइन के साथ कार एकदम फ्रेश लगती है। बात करें नई 2019 मारुति बलेनो फेसलिफ्ट के इंटीरियर की तो इसमें ढ़ेर सारे एडिशनल फीचर्स और इक्विपमेंट जोड़े जाएंगे। इसमें नया सीट अपहोल्स्ट्री भी देखनो को मिलेगा, जो कि प्रीमियम लेदर और फिनिश के साथ आएगी। MOST READ: ईंधन (फ्यूल) से जुड़े इन मिथकों को क्या आप भी सच मानते हैं? नई 2019 मारुति बलेनो फेसलिफ्ट में पैसेंजर की सुरक्षा को भी पहले के मुकाबले चाक-चौबंध किया जाएगा। नए सेफ्टी फीचर्स के तौर पर नई 2019 मारुति बलेनो फेसलिफ्ट में स्पीड सेंसिंग ऑटो डोर लॉक/अनलॉक और हाई-स्पीड अलर्ट स्टैंडर्ड फीचर्स के तौर पर सभी वेरिएंट में दिये जाएंगे। वेरिएंट डिटेल्स की बात करें तो नई नई 2019 मारुति बलेनो फेसलिफ्ट को भी चार वेरिएंट - सिग्मा, डेल्टा, जे़टा और अल्फा में लॉन्च किया जाएगा। इस पहले की तरही ही मारुति नेक्सा डीलरशिप के द्वारा ही बेचा जाएगा, जो कि विशेष तौर पर प्रीमियम कारों को बेचने के लिए सेटअप किया गया है। MOST READ: निसान किक्स रिव्यू और टेस्ट ड्राइवः क्या साबित होगी हुंडई क्रेटा की सबसे तगड़ी प्रतिद्वंदी? मारुति बलेनो एक प्रीमियम हैचबैक कार है जिसने अब तक कंपनी की सेल बढ़ाने में काफी मदद की है। मारुति बलेनो कंपनी ही नहीं बल्कि अपने सेगमेंट के बादशाह के रूप में जानी जाती है। A2+ सेगमेंट में बलेनो ने करीब 27 फीसद से ज्यादा बाजार हिस्सेदारी हासिल की है, जिसमें हुंडई i20 और होंडा जैज भी शामिल हैं। भारत में इसे प्रीमियम नेक्सा डीलरशीप के माध्यम से बेचा जाता है। वर्तमान कीमत की बात करें तो भारत में मारुति सुजुकी बलेनो की कीमत 5. 35 लाख रुपए से शुरू होती है, जो कि टॉप वेरिएंट के लिए 8. 49 लाख रुपए एक्स शोरूम (दिल्ली) तक जाती है। मारुति सुजुकी बलेनो को विशेष तौर पर भारत में बनाया जाता है। बलेनो कंपनी का पहला ऐसा प्रोडक्ट है जिसे भारत से जापान निर्यात किया गया है। भारत के अलावा कई विदेशी बाजारों जैसे की ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और लैटिन अमेरिकी देशों में भी ये काफी हिट है। भारत में मारुति सुजुकी बलेनो का मुख्य मुकाबला हुंडई आई20 एलिट, होंडा जैज और फॉक्सवैगन पोलो से हो रहा है।
Don't Miss! - Travel क्या होता है टिकट पर छपा PNR नंबर और कब तक यह वैध रहता है? पिछले साल बिकी दो,नौ,नौ सौ छयासठ मारुति बलेनो - जानें क्यों हिट है यह प्रीमियम हैचबैक? मारुति सुजुकी भारत की सबसे बड़ी कार कंपनी है और देश में सबसे ज्यादा उसी की कारें बिकती हैं। पिछले साल मारुति बलेनो की कुल दो,नौ,नौ सौ छयासठ युनिट की बिक्री हुई है और इसी के साथ ये देश की बेस्ट सेलिंग प्रीमयम हैचबैक कार बन गई है। इस हिसाब से पिछले साल हर महिने करीब सोलह,शून्य मारुति बलेनो की सेल हुई है। जल्द ही मारुति बलेनो का फेसलिफ्ट वर्जन भी लॉन्च होने वाला है और इसके बाद संभव है कि मारुति बलेनो की बिक्री में और तेजी आए। नई दो हज़ार उन्नीस मारुति बलेनो फेसलिफ्ट में कई बदलाव किये गए हैं। जैसे की इसमें नए डिजाइन का बंपर लगाया गया है और साथ ही इसमें नए प्रोजेक्टर हेडलैंप लगे हैं जो कि स्मोक्ड इफेक्ट के साथ आते हैं। MOST READ: टाटा हैरियर रिव्यू और टेस्ट ड्राइव - कंपनी के लिए हो सकता गेम चेंजर! वैसे इन बदलावों के बावजूद भी नई दो हज़ार उन्नीस मारुति बलेनो फेसलिफ्ट के लुक में कोई खास बदलाव नहीं आया है। ये पहले की तरह ही दिख रही है। हालांकि नए बंपर, फॉग लैंप हाउसिंग और नए रेक्टैंग्यूलर एयर डैम डिजाइन के साथ कार एकदम फ्रेश लगती है। बात करें नई दो हज़ार उन्नीस मारुति बलेनो फेसलिफ्ट के इंटीरियर की तो इसमें ढ़ेर सारे एडिशनल फीचर्स और इक्विपमेंट जोड़े जाएंगे। इसमें नया सीट अपहोल्स्ट्री भी देखनो को मिलेगा, जो कि प्रीमियम लेदर और फिनिश के साथ आएगी। MOST READ: ईंधन से जुड़े इन मिथकों को क्या आप भी सच मानते हैं? नई दो हज़ार उन्नीस मारुति बलेनो फेसलिफ्ट में पैसेंजर की सुरक्षा को भी पहले के मुकाबले चाक-चौबंध किया जाएगा। नए सेफ्टी फीचर्स के तौर पर नई दो हज़ार उन्नीस मारुति बलेनो फेसलिफ्ट में स्पीड सेंसिंग ऑटो डोर लॉक/अनलॉक और हाई-स्पीड अलर्ट स्टैंडर्ड फीचर्स के तौर पर सभी वेरिएंट में दिये जाएंगे। वेरिएंट डिटेल्स की बात करें तो नई नई दो हज़ार उन्नीस मारुति बलेनो फेसलिफ्ट को भी चार वेरिएंट - सिग्मा, डेल्टा, जे़टा और अल्फा में लॉन्च किया जाएगा। इस पहले की तरही ही मारुति नेक्सा डीलरशिप के द्वारा ही बेचा जाएगा, जो कि विशेष तौर पर प्रीमियम कारों को बेचने के लिए सेटअप किया गया है। MOST READ: निसान किक्स रिव्यू और टेस्ट ड्राइवः क्या साबित होगी हुंडई क्रेटा की सबसे तगड़ी प्रतिद्वंदी? मारुति बलेनो एक प्रीमियम हैचबैक कार है जिसने अब तक कंपनी की सेल बढ़ाने में काफी मदद की है। मारुति बलेनो कंपनी ही नहीं बल्कि अपने सेगमेंट के बादशाह के रूप में जानी जाती है। Aदो+ सेगमेंट में बलेनो ने करीब सत्ताईस फीसद से ज्यादा बाजार हिस्सेदारी हासिल की है, जिसमें हुंडई iबीस और होंडा जैज भी शामिल हैं। भारत में इसे प्रीमियम नेक्सा डीलरशीप के माध्यम से बेचा जाता है। वर्तमान कीमत की बात करें तो भारत में मारुति सुजुकी बलेनो की कीमत पाँच. पैंतीस लाख रुपए से शुरू होती है, जो कि टॉप वेरिएंट के लिए आठ. उनचास लाख रुपए एक्स शोरूम तक जाती है। मारुति सुजुकी बलेनो को विशेष तौर पर भारत में बनाया जाता है। बलेनो कंपनी का पहला ऐसा प्रोडक्ट है जिसे भारत से जापान निर्यात किया गया है। भारत के अलावा कई विदेशी बाजारों जैसे की ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और लैटिन अमेरिकी देशों में भी ये काफी हिट है। भारत में मारुति सुजुकी बलेनो का मुख्य मुकाबला हुंडई आईबीस एलिट, होंडा जैज और फॉक्सवैगन पोलो से हो रहा है।
पीएम मोदी (PM Modi) ने ट्वीट करते हुए लिखा है 'लंबी उड़ान का मतलब पेपर्स और कुछ फाइल वर्क के काम को करने के अवसरों से भी है। ' इसके साथ में उन्होंने फाइलों के चेक करते हुए फोटो भी शेयर की है। नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM modi), छुट्टियां नहीं लेते हैं। उनके काम करने के तरीके की अक्सर चर्चा होती है। कहा जाता है कि पिछले सात सालों में उन्होंने एक भी दिन छुट्टी नहीं ली है। दिन में करीब 18 घंटे काम करते हैं इसका एक ताजा उदाहरण देखने को मिला पीएम मोदी के अमेरिका दौरे पर रवाना होने के बाद। दरअसल, पीएम तीन दिवसीय अमेरिका यात्रा के लिए बुधवार को रवाना हुए। लेकिन अमेरिका पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ट्विटर हैंडल से एक फोटो शेयर की है। जिसमें वो कुछ फाइलों को देख रहे हैं। पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा है 'लंबी उड़ान का मतलब पेपर्स और कुछ फाइल वर्क के काम को करने के अवसरों से भी है। ' इसके साथ में उन्होंने फाइलों के चेक करते हुए फोटो भी शेयर की है। प्रधानमंत्री मोदी सुबह करीब 3. 30 बजे वाशिंगटन के एंड्रयूज एयरबेस पर उतरे। COVID-19 महामारी के प्रकोप के बाद से यह पड़ोस देशों को छोड़कर पीएम मोदी की पहली विदेश यात्रा है। पीएम मोदी ने भारतीय उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ एयर इंडिया वन के बोइंग 777 वीवीआईपी विमान ने बुधवार सुबह 11 बजे अमेरिका के लिए रवाना हुए। इस दौरे को काफी अहम माना जा रहा है। अमेरिका के नए राष्ट्रपति चुनने के बाद यह पहली बार जो बाइडेन से प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात होगी। पीएम मोदी खुद भी इस दौरे को लेकर काफी उत्साहित नजर आए। उन्होंन रवाना होने से पहले ट्वीट करके भी इसकी जानकारी दी थी। पीएम मोदी द्वारा पोस्ट की गई तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल हो रही है। मोदी पेन लेकर कागज में कुछ लिखते हुए भी दिखाई दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस तस्वीर के साथ में एक कैप्शन भी लिखा है।
पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा है 'लंबी उड़ान का मतलब पेपर्स और कुछ फाइल वर्क के काम को करने के अवसरों से भी है। ' इसके साथ में उन्होंने फाइलों के चेक करते हुए फोटो भी शेयर की है। नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , छुट्टियां नहीं लेते हैं। उनके काम करने के तरीके की अक्सर चर्चा होती है। कहा जाता है कि पिछले सात सालों में उन्होंने एक भी दिन छुट्टी नहीं ली है। दिन में करीब अट्ठारह घंटाटे काम करते हैं इसका एक ताजा उदाहरण देखने को मिला पीएम मोदी के अमेरिका दौरे पर रवाना होने के बाद। दरअसल, पीएम तीन दिवसीय अमेरिका यात्रा के लिए बुधवार को रवाना हुए। लेकिन अमेरिका पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ट्विटर हैंडल से एक फोटो शेयर की है। जिसमें वो कुछ फाइलों को देख रहे हैं। पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा है 'लंबी उड़ान का मतलब पेपर्स और कुछ फाइल वर्क के काम को करने के अवसरों से भी है। ' इसके साथ में उन्होंने फाइलों के चेक करते हुए फोटो भी शेयर की है। प्रधानमंत्री मोदी सुबह करीब तीन. तीस बजे वाशिंगटन के एंड्रयूज एयरबेस पर उतरे। COVID-उन्नीस महामारी के प्रकोप के बाद से यह पड़ोस देशों को छोड़कर पीएम मोदी की पहली विदेश यात्रा है। पीएम मोदी ने भारतीय उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ एयर इंडिया वन के बोइंग सात सौ सतहत्तर वीवीआईपी विमान ने बुधवार सुबह ग्यारह बजे अमेरिका के लिए रवाना हुए। इस दौरे को काफी अहम माना जा रहा है। अमेरिका के नए राष्ट्रपति चुनने के बाद यह पहली बार जो बाइडेन से प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात होगी। पीएम मोदी खुद भी इस दौरे को लेकर काफी उत्साहित नजर आए। उन्होंन रवाना होने से पहले ट्वीट करके भी इसकी जानकारी दी थी। पीएम मोदी द्वारा पोस्ट की गई तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल हो रही है। मोदी पेन लेकर कागज में कुछ लिखते हुए भी दिखाई दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस तस्वीर के साथ में एक कैप्शन भी लिखा है।
टीवी इंडस्ट्री की कुछ ऐसी एक्ट्रेसेस जिन्हें हुआ परदेसी से प्यार। आइए इनकी रोचक लवस्टोरी के बारे में जानते हैं। प्यार का कोई धर्म नहीं होता, न ही उसे सरहदों की जंजीरों में बांधा जा सकता है। यह बात हम सब ने कई बार सुनी है, मगर टीवी इंडस्ट्री की कुछ एक्ट्रेसेस ने इसे अपने जीवन में सिद्ध करके भी दिखाया है। टीवी की कुछ एक्टेसेस ऐसी हैं जिनके जीवन में सच्चे प्यार की कमी एक परदेसी ने पूरी की। आज हम ऐसी ही कुछ टीवी एक्ट्रेसेस के बारे में आपको बताएंगे, जिनके बॉयफ्रेंड विदेशी हैं या जिन्होंने शादी के लिए विदेशी लाइफपार्टनर चुना है। 'देश में निकला होगा चांद' और 'बा बहू और बेबी' जैसे सुपरहिट टीवी सीरियल में काम कर चुकीं श्वेता केश्वानी का नाम बहुत समय तक अमेरिकन सिंगर एवं एक्टर एलेक्स ओनल के साथ जोड़ा गया था। दोनों ही सीरियस रिलेशनशिप में थे और श्वेता अपने पेरेंट्स के अगेंस्ट जाकर एलेक्स से शादी भी करना चाहती थीं। मगर एलेक्स रिश्ते में वफादारी नहीं निभा सके। वर्ष 2011 में एलेक्स के साथ ब्रेकअप के बाद वर्ष 2012 में श्वेता न्यूयॉर्क में केन एंडीनो से मिलीं। केन एक न्यूयॉर्क बेस्ड लॉयर हैं। दोनों ने वर्ष 2012 में ही शादी कर ली थी और वर्ष 2013 में दोनों एक बेटी के पेरेंट भी बन गए थे। टीवी की टॉप एक्ट्रेसेस में से एक शमासिकंदर भी एक विदेशी को दिल दे बैठी हैं। उनके मंगेतर जेम्स मिलिरॉन अमेरिकी बिजनेसमैन हैं। वर्ष 2016 में शमा सिकंदर और जेम्स मिलिरॉन ने सगाई कर ली थी। दोनों ही वर्ष 2020 में सितंबर तक शादी भी करने वाले थे। एक लीडिंग मीडिया हाउस को दिए इंटरव्यू में शमा ने बताया था, 'डेट और जगह दोनों ही फाइनल हो चुकी थीं। मगर कोविड-19 की वजह से हमने इस साल अपनी शादी टाल दी है। ' आपको बता दें कि एक समय था जब शमा सिकंदर भी एलेक्स ओनल को डेट करती थीं, मगर दोनों का ब्रेकअप हो गया था। फेमस टीवी सीरियल 'उतरन' फेम एक्ट्रेस श्रीजीता डे ने भी देशी नहीं बल्कि एक विदेशी में ट्रू लव पाया है। श्रीजीता के बॉयफ्रेंड का नाम माईकल है और वह एक जर्मन बिजनेसमैन हैं। माईकल अपने काम के सिलसिले में ज्यादातर वक्त मुंबई में ही बिताते हैं। श्रीजीता और माईकल दोनों ही शादी का प्लान बना रहे हैं, शादी के बाद माईकल इंडिया में ही सेटलडाउन हो जाएंगे। आपको बता दें कि श्रीजीता और माईकल दोनों ही अपने इंस्टाग्राम पर एक दूसरे के साथ लवी-डवी तस्वीरें डालते रहते हैं। टीवी इंडस्ट्री की फेमस एक्ट्रेस आशका गोराडिया की एक्टिंग के साथ ही लोग उनकी खूबसूरती के भी दीवाने हैं। आशका ने वर्ष 2017 में अमेरिकन बिजनेसमैन ब्रेंट गोबल से शादी कर ली थी। दोनों की पहली मुलाकात लास वेगास में हुई थी। आशका लास वेगास घूमने गई थीं और ब्रेंट का लास वेगास में बिजनेस था। एक लंबी फ्रेंडशिप (रिलेशनशिप से पहले फ्रेंडशिप क्यों है जरूरी) के बाद ब्रेंट ने ही आशका को शादी के लिए प्रपोज किया था। आशका के हां कहने के बाद ब्रेंट ने इंडिया में ही सेटलडाउन होने का फैसला किया और अपना पूरा बिजनेस इंडिया शिफ्ट कर लिया। पहले दोनों ने ईसाई रीति-रिवाज से चर्च में शादी की थी और बाद में दोनों ने अहमदाबाद में हिंदू रीति-रिवाज से शादी की थी। आपको बता दें कि आशका वर्ष 2006-2015 में टीवी एक्टर रोहित बक्शी के साथ रिलेशनशिप में थीं और बाद में दोनों का ब्रेकअप हो गया था। सुचित्रा का नाम टीवी और फिल्म दोनों ही इंडस्ट्री से जुड़ा हुआ है। सुचित्रा ने कई इंग्लिश और फ्रेंच मूवीज में भी काम किया है। एक दोस्त की हाउस पार्टी में सुचित्रा की मुलाकात डेनमार्क(6 बेस्ट प्लेस शादी से पहले जरूर जाएं) बेस्ड इंजीनियर लार्स जेल्डसन से हुई। पहले दोनों की दोस्ती हुई और बाद में दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया। वर्ष 2005 में साउथ इंडियन रीति-रिवाज के साथ सुचित्रा और लार्स ने शादी कर ली। अब दोनों की शादी को 15 बरस बीत चुके हैं। दोनों एक बेटी अनिका के पेरेंट्स भी हैं। तो कैसा लगा आपको इन कपल्स की लवस्टोरी जानकर? अगर आप सेलिब्रिटीज की लाइफ से जुड़ी और भी रोचक बातें जानना चाहती हैं तो जुड़ी रहें हरजिंदगी से। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
टीवी इंडस्ट्री की कुछ ऐसी एक्ट्रेसेस जिन्हें हुआ परदेसी से प्यार। आइए इनकी रोचक लवस्टोरी के बारे में जानते हैं। प्यार का कोई धर्म नहीं होता, न ही उसे सरहदों की जंजीरों में बांधा जा सकता है। यह बात हम सब ने कई बार सुनी है, मगर टीवी इंडस्ट्री की कुछ एक्ट्रेसेस ने इसे अपने जीवन में सिद्ध करके भी दिखाया है। टीवी की कुछ एक्टेसेस ऐसी हैं जिनके जीवन में सच्चे प्यार की कमी एक परदेसी ने पूरी की। आज हम ऐसी ही कुछ टीवी एक्ट्रेसेस के बारे में आपको बताएंगे, जिनके बॉयफ्रेंड विदेशी हैं या जिन्होंने शादी के लिए विदेशी लाइफपार्टनर चुना है। 'देश में निकला होगा चांद' और 'बा बहू और बेबी' जैसे सुपरहिट टीवी सीरियल में काम कर चुकीं श्वेता केश्वानी का नाम बहुत समय तक अमेरिकन सिंगर एवं एक्टर एलेक्स ओनल के साथ जोड़ा गया था। दोनों ही सीरियस रिलेशनशिप में थे और श्वेता अपने पेरेंट्स के अगेंस्ट जाकर एलेक्स से शादी भी करना चाहती थीं। मगर एलेक्स रिश्ते में वफादारी नहीं निभा सके। वर्ष दो हज़ार ग्यारह में एलेक्स के साथ ब्रेकअप के बाद वर्ष दो हज़ार बारह में श्वेता न्यूयॉर्क में केन एंडीनो से मिलीं। केन एक न्यूयॉर्क बेस्ड लॉयर हैं। दोनों ने वर्ष दो हज़ार बारह में ही शादी कर ली थी और वर्ष दो हज़ार तेरह में दोनों एक बेटी के पेरेंट भी बन गए थे। टीवी की टॉप एक्ट्रेसेस में से एक शमासिकंदर भी एक विदेशी को दिल दे बैठी हैं। उनके मंगेतर जेम्स मिलिरॉन अमेरिकी बिजनेसमैन हैं। वर्ष दो हज़ार सोलह में शमा सिकंदर और जेम्स मिलिरॉन ने सगाई कर ली थी। दोनों ही वर्ष दो हज़ार बीस में सितंबर तक शादी भी करने वाले थे। एक लीडिंग मीडिया हाउस को दिए इंटरव्यू में शमा ने बताया था, 'डेट और जगह दोनों ही फाइनल हो चुकी थीं। मगर कोविड-उन्नीस की वजह से हमने इस साल अपनी शादी टाल दी है। ' आपको बता दें कि एक समय था जब शमा सिकंदर भी एलेक्स ओनल को डेट करती थीं, मगर दोनों का ब्रेकअप हो गया था। फेमस टीवी सीरियल 'उतरन' फेम एक्ट्रेस श्रीजीता डे ने भी देशी नहीं बल्कि एक विदेशी में ट्रू लव पाया है। श्रीजीता के बॉयफ्रेंड का नाम माईकल है और वह एक जर्मन बिजनेसमैन हैं। माईकल अपने काम के सिलसिले में ज्यादातर वक्त मुंबई में ही बिताते हैं। श्रीजीता और माईकल दोनों ही शादी का प्लान बना रहे हैं, शादी के बाद माईकल इंडिया में ही सेटलडाउन हो जाएंगे। आपको बता दें कि श्रीजीता और माईकल दोनों ही अपने इंस्टाग्राम पर एक दूसरे के साथ लवी-डवी तस्वीरें डालते रहते हैं। टीवी इंडस्ट्री की फेमस एक्ट्रेस आशका गोराडिया की एक्टिंग के साथ ही लोग उनकी खूबसूरती के भी दीवाने हैं। आशका ने वर्ष दो हज़ार सत्रह में अमेरिकन बिजनेसमैन ब्रेंट गोबल से शादी कर ली थी। दोनों की पहली मुलाकात लास वेगास में हुई थी। आशका लास वेगास घूमने गई थीं और ब्रेंट का लास वेगास में बिजनेस था। एक लंबी फ्रेंडशिप के बाद ब्रेंट ने ही आशका को शादी के लिए प्रपोज किया था। आशका के हां कहने के बाद ब्रेंट ने इंडिया में ही सेटलडाउन होने का फैसला किया और अपना पूरा बिजनेस इंडिया शिफ्ट कर लिया। पहले दोनों ने ईसाई रीति-रिवाज से चर्च में शादी की थी और बाद में दोनों ने अहमदाबाद में हिंदू रीति-रिवाज से शादी की थी। आपको बता दें कि आशका वर्ष दो हज़ार छः-दो हज़ार पंद्रह में टीवी एक्टर रोहित बक्शी के साथ रिलेशनशिप में थीं और बाद में दोनों का ब्रेकअप हो गया था। सुचित्रा का नाम टीवी और फिल्म दोनों ही इंडस्ट्री से जुड़ा हुआ है। सुचित्रा ने कई इंग्लिश और फ्रेंच मूवीज में भी काम किया है। एक दोस्त की हाउस पार्टी में सुचित्रा की मुलाकात डेनमार्क बेस्ड इंजीनियर लार्स जेल्डसन से हुई। पहले दोनों की दोस्ती हुई और बाद में दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया। वर्ष दो हज़ार पाँच में साउथ इंडियन रीति-रिवाज के साथ सुचित्रा और लार्स ने शादी कर ली। अब दोनों की शादी को पंद्रह बरस बीत चुके हैं। दोनों एक बेटी अनिका के पेरेंट्स भी हैं। तो कैसा लगा आपको इन कपल्स की लवस्टोरी जानकर? अगर आप सेलिब्रिटीज की लाइफ से जुड़ी और भी रोचक बातें जानना चाहती हैं तो जुड़ी रहें हरजिंदगी से। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
हुसेन गजनी से भाग निकला। उसके साथ वह वेश्या भी थी। दोनों ही पृथ्वीराज की शरण में आये। उन्होंने दीनतापूर्वक शरण देने की प्रार्थना की । पृथ्वीराज ने अपने सामन्तों से परामर्श किया और सबकी राय से उसे आश्रय दे दिया। जब गोरी के पास यह समाचार पहुंचा तो उसे बड़ा गुस्सा आया। उसने अब नामक दूत को दो पत्र देकर हिन्दुस्तान भेजा। अरवखां ने पहिले मीरहुसेन को पत्र दिया। पत्र में लिखा था कि यदि तुम चित्ररेखा को वापिस करके अपने अपराध के लिए क्षमा माँगो तो मैं तुम्हें क्षमा कर दूंगा और तुम गजनी में रह सकोगे । मीरहुसेन ने दोनों बातों से इन्कार कर दिया । उसके इन्कार कर देने पर अरबखाँ ने पृथ्वीराज से भेंट की और पत्र दिया। पत्र में लिखा था कि 'मीर हुसेन को अपने राज्य से निकाल दीजिए अन्यथा मैं आपके ऊपर चढ़ाई कर दूंगा।' पृथ्वीराज ने अपने सामन्तों से फिर परामर्श किया और उन लोगों ने अपने निर्णय पर दृढ़ रहना ही पसन्द किया। अरबखां निराश होकर गजनी लौटा और गोरी को सारा हाल कह सुनाया । गोरी ने भी अपने सरदारों से राय ली । सरदारों ने कहा - "भारतवर्ष एक धनी देश है उस पर आक्रमण करके हमें असंख्य धन तो मिलेगा ही हम इस्लाम का प्रचार भी वहां कर सकेंगे । युद्ध के लिए इससे ज्यादा उपयुक्त अवसर और कौनसा मिलेगा।" गोरी इस राय से बड़ा खुश हुआ। उसने लड़ाई की तैयारी प्रारम्भ कर दी। पृथ्वीराज को भी यह खबर मिल गई । पृथ्वीराज ने अपने सामन्तों को बुलाया और यह हुआ कि गोरी को यहां तक आने का मौका न दिया जाय और उसे अपनी सीमा पर ही रोक कर युद्ध किया जाय। जब गौरी के आने की खबर मिली पृथ्वीराज अपनी सेना के साथ आगे बढ़े। मीरहुसेन भी अपनी थोड़ी
हुसेन गजनी से भाग निकला। उसके साथ वह वेश्या भी थी। दोनों ही पृथ्वीराज की शरण में आये। उन्होंने दीनतापूर्वक शरण देने की प्रार्थना की । पृथ्वीराज ने अपने सामन्तों से परामर्श किया और सबकी राय से उसे आश्रय दे दिया। जब गोरी के पास यह समाचार पहुंचा तो उसे बड़ा गुस्सा आया। उसने अब नामक दूत को दो पत्र देकर हिन्दुस्तान भेजा। अरवखां ने पहिले मीरहुसेन को पत्र दिया। पत्र में लिखा था कि यदि तुम चित्ररेखा को वापिस करके अपने अपराध के लिए क्षमा माँगो तो मैं तुम्हें क्षमा कर दूंगा और तुम गजनी में रह सकोगे । मीरहुसेन ने दोनों बातों से इन्कार कर दिया । उसके इन्कार कर देने पर अरबखाँ ने पृथ्वीराज से भेंट की और पत्र दिया। पत्र में लिखा था कि 'मीर हुसेन को अपने राज्य से निकाल दीजिए अन्यथा मैं आपके ऊपर चढ़ाई कर दूंगा।' पृथ्वीराज ने अपने सामन्तों से फिर परामर्श किया और उन लोगों ने अपने निर्णय पर दृढ़ रहना ही पसन्द किया। अरबखां निराश होकर गजनी लौटा और गोरी को सारा हाल कह सुनाया । गोरी ने भी अपने सरदारों से राय ली । सरदारों ने कहा - "भारतवर्ष एक धनी देश है उस पर आक्रमण करके हमें असंख्य धन तो मिलेगा ही हम इस्लाम का प्रचार भी वहां कर सकेंगे । युद्ध के लिए इससे ज्यादा उपयुक्त अवसर और कौनसा मिलेगा।" गोरी इस राय से बड़ा खुश हुआ। उसने लड़ाई की तैयारी प्रारम्भ कर दी। पृथ्वीराज को भी यह खबर मिल गई । पृथ्वीराज ने अपने सामन्तों को बुलाया और यह हुआ कि गोरी को यहां तक आने का मौका न दिया जाय और उसे अपनी सीमा पर ही रोक कर युद्ध किया जाय। जब गौरी के आने की खबर मिली पृथ्वीराज अपनी सेना के साथ आगे बढ़े। मीरहुसेन भी अपनी थोड़ी
आगामी वर्ष की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा के लिए संस्थागत एवं व्यक्तिगत ऑनलाइन आवेदन पत्र अपलोड कराने के लिए डीआईओएस वीके दुबे ने प्रधानाचायोंर् को निर्देश दे दिए हैं। उन्होंने बताया कि सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद प्रयागराज ने कार्यक्रम घोषित कर दिया है। सभी प्रधानाचार्यो को निर्धारित समय में प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए कहा है। डीआईओएस ने बताया कि सभी प्रधानाचार्य द्वारा हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में प्रवेश लेने एवं परीक्षा शुल्क प्राप्त करने की अंतिम तिथि पांच अगस्त निर्धारित की गई है। संस्था के प्रधानाचार्य एक मुश्त कोषागार में जमा करने की अंतिम तिथि 10 अगस्त तक करनी होगी। संस्था के प्रधानाचार्य कोषागार में जमा किए गए शुल्क की सूचना छात्र व छात्राओं के शैक्षिक विवरण परिषद की वेबसाइड पर 16 अगस्त तक अपलोड करने के दिशा निर्देश दिए है। 10 अगस्त के पश्चात प्रति छात्र 100 रुपए विलंब शुल्क के साथ परीक्षा शुल्क चालान के साथ जमा कर सकते है। विलंब शुल्क के साथ जमा चालान के साथ शैक्षिक विवरण 20 अगस्त तक परिषद की वेबसाइड पर अपलोड कर सकते है। परिषद की वेबसाइड पर अपलोड छात्र छात्राओं का शैक्षिक विवरण 21 अगस्त से 31 तक चेक लिस्ट प्राप्त कर सकते है। जो भी त्रुटियां हो वह संस्थाध्यक्ष के माध्यम से संशोधन किया जा सकता है। डीआईओएस ने बताया कि सभी परीक्षा शुल्क पांच प्रतियों में तैयार करके कोषागार में जमा सकते हैं।
आगामी वर्ष की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा के लिए संस्थागत एवं व्यक्तिगत ऑनलाइन आवेदन पत्र अपलोड कराने के लिए डीआईओएस वीके दुबे ने प्रधानाचायोंर् को निर्देश दे दिए हैं। उन्होंने बताया कि सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद प्रयागराज ने कार्यक्रम घोषित कर दिया है। सभी प्रधानाचार्यो को निर्धारित समय में प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए कहा है। डीआईओएस ने बताया कि सभी प्रधानाचार्य द्वारा हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में प्रवेश लेने एवं परीक्षा शुल्क प्राप्त करने की अंतिम तिथि पांच अगस्त निर्धारित की गई है। संस्था के प्रधानाचार्य एक मुश्त कोषागार में जमा करने की अंतिम तिथि दस अगस्त तक करनी होगी। संस्था के प्रधानाचार्य कोषागार में जमा किए गए शुल्क की सूचना छात्र व छात्राओं के शैक्षिक विवरण परिषद की वेबसाइड पर सोलह अगस्त तक अपलोड करने के दिशा निर्देश दिए है। दस अगस्त के पश्चात प्रति छात्र एक सौ रुपयापए विलंब शुल्क के साथ परीक्षा शुल्क चालान के साथ जमा कर सकते है। विलंब शुल्क के साथ जमा चालान के साथ शैक्षिक विवरण बीस अगस्त तक परिषद की वेबसाइड पर अपलोड कर सकते है। परिषद की वेबसाइड पर अपलोड छात्र छात्राओं का शैक्षिक विवरण इक्कीस अगस्त से इकतीस तक चेक लिस्ट प्राप्त कर सकते है। जो भी त्रुटियां हो वह संस्थाध्यक्ष के माध्यम से संशोधन किया जा सकता है। डीआईओएस ने बताया कि सभी परीक्षा शुल्क पांच प्रतियों में तैयार करके कोषागार में जमा सकते हैं।
WhatsApp Chat Lock: यूजर्स की प्राइवेसी और सेफ्टी हुई मजबूत! जानें कैसे करेंगे इस्तेमाल? WhatsApp Chat Lock: मेटा के पॉपुलर मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप आपके लिए एक नया अपडेट लेकर आए हैं। कंपनी ने अपने यूजर्स की सिक्योरिटी और प्राइवेसी के लिए एक नए फीचर को अपडेट करने जा रही है। वॉट्सऐप यूजर्स के लिए चैट लॉक (WhatsApp Chat Lock) को पेश किया जा रहा है। इस फीचर की मदद से यूजर्स अब पर्सनल चैट को लॉक रख सकेंगे। वॉट्सऐपने अपने ब्लॉग पोस्ट में कहा है कि चैट लॉक फीचर यूजर की पर्सनल और इंटीमेट चैट्स को प्रोटेक्ट करने के लिए लाया जा रहा है। - चैट लॉक फीचर की मदद से यूजर किसी खास यूजर या ग्रुप की चैट को लॉक कर सकेगा। - इस फीचर की मदद से यूजर अपने खास कॉन्टेक्ट और ग्रुप को रेगुलर चैट से अलग लिस्ट कर सकेगा। - चैट लॉक की मदद से नोटिफिकेशन पैनल से खास कॉन्टेक्ट के मैसेज को हाइड रखा जा सकेगा। - लॉक्ड चैट्स को लॉक्ड चैट सेक्शन में जोड़ा जा सकेगा। - चैट्स को बायोमैट्रिक, पिन और पासवर्ड से लॉक किया जा सकेगा। - चैट लॉक का इस्तेमाल करने के लिए वॉट्सऐप को अपडेट करना जरूरी होगा। - वॉट्सऐप अपडेट करने के बाद फोन में ऐप ओपन करना होगा। - जिस कॉन्टेक्ट या ग्रुप की चैट लॉक करनी है उसे चैट लिस्ट से सेलेक्ट करना होगा। - कॉन्टेक्ट या ग्रुप की चैट विंडो को ओपन करना होगा। - चैट विंडो पर पर्सन या ग्रुप के नाम पर टैप करना होगा। - ऑप्शन की लिस्ट में ही Chat Lock की फीचर अपीयर होगा। - फीचर का इस्तेमाल करने के लिए टोगल को एनेबल करना होगा। ये भी पढ़ेंः
WhatsApp Chat Lock: यूजर्स की प्राइवेसी और सेफ्टी हुई मजबूत! जानें कैसे करेंगे इस्तेमाल? WhatsApp Chat Lock: मेटा के पॉपुलर मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप आपके लिए एक नया अपडेट लेकर आए हैं। कंपनी ने अपने यूजर्स की सिक्योरिटी और प्राइवेसी के लिए एक नए फीचर को अपडेट करने जा रही है। वॉट्सऐप यूजर्स के लिए चैट लॉक को पेश किया जा रहा है। इस फीचर की मदद से यूजर्स अब पर्सनल चैट को लॉक रख सकेंगे। वॉट्सऐपने अपने ब्लॉग पोस्ट में कहा है कि चैट लॉक फीचर यूजर की पर्सनल और इंटीमेट चैट्स को प्रोटेक्ट करने के लिए लाया जा रहा है। - चैट लॉक फीचर की मदद से यूजर किसी खास यूजर या ग्रुप की चैट को लॉक कर सकेगा। - इस फीचर की मदद से यूजर अपने खास कॉन्टेक्ट और ग्रुप को रेगुलर चैट से अलग लिस्ट कर सकेगा। - चैट लॉक की मदद से नोटिफिकेशन पैनल से खास कॉन्टेक्ट के मैसेज को हाइड रखा जा सकेगा। - लॉक्ड चैट्स को लॉक्ड चैट सेक्शन में जोड़ा जा सकेगा। - चैट्स को बायोमैट्रिक, पिन और पासवर्ड से लॉक किया जा सकेगा। - चैट लॉक का इस्तेमाल करने के लिए वॉट्सऐप को अपडेट करना जरूरी होगा। - वॉट्सऐप अपडेट करने के बाद फोन में ऐप ओपन करना होगा। - जिस कॉन्टेक्ट या ग्रुप की चैट लॉक करनी है उसे चैट लिस्ट से सेलेक्ट करना होगा। - कॉन्टेक्ट या ग्रुप की चैट विंडो को ओपन करना होगा। - चैट विंडो पर पर्सन या ग्रुप के नाम पर टैप करना होगा। - ऑप्शन की लिस्ट में ही Chat Lock की फीचर अपीयर होगा। - फीचर का इस्तेमाल करने के लिए टोगल को एनेबल करना होगा। ये भी पढ़ेंः
काबुल, 20 मई (आईएएनएस)। अफगानिस्तान में गोलीबारी की दो अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 10 ग्रामीण मारे गए, जबकि 14 अन्य घायल हो गए। अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। स्थानीय मीडिया टोलो न्यूज टीवी के अनुसार, पूर्वी परवान प्रांत में चारीकार शहर के खलजई गांव में स्थानीय समयानुसार शाम सात बजे के आसपास नमाज के दौरान इसी तरह के हमले में सात ग्रामीण मारे गए, जबकि 13 अन्य घायल हो गए। मीडिया ने आंतरिक मामलों के मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से कहा कि घायलों को चारीकार के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल किसी भी समूह ने हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है।
काबुल, बीस मई । अफगानिस्तान में गोलीबारी की दो अलग-अलग घटनाओं में कम से कम दस ग्रामीण मारे गए, जबकि चौदह अन्य घायल हो गए। अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। स्थानीय मीडिया टोलो न्यूज टीवी के अनुसार, पूर्वी परवान प्रांत में चारीकार शहर के खलजई गांव में स्थानीय समयानुसार शाम सात बजे के आसपास नमाज के दौरान इसी तरह के हमले में सात ग्रामीण मारे गए, जबकि तेरह अन्य घायल हो गए। मीडिया ने आंतरिक मामलों के मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से कहा कि घायलों को चारीकार के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल किसी भी समूह ने हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है।
मानसून की शुरुआती बारिश ही अब आफत बनकर बरस रही है। सोमवार की शाम ने जहां सबको भिगो दिया, वहीं मंगलवार की सुबह भी बारिश लेकर आई। रुक रुककर हो रही बारिश से पूरा ब्रज सराबोर हो गया है। जल निकासी न होने के कारण सड़़कें तालाब में तब्दील हो गई हैं। सबसे ज्यादा बुरे हाल तो फिरोजाबाद में हैं, जहां कई इलाकों में जलभराव हो गया है। फिरोजाबाद में सोमवार को डेढ़ घंटे की बारिश ने फिर से नगर निगम के दावों पोल खोल दी। झमाझम बारिश से शहर की गलियां ताल तलैया बन गईं। निचले इलाकों में पानी इतना भर गया कि रास्ता निकलना मुश्किल हो रहा था। सड़कों पर तो ये हाल था गाड़ी को धक्का देकर पानी से निकाला आधे से ज्यादा शरीर तो पानी में ही डूबा हुआ था। सड़कें और कॉलोनी में ही नहीं, जिला अस्पताल परिसर भी जलमग्न हो गया। मरीजों को पानी से होकर दवा लेने जाना पड़ा तो सर्विस रोड पर भी पानी भर गया। थाना टूंडला क्षेत्र में जलोपुरा रोड पर बारिश के कारण एक कारखाने की दीवार भर-भराकर गिर गई। दीवार के नीचे दबने से दो किशोर सुमित (16) और अभिषेक (15) की मौत हो गई। जबकि तीन गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया। फिरोजाबाद के किशन नगर में मकान की दीवार गिरने से महिला सहित तीन लोग घायल हो गए। आगरा में मंगलवार सुबह से खुशनुमा मौसम बना हुआ है। सुबह 10 बजे से रिमझिम बारिश होने लगी है। रिमझिम बारिश में ताजमहल सहित ऐतिहासिक इमारतों में पर्यटक मौसम का लुत्फ उठाते नजर आए। हालांकि शहर के कई इलाकों में जलभराव होने के कारण लोगों का परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मौसम के रुख से किसानों के चेहरे खिल गए। तीन दिन से हो रही बरसात के बाद किसानों को मिर्च की खेती में अधिक लाभ होने की उम्मीद जग गई है। बरसात से उन किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ सकता है जिनके खेतों में मक्का पकी हुई खड़ी है। धान के लिए यह बरसात अमृत के समान मानी जा रही है।
मानसून की शुरुआती बारिश ही अब आफत बनकर बरस रही है। सोमवार की शाम ने जहां सबको भिगो दिया, वहीं मंगलवार की सुबह भी बारिश लेकर आई। रुक रुककर हो रही बारिश से पूरा ब्रज सराबोर हो गया है। जल निकासी न होने के कारण सड़़कें तालाब में तब्दील हो गई हैं। सबसे ज्यादा बुरे हाल तो फिरोजाबाद में हैं, जहां कई इलाकों में जलभराव हो गया है। फिरोजाबाद में सोमवार को डेढ़ घंटे की बारिश ने फिर से नगर निगम के दावों पोल खोल दी। झमाझम बारिश से शहर की गलियां ताल तलैया बन गईं। निचले इलाकों में पानी इतना भर गया कि रास्ता निकलना मुश्किल हो रहा था। सड़कों पर तो ये हाल था गाड़ी को धक्का देकर पानी से निकाला आधे से ज्यादा शरीर तो पानी में ही डूबा हुआ था। सड़कें और कॉलोनी में ही नहीं, जिला अस्पताल परिसर भी जलमग्न हो गया। मरीजों को पानी से होकर दवा लेने जाना पड़ा तो सर्विस रोड पर भी पानी भर गया। थाना टूंडला क्षेत्र में जलोपुरा रोड पर बारिश के कारण एक कारखाने की दीवार भर-भराकर गिर गई। दीवार के नीचे दबने से दो किशोर सुमित और अभिषेक की मौत हो गई। जबकि तीन गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया। फिरोजाबाद के किशन नगर में मकान की दीवार गिरने से महिला सहित तीन लोग घायल हो गए। आगरा में मंगलवार सुबह से खुशनुमा मौसम बना हुआ है। सुबह दस बजे से रिमझिम बारिश होने लगी है। रिमझिम बारिश में ताजमहल सहित ऐतिहासिक इमारतों में पर्यटक मौसम का लुत्फ उठाते नजर आए। हालांकि शहर के कई इलाकों में जलभराव होने के कारण लोगों का परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मौसम के रुख से किसानों के चेहरे खिल गए। तीन दिन से हो रही बरसात के बाद किसानों को मिर्च की खेती में अधिक लाभ होने की उम्मीद जग गई है। बरसात से उन किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ सकता है जिनके खेतों में मक्का पकी हुई खड़ी है। धान के लिए यह बरसात अमृत के समान मानी जा रही है।
संयुक्त प्रान्तका दौरा - ११ मिर्जापुर और चुनार गया । चुनार गंगाके किनारे पर स्थित है और ऐतिहासिक महत्त्वका स्थान है। परन्तु इस स्थानका दौरा केवल इसलिए किया गया कि यह स्थान डॉ० भगवानदासने वानप्रस्थ जीवन वितानेके लिए चुना है । वे वहाँ अपनी प्रिय काशी नगरीके, जो उनके जीवन भरके क्रिया-कलापका केन्द्र रही, पास ही पूर्णतः शान्त और सुन्दर वातावरण में रह रहे है और वड़े शहरके शोर और हलचलसे बचे हुए है। चुनारसे हम इलाहाबाद वापस आये । वहाँसे हमें बुन्देलखण्ड जाना था, यह प्रान्तोंके इस बडे समुदाय संयुक्त प्रान्तका अन्तिम गन्तव्य स्थान था । रास्ते में फतेहपुरसे होते हुए हम बुन्देलखण्ड पहुँच गये, निरन्तर भयानक अकालो की चपेट में पड़ते रहने से यह क्षेत्र ऊसर हो चुका था । कुलपहाडमें एक खादी-आश्रम है। बुन्देलखण्डको एकसे ज्यादा खादी केन्द्र और बहुतसे कार्यकर्त्ताओकी जरूरत है। इससे हजारों अवभूखे परिवारोको मदद मिल सकती है और वे इस लायक हो सकते है कि अकालके दिनोमें कठिनाइयोंपर विजय पा सकें और अच्छे दिनोमें भी उनकी नगण्य - सी आमदनीमें इससे वृद्धि हो सकती है। भारतीय किसानको पीढियोसे खुशहालीके वर्षं देखनेको नहीं मिले हैं। बुन्देलखण्डमें कोरी जातिके हजारो परिवार है । उनका परम्परागत धंघा बुनाई है और वे कताईका काम भी करते हैं । चार सदस्योका परिवार जिसके पास एक खड्डी है हर महीने ११ से लेकर १२ रुपये से ज्यादा नही कमाता और इसलिए रागी और वाजरीसे मिलते-जुलते देसी अनाजपर वड़ी मुश्किलसे जैसे-तैसे गुजारा करता है। उन्हें न दूध मिलता है और न घी। उनसे मिलकर बडा दुःख हुआ। कोई कारण नहीं दीखता कि क्यों इन पुरुषों और महिलाओोको वारडोलीकी रानीपरज' जातिके लोगोंकी तरह कुछ ही सालोमें बदला न जा सके । जीवनदायक चरखेके द्वारा उन्हीकी तरह उनके निराश जीवनको भी आशामय बनाया जा सकता है । कुलपहाड़से हम झासीमें दाखिल हुए और वहाँसे उरई, औरैया और अन्तमें इटावा पहुँचे । यहाँ प्रेम महाविद्यालयके स्नातक स्वामी स्वराजस्वरूप, जिन्होने अपनेको देशकी सेवामें लगा दिया है, ग्राम सुधारकका काम करनेकी कोशिश कर रहे है । संयुक्त प्रान्तका दौरा ११ सितम्बरको आगरासे आरम्भ हुआ और २४ नवम्बर को अर्थात् पूरे दो महीने और एक पखवाड़े के बाद इटावामें समाप्त हो गया । यदि अलमोडाके पिछले तीन हफ्ते भी जोड़ दिये जायें तो दौरेमें तीन महीने और एक हफ्ता लगा । मित्रोंको यह जानकर प्रसन्नता होगी कि यद्यपि दौरा निस्सन्देह श्रमसाध्य था, तो भो इस सारी अवधिमें गांधीजीका स्वास्थ्य बहुत अच्छा बना रहा।
संयुक्त प्रान्तका दौरा - ग्यारह मिर्जापुर और चुनार गया । चुनार गंगाके किनारे पर स्थित है और ऐतिहासिक महत्त्वका स्थान है। परन्तु इस स्थानका दौरा केवल इसलिए किया गया कि यह स्थान डॉशून्य भगवानदासने वानप्रस्थ जीवन वितानेके लिए चुना है । वे वहाँ अपनी प्रिय काशी नगरीके, जो उनके जीवन भरके क्रिया-कलापका केन्द्र रही, पास ही पूर्णतः शान्त और सुन्दर वातावरण में रह रहे है और वड़े शहरके शोर और हलचलसे बचे हुए है। चुनारसे हम इलाहाबाद वापस आये । वहाँसे हमें बुन्देलखण्ड जाना था, यह प्रान्तोंके इस बडे समुदाय संयुक्त प्रान्तका अन्तिम गन्तव्य स्थान था । रास्ते में फतेहपुरसे होते हुए हम बुन्देलखण्ड पहुँच गये, निरन्तर भयानक अकालो की चपेट में पड़ते रहने से यह क्षेत्र ऊसर हो चुका था । कुलपहाडमें एक खादी-आश्रम है। बुन्देलखण्डको एकसे ज्यादा खादी केन्द्र और बहुतसे कार्यकर्त्ताओकी जरूरत है। इससे हजारों अवभूखे परिवारोको मदद मिल सकती है और वे इस लायक हो सकते है कि अकालके दिनोमें कठिनाइयोंपर विजय पा सकें और अच्छे दिनोमें भी उनकी नगण्य - सी आमदनीमें इससे वृद्धि हो सकती है। भारतीय किसानको पीढियोसे खुशहालीके वर्षं देखनेको नहीं मिले हैं। बुन्देलखण्डमें कोरी जातिके हजारो परिवार है । उनका परम्परागत धंघा बुनाई है और वे कताईका काम भी करते हैं । चार सदस्योका परिवार जिसके पास एक खड्डी है हर महीने ग्यारह से लेकर बारह रुपयापये से ज्यादा नही कमाता और इसलिए रागी और वाजरीसे मिलते-जुलते देसी अनाजपर वड़ी मुश्किलसे जैसे-तैसे गुजारा करता है। उन्हें न दूध मिलता है और न घी। उनसे मिलकर बडा दुःख हुआ। कोई कारण नहीं दीखता कि क्यों इन पुरुषों और महिलाओोको वारडोलीकी रानीपरज' जातिके लोगोंकी तरह कुछ ही सालोमें बदला न जा सके । जीवनदायक चरखेके द्वारा उन्हीकी तरह उनके निराश जीवनको भी आशामय बनाया जा सकता है । कुलपहाड़से हम झासीमें दाखिल हुए और वहाँसे उरई, औरैया और अन्तमें इटावा पहुँचे । यहाँ प्रेम महाविद्यालयके स्नातक स्वामी स्वराजस्वरूप, जिन्होने अपनेको देशकी सेवामें लगा दिया है, ग्राम सुधारकका काम करनेकी कोशिश कर रहे है । संयुक्त प्रान्तका दौरा ग्यारह सितम्बरको आगरासे आरम्भ हुआ और चौबीस नवम्बर को अर्थात् पूरे दो महीने और एक पखवाड़े के बाद इटावामें समाप्त हो गया । यदि अलमोडाके पिछले तीन हफ्ते भी जोड़ दिये जायें तो दौरेमें तीन महीने और एक हफ्ता लगा । मित्रोंको यह जानकर प्रसन्नता होगी कि यद्यपि दौरा निस्सन्देह श्रमसाध्य था, तो भो इस सारी अवधिमें गांधीजीका स्वास्थ्य बहुत अच्छा बना रहा।
Husnn Hai Suhana Song Twitter Review: ट्विटर पर 'कुली नं 1' के नए गाने 'हुस्न है सुहाना' को जबरदस्त रिस्पांस मिल रहा है। वरुण धवन और सारा अली खान के फैंस का कहना है कि यह साल 2020 का सबसे धमाकेदार गाना है। बॉलीवुड कलाकार वरुण धवन (Varun Dhawan) और सारा अली खान की अपकमिंग फिल्म 'कुली नं 1' (Coolie No 1) का लेटेस्ट सॉन्ग 'हुस्न है सुहाना' कुछ देर पहले ही रिलीज हुआ है, जिसे फैंस से जबरदस्त रिस्पांस मिला है। यह गाना 90 के दशक में रिलीज हुई गोविंदा और करिश्मा कपूर की सुपरहिट फिल्म 'कुली नं 1' का रीमेक वर्जन है, जिस कारण फैंस इसका इंतजार बेसब्री से कर रहे थे। फैंस जानना चाहते थे कि 'हुस्न है सुहाना' गाने के नए वर्जन में मेकर्स क्या-क्या बदलाव करेंगे और इस पर वरुण धवन और सारा अली खान कैसा परफॉर्म करेंगे ? 'हुस्न है सुहाना' गाने को रिलीज हुए अभी कुछ ही समय हुआ है और दर्शकों ने इस पर प्यार बरसाना शुरू कर दिया है। ट्विटर पर 'हुस्न है सुहाना' गाने को जैसा रिस्पांस मिल रहा है, उसे देखकर ऐसा कहा जा सकता है कि वरुण और सारा की जबरदस्त केमिस्ट्री सभी के सिर चढ़कर बोल रही है। एक फैन न कमेंट में लिखा है, 'यह गाना कमाल का है। इसमें वरुण और सारा की केमिस्ट्री देखने वाली है। मुझे खुशी है कि गाने के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है।' तो वहीं दूसरे फैन ने लिखा है, 'गाने में वरुण और सारा ने जबरदस्त परफॉर्मेंस दी है। दोनों की जोड़ी कमाल की है। मैं इस गाने को शब्दों में बयां नहीं कर सकता हूं। इस गाने को देखने के बाद मैं फिल्म के लिए एक्साइटिड हो गया हूं।' फिल्म 'कुली नं 1' के लेटेस्ट गाने 'हुस्न है सुहाना' को दर्शकों ने जैसा रिस्पांस दिया है, उससे साफ है कि आने वाले समय में वरुण धवन और सारा अली खान की फिल्म को लेकर उत्सुकता और बढ़ जाएगी। वैसे आपको 'हुस्न है सुहाना' गाना कैसा लगा, हमें कमेंट करके जरूर बताएं। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
Husnn Hai Suhana Song Twitter Review: ट्विटर पर 'कुली नं एक' के नए गाने 'हुस्न है सुहाना' को जबरदस्त रिस्पांस मिल रहा है। वरुण धवन और सारा अली खान के फैंस का कहना है कि यह साल दो हज़ार बीस का सबसे धमाकेदार गाना है। बॉलीवुड कलाकार वरुण धवन और सारा अली खान की अपकमिंग फिल्म 'कुली नं एक' का लेटेस्ट सॉन्ग 'हुस्न है सुहाना' कुछ देर पहले ही रिलीज हुआ है, जिसे फैंस से जबरदस्त रिस्पांस मिला है। यह गाना नब्बे के दशक में रिलीज हुई गोविंदा और करिश्मा कपूर की सुपरहिट फिल्म 'कुली नं एक' का रीमेक वर्जन है, जिस कारण फैंस इसका इंतजार बेसब्री से कर रहे थे। फैंस जानना चाहते थे कि 'हुस्न है सुहाना' गाने के नए वर्जन में मेकर्स क्या-क्या बदलाव करेंगे और इस पर वरुण धवन और सारा अली खान कैसा परफॉर्म करेंगे ? 'हुस्न है सुहाना' गाने को रिलीज हुए अभी कुछ ही समय हुआ है और दर्शकों ने इस पर प्यार बरसाना शुरू कर दिया है। ट्विटर पर 'हुस्न है सुहाना' गाने को जैसा रिस्पांस मिल रहा है, उसे देखकर ऐसा कहा जा सकता है कि वरुण और सारा की जबरदस्त केमिस्ट्री सभी के सिर चढ़कर बोल रही है। एक फैन न कमेंट में लिखा है, 'यह गाना कमाल का है। इसमें वरुण और सारा की केमिस्ट्री देखने वाली है। मुझे खुशी है कि गाने के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है।' तो वहीं दूसरे फैन ने लिखा है, 'गाने में वरुण और सारा ने जबरदस्त परफॉर्मेंस दी है। दोनों की जोड़ी कमाल की है। मैं इस गाने को शब्दों में बयां नहीं कर सकता हूं। इस गाने को देखने के बाद मैं फिल्म के लिए एक्साइटिड हो गया हूं।' फिल्म 'कुली नं एक' के लेटेस्ट गाने 'हुस्न है सुहाना' को दर्शकों ने जैसा रिस्पांस दिया है, उससे साफ है कि आने वाले समय में वरुण धवन और सारा अली खान की फिल्म को लेकर उत्सुकता और बढ़ जाएगी। वैसे आपको 'हुस्न है सुहाना' गाना कैसा लगा, हमें कमेंट करके जरूर बताएं। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
बॉलीवुड डायरेक्टर संजय लीला भंसाली फरवरी, 2019 में हुई बालाकोट एयर स्ट्राइक पर फिल्म बनाने जा रहे हैं। बालाकोट एयर स्ट्राइक के ऊपर बन रही फिल्म को भंसाली टी-सीरीज के मालिक भूषण कुमार के साथ मिलकर प्रोड्यूस करेंगे। मुंबईः बॉलीवुड डायरेक्टर संजय लीला भंसाली फरवरी, 2019 में हुई बालाकोट एयर स्ट्राइक पर फिल्म बनाने जा रहे हैं। बालाकोट एयर स्ट्राइक के ऊपर बन रही फिल्म को भंसाली टी-सीरीज के मालिक भूषण कुमार के साथ मिलकर प्रोड्यूस करेंगे। इस फिल्म को अभिषेक कपूर डायरेक्ट करेंगे। बता दें कि, अभिषेक कपूर ने इससे पहले 'केदारनाथ', 'काई पो छे' और 'रॉकऑन' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया है। इस फिल्म की ऑफिशियल अनाउंसमेंट हो चुकी है। इस बात की जानकारी ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने सोशल मीडिया पर दी है। ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि, संजय लीला भंसाली, भूषण कुमार, महावीर जैन और प्रज्ञा कपूर 2019 में हुई बालाकोट एयर स्ट्राइक पर फिल्म बनाएंगे। फिल्म का निर्देशन नेशनल अवॉर्ड जीत चुके अभिषेक कपूर करेंगे। ये फिल्म भारतीय जवानों के लिए एक ट्रिब्यूट होगी। अभी इस फिल्म की कास्ट को लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है। बता दें कि, संजय लीला भंसाली से पहले एक्टर विवेक ओबेरॉय भी बालाकोट एयर स्ट्राइक पर फिल्म बनाने की अनाउंसमेंट कर चुके हैं। विवेक ओबेरॉय की फिल्म अगले साल यानि 2020 में रिलीज होगी। इस फिल्म की शूटिंग जम्मू और कश्मीर, दिल्ली और आगरा में होगी। गौरतलब है कि, 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों पर आतंकी हमला किया गया था, जिसमें भारत ने अपने 40 से अधिक जवानों को खो दिया था। जिसके जवाबी कार्रवाई में भारतीय वायुसेना ने 26 फरवरी को एयर स्ट्राइक करते हुए पाकिस्तान में स्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए, उन्हें पूरी तरह से तबाह कर दिया था।
बॉलीवुड डायरेक्टर संजय लीला भंसाली फरवरी, दो हज़ार उन्नीस में हुई बालाकोट एयर स्ट्राइक पर फिल्म बनाने जा रहे हैं। बालाकोट एयर स्ट्राइक के ऊपर बन रही फिल्म को भंसाली टी-सीरीज के मालिक भूषण कुमार के साथ मिलकर प्रोड्यूस करेंगे। मुंबईः बॉलीवुड डायरेक्टर संजय लीला भंसाली फरवरी, दो हज़ार उन्नीस में हुई बालाकोट एयर स्ट्राइक पर फिल्म बनाने जा रहे हैं। बालाकोट एयर स्ट्राइक के ऊपर बन रही फिल्म को भंसाली टी-सीरीज के मालिक भूषण कुमार के साथ मिलकर प्रोड्यूस करेंगे। इस फिल्म को अभिषेक कपूर डायरेक्ट करेंगे। बता दें कि, अभिषेक कपूर ने इससे पहले 'केदारनाथ', 'काई पो छे' और 'रॉकऑन' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया है। इस फिल्म की ऑफिशियल अनाउंसमेंट हो चुकी है। इस बात की जानकारी ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने सोशल मीडिया पर दी है। ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि, संजय लीला भंसाली, भूषण कुमार, महावीर जैन और प्रज्ञा कपूर दो हज़ार उन्नीस में हुई बालाकोट एयर स्ट्राइक पर फिल्म बनाएंगे। फिल्म का निर्देशन नेशनल अवॉर्ड जीत चुके अभिषेक कपूर करेंगे। ये फिल्म भारतीय जवानों के लिए एक ट्रिब्यूट होगी। अभी इस फिल्म की कास्ट को लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है। बता दें कि, संजय लीला भंसाली से पहले एक्टर विवेक ओबेरॉय भी बालाकोट एयर स्ट्राइक पर फिल्म बनाने की अनाउंसमेंट कर चुके हैं। विवेक ओबेरॉय की फिल्म अगले साल यानि दो हज़ार बीस में रिलीज होगी। इस फिल्म की शूटिंग जम्मू और कश्मीर, दिल्ली और आगरा में होगी। गौरतलब है कि, चौदह फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों पर आतंकी हमला किया गया था, जिसमें भारत ने अपने चालीस से अधिक जवानों को खो दिया था। जिसके जवाबी कार्रवाई में भारतीय वायुसेना ने छब्बीस फरवरी को एयर स्ट्राइक करते हुए पाकिस्तान में स्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए, उन्हें पूरी तरह से तबाह कर दिया था।
प्रायः हथेली पर अंगुलियों के मूल मे, कलाई के ऊपर, अंगूठे के नीचे, कुछ उभरी हुई मांसपेशियां दिखायी देती हैं, हस्तरेखा विज्ञान में इन्हें पर्वत कहा जाता है। संरचना के अनुसार ये फुसफुसे मांस पिण्ड होते हैं जिनमें रक्त और नाडि़यों की कोशिकाओं का सूक्ष्म, सघन समूह विखरा होता है। प्रत्येक पर्वत मस्तिष्क के अलग-अलग भागों से नाडि़यों द्वारा सम्बन्धित रहता है, इस प्रकार वह अलग-अलग मानसिक शक्तियों को प्रकट करता है। हथेली के बीच का भाग जो कि चारों ओर पर्वतों से घिरा होता है, इन पर्वतों के नाम विभिन्न ग्रहों के नाम पर सुविधा के दृष्टिकोण से रखे गये हैं, ये पर्वत सात हैं। हथेली में इनके विकसित अथवा अविकसित या किसी एक पूर्ण विकास के आधार पर भी कुछ विद्वान इन्हें सात वर्गों में विभाविजत करते हैं। बुध पर्वत- कनिष्ठा के निम्न भाग में यह क्षेत्र स्थित होता है जिससे रोमांस, बौद्धिक क्षमता, प्रेम, परिवर्तन, यात्रा, आदि से सम्बन्धी विचार किये जाते हैं। हाथ अगर अनुकूल हो तो ये गुण शुभ फल देते हैं, अगर प्रतिकूल हो तो अशुभ फल को जानना चाहिए। चन्द्र पर्वत- मंगल पर्वत के नीचे और शुक्र पर्वत के विपरीत दिशा में चंद्र पर्वत होता है। यह कल्पना, आदर्श, कला साहित्य के प्रति लगाव आदि को प्रदर्शित करता है। मंगल पर्वत- यह युद्ध में सौर्य की भावना, सक्रियता, साहस, भावना आदि प्रदान करता है। यदि यह क्षेत्र ज्यादा उन्नत युक्त होगा तो व्यक्ति में लड़ाई, -हजयगड़े की भावना उत्पन्न करता है यह शुक्र पर्वत के बगल में होता है। दूसरा चन्द्र और बुध के मध्य पाया जाता है जो कि निश्चित साहस, आत्मनियन्त्रण, निराशा और गलती के विराधे की क्षमता का सूचक है। सूर्य पर्वत- यह क्षेत्र अनामिका के आधार में स्थित होता है, यदि यह क्षेत्र विकसित होगा तो व्यक्ति को कला के प्रति सफलता प्रदान करता है। साहित्य, कविता, संगीत तथा आदर्श एवं उच्च विचारों के प्रति रुचि एवं सफलता प्राप्त होती है। गुरु पर्वत- तर्जनी के मूल में जो उभार दिखायी देता है वह गुरुपर्वत है। गुरु पर्वत उन्नत होने पर व्यक्ति में महत्वाकांक्षा और गर्व की भावना अधिक होती है। उत्साह एवं शान्ती की कामना का यह सूचक है, यदि व्यक्ति के हाथ में अविकसित होगा तो धार्मिक भावना में कमी बड़ों के प्रति अश्रद्धा तथा अधिक विकसित होने पर व्यक्ति में अहंकार उत्पन्न होता है। शुक्र पर्वत- यह क्षेत्र अंगूठे के मूल स्थान के नीचे स्थित होता है। यह असामान्य ठंग से विकसित होने पर व्यक्ति की इच्छा, कला, भावनात्मक सम्बन्ध, सौन्दर्य पुजारी के रुप में जाना जाता है। यह पर्वत हाथ में सबसे महत्त्वपूर्ण रक्त कोश बनाता है जो हथेली का बड़ा विकास है। यदि शुक्र पर्वत सुविकसित होगा तो स्वास्थ्य उत्तम रहता है यही क्षेत्र छोटा अथवा सामान्य से कम होने पर या अविकसित होने पर स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है तथा काम शक्ति की भी कमी होती है। यदि यह क्षेत्र अधिक विकसित या उभरा होगा तो वह स्त्री/पुरुष-विपरीत लिंग के प्रति कामोन्माद प्रकट करता है तथा सौंदर्य के प्रति रुचि होती है ऐसे जातक के चरित्र को भी संदेह की नजर से देखा जाता है। शनि पर्वत-यह पर्वत मध्यमा के मूल में होता है, यह अधिक विकसित होने से कार्य के प्रति रुचि एवं क्षमता उत्पन्न करता है, दोषयुक्त शनि पर्वत इसके विपरीत परिणाम देता है। यह शान्ति कार्य के प्रति लगाव, एकान्तवास तथा धन आदि के बारे में जानकारी देता है।
प्रायः हथेली पर अंगुलियों के मूल मे, कलाई के ऊपर, अंगूठे के नीचे, कुछ उभरी हुई मांसपेशियां दिखायी देती हैं, हस्तरेखा विज्ञान में इन्हें पर्वत कहा जाता है। संरचना के अनुसार ये फुसफुसे मांस पिण्ड होते हैं जिनमें रक्त और नाडि़यों की कोशिकाओं का सूक्ष्म, सघन समूह विखरा होता है। प्रत्येक पर्वत मस्तिष्क के अलग-अलग भागों से नाडि़यों द्वारा सम्बन्धित रहता है, इस प्रकार वह अलग-अलग मानसिक शक्तियों को प्रकट करता है। हथेली के बीच का भाग जो कि चारों ओर पर्वतों से घिरा होता है, इन पर्वतों के नाम विभिन्न ग्रहों के नाम पर सुविधा के दृष्टिकोण से रखे गये हैं, ये पर्वत सात हैं। हथेली में इनके विकसित अथवा अविकसित या किसी एक पूर्ण विकास के आधार पर भी कुछ विद्वान इन्हें सात वर्गों में विभाविजत करते हैं। बुध पर्वत- कनिष्ठा के निम्न भाग में यह क्षेत्र स्थित होता है जिससे रोमांस, बौद्धिक क्षमता, प्रेम, परिवर्तन, यात्रा, आदि से सम्बन्धी विचार किये जाते हैं। हाथ अगर अनुकूल हो तो ये गुण शुभ फल देते हैं, अगर प्रतिकूल हो तो अशुभ फल को जानना चाहिए। चन्द्र पर्वत- मंगल पर्वत के नीचे और शुक्र पर्वत के विपरीत दिशा में चंद्र पर्वत होता है। यह कल्पना, आदर्श, कला साहित्य के प्रति लगाव आदि को प्रदर्शित करता है। मंगल पर्वत- यह युद्ध में सौर्य की भावना, सक्रियता, साहस, भावना आदि प्रदान करता है। यदि यह क्षेत्र ज्यादा उन्नत युक्त होगा तो व्यक्ति में लड़ाई, -हजयगड़े की भावना उत्पन्न करता है यह शुक्र पर्वत के बगल में होता है। दूसरा चन्द्र और बुध के मध्य पाया जाता है जो कि निश्चित साहस, आत्मनियन्त्रण, निराशा और गलती के विराधे की क्षमता का सूचक है। सूर्य पर्वत- यह क्षेत्र अनामिका के आधार में स्थित होता है, यदि यह क्षेत्र विकसित होगा तो व्यक्ति को कला के प्रति सफलता प्रदान करता है। साहित्य, कविता, संगीत तथा आदर्श एवं उच्च विचारों के प्रति रुचि एवं सफलता प्राप्त होती है। गुरु पर्वत- तर्जनी के मूल में जो उभार दिखायी देता है वह गुरुपर्वत है। गुरु पर्वत उन्नत होने पर व्यक्ति में महत्वाकांक्षा और गर्व की भावना अधिक होती है। उत्साह एवं शान्ती की कामना का यह सूचक है, यदि व्यक्ति के हाथ में अविकसित होगा तो धार्मिक भावना में कमी बड़ों के प्रति अश्रद्धा तथा अधिक विकसित होने पर व्यक्ति में अहंकार उत्पन्न होता है। शुक्र पर्वत- यह क्षेत्र अंगूठे के मूल स्थान के नीचे स्थित होता है। यह असामान्य ठंग से विकसित होने पर व्यक्ति की इच्छा, कला, भावनात्मक सम्बन्ध, सौन्दर्य पुजारी के रुप में जाना जाता है। यह पर्वत हाथ में सबसे महत्त्वपूर्ण रक्त कोश बनाता है जो हथेली का बड़ा विकास है। यदि शुक्र पर्वत सुविकसित होगा तो स्वास्थ्य उत्तम रहता है यही क्षेत्र छोटा अथवा सामान्य से कम होने पर या अविकसित होने पर स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है तथा काम शक्ति की भी कमी होती है। यदि यह क्षेत्र अधिक विकसित या उभरा होगा तो वह स्त्री/पुरुष-विपरीत लिंग के प्रति कामोन्माद प्रकट करता है तथा सौंदर्य के प्रति रुचि होती है ऐसे जातक के चरित्र को भी संदेह की नजर से देखा जाता है। शनि पर्वत-यह पर्वत मध्यमा के मूल में होता है, यह अधिक विकसित होने से कार्य के प्रति रुचि एवं क्षमता उत्पन्न करता है, दोषयुक्त शनि पर्वत इसके विपरीत परिणाम देता है। यह शान्ति कार्य के प्रति लगाव, एकान्तवास तथा धन आदि के बारे में जानकारी देता है।
भोपाल , मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय पर्यटन दिवस पर पर्यटन प्रेमियों को प्रदेश में आने का आमंत्रण देते हुए सभी लोगों को शुभकामनाएं दी है। चौहान ने आज ट्वीट के माध्यम से कहा कि पर्यटन से जीवन में उत्साह, उल्लास और आनंद की वृद्धि होती है तथा ज्ञान एवं अनुभव भी बढ़ता है। पर्यटन के आनंद के लिए मैं पर्यटन प्रेमियों को मैं मध्यप्रदेश में आमंत्रित करता हूं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में भीमबैठका, सांची स्तूप, धुंआधार जलप्रपात, कान्हा राष्ट्रीय उद्यान और अनेक अनूठे पर्यटन स्थल हैं। यहां के अद्वितीय प्राकृतिक सौंदर्य ने अब तक किसी को निराश नहीं किया है। आपका भी अंतर्मन भाव-विभोर हो जायेगा। प्रदेश में पधारिये और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लीजिए।
भोपाल , मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय पर्यटन दिवस पर पर्यटन प्रेमियों को प्रदेश में आने का आमंत्रण देते हुए सभी लोगों को शुभकामनाएं दी है। चौहान ने आज ट्वीट के माध्यम से कहा कि पर्यटन से जीवन में उत्साह, उल्लास और आनंद की वृद्धि होती है तथा ज्ञान एवं अनुभव भी बढ़ता है। पर्यटन के आनंद के लिए मैं पर्यटन प्रेमियों को मैं मध्यप्रदेश में आमंत्रित करता हूं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में भीमबैठका, सांची स्तूप, धुंआधार जलप्रपात, कान्हा राष्ट्रीय उद्यान और अनेक अनूठे पर्यटन स्थल हैं। यहां के अद्वितीय प्राकृतिक सौंदर्य ने अब तक किसी को निराश नहीं किया है। आपका भी अंतर्मन भाव-विभोर हो जायेगा। प्रदेश में पधारिये और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लीजिए।
गुरुग्रामः गुरुग्राम की एक आवासीय सोसायटी में दो वर्षीय बच्ची के साथ एक अज्ञात आदमी द्वारा कथित तौर पर बलात्कार करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने रविवार को बताया कि खेरकी दौला थाने में पॉक्सो कानून के अनुसार प्राथमिकी दर्ज की गयी है। ऑफिसरों के अनुसार पुलिस को इस मुद्दे में एक ट्रक चालक पर शक है। पुलिस ने बताया कि घटना रविवार को सेक्टर-81 की एक सोसायटी के परिसर में अपराह्न लगभग दो बजे घटी। पुलिस के मुताबिक पीड़ित बच्ची एक घरेलू सहायिका की बेटी है। पुलिस ने बताया कि एक अन्य घटना में सोहना क्षेत्र के एक गांव में एक खेल आयोजन के दौरान तीन लड़कों ने आठवीं कक्षा की लड़की को कथित रूप से उसके विद्यालय से अगवा कर उसके साथ बलात्कार किया। पुलिस ने बताया कि तीनों ने लड़की का आपत्तिजनक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी डाल दिया। पुलिस उपाधीक्षक उपासना ने बताया कि पुलिस आरोपियों को पकड़ने के लिए दबिश दे रही है।
गुरुग्रामः गुरुग्राम की एक आवासीय सोसायटी में दो वर्षीय बच्ची के साथ एक अज्ञात आदमी द्वारा कथित तौर पर बलात्कार करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने रविवार को बताया कि खेरकी दौला थाने में पॉक्सो कानून के अनुसार प्राथमिकी दर्ज की गयी है। ऑफिसरों के अनुसार पुलिस को इस मुद्दे में एक ट्रक चालक पर शक है। पुलिस ने बताया कि घटना रविवार को सेक्टर-इक्यासी की एक सोसायटी के परिसर में अपराह्न लगभग दो बजे घटी। पुलिस के मुताबिक पीड़ित बच्ची एक घरेलू सहायिका की बेटी है। पुलिस ने बताया कि एक अन्य घटना में सोहना क्षेत्र के एक गांव में एक खेल आयोजन के दौरान तीन लड़कों ने आठवीं कक्षा की लड़की को कथित रूप से उसके विद्यालय से अगवा कर उसके साथ बलात्कार किया। पुलिस ने बताया कि तीनों ने लड़की का आपत्तिजनक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी डाल दिया। पुलिस उपाधीक्षक उपासना ने बताया कि पुलिस आरोपियों को पकड़ने के लिए दबिश दे रही है।
शामली जिले में शनिवार को बदमाशों ने एक युवक को इसलिए चाकुओं से गोद डाला, क्योंकि युवक ने बदमाशों को एक छात्रा से छेड़छाड़ करने का विरोध जताया था. बताया जाता है छेड़छाड़ का विरोध करने पर बाइक सवार करीब आधा दर्जन बदमाशों ने युवक पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला किया, जिससे युवक गंभीर रूप से घायल हो गया. रिपोर्ट के मुताबिक मामला आदर्शमण्डी थाना क्षेत्र के मौहल्ला रेलपार का है, जहां आरोपी बदमाश ट्यूशन जा रही लड़कियों के साथ छेड़छाड़ कर रहे थे और जब वहां मौजूद पीड़ित युवक अनूप ने छेड़छाड़ का विरोध किया तो उन्होंने उस पर चाकुओं से हमला कर दिया. उन्होंने पीड़ित युवक पर चाकुओं से करीब 8 बार ताबड़तोड़ वार किया और घायल अवस्था में युवक को छोड़कर वहां से फरार हो गए. सूचना पाकर मौके पहुंची पुलिस ने घायल युवक को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी गंभीर हालत को देखते हुए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है. पुलिस तहरीर आने के बाद मामले की जांच की बात कह रही है. पूरे मामले में एएसपी अजय प्रताप सिंह का कहना है कि पुलिस को मारपीट की सूचना मिली थी और मौके पर पहुंचकर पुलिस ने घायल को अस्पताल में भर्ती कराया. उन्होंने बताया कि जांच में पता चला है कि किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था, लेकिन पीड़ित पक्ष की तरफ से तहरीर आने के बाद ही मामले की सत्यता का पता चल पाएगा. (रिपोर्टर, शामली) .
शामली जिले में शनिवार को बदमाशों ने एक युवक को इसलिए चाकुओं से गोद डाला, क्योंकि युवक ने बदमाशों को एक छात्रा से छेड़छाड़ करने का विरोध जताया था. बताया जाता है छेड़छाड़ का विरोध करने पर बाइक सवार करीब आधा दर्जन बदमाशों ने युवक पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला किया, जिससे युवक गंभीर रूप से घायल हो गया. रिपोर्ट के मुताबिक मामला आदर्शमण्डी थाना क्षेत्र के मौहल्ला रेलपार का है, जहां आरोपी बदमाश ट्यूशन जा रही लड़कियों के साथ छेड़छाड़ कर रहे थे और जब वहां मौजूद पीड़ित युवक अनूप ने छेड़छाड़ का विरोध किया तो उन्होंने उस पर चाकुओं से हमला कर दिया. उन्होंने पीड़ित युवक पर चाकुओं से करीब आठ बार ताबड़तोड़ वार किया और घायल अवस्था में युवक को छोड़कर वहां से फरार हो गए. सूचना पाकर मौके पहुंची पुलिस ने घायल युवक को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी गंभीर हालत को देखते हुए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है. पुलिस तहरीर आने के बाद मामले की जांच की बात कह रही है. पूरे मामले में एएसपी अजय प्रताप सिंह का कहना है कि पुलिस को मारपीट की सूचना मिली थी और मौके पर पहुंचकर पुलिस ने घायल को अस्पताल में भर्ती कराया. उन्होंने बताया कि जांच में पता चला है कि किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था, लेकिन पीड़ित पक्ष की तरफ से तहरीर आने के बाद ही मामले की सत्यता का पता चल पाएगा. .
पूनम पांडे ( Poonam Pandey), सारा खान (Sara Khan), करणवीर बोहरा (Karanvir Bohra) जैसे फेमस सेलेब्स ने ओटीटी (OTT) के रियलिटी शो लॉक अप (Lock upp) में हिस्सा लिया है। इस शो को कंगना रनौत (Kangana Ranaut) होस्ट कर रही हैं। ओटीटी पर 27 फरवरी से एकता कपूर का रियलिटी शो लॉकअप 13 कैदियों के साथ शुरू हो चुका है। उन 13 कैदियों में से एक हैं शिवम शर्मा। शिवम शो के प्रीमियर पर ही कंगना रनौत से फ्लर्ट करते नजर आए थे। शिवम शर्मा शो में पहले ही दिन नॉमिनेशन टास्क में सिद्धार्थ शर्मा से झगड़ पड़े। हालांकि टास्क खत्म होने के बाद दोनों ने एक दूसरे को गले लगाकर माफी भी मांगी। आइए जानते हैं कौन हैं शिवम शर्मा। दिल्ली के रहने वाले शिवम शर्मा मॉडल के साथ-साथ टीवी एक्टर भी हैं। साल 2015 में 'दिल को आज फिर जीने की तमन्ना है' सीरियल से इन्होंने एक्टिंग में डेब्यू किया था। शिवम को असली पहचान 'स्प्लिट्सविला' 13 से मिली थी। 'स्प्लिट्सविला' 13 में सुर्खियों में बने रहना शिवम को अच्छे से आता था। हालांकि वो ये शो जीत नहीं पाए। पलक के साथ उनकी जोड़ी फर्स्ट रनरअप रही थी। हर शो में ये अपनी शायरी के लिए जाने जाते हैं। शो में बने रहने के लिए झगड़ा करना इनकी स्ट्रेटेजी है। तभी आते ही इन्होंने सिद्धार्थ से पंगा ले लिया। अब इनका ये गेम प्लान इन्हें लॉकअप शो का विनर बनाता है या नहीं ये तो वक्त बताएगा। (All Photos: Shivam Sharma Instagram & Social Media)
पूनम पांडे , सारा खान , करणवीर बोहरा जैसे फेमस सेलेब्स ने ओटीटी के रियलिटी शो लॉक अप में हिस्सा लिया है। इस शो को कंगना रनौत होस्ट कर रही हैं। ओटीटी पर सत्ताईस फरवरी से एकता कपूर का रियलिटी शो लॉकअप तेरह कैदियों के साथ शुरू हो चुका है। उन तेरह कैदियों में से एक हैं शिवम शर्मा। शिवम शो के प्रीमियर पर ही कंगना रनौत से फ्लर्ट करते नजर आए थे। शिवम शर्मा शो में पहले ही दिन नॉमिनेशन टास्क में सिद्धार्थ शर्मा से झगड़ पड़े। हालांकि टास्क खत्म होने के बाद दोनों ने एक दूसरे को गले लगाकर माफी भी मांगी। आइए जानते हैं कौन हैं शिवम शर्मा। दिल्ली के रहने वाले शिवम शर्मा मॉडल के साथ-साथ टीवी एक्टर भी हैं। साल दो हज़ार पंद्रह में 'दिल को आज फिर जीने की तमन्ना है' सीरियल से इन्होंने एक्टिंग में डेब्यू किया था। शिवम को असली पहचान 'स्प्लिट्सविला' तेरह से मिली थी। 'स्प्लिट्सविला' तेरह में सुर्खियों में बने रहना शिवम को अच्छे से आता था। हालांकि वो ये शो जीत नहीं पाए। पलक के साथ उनकी जोड़ी फर्स्ट रनरअप रही थी। हर शो में ये अपनी शायरी के लिए जाने जाते हैं। शो में बने रहने के लिए झगड़ा करना इनकी स्ट्रेटेजी है। तभी आते ही इन्होंने सिद्धार्थ से पंगा ले लिया। अब इनका ये गेम प्लान इन्हें लॉकअप शो का विनर बनाता है या नहीं ये तो वक्त बताएगा।
है कि जल सूर्य एव चन्द्र को किरणा, वायु सम्बन्ध, गोबर एव गोमूत्र से शुद्ध हो जाता है। इनमें कुछ पदार्थ आधुनिक वैज्ञानिक सोजी से शुद्धिकारक मान लिये गये हैं। एक स्मृति-वचन (भपराकं, १० २७३) के अनुसार वन मे प्रपा (पोसरा या प्याऊ) या कूप के पास रखे हुए घडे ( जिससे काई भी कूप से जल निकाल सकता है) का जल या पत्थर या लक्डी वाले पात्र ( नोरामोवे लिए रहते हैं) का एवं नर्म-पात्र (चरम, मशव आदि) का जल, मले हो उससे सूद का कोई सम्बन्ध न हो, पीने के अयोग्य ठहराया गया है, किन्तु आपत-काल मे ऐसा जल जितना चाहे उतना पोया जा सकता है। इससे प्रकट होता है कि प्राचीन काल मे मो जलाभाव में जल चर्म-पात्र या ढोलक (मशक, जिसे आजकल मिस्तो काम मे लाते है) मे भरकर लाया जाता था और द्विज लोग भी उसे प्रयोग में लाते थे।" अब हम धातुओ एवं पात्रा की शुद्धि की चर्चा करेंगे। बी०६० मू० (१९५१-३४-३५ एव ११६१३७-४१), वसिष्ठ (३७५८ एव ६१-६३), मनु (५/१११-११४), याज्ञ० ( १८१८२ एवं १९०), विष्णु ० (२३१२७, २३-२४), शस (१६॥३-४), स्मृत्यभंसार (५० ७० ) ने धातु-शुद्धि के विषय मे नियम दिये है, जो विभिन्न प्रकार के हैं। अत केवल मनु एव दो-एक के मत यहाँ दिये जायेंगे । मनु (५१११३) का कहना है - बुधा (विद्वान् लोगा) ने उदघोषित किया है कि सोना आदि धातुएँ, मरक्त जैने रत्न एवं पत्थर के अन्य पात्र राख, जल एव मिट्टी से शुद्ध हो जाते हैं, सोने की वस्तुएँ (जो जूठे भोजन आदि से गन्दी नही हो गयी हैं) केवल जल से हो पवित्र हो जाती है। यही बात उन वस्तुओ के साथ भी पायी जाती है जो जल से प्राप्त होती हैं (यथा-सोपी, मूंगा, शरा आदि) या जो पत्थर से बनी होती हैं या चांदी से बनी होती हैं और जिन पर शिल्पकारी नहीं हुई रहती है। सोना-चांदी जल एव तेज से उत्पन्न होते हैं. अत उनकी शुद्धि उनके भूलमूत कारणों से ही होती है, अर्थात् जल से (थोडा अशुद्ध होने पर) एव अग्नि से (अधिक अशुद्ध होने पर)। ताम्र, लोह, कास्य, पीतल, टीन (त्रपु या रोगा) और सौसा को क्षार ( भस्म ), अम्ल एवं जल से परिस्थिति के अनुसार (जिस प्रकार की अशुद्धि हो) शुद्ध किया जाता है।' वसिष्ठ (३२५८, ६१-६३) वा कथन है - 'पु (टीन), सीसा, तांबा की शुद्धि नमक के पानी, अम्ल एव साधारण जल से हो जाती है, कांसा एवं लोह भस्म एव जल से शुद्ध होते हैं। लिंगपुराण (पूर्वाधं, १८९१५८) ने कहा है-कांसा भरम से, लोह-पात्र नमक से तौबा त्रपु एव सीसा पम्ल से शुद्ध होते हैं, सोने एव चाँदी के पात्र जल से, बहुमूल्य पत्थर, रल, मूंगे एवं मोती धातु-पात्रों के समान शुद्ध किये जाते हैं।' और देखिए वामनपुराण (१४॥७०) । मेघातिथि (मनु ५१११४) ने एक उक्ति उद्धृन को है'कमि या पीतल मे पात्र जब गायो द्वारा घाट लिये जायें या जिन्हें गायें सूंघ लें या जो कुत्तो द्वारा घाट या छू लिये जायें, जिनमें धूद्र भोजन कर ले तथा जिन्हें कौए अपवित्र कर दें, वे नमक या मस्म द्वारा १० बार रगडने से शुद्ध हो जाते हैं। देखिए पराशर मी (परा० मा०, जिल्द २, भाग १, पृ० १७२ ) । सामान्य जीवन में व्यवहृत पानी एवं बरतनो को शुद्धि के विषय मे बौघा० ६० सू० (१९५१३४-५० एवं १/६/३३-४२), याज्ञ० (१९१८२-१८३), विष्णु० (२३१२-५), दास (१६१११५) आदि ने विस्तृत नियम दिये हैं। इनका कतिपय नियमो मे मतैक्य नहीं है। मिताब (याश० १११९०) ने कहा है कि यह कोई आवश्यक नहीं है कि तान६८. प्रपास्वरप्पे पटगं च भूपे होच्यां संकोशातस्याप । ऋषि धूत्रात्तवपेयमाहूरापद्गत काशितबत् पिबेश ॥ यम (अपराकं, १० २७३ः १० प्र०, १० १०४) । ६९. गया प्रातानि कांस्यानि श्रोन्टिानि यानि च । शुम्पन्ति दशमि ः काकोपहतानि । मेया० (मनु ५।११३ एवं यास० १९१९० ) । भातुओं के विविध पात्रों (भरतनों) की शुद्धि शुद्धि केवल अम्ल (सटाई) से होती है, अन्य साधन मी प्रयुक्त हो सकते हैं। पात्रों को शुद्धि की विभिन्न विधियो के विषय में लिखना आवश्यक नहीं है। प्रकाश (पू० ११७-११८) की एक उक्ति इस विषय में पर्याप्त होगी कि मध्यकाल में पात्र-शुद्धि किस प्रकार की जाती थी - "सोने, चांदी, मूंगा, रत्न, सीपियो, पत्थरो, कांसे, पोतल, टोन, सोसा के पात्र केवल जल से शुद्ध हो जाते हैं यदि उनमें गन्दगी चिपकी हुई न हो, यदि उनमे उच्छिष्ट भोजन आदि लगे हों तो वे अम्ल, जल आदि से परिस्थिति के अनुसार शुद्ध किये जाते हैं; यदि ऐसे पात्र शूद्रो द्वारा बहुत दिनो तक प्रयोग में लाये गये हो या उनमे भोजन के कणो का स्पर्श हुआ हो तो उन्हें पहले गस्म से मांजना चाहिए और तीन बार जल से घोना चाहिए और अन्त मे उन्हें अग्नि मे उस सीमा तक तपाना चाहिए कि वे समग्र रह सकें अर्थात् टूट न जाये, गल न जायँ मा जल न जायें, तभी ये शुद्ध होते हैं। कांसे के बरतन यदि कुत्तो, कौओ, शूद्रो या उच्छिष्ट भोजन से केवल एक बार छू जायें तो उन्हें जल एक नमक से दस बार मांजना चाहिए, किन्तु यदि कई बार उपर्युक्त रूप से अशुद्ध हो जायें तो उन्हें २१ बार मौजकर शुद्धे करना चाहिए। यदि तोन उच्च वर्गों के पात्र को शूद्र व्यवहार मे लाये तो वह चार बार नमक से धोने एव तपाने से तथा जल से धोये गये शुद्ध हाथों में ग्रहण करने से शुद्ध हो जाता है। सय प्रसूता नारी द्वारा व्यवहृत कौसे का पात्र या वह जो मद्य से अशुद्ध हो गया हो तपाने से शुद्ध हो जाता है, किन्तु यदि वह उस प्रकार कई बार व्यवहृत हुआ हो तब वह पुनर्निर्मित होने में हो शुद्ध होता है। वह काँसे का बरतन जिसमे बहुधा कुल्ला किया गया हो, या जिसमे पर घोये गये हो उसे पृथिवी मे छ मास तक गाड देना चाहिए और उसे फिर तपाकर काम में लाना चाहिए (पराशर ७२४-२५), किन्तु यदि वह केवल एक बार इस प्रकार अशुद्ध हुआ हो तो केवल १० दिनो तक गाड देना चाहिए। सभी प्रकार के धातु-पात्र यदि थोडे काल के लिए शरीर की गन्दगियो, यथा - मल, मूत्र, वीर्यं से अशुद्ध हो जायें तो सात दिनो तक गोमूत्र में रखने या नदी में रखने से शुद्ध हो जाते हैं, किन्तु यदि वे कई बार अशुद्ध हो जायँ या शव, सद्य प्रसूता नारी या रजस्वला नारी मे छू जायें तो तीन बार नमक, अम्ल या जल से धोये जाने के उपरान्त तपाने से शुद्ध हो जाते हैं, किन्तु यदि वे मूत्र से बहुत समय तक अशुद्ध हो जायें तो पुर्नानिमित होने पर ही शुद्ध हो सकते हैं। विष्णु ० (२३।२ एव ५) ने कहा है कि सभी धातुपात्र जब अत्यन्त अशुद्ध हो जाते हैं तो वे तपाने से शुद्ध हो जाते हैं, किन्तु अत्यन्त अशुद्ध लकडी एवं मिट्टी के पात्र त्याग देने चाहिए। किन्तु देवल का कथन है कि कम अशुद्ध हुए काठपात्र तक्षण (छोलने) से या मिट्टी, गोबर या जल से स्वच्छ हो जाते है और मिट्टी के पात्र यदि अधिक अशुद्ध नहीं हुए रहते तो तपाने से शुद्ध हो जाते हैं (याज्ञ० १११८७ मे भी ऐसा ही है ) । किन्तु वसिष्ठ ( ३।५९) ने कहा है कि सुरा, सूत्र, मल, बलगम (इलेप्मा), आँसू, धीव एवं रक्त से अशुद्ध हुए मिट्टी के पात्र अग्नि मे तपाने पर भी शुद्ध नहीं होते। " वैदिक यज्ञो मे प्रयुक्त पात्रो एव वस्तुओ की शुद्धि के लिए विशिष्ट नियम हैं। बौघा० ६० सू० (१1५1५१५२) के मत मे यज्ञों में प्रयुक्त चमस-पात्र विशिष्ट वैदिक मन्त्रो से शुद्ध किये जाते है", क्योकि वेदानुसार जब उनमे सोमरम का पान किया जाता है तो चमस-पात्र उच्छिष्ट होने के दोष से मुक्त रहते हैं। मनु (५१११६ ११७ ), याज्ञ (१९१८३-१८५), विष्णु० (२३१८-११), शख (१६०६ ), पराशर (७१२-३ ) आदि ने भी यज्ञ-पात्रो की शुद्धि के ७०. महामंत्रे पुरोषैर्वा श्लेमपूपाभुशोणितेः । सस्पृष्टं नैव शुध्येत पुनपान मुन्मयम् ॥ वसिष्ठ (३५९= मनु] [५॥१२३)। ७१. वचनाद्यते चमसपात्राणाम् । न सोमेनोच्छिटा भवन्तौति श्रुतिः । ० ० ० (१०५/५१-५२ ) । वेलिए इस प्रत्य का सड २, अध्याय ३३, जहाँ एक के पश्चात् एक पुरोहितों द्वारा चमसों से सोम पीने का उल्लेख है।
है कि जल सूर्य एव चन्द्र को किरणा, वायु सम्बन्ध, गोबर एव गोमूत्र से शुद्ध हो जाता है। इनमें कुछ पदार्थ आधुनिक वैज्ञानिक सोजी से शुद्धिकारक मान लिये गये हैं। एक स्मृति-वचन के अनुसार वन मे प्रपा या कूप के पास रखे हुए घडे का जल या पत्थर या लक्डी वाले पात्र का एवं नर्म-पात्र का जल, मले हो उससे सूद का कोई सम्बन्ध न हो, पीने के अयोग्य ठहराया गया है, किन्तु आपत-काल मे ऐसा जल जितना चाहे उतना पोया जा सकता है। इससे प्रकट होता है कि प्राचीन काल मे मो जलाभाव में जल चर्म-पात्र या ढोलक मे भरकर लाया जाता था और द्विज लोग भी उसे प्रयोग में लाते थे।" अब हम धातुओ एवं पात्रा की शुद्धि की चर्चा करेंगे। बीसाठ मूशून्य , वसिष्ठ , मनु , याज्ञशून्य , विष्णु शून्य , शस , स्मृत्यभंसार ने धातु-शुद्धि के विषय मे नियम दिये है, जो विभिन्न प्रकार के हैं। अत केवल मनु एव दो-एक के मत यहाँ दिये जायेंगे । मनु का कहना है - बुधा ने उदघोषित किया है कि सोना आदि धातुएँ, मरक्त जैने रत्न एवं पत्थर के अन्य पात्र राख, जल एव मिट्टी से शुद्ध हो जाते हैं, सोने की वस्तुएँ केवल जल से हो पवित्र हो जाती है। यही बात उन वस्तुओ के साथ भी पायी जाती है जो जल से प्राप्त होती हैं या जो पत्थर से बनी होती हैं या चांदी से बनी होती हैं और जिन पर शिल्पकारी नहीं हुई रहती है। सोना-चांदी जल एव तेज से उत्पन्न होते हैं. अत उनकी शुद्धि उनके भूलमूत कारणों से ही होती है, अर्थात् जल से एव अग्नि से । ताम्र, लोह, कास्य, पीतल, टीन और सौसा को क्षार , अम्ल एवं जल से परिस्थिति के अनुसार शुद्ध किया जाता है।' वसिष्ठ वा कथन है - 'पु , सीसा, तांबा की शुद्धि नमक के पानी, अम्ल एव साधारण जल से हो जाती है, कांसा एवं लोह भस्म एव जल से शुद्ध होते हैं। लिंगपुराण ने कहा है-कांसा भरम से, लोह-पात्र नमक से तौबा त्रपु एव सीसा पम्ल से शुद्ध होते हैं, सोने एव चाँदी के पात्र जल से, बहुमूल्य पत्थर, रल, मूंगे एवं मोती धातु-पात्रों के समान शुद्ध किये जाते हैं।' और देखिए वामनपुराण । मेघातिथि ने एक उक्ति उद्धृन को है'कमि या पीतल मे पात्र जब गायो द्वारा घाट लिये जायें या जिन्हें गायें सूंघ लें या जो कुत्तो द्वारा घाट या छू लिये जायें, जिनमें धूद्र भोजन कर ले तथा जिन्हें कौए अपवित्र कर दें, वे नमक या मस्म द्वारा दस बार रगडने से शुद्ध हो जाते हैं। देखिए पराशर मी । सामान्य जीवन में व्यवहृत पानी एवं बरतनो को शुद्धि के विषय मे बौघाशून्य साठ सूशून्य , याज्ञशून्य , विष्णुशून्य , दास आदि ने विस्तृत नियम दिये हैं। इनका कतिपय नियमो मे मतैक्य नहीं है। मिताब ने कहा है कि यह कोई आवश्यक नहीं है कि तानअड़सठ. प्रपास्वरप्पे पटगं च भूपे होच्यां संकोशातस्याप । ऋषि धूत्रात्तवपेयमाहूरापद्गत काशितबत् पिबेश ॥ यम । उनहत्तर. गया प्रातानि कांस्यानि श्रोन्टिानि यानि च । शुम्पन्ति दशमि ः काकोपहतानि । मेयाशून्य । भातुओं के विविध पात्रों की शुद्धि शुद्धि केवल अम्ल से होती है, अन्य साधन मी प्रयुक्त हो सकते हैं। पात्रों को शुद्धि की विभिन्न विधियो के विषय में लिखना आवश्यक नहीं है। प्रकाश की एक उक्ति इस विषय में पर्याप्त होगी कि मध्यकाल में पात्र-शुद्धि किस प्रकार की जाती थी - "सोने, चांदी, मूंगा, रत्न, सीपियो, पत्थरो, कांसे, पोतल, टोन, सोसा के पात्र केवल जल से शुद्ध हो जाते हैं यदि उनमें गन्दगी चिपकी हुई न हो, यदि उनमे उच्छिष्ट भोजन आदि लगे हों तो वे अम्ल, जल आदि से परिस्थिति के अनुसार शुद्ध किये जाते हैं; यदि ऐसे पात्र शूद्रो द्वारा बहुत दिनो तक प्रयोग में लाये गये हो या उनमे भोजन के कणो का स्पर्श हुआ हो तो उन्हें पहले गस्म से मांजना चाहिए और तीन बार जल से घोना चाहिए और अन्त मे उन्हें अग्नि मे उस सीमा तक तपाना चाहिए कि वे समग्र रह सकें अर्थात् टूट न जाये, गल न जायँ मा जल न जायें, तभी ये शुद्ध होते हैं। कांसे के बरतन यदि कुत्तो, कौओ, शूद्रो या उच्छिष्ट भोजन से केवल एक बार छू जायें तो उन्हें जल एक नमक से दस बार मांजना चाहिए, किन्तु यदि कई बार उपर्युक्त रूप से अशुद्ध हो जायें तो उन्हें इक्कीस बार मौजकर शुद्धे करना चाहिए। यदि तोन उच्च वर्गों के पात्र को शूद्र व्यवहार मे लाये तो वह चार बार नमक से धोने एव तपाने से तथा जल से धोये गये शुद्ध हाथों में ग्रहण करने से शुद्ध हो जाता है। सय प्रसूता नारी द्वारा व्यवहृत कौसे का पात्र या वह जो मद्य से अशुद्ध हो गया हो तपाने से शुद्ध हो जाता है, किन्तु यदि वह उस प्रकार कई बार व्यवहृत हुआ हो तब वह पुनर्निर्मित होने में हो शुद्ध होता है। वह काँसे का बरतन जिसमे बहुधा कुल्ला किया गया हो, या जिसमे पर घोये गये हो उसे पृथिवी मे छ मास तक गाड देना चाहिए और उसे फिर तपाकर काम में लाना चाहिए , किन्तु यदि वह केवल एक बार इस प्रकार अशुद्ध हुआ हो तो केवल दस दिनो तक गाड देना चाहिए। सभी प्रकार के धातु-पात्र यदि थोडे काल के लिए शरीर की गन्दगियो, यथा - मल, मूत्र, वीर्यं से अशुद्ध हो जायें तो सात दिनो तक गोमूत्र में रखने या नदी में रखने से शुद्ध हो जाते हैं, किन्तु यदि वे कई बार अशुद्ध हो जायँ या शव, सद्य प्रसूता नारी या रजस्वला नारी मे छू जायें तो तीन बार नमक, अम्ल या जल से धोये जाने के उपरान्त तपाने से शुद्ध हो जाते हैं, किन्तु यदि वे मूत्र से बहुत समय तक अशुद्ध हो जायें तो पुर्नानिमित होने पर ही शुद्ध हो सकते हैं। विष्णु शून्य ने कहा है कि सभी धातुपात्र जब अत्यन्त अशुद्ध हो जाते हैं तो वे तपाने से शुद्ध हो जाते हैं, किन्तु अत्यन्त अशुद्ध लकडी एवं मिट्टी के पात्र त्याग देने चाहिए। किन्तु देवल का कथन है कि कम अशुद्ध हुए काठपात्र तक्षण से या मिट्टी, गोबर या जल से स्वच्छ हो जाते है और मिट्टी के पात्र यदि अधिक अशुद्ध नहीं हुए रहते तो तपाने से शुद्ध हो जाते हैं । किन्तु वसिष्ठ ने कहा है कि सुरा, सूत्र, मल, बलगम , आँसू, धीव एवं रक्त से अशुद्ध हुए मिट्टी के पात्र अग्नि मे तपाने पर भी शुद्ध नहीं होते। " वैदिक यज्ञो मे प्रयुक्त पात्रो एव वस्तुओ की शुद्धि के लिए विशिष्ट नियम हैं। बौघाशून्य साठ सूशून्य के मत मे यज्ञों में प्रयुक्त चमस-पात्र विशिष्ट वैदिक मन्त्रो से शुद्ध किये जाते है", क्योकि वेदानुसार जब उनमे सोमरम का पान किया जाता है तो चमस-पात्र उच्छिष्ट होने के दोष से मुक्त रहते हैं। मनु , याज्ञ , विष्णुशून्य , शख , पराशर आदि ने भी यज्ञ-पात्रो की शुद्धि के सत्तर. महामंत्रे पुरोषैर्वा श्लेमपूपाभुशोणितेः । सस्पृष्टं नैव शुध्येत पुनपान मुन्मयम् ॥ वसिष्ठ । इकहत्तर. वचनाद्यते चमसपात्राणाम् । न सोमेनोच्छिटा भवन्तौति श्रुतिः । शून्य शून्य शून्य । वेलिए इस प्रत्य का सड दो, अध्याय तैंतीस, जहाँ एक के पश्चात् एक पुरोहितों द्वारा चमसों से सोम पीने का उल्लेख है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका को सराहा है। बुधवार सुबह उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट करके मीडिया को सराहना की। नई दिल्ली, जेएनएन। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका को सराहा है। बुधवार सुबह उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट करके मीडिया की सराहना की। उन्होंने कहा कि मीडिया आम लोगों की सोच विकसित करने में अहम भूमिका निभाता है। एक ट्वीट में उन्होंने दैनिक जागरण के एडिटर इन चीफ संजय गुप्त को भी टैग किया है। इस ट्वीट में उन्होंने चुनाव के दौरान भारी मतदान सुनिश्चित कराने के लिए अवेयरनेस कार्यक्रम चलाने की अपील की है। The media plays a vital role in a democracy. It is also a strong influence on people's minds. I request @Sanjaygupta0702, @aroonpurie and @18RahulJoshi to work towards greater voter awareness and registration that ensures an impressive turnout at the hustings. अपने कई ट्वीट में पीएम मोदी ने मीडिया जगत की अन्य बड़ी हस्तियों को भी टैग किया है। इनमें इंडिया टुडे ग्रुप के अरुण पुरी, नेटवर्क 18 के राहुल जोशी, इंडिया टीवी के रजत शर्मा, जी मीडिया के सुभाष चंद्रा और टाइम्स ग्रुप के विनीत जैन भी शामिल हैं। I call upon veterans of the media world, @RajatSharmaLive, @subhashchandra and @vineetjaintimes to take the lead in highlighting the need to vote in large numbers. Doing so would ensure greater participation in democratic processes and strengthen our nation's development. प्रधानमंत्री ने अपने एक अन्य ट्वीट में पत्रकार और एंकर रूबिका लियाकत, अंजना ओम कश्यप, सुधीर चौधरी, राहुल कंवल और रिपब्लिक चैनल की पूरी टीम को टैग करते हुए वोटर रजिस्ट्रेशन अवेयरनेस फैलाने की अपील की है। I appeal to @RubikaLiyaquat, @anjanaomkashyap, @sudhirchaudhary, @rahulkanwal and the team of @republic to spread awareness on voter registration, and why every Indian, particularly the youth should vote. Your support can ensure more people exercise their franchise. You have worked to give voice to people's aspirations. Increased voter awareness is key to a strong democracy. I appeal to you to motivate people to vote in large numbers.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका को सराहा है। बुधवार सुबह उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट करके मीडिया को सराहना की। नई दिल्ली, जेएनएन। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका को सराहा है। बुधवार सुबह उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट करके मीडिया की सराहना की। उन्होंने कहा कि मीडिया आम लोगों की सोच विकसित करने में अहम भूमिका निभाता है। एक ट्वीट में उन्होंने दैनिक जागरण के एडिटर इन चीफ संजय गुप्त को भी टैग किया है। इस ट्वीट में उन्होंने चुनाव के दौरान भारी मतदान सुनिश्चित कराने के लिए अवेयरनेस कार्यक्रम चलाने की अपील की है। The media plays a vital role in a democracy. It is also a strong influence on people's minds. I request @Sanjayguptaसात सौ दो, @aroonpurie and @अट्ठारहRahulJoshi to work towards greater voter awareness and registration that ensures an impressive turnout at the hustings. अपने कई ट्वीट में पीएम मोदी ने मीडिया जगत की अन्य बड़ी हस्तियों को भी टैग किया है। इनमें इंडिया टुडे ग्रुप के अरुण पुरी, नेटवर्क अट्ठारह के राहुल जोशी, इंडिया टीवी के रजत शर्मा, जी मीडिया के सुभाष चंद्रा और टाइम्स ग्रुप के विनीत जैन भी शामिल हैं। I call upon veterans of the media world, @RajatSharmaLive, @subhashchandra and @vineetjaintimes to take the lead in highlighting the need to vote in large numbers. Doing so would ensure greater participation in democratic processes and strengthen our nation's development. प्रधानमंत्री ने अपने एक अन्य ट्वीट में पत्रकार और एंकर रूबिका लियाकत, अंजना ओम कश्यप, सुधीर चौधरी, राहुल कंवल और रिपब्लिक चैनल की पूरी टीम को टैग करते हुए वोटर रजिस्ट्रेशन अवेयरनेस फैलाने की अपील की है। I appeal to @RubikaLiyaquat, @anjanaomkashyap, @sudhirchaudhary, @rahulkanwal and the team of @republic to spread awareness on voter registration, and why every Indian, particularly the youth should vote. Your support can ensure more people exercise their franchise. You have worked to give voice to people's aspirations. Increased voter awareness is key to a strong democracy. I appeal to you to motivate people to vote in large numbers.
इंजीनियरिंग का चमत्कार कहा जाने वाला दुनिया का सबसे बड़ा विमान एंटोनोव 225 या बस AN225 जो यूक्रेन-रूस युद्ध में नष्ट हो गया है। अपने संचालन के दौरान विमान के कई रिकॉर्ड हैं और इसका नाम मिरिया रखा गया था जिसका यूक्रेनी में अर्थ "सपना" था। बड़े मालवाहक विमान को बनाने में $250 मिलियन से $300 मिलियन डॉलर की लागत आई। इसे 1980 के दशक के अंत में बनाया गया था। यहां जानिए दुनिया के सबसे बड़े विमान के बारे में 10 तथ्यः - केवल एक एंटोनोव एएन-225 को पूरा करने के लिए बनाया गया था। - विमान के नष्ट होने के बाद, एंटोनोव की मूल कंपनी, उक्रोबोरोनप्रोम ने कहा कि इसकी लागत $ 3 बिलियन (2. 7 बिलियन यूरो) से अधिक होगी और इसे बहाल करने में पांच साल से अधिक का समय लग सकता है। - प्रारंभ में, यह स्पष्ट नहीं था कि विमान को नष्ट किया गया था या नहीं क्योंकि विभिन्न कोणों से विमान के बारे में कई रिपोर्टें थीं।
इंजीनियरिंग का चमत्कार कहा जाने वाला दुनिया का सबसे बड़ा विमान एंटोनोव दो सौ पच्चीस या बस ANदो सौ पच्चीस जो यूक्रेन-रूस युद्ध में नष्ट हो गया है। अपने संचालन के दौरान विमान के कई रिकॉर्ड हैं और इसका नाम मिरिया रखा गया था जिसका यूक्रेनी में अर्थ "सपना" था। बड़े मालवाहक विमान को बनाने में दो सौ पचास डॉलर मिलियन से तीन सौ डॉलर मिलियन डॉलर की लागत आई। इसे एक हज़ार नौ सौ अस्सी के दशक के अंत में बनाया गया था। यहां जानिए दुनिया के सबसे बड़े विमान के बारे में दस तथ्यः - केवल एक एंटोनोव एएन-दो सौ पच्चीस को पूरा करने के लिए बनाया गया था। - विमान के नष्ट होने के बाद, एंटोनोव की मूल कंपनी, उक्रोबोरोनप्रोम ने कहा कि इसकी लागत तीन डॉलर बिलियन से अधिक होगी और इसे बहाल करने में पांच साल से अधिक का समय लग सकता है। - प्रारंभ में, यह स्पष्ट नहीं था कि विमान को नष्ट किया गया था या नहीं क्योंकि विभिन्न कोणों से विमान के बारे में कई रिपोर्टें थीं।
भारतेन्दु हरिश्चन्द्रः भाषा कथ्य की अभिव्यक्ति का एक सहज एवं सशक्त माध्यम है। इस क्षेत्र में भारतेन्दु की प्रतिभा एक सर्जक, संग्राहक सुधारक एवं प्रचारक के रूप में स्थापित है। उनके सर्जनात्मक रूप की पहचान गद्य-भाषा में उपलब्ध है। उन्होंने गद्य-भाषा का संस्कार करके जो नया रूप दिया उसे समकालीन साहित्यिकों ने 'हरिश्चन्द्री हिन्दी' की संज्ञा देकर सम्मान किया। वही 'हरिश्चन्द्री हिन्दी साहित्य के अन्तर्गत अनेक रूपों में विकसित होकर आधुनिक हिन्दी भाषा के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकी। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने अपने से पूर्ववर्ती हिन्दी गद्य की संस्कृति तत्सम् प्रधान तथा अरबी-फारसी और उर्दू शब्द मिश्रित भाषाओं में मध्यम मार्ग को अपनाया। उन्होंने भाषा में प्रवाह और अभिव्यक्ति को महत्व दिया। उन्होंने 1867 में 'कवि वचन सुधा' और सन् 1873 में 'हरिश्चन्द्र मैगजीन' के प्रकाशन के द्वारा हिन्दी को नई शैली प्रदान की । हिन्दी गद्य के क्षेत्र में यह एक दिशा परिवर्तन था। भारतेन्द्र ने स्वयं अपने नाटकों, निबंधों, लेखों और पत्रों में इस सामान्य शैली का प्रयोग किया। उनकी इस नवीन शैली की उल्लेखनीय विशेषता यह है कि विषय के अनुरूप वह सरल और गम्भीर दोनों प्रकार की है। हास्य-व्यंग्य प्रधान निबंधों में उनकी भाषा अत्यन्त सरल, स्वाभाविक प्रवाहपूर्ण और प्रभावोत्पादक है। इस प्रकार की भाषा में उनका संस्कृत अथवा अरबी-फारसी के प्रति आग्रह नहीं है। भारतेन्दु ने अपनी 'लखनऊ - यात्रा' के संस्मरणों को अत्यन्त रोचक भाषा में लिखा है"कानपुर से लखनऊ आने के हेतु एक कम्पनी अलग है। इसका नाम अ०स०रे० कम्पनी है। इसका काम अभी नया है और इसके गार्ड इत्यादिक सब काम चलाने वाले
भारतेन्दु हरिश्चन्द्रः भाषा कथ्य की अभिव्यक्ति का एक सहज एवं सशक्त माध्यम है। इस क्षेत्र में भारतेन्दु की प्रतिभा एक सर्जक, संग्राहक सुधारक एवं प्रचारक के रूप में स्थापित है। उनके सर्जनात्मक रूप की पहचान गद्य-भाषा में उपलब्ध है। उन्होंने गद्य-भाषा का संस्कार करके जो नया रूप दिया उसे समकालीन साहित्यिकों ने 'हरिश्चन्द्री हिन्दी' की संज्ञा देकर सम्मान किया। वही 'हरिश्चन्द्री हिन्दी साहित्य के अन्तर्गत अनेक रूपों में विकसित होकर आधुनिक हिन्दी भाषा के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकी। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने अपने से पूर्ववर्ती हिन्दी गद्य की संस्कृति तत्सम् प्रधान तथा अरबी-फारसी और उर्दू शब्द मिश्रित भाषाओं में मध्यम मार्ग को अपनाया। उन्होंने भाषा में प्रवाह और अभिव्यक्ति को महत्व दिया। उन्होंने एक हज़ार आठ सौ सरसठ में 'कवि वचन सुधा' और सन् एक हज़ार आठ सौ तिहत्तर में 'हरिश्चन्द्र मैगजीन' के प्रकाशन के द्वारा हिन्दी को नई शैली प्रदान की । हिन्दी गद्य के क्षेत्र में यह एक दिशा परिवर्तन था। भारतेन्द्र ने स्वयं अपने नाटकों, निबंधों, लेखों और पत्रों में इस सामान्य शैली का प्रयोग किया। उनकी इस नवीन शैली की उल्लेखनीय विशेषता यह है कि विषय के अनुरूप वह सरल और गम्भीर दोनों प्रकार की है। हास्य-व्यंग्य प्रधान निबंधों में उनकी भाषा अत्यन्त सरल, स्वाभाविक प्रवाहपूर्ण और प्रभावोत्पादक है। इस प्रकार की भाषा में उनका संस्कृत अथवा अरबी-फारसी के प्रति आग्रह नहीं है। भारतेन्दु ने अपनी 'लखनऊ - यात्रा' के संस्मरणों को अत्यन्त रोचक भाषा में लिखा है"कानपुर से लखनऊ आने के हेतु एक कम्पनी अलग है। इसका नाम अशून्यसशून्यरेशून्य कम्पनी है। इसका काम अभी नया है और इसके गार्ड इत्यादिक सब काम चलाने वाले
मंडी। हिमाचल (Himachal) में हालांकि बारिश (Rain) का दौर थमता हुआ नजर आ रहा है मगर पहाड़ियों (Hills) के दरकने और लैंडस्लाइड (Landslide) होने का दौर अभी थमा नहीं है। अब मंडी (Mandi) में बजौरा बाया कटौला राजमार्ग कमांद के पास से पहाड़ी दरक गई है। अब इस कारण यहां यातायात बंद हो गया है। रोड पर बहुत ज्यादा मलबा आकर गिर चुका है और लोग अब पैदल भी नहीं जा पा रहे हैं। रोड के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग चुकी हैं। सैकड़ों वाहन फंसे हुए हैं। वहीं लोगों को बहुत ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। वहीं लोक निर्माण विभाग (PWD) की मशीनरी मौके पर पहुंच कर मलबा हटाने में जुटी हुई है। मलबा ज्यादा है इस कारण मार्ग को बहाल करने में अभी कुछ समय लग सकता है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि आज रात से मार्ग बंद हो चुका है। वहीं पहाड़ी से लगातार मलबा गिर रहा है। इसलिए भी दिक्कतें सामने आ रही हैं। इस संबंध में डीएसपी लोकेंद्र नेगी (DSP Lokendra Negi) ने बताया कि मार्ग को बहाल करने के लिए तेजी से काम चला हुआ है। जल्द ही मार्ग को बहाल कर दिया जाएगा। ऐसे में यात्री मंडी-कुल्लू एनएच (Mandi-Kullu NH) से ही सफर करें।
मंडी। हिमाचल में हालांकि बारिश का दौर थमता हुआ नजर आ रहा है मगर पहाड़ियों के दरकने और लैंडस्लाइड होने का दौर अभी थमा नहीं है। अब मंडी में बजौरा बाया कटौला राजमार्ग कमांद के पास से पहाड़ी दरक गई है। अब इस कारण यहां यातायात बंद हो गया है। रोड पर बहुत ज्यादा मलबा आकर गिर चुका है और लोग अब पैदल भी नहीं जा पा रहे हैं। रोड के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग चुकी हैं। सैकड़ों वाहन फंसे हुए हैं। वहीं लोगों को बहुत ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। वहीं लोक निर्माण विभाग की मशीनरी मौके पर पहुंच कर मलबा हटाने में जुटी हुई है। मलबा ज्यादा है इस कारण मार्ग को बहाल करने में अभी कुछ समय लग सकता है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि आज रात से मार्ग बंद हो चुका है। वहीं पहाड़ी से लगातार मलबा गिर रहा है। इसलिए भी दिक्कतें सामने आ रही हैं। इस संबंध में डीएसपी लोकेंद्र नेगी ने बताया कि मार्ग को बहाल करने के लिए तेजी से काम चला हुआ है। जल्द ही मार्ग को बहाल कर दिया जाएगा। ऐसे में यात्री मंडी-कुल्लू एनएच से ही सफर करें।
दिल्लीः स्मार्टफोन निर्माता कंपनी सैमसंग ने भारत में अपने नए मोबाइल गैलेक्सी ए और जे सीरीज़ स्मार्टफोन लांच कर दिए है. साथ ही सेमसंग ने जे सीरीज के तहत अपने नए किफायती हैंडसेट गैलेक्सी जे4 को लांच कर दिया है. कंपनी ने इस फोन के ग्लोबल लांच के बारे में अभी जानकारी नहीं दी गई है. अगर सेमसंग के इस मोबाइल फोन गैलेक्सी जे4 के फीचर्स की बात करे तो इसमें 1. 4 गीगाहर्ट्ज़ क्वाड-कोर एक्सीनॉस 7570 प्रोसैसर के साथ इसमें 2 जीबी रैम व 16 जीबी स्टोरेज दी गई है, जिसे माइक्रोएसडी कार्ड के जरिए 256 जीबी तक बढाया जा सकता है. इसमें 5. 5 इंच की सुपर एमोलेड डिस्प्ले दी गई है, जिसका रेजोल्यूशन 720x1280 पिक्सल का है. एंड्रॉयड 8. 0 पर अाधारित सेमसंग के इस स्मार्टफोन में 3000 एमएएच की बैटरी लगाई गई है. सैमसंग के इस स्मार्टफोन की सबसे बडी खासियत यह है कि इसमें सुपर एमोलेड डिस्प्ले दी गई है इसके अलावा यह स्मार्टफोन यूक्रेन के एक रिटेलर के पास लगभग 13,000 रुपए की कीमत के साथ प्री-ऑर्डर्स के लिए उपलब्ध है. इसके अलावा इस हैंडसेट को खरीदने पर सैमसंग क्लाउड के जरिए 15 जीबी क्लाउड स्टोरेज भी मिलेगी. इसमें 13 मेगापिक्सल का रियर और 5 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया है.
दिल्लीः स्मार्टफोन निर्माता कंपनी सैमसंग ने भारत में अपने नए मोबाइल गैलेक्सी ए और जे सीरीज़ स्मार्टफोन लांच कर दिए है. साथ ही सेमसंग ने जे सीरीज के तहत अपने नए किफायती हैंडसेट गैलेक्सी जेचार को लांच कर दिया है. कंपनी ने इस फोन के ग्लोबल लांच के बारे में अभी जानकारी नहीं दी गई है. अगर सेमसंग के इस मोबाइल फोन गैलेक्सी जेचार के फीचर्स की बात करे तो इसमें एक. चार गीगाहर्ट्ज़ क्वाड-कोर एक्सीनॉस सात हज़ार पाँच सौ सत्तर प्रोसैसर के साथ इसमें दो जीबी रैम व सोलह जीबी स्टोरेज दी गई है, जिसे माइक्रोएसडी कार्ड के जरिए दो सौ छप्पन जीबी तक बढाया जा सकता है. इसमें पाँच. पाँच इंच की सुपर एमोलेड डिस्प्ले दी गई है, जिसका रेजोल्यूशन सात सौ बीसxएक हज़ार दो सौ अस्सी पिक्सल का है. एंड्रॉयड आठ. शून्य पर अाधारित सेमसंग के इस स्मार्टफोन में तीन हज़ार एमएएच की बैटरी लगाई गई है. सैमसंग के इस स्मार्टफोन की सबसे बडी खासियत यह है कि इसमें सुपर एमोलेड डिस्प्ले दी गई है इसके अलावा यह स्मार्टफोन यूक्रेन के एक रिटेलर के पास लगभग तेरह,शून्य रुपयापए की कीमत के साथ प्री-ऑर्डर्स के लिए उपलब्ध है. इसके अलावा इस हैंडसेट को खरीदने पर सैमसंग क्लाउड के जरिए पंद्रह जीबी क्लाउड स्टोरेज भी मिलेगी. इसमें तेरह मेगापिक्सल का रियर और पाँच मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया है.
चरित्तमोहणीय-डवसामणाए करणकज्जणिद्दसो कमेण णेदव्वं जाव चरिमकिट्टि त्ति । अथवा 'जहण्णिया किट्टी थोवा' एवं भणिदे जहण्णकिडीए सरिसधणियपरमाणू अणंता अत्थि । ते सव्वे घेतूण जहण्णकिट्टी णाम उच्चदे। एसा थोवा भवदि । एवं विदियट्टिए वि सरिसधणियसव्वपरमाणू घेत्तणाणंतगुणत्तमवगंतव्वं । एवं जात्र चरिमकिट्टि ति । अदो चेव एदासि किविवएसोअविभागपडिच्छेदुत्तरकमवड्डीए एत्थाणुवलंभादो । पुणो चरिमकिट्टीदो उवरि जहण्णफदयपढमवग्गणा अनंतगुणा । एवं सव्वाओ वग्गणाओ जाणिय णेदव्चाओ* एसो विदियतिभागो किट्टीकरणद्धा णाम । ६ २७०, जदो एवमेत्य फहयगदाणुभागमोवडिय किडीओ करेदि तदो एदस्स लोभवेदगद्धाविदियतिभागस्स किट्टीकरणद्धा त्ति सण्णा अत्थाणुगया दट्ठव्वा त्ति भणिदं होदि । जहा खवगसेढीए किडीओ करेमाणो पुव्वापुव्वफयाणि सव्वाणि गिरवसेसमोवट्टेयूण किट्टीओ चेव ठवेदि, ण एवमेत्थ संभवो। किंतु पुव्वफद्दएस सव्वेसु सगसरूवमछंडिय तहावट्ठिदेसु सव्वफद एहिंतो असंखेजदिभागमेत्तदव्यमोकड्डियूण एयफद्दयवग्गणाणमणंतभागमेत्ताओ सुहुमकिड्डीओ एत्थ णिव्यत्तेदि त्ति वत्तव्वं । * किट्टीकरणद्धासंखेजसु भागेसु गदेसु लोभसंजलणस्स अंतोमुहुत्तद्विदिगो बंधो । ही ग्रहण करना चाहिए । इस प्रकार एक-एक परमाणुको ही ग्रहणकर अनन्तगुणित क्रमसे अन्तिम कृष्टिके प्राप्त होने तक ले जाना चाहिए । अथवा 'जघन्य कृष्टि स्तोक है ऐसा कहनेपर जघन्य कृष्टि में सदृश धनवाले परमाणु अनन्त हैं। उन सबको ग्रहण कर जघन्य कृष्टि कहते हैं । यह स्तांक है। इसीप्रकार दूसरी कृष्टि में भी सदृश धनवाले सब परमाणुओंको ग्रहण कर अनन्तगुणा जानना चाहिए। इसी प्रकार अन्तिम कृष्टि तक जानना चाहिए । इसीलिये इनकी कृष्टि संज्ञा है, क्योंकि उत्तरोत्तर अविभाग प्रतिच्छेदोंकी क्रम वृद्धि यहाँपर नहीं पाई जाती । पुनः अन्तिम कृष्टिसे ऊपर जघन्य स्पर्धककी प्रथम वर्गणा अनन्तगुणी है। इसी प्रकार सभी वर्गणाओंको जानकर कथन करना चाहिए । * इस द्वितीय त्रिभागका नाम कृष्टिकरणकाल है। ६ २७०. यतः इस प्रकार यहाँपर स्पर्धकगत अनुभागका अपवर्तनकर कृष्टियोंको करता अतः इस लोभवेदककालके द्वितीय विभागकी कृष्टिकरणकाल यह सार्थक संज्ञा जाननी चाहिये यह उक्त कथनका तात्पर्य है। जिस प्रकार क्षपक श्रेणिमें कृष्टियोंको करता हुआ सभी पूर्व और अपूर्व स्पर्धकका पूरी तरहसे अपवर्तनकर कृष्टियोंको ही स्थापित करता है, उस प्रकार यहाँपर सम्भव नहीं है, क्योंकि सभी पूर्व स्पर्धकोंके अपने-अपने स्वरूपको न छोड़कर उस प्रकार अबस्थित रहते हुए सब स्पर्धकों में से असंख्यातवें भागप्रमाण द्रव्यका अपकर्षणकर एक स्पर्धककी वर्गणाओंके अनन्तवें भागप्रमाण सूक्ष्म कृष्टियोंकी यहाँपर रचना करता है ऐसा कहना चाहिये । * कृष्टिकरणकालके संख्यात बहुमागके व्यतीत होनेपर लोभसंज्वलनका स्थितिबन्ध अन्तर्मुहूर्तप्रमाण होता है।
चरित्तमोहणीय-डवसामणाए करणकज्जणिद्दसो कमेण णेदव्वं जाव चरिमकिट्टि त्ति । अथवा 'जहण्णिया किट्टी थोवा' एवं भणिदे जहण्णकिडीए सरिसधणियपरमाणू अणंता अत्थि । ते सव्वे घेतूण जहण्णकिट्टी णाम उच्चदे। एसा थोवा भवदि । एवं विदियट्टिए वि सरिसधणियसव्वपरमाणू घेत्तणाणंतगुणत्तमवगंतव्वं । एवं जात्र चरिमकिट्टि ति । अदो चेव एदासि किविवएसोअविभागपडिच्छेदुत्तरकमवड्डीए एत्थाणुवलंभादो । पुणो चरिमकिट्टीदो उवरि जहण्णफदयपढमवग्गणा अनंतगुणा । एवं सव्वाओ वग्गणाओ जाणिय णेदव्चाओ* एसो विदियतिभागो किट्टीकरणद्धा णाम । छः दो सौ सत्तर, जदो एवमेत्य फहयगदाणुभागमोवडिय किडीओ करेदि तदो एदस्स लोभवेदगद्धाविदियतिभागस्स किट्टीकरणद्धा त्ति सण्णा अत्थाणुगया दट्ठव्वा त्ति भणिदं होदि । जहा खवगसेढीए किडीओ करेमाणो पुव्वापुव्वफयाणि सव्वाणि गिरवसेसमोवट्टेयूण किट्टीओ चेव ठवेदि, ण एवमेत्थ संभवो। किंतु पुव्वफद्दएस सव्वेसु सगसरूवमछंडिय तहावट्ठिदेसु सव्वफद एहिंतो असंखेजदिभागमेत्तदव्यमोकड्डियूण एयफद्दयवग्गणाणमणंतभागमेत्ताओ सुहुमकिड्डीओ एत्थ णिव्यत्तेदि त्ति वत्तव्वं । * किट्टीकरणद्धासंखेजसु भागेसु गदेसु लोभसंजलणस्स अंतोमुहुत्तद्विदिगो बंधो । ही ग्रहण करना चाहिए । इस प्रकार एक-एक परमाणुको ही ग्रहणकर अनन्तगुणित क्रमसे अन्तिम कृष्टिके प्राप्त होने तक ले जाना चाहिए । अथवा 'जघन्य कृष्टि स्तोक है ऐसा कहनेपर जघन्य कृष्टि में सदृश धनवाले परमाणु अनन्त हैं। उन सबको ग्रहण कर जघन्य कृष्टि कहते हैं । यह स्तांक है। इसीप्रकार दूसरी कृष्टि में भी सदृश धनवाले सब परमाणुओंको ग्रहण कर अनन्तगुणा जानना चाहिए। इसी प्रकार अन्तिम कृष्टि तक जानना चाहिए । इसीलिये इनकी कृष्टि संज्ञा है, क्योंकि उत्तरोत्तर अविभाग प्रतिच्छेदोंकी क्रम वृद्धि यहाँपर नहीं पाई जाती । पुनः अन्तिम कृष्टिसे ऊपर जघन्य स्पर्धककी प्रथम वर्गणा अनन्तगुणी है। इसी प्रकार सभी वर्गणाओंको जानकर कथन करना चाहिए । * इस द्वितीय त्रिभागका नाम कृष्टिकरणकाल है। छः दो सौ सत्तर. यतः इस प्रकार यहाँपर स्पर्धकगत अनुभागका अपवर्तनकर कृष्टियोंको करता अतः इस लोभवेदककालके द्वितीय विभागकी कृष्टिकरणकाल यह सार्थक संज्ञा जाननी चाहिये यह उक्त कथनका तात्पर्य है। जिस प्रकार क्षपक श्रेणिमें कृष्टियोंको करता हुआ सभी पूर्व और अपूर्व स्पर्धकका पूरी तरहसे अपवर्तनकर कृष्टियोंको ही स्थापित करता है, उस प्रकार यहाँपर सम्भव नहीं है, क्योंकि सभी पूर्व स्पर्धकोंके अपने-अपने स्वरूपको न छोड़कर उस प्रकार अबस्थित रहते हुए सब स्पर्धकों में से असंख्यातवें भागप्रमाण द्रव्यका अपकर्षणकर एक स्पर्धककी वर्गणाओंके अनन्तवें भागप्रमाण सूक्ष्म कृष्टियोंकी यहाँपर रचना करता है ऐसा कहना चाहिये । * कृष्टिकरणकालके संख्यात बहुमागके व्यतीत होनेपर लोभसंज्वलनका स्थितिबन्ध अन्तर्मुहूर्तप्रमाण होता है।
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कोरोना से निपटने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल देश की राजधानी में ऑपरेशन शील्ड चलाने का ऐलान किया है। इसके तहत बारीकी से कोरोना के मामलों को निपटा जाएगा। इसके साथ ही डिजिटल प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने साफ कहा कि कल हमने आदेश निकाले थे कि हर व्यक्ति जब घर से बाहर निकलेगा तो उसको मास्क पहनना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कई देशों से सीख लेकर दिल्ली सरकार ने भी यह आदेश दिया है। कई देशों में सुनने को मिला है कि अगर सब लोग मास्क पहनना शुरू कर दें तो कोरोना को काफी हद तक पहनने से रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि मास्क बाजार से खरीदने की जरूरत नहीं है, आप अपने घर में साफ धुला हुआ कपड़ा या रुमाल इस्तेमाल कर सकते हैं। उसे ही बतौर मास्क की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। केजरीवाल चेताया कि पिछले 24 घंटों में अमेरिका में 2000 लोगों की मौत हो चुकी है, इससे हमें सबक लेते हुए इस बीमारी के प्रति अलर्ट हो जाना चाहिए। उन्होंने 71 लाख लोगों को पहले ही राशन दे रहे हैं। जिनके पास राशन कार्ड नहीं थे, उनको भी राशनदेना शुरू किया है। लेकिन क्योंकि पहले कोई व्यवस्था नहीं थी, इसलिए देने में दिक्कत आ रही है। 71 लाख लोगों को हम फ्री राशन दे रहे हैं, जिनके पास राशन कार्ड नहीं था उन्हें भी अब हम राशन दे रहे हैं। 71 लाख लोगों को हम फ्री राशन दे रहे हैं, जिनके पास राशन कार्ड नहीं था उन्हें भी अब हम राशन दे रहे हैं। दिल्ली के सीएम ने कहा कि अगले दो-चार दिनों में दिक्कतें ठीक हो जाएंगी, बस थोड़ा सब्र रखिए। आज नहीं तो कल या परसों राशन मिल जाएगा। मैं सबको राशन दिलवा लूंगा, कल हमने एक और आर्डर निकाला। कोई काम धंधा नहीं चल रहा है, इसलिए सरकार को टैक्स आना बंद हो गया है। महीने 2 महीने के बाद सरकार के पास तनख्वाह देने के लिए कहां से रकम आएगी। इसलिए हमने पहला निर्णय यही लिया कि एक तो वेतन और दूसरा कोरोना से संबंधित खर्च के अलावा कोई खर्च नहीं होगा। इस मुश्किल परिस्थिति में सब लोगों को अपने अपने स्तर पर कुर्बानी करनी पड़ेगी, कटौती करनी पड़ेगी। दिल्ली में 21 ऐसे इलाके की पहचान की गई हैं, जिनमें कंटेंटमेंट लागू किया गया है। कंटेनमेंट मतलब जहां पर हमें कोरोना के कुछ मरीज मिलते हैं तो वहां हम सील कर देते हैं। कंटेनमेंट का मतलब उस इलाके को हमने शील्ड कर दिया। उस एरिया के लोग बाहर नहीं जाएंगे ना ही बाहर वाले अंदर आएंगे। Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें। हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कोरोना से निपटने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल देश की राजधानी में ऑपरेशन शील्ड चलाने का ऐलान किया है। इसके तहत बारीकी से कोरोना के मामलों को निपटा जाएगा। इसके साथ ही डिजिटल प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने साफ कहा कि कल हमने आदेश निकाले थे कि हर व्यक्ति जब घर से बाहर निकलेगा तो उसको मास्क पहनना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कई देशों से सीख लेकर दिल्ली सरकार ने भी यह आदेश दिया है। कई देशों में सुनने को मिला है कि अगर सब लोग मास्क पहनना शुरू कर दें तो कोरोना को काफी हद तक पहनने से रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि मास्क बाजार से खरीदने की जरूरत नहीं है, आप अपने घर में साफ धुला हुआ कपड़ा या रुमाल इस्तेमाल कर सकते हैं। उसे ही बतौर मास्क की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। केजरीवाल चेताया कि पिछले चौबीस घंटाटों में अमेरिका में दो हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है, इससे हमें सबक लेते हुए इस बीमारी के प्रति अलर्ट हो जाना चाहिए। उन्होंने इकहत्तर लाख लोगों को पहले ही राशन दे रहे हैं। जिनके पास राशन कार्ड नहीं थे, उनको भी राशनदेना शुरू किया है। लेकिन क्योंकि पहले कोई व्यवस्था नहीं थी, इसलिए देने में दिक्कत आ रही है। इकहत्तर लाख लोगों को हम फ्री राशन दे रहे हैं, जिनके पास राशन कार्ड नहीं था उन्हें भी अब हम राशन दे रहे हैं। इकहत्तर लाख लोगों को हम फ्री राशन दे रहे हैं, जिनके पास राशन कार्ड नहीं था उन्हें भी अब हम राशन दे रहे हैं। दिल्ली के सीएम ने कहा कि अगले दो-चार दिनों में दिक्कतें ठीक हो जाएंगी, बस थोड़ा सब्र रखिए। आज नहीं तो कल या परसों राशन मिल जाएगा। मैं सबको राशन दिलवा लूंगा, कल हमने एक और आर्डर निकाला। कोई काम धंधा नहीं चल रहा है, इसलिए सरकार को टैक्स आना बंद हो गया है। महीने दो महीने के बाद सरकार के पास तनख्वाह देने के लिए कहां से रकम आएगी। इसलिए हमने पहला निर्णय यही लिया कि एक तो वेतन और दूसरा कोरोना से संबंधित खर्च के अलावा कोई खर्च नहीं होगा। इस मुश्किल परिस्थिति में सब लोगों को अपने अपने स्तर पर कुर्बानी करनी पड़ेगी, कटौती करनी पड़ेगी। दिल्ली में इक्कीस ऐसे इलाके की पहचान की गई हैं, जिनमें कंटेंटमेंट लागू किया गया है। कंटेनमेंट मतलब जहां पर हमें कोरोना के कुछ मरीज मिलते हैं तो वहां हम सील कर देते हैं। कंटेनमेंट का मतलब उस इलाके को हमने शील्ड कर दिया। उस एरिया के लोग बाहर नहीं जाएंगे ना ही बाहर वाले अंदर आएंगे। Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें। हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
नई दिल्लीः शहद एक ऐसा पदार्थ है जो हर किसी की रसोई में मिलता है। शहद को कई गुणों का खान कहा जाता है और इसके औषधीय गुण कई रोगों से निजात पाने के लिए मददगार साबित होते हैं। वर्षों से पारंपरिक उपचार में शहद का उपयोग चला आ रहा है। रोजाना शहद का सेवन करने से त्वचा निखरती है और चमकदार बनती है। डॉक्टरों के मुताबिक शहद में पाए जाने वाले महत्वपूर्ण कंपाउंड्स हमारे शरीर में कई तत्वों की पूर्ति करते हैं। शहद इतना लाभदायक है कि यह आंखों की रोशनी बढ़ाने में सक्षम है। सर्दी, खांसी और कफ जैसे मौसमी बीमारी से बचने के लिए शहद काम आता है। शहद इतना प्रबल है कि यह अस्थमा और हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियों से भी मानव शरीर को राहत दिलाता है। बड़े बुजुर्ग यह बताते हैं कि शहद का रोजाना सेवन करने से खून साफ होता है और हृदय संबंधित परेशानियों के रिस्क को यह कम करता है। सिर्फ इतना ही नहीं शहद की कई और फायदे हैं जो आप लोगों को जानना बेहद जरूरी है। हमारे शरीर में बाल एक ऐसा हिस्सा है जो हमारी सुंदरता को बढ़ाता है। अगर बाल झड़ने की समस्या है या आपके बाल जरूरत से ज्यादा गिरने लगे हैं तो रोजाना दो चम्मच शहद खाया कीजिए। ऐसा करने से आपके बाल मजबूत होंगे और बाल गिरने की समस्या दूर हो जाएगी। रोजाना शहद खाने से शरीर के अंदर ऊर्जा पैदा होता है और आप लंबे समय तक बिना थके अपना काम निरंतर कर सकते हैं। चुस्त और दुरुस्त रहने के लिए मांसपेशियों का स्वस्थ रहना आवश्यक है। जानकार बताते हैं कि शहद का सेवन करने से हमारी मांसपेशियां मजबूत बनती है। शहद हमारी त्वचा के लिए बहुत ही फायदेमंद औषधि मानी जाती है। यह हमारे खून को साफ करने के साथ हमारे रंग को निखारता है और हमारी त्वचा को बेहद मुलायम बनाता है। अगर आप अपनी त्वचा को हेल्दी बनाना चाहते हैं तो रोज सुबह ठंडे पानी में शहद मिलाकर पीजिए। शहद के अंदर कई महत्वपूर्ण ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो ट्यूमर के रिस्क को कम करते हैं साथ में शहद का सेवन रोजाना करने से पेट के कैंसर से भी बचा जा सकता है। शहद एंटीसेप्टिक की तरह काम करता है। अगर आपकी त्वचा कट गई है या जल गई है तो उस पर शहद लगाइए। ऐसा करने से कटी हुई त्वचा या जली हुई त्वचा जल्दी ठीक होती है और किसी तरह का इन्फेक्शन भी नहीं होता है। रोज दो चम्मच शहद को हल्के गुनगुने दूध में मिलाकर पीने से शरीर के अंदर इम्युनिटी बढ़ती है। शहद के अंदर एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो हमारे रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में कारगर साबित होते हैं। (डिस्क्लेमरः प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। )
नई दिल्लीः शहद एक ऐसा पदार्थ है जो हर किसी की रसोई में मिलता है। शहद को कई गुणों का खान कहा जाता है और इसके औषधीय गुण कई रोगों से निजात पाने के लिए मददगार साबित होते हैं। वर्षों से पारंपरिक उपचार में शहद का उपयोग चला आ रहा है। रोजाना शहद का सेवन करने से त्वचा निखरती है और चमकदार बनती है। डॉक्टरों के मुताबिक शहद में पाए जाने वाले महत्वपूर्ण कंपाउंड्स हमारे शरीर में कई तत्वों की पूर्ति करते हैं। शहद इतना लाभदायक है कि यह आंखों की रोशनी बढ़ाने में सक्षम है। सर्दी, खांसी और कफ जैसे मौसमी बीमारी से बचने के लिए शहद काम आता है। शहद इतना प्रबल है कि यह अस्थमा और हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियों से भी मानव शरीर को राहत दिलाता है। बड़े बुजुर्ग यह बताते हैं कि शहद का रोजाना सेवन करने से खून साफ होता है और हृदय संबंधित परेशानियों के रिस्क को यह कम करता है। सिर्फ इतना ही नहीं शहद की कई और फायदे हैं जो आप लोगों को जानना बेहद जरूरी है। हमारे शरीर में बाल एक ऐसा हिस्सा है जो हमारी सुंदरता को बढ़ाता है। अगर बाल झड़ने की समस्या है या आपके बाल जरूरत से ज्यादा गिरने लगे हैं तो रोजाना दो चम्मच शहद खाया कीजिए। ऐसा करने से आपके बाल मजबूत होंगे और बाल गिरने की समस्या दूर हो जाएगी। रोजाना शहद खाने से शरीर के अंदर ऊर्जा पैदा होता है और आप लंबे समय तक बिना थके अपना काम निरंतर कर सकते हैं। चुस्त और दुरुस्त रहने के लिए मांसपेशियों का स्वस्थ रहना आवश्यक है। जानकार बताते हैं कि शहद का सेवन करने से हमारी मांसपेशियां मजबूत बनती है। शहद हमारी त्वचा के लिए बहुत ही फायदेमंद औषधि मानी जाती है। यह हमारे खून को साफ करने के साथ हमारे रंग को निखारता है और हमारी त्वचा को बेहद मुलायम बनाता है। अगर आप अपनी त्वचा को हेल्दी बनाना चाहते हैं तो रोज सुबह ठंडे पानी में शहद मिलाकर पीजिए। शहद के अंदर कई महत्वपूर्ण ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो ट्यूमर के रिस्क को कम करते हैं साथ में शहद का सेवन रोजाना करने से पेट के कैंसर से भी बचा जा सकता है। शहद एंटीसेप्टिक की तरह काम करता है। अगर आपकी त्वचा कट गई है या जल गई है तो उस पर शहद लगाइए। ऐसा करने से कटी हुई त्वचा या जली हुई त्वचा जल्दी ठीक होती है और किसी तरह का इन्फेक्शन भी नहीं होता है। रोज दो चम्मच शहद को हल्के गुनगुने दूध में मिलाकर पीने से शरीर के अंदर इम्युनिटी बढ़ती है। शहद के अंदर एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो हमारे रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में कारगर साबित होते हैं।
माध्यम से एक कार्य प्रणाली को वर्गीकृत किया जा सकता है क्योंकि इसके बीच अपेक्षाकृत उच्च मनोबल है और यह मानव विषयों के बीच अपेक्षाकृत उच्च स्तर की नौकरी की संतुष्टि है। आप यह भी देख सकते हैं कि दूसरी तरफ क्या होता है, जब कार्य या कम मनोबल के साथ सामान्य असंतोष होता है तो हस्ताक्षर क्या जुड़े होते हैं। तो, वे बहुत कम उत्पादकता और उच्च लागत हो सकते हैं जो इंगित करता है कि लोग वास्तव में काम करने या कुछ करने के बारे में खुश नहीं हैं। उत्पादों और सेवाओं की खराब गुणवत्ता यह फिर से एक और बहुत ही दिलचस्प है जिसे आप नौकरी असंतोष का संकेत जानते हैं, या चोट दर या दुर्घटना दर आमतौर पर बढ़ सकती है क्योंकि वे खुश नहीं हैं। इसलिए, वे अपने मन की अच्छी स्थिति में नहीं होंगे और वे कुछ ऐसा करेंगे जो गैरअनुपालन है। और वे कुछ ऐसा करेंगे जो असुरक्षित है और इससे उच्च स्तर की चोटें या दुर्घटनाएँ हो सकती हैं। आम तौर पर गरीब हाउसकीपिंग (housekeeping) हो सकती है, सभी सामग्री हैंडलिंग (handling) मुद्दों को सही समय पर उपलब्ध नहीं होती है क्योंकि वे कहीं रखे जाते हैं और उस समय का पता नहीं लगाया जा सकता है जब उन्हें जरूरत होती है। तो, ये सभी संकेतक आम तौर पर असंतुष्ट हैं या उनके पास एक निश्चित कार्य संरचना में काम करने का कम मनोबल है। इसके अलावा कभी-कभी जीवन और अंग कानून सहित कंपनी (company) की संपत्ति में तोड़फोड़ के मामले भी हो सकते हैं क्योंकि इस तरह की तोड़फोड़ से लोग चीजों को जला सकते हैं या लोग नाराज़ हो सकते हैं या प्रशासन में लोगों को भीड़ सकते हैं ताकि फिर से मानव विषयों के बीच उच्च असंतोष का संकेत हो । जानते हैं, कार्य प्रणाली से जुड़े। समय-समय पर उच्च श्रम कारोबार या उच्च अनुपस्थिति हो सकती है। बस कार्य प्रणाली के कामकाज के पीछे समग्र नियमित प्रक्रियाओं को खतरे में डालना जो फिर से संकेतक भी हो सकते हैं । तो, ये कुछ हस्ताक्षर हैं जो यह इंगित करते हैं कि क्या लोग आमतौर पर संतुष्ट हैं या आम तौर पर एक निश्चित नौकरी के बारे में असंतुष्ट हैं जो वे प्रदर्शन कर रहे हैं। दूसरा मुद्दा जिसका मैं उल्लेख करना चाहूँगा वह है नौकरी विशेषज्ञता । और वास्तव में, यह एक संगठनात्मक सिद्धांत के संदर्भ में बहुत महत्वपूर्ण है जहां आप देखेंगे कि कुछ कार्यकर्ता हैं जो सीमित कार्यों में विशेषज्ञता प्राप्त करेंगे। (स्लाइड (slide) समय देखेंः 08:19 ) Job Specialization Important organization principle in which workers specialize in a limited range of tasks • Work content is simple, task time is short • High efficiency and productivity Often viewed negatively by workers because tasks tend to be routine, boring, unappealing, and unrewarding Alternatives to job specialization: • Job enlargement and job enrichment • Job rotation_ और आम तौर पर फिर से विशेषज्ञता यदि आप संगठन के डिज़ाइन (design) या संरचनात्मक डिज़ाइन (design) के सिद्धांतों को देखते हैं, तो मुझे लगता है कि मैंने इसे कुछ व्याख्यान पहले ही सचित्र कर दिया था। नौकरी की विशेषज्ञता भी एक संगठन संरचना बनाने का एक आधार हो सकती है। आप एक निश्चित अंतिम लक्ष्य या कार्य प्रणाली से जुड़े कार्य के एक निश्चित भाग के लिए समान कौशल सेट (set) या समाजीकरण वाले लोगों को एक साथ समूहित करते हैं। इसलिए, जब हम नौकरी विशेषज्ञताओं के बारे में बात करते हैं, तो हमें यह पहचानना होगा कि कार्य सामग्री सरल कार्य समय कम है और इसका परिणाम उच्च दक्षता और उत्पादकता में हो सकता है यदि हम कार्य को वर्गीकृत या वर्गीकृत करने के सिद्धांत के रूप में नौकरी विशेषज्ञता का उपयोग करना चाहते हैं। समूहों में। तो, यह नहीं है कि यह अपनी कमियों है; हालांकि, ऐसा नहीं है कि विभिन्न कार्यों में मैन (man) पावर (power) के स्पेशलाइजेशन (specialization) आधारित आवंटन से हमेशा उच्च स्तर की उत्पादकता या दक्षता प्राप्त होती है, क्योंकि इसे हमेशा कुछ श्रमिकों द्वारा नकारात्मक रूप से देखा जा सकता है, जो कहते हैं कि कुछ विशिष्ट जो आपके साथ एक अच्छा संबंध रखते हैं, जानते हैं उच्चतर प्रशासनिक नियंत्रकों के साथ अच्छे संबंध से विशेषज्ञता के आधार पर आसानी से काम मिल जाएगा। इसलिए, विशेषज्ञता को नकारात्मक रूप से व्यक्त किया जाता है और इसे कुछ चीजों के रूप में देखा जाता है, जो कि व्यक्तियों के समूह के पक्ष में दिया जाता है, यह कहकर कि वे विशेष हैं, इसलिए वे इस तरह के कार्य कर रहे हैं। इसलिए, और फिर विशेषज्ञता के पास कुछ अन्य कमियाँ भी हैं, अगर यह बहुत विशिष्ट है और संगठन संरचना को विशेषज्ञता के सिद्धांत पर डिज़ाइन (design) किया गया है, तो बहुत अधिक रोज़गार नहीं हो सकते हैं। इसलिए, यदि एक निश्चित कार्यकर्ता या एक मानव विषय को कहने या ऑटोमोटिव (automotive) में पेंट (paint) लगाने में विशेषज्ञता प्राप्त है, तो वह आवश्यक रूप से भागों या घटकों की मरम्मत में एक अच्छा फिट (fit) नहीं हो सकता है। इसलिए, सबसे अधिक जो कुछ कर सकता है, वह इस व्यक्ति को पेंट (paint) की मरम्मत के मुद्दों, या पोस्ट (post) असेंबली (assembly) दोषों से संबंधित मुद्दों के तनाव को हल कर सकता है जो पेंटेरा के छिलके के कारण उत्पन्न होते हैं। लेकिन फिर विधानसभा या वेल्ड (weld) संरचनाओं में पेंट (paint) से पूरी तरह से डोमेन (domain) बदलना बहुत अच्छा विचार नहीं हो सकता है। इसलिए, कभी-कभी यह बहुत नियमित हो जाता है कि आप जानते हैं कि कोई व्यक्ति या कार्यकर्ता क्या कर रहा है; दिनचर्या निश्चित रूप से अपील की ऊब में कमी लाती है। और फिर यह भी कि यदि नौकरियाँ अत्यधिक विशिष्ट हैं और वे एक क्रिस्क्रॉस (crisscross) खिलाड़ी के लिए सक्षम नहीं हैं, तो यह हमेशा एक ऐसी स्थिति में परिणाम होता है जहां आप इनाम नहीं दे सकते हैं, क्योंकि कुछ ऐसे लोगों के एक निश्चित समूह के लिए योजना बनाई गई है जो एक निश्चित क्षेत्र में विशिष्ट हैं। एक प्रणाली द्वारा उत्पन्न कार्य की आवश्यकता पर उन्हें काम करने के लिए आरंभ किया जाएगा। इसलिए, अगर उस क्षेत्र में आम तौर पर काम नियमित होता है, तो उच्च उत्पादकता या उच्च दक्षता का कोई सवाल ही नहीं था, क्योंकि सब कुछ एक संतुलन में है। और इसलिए, प्रक्रिया में शायद ही कोई कमी हो और सब कुछ बहुत, बहुत नियमित या मानक प्रतीत होता हो; हालाँकि, अगर कोई ऐसा मामला है जहाँ निश्चित रूप से किसी विशेष उत्पाद के कुछ क्षेत्र में कोई चुनौती है या हमें ऐसा संगठन कहना चाहिए जहाँ मैन (man) पावर (power) को स्थानांतरित करने की आवश्यकता है। और कुछ लोगों को काम करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है और वे इस विशेषज्ञता डोमेन (domain) को दूसरे क्षेत्र में जाने के लिए छोड़ देते हैं और फिर काम करते हैं जो निश्चित रूप से बहुत उत्पादक और कुशल कर्मचारी माना जाता है। तो, ये संगठनात्मक सिद्धांत, संरचना सिद्धांत के रूप में नौकरी विशेषज्ञता से जुड़े कुछ नकारात्मक संबंध हैं। और इसलिए, वहाँ कुछ विकल्प हैं जो नौकरी विशेषज्ञता के लिए हैं। उदाहरण के लिए, कोई नौकरी में इज़ाफा कर सकता है, और मैं निम्नलिखित स्लाइड्स में व्यक्तिगत रूप से इन विषयों का इलाज करने जा रहा हूं। किसी को निर्णय लेने के कुछ स्तर देकर आप लोगों की नौकरी को समृद्ध कर सकते हैं, एक वाहन के असेंबली (assembly) लाइन (line) पर हमें एक निश्चित घटक के फिट (fit) होने के साथ जुड़े कार्य करने के लिए कहते हैं, और एक कार्यकर्ता के रूप में आप जानते हैं कि इस विधानसभा में है लचीली प्रणाली जहां कई मॉडल होते हैं, और एक मिश्रण मॉडल का उत्पादन होता है। तो, हो सकता है कि आपके पास सामग्री के नियोजन से संबंधित निर्णय हो सकता है, जो आपके कार्य केंद्र में और आपके कार्य केंद्र के माध्यम से वाहन के लिए अग्रिम में विभिन्न मॉडलों (models) के लिए होगा। इसलिए, यदि आप जानते हैं कि आज की विशेष पारी में 30 अलग-अलग वेरिएंट (variant) होंगे, तो ऑपरेटर (operator) को मीटर (meter) के पास सामग्री की उपलब्धता पर ध्यान देना बेहतर होगा और योजना बना सकते हैं कि इन वाहनों में विभिन्न प्रकार के तीस अलग-अलग घटक फिट (fit) किए जा रहे हैं । और यदि आप पारी की शुरुआत में सोचते हैं कि आपको लगता है कि वे सामग्री उपलब्ध नहीं हैं, तो वह हमेशा अपनी छाप देने के लिए एक अलार्म (alarm) उठा सकता है कि हां मुझे एक निश्चित प्रकार की नौकरी के लिए एक निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए। इसलिए, आप मूल रूप से अधिक जिम्मेदारियां मान रहे हैं ताकि यह प्रणाली सुचारु रूप से चले, और यह कार्यकर्ता को फिर से प्रेरित करने का सवाल हो सकता है, यह फिर से कार्यकर्ता को पुरस्कृत करने का प्रश्न हो सकता है यदि इस तरह की समस्याएं नियमित आधार पर होती हैं। तो, आप अधिक से अधिक जिम्मेदारियों को देने या गुल्लक द्वारा ऊर्ध्वाधर स्तर पर नौकरी को समृद्ध कर रहे हैं। एक व्यक्ति जो एक उत्पाद की जांच के बाद असेंबली ( assembly) लाइन (line) पर एक ऑपरेटर (operator) होता है और एक चीज के बारे में निरीक्षण करता है जो उसने किया है और एक रिकॉर्ड (record) का रखरखाव करता है यह एक अतिरिक्त कर्तव्य है जिसे वह उस कार्य में अपनी नौकरी के संवर्धन के संदर्भ में मान रहा है जो वह है अन्यथा बाहर ले जाने, कुछ संगठन और कुछ मामलों में उद्योग के साथ उपलब्ध कठोर गुणवत्ता मानदंडों के कारण, लोगों को विभिन्न प्रकार के कार्यों में इस तरह के संवर्धन रणनीति पर ध्यान दिया जाएगा जो आपको तर्क करने और छह सिग्मा आधारित नियंत्रणों की प्रक्रिया में जाने में मदद करेंगे। उच्च गुणवत्ता। इसलिए, निश्चित रूप से, लोगों को विभिन्न विशिष्टताओं में घुमाने का एक और विकल्प हो सकता है। तो, यहाँ प्रशिक्षण का सवाल है और मानव कारणों से जुड़े सीखने की अवस्था का सवाल है। क्योंकि जाहिर है, अगर एक इंसान को एक निश्चित कार्य करने के लिए विशेष किया जाता है, और वह मान लेता है कि वह कार्य को बदल देता है और उसे फिर से पूरी दक्षता से एक अलग कार्य करना है। इसलिए, सभी लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए नहीं है कि लोगों को आपके बारे में जानने के लिए, भिन्न सीखने की प्रतिक्रियाएँ या सीखने की अवस्था हो सकती है और एक बार जिनके पास तेजी से प्रतिक्रियाएँ होती हैं, वे ऐसे रोटेशन (rotation) के लिए अधिक अपनाने योग्य हो सकते हैं, जो उनके सीखने के संदर्भ में कम हैं। क्षमताओं। तो, इसलिए, स्क्रीनिंग (screening) का सवाल है कि हर किसी को घुमाया नहीं जा सकता, लेकिन कुछ को घुमाया जा सकता है। लेकिन तब आप जॉब (job) स्पेशलाइजेशन (specialization) के क्षेत्र से बाहर निकलते हैं, जब आप जॉब (job) इज़ाफा जॉब (job) संवर्धन और जॉब (job) रोटेशन (rotation) की ऐसी रणनीति पेश करते हैं। तो आइए हम व्यक्तिगत रूप से देखें कि उनका क्या मतलब है। (स्लाइड (slide) समय देखेंः 15:25 ) Job Enlargement and Job Enrichment Job enlargement - horizontal increase in the number of activities included in the work, but the activities are still of the same type or level Example: worker assembles entire product module rather than just three parts in the module Job enrichment - vertical increase in work content, so that scope of responsibility is increased Example: worker plans, sets up, produces, and inspects parts rather than just produces इसलिए, जैसा कि मैंने आपको बताया था कि नौकरी में वृद्धि का मतलब आमतौर पर काम में शामिल गतिविधियों की संख्या में क्षैतिज वृद्धि होगी। लेकिन गतिविधियाँ अभी भी उसी प्रकार के स्तर के हैं उदाहरण के लिए, कार्यकर्ता केवल एक घटक या एक भाग को उत्पाद मॉड्यूल (module) में इकट्ठा करने के बजाय, वह उन सभी घटकों को इकट्ठा करने के लिए जिम्मेदार है जो एक निश्चित मॉड्यूल (module) में हैं। इसलिए, एक तरह से वह कार्यों का एक विस्तारित सेट (set) प्राप्त करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वह उस निश्चित विधानसभा के पीछे जिम्मेदार हो रहा है जिसे वह एक निश्चित उत्पाद के लिए बना रहा है। इसलिए, एक बार नौकरी मॉड्यूल (module) को बढ़ाकर उन्हें वह सम्मान या आदेश दें या हमें बताएं कि आप उस उत्पाद के पीछे एक स्वामित्व जानते हैं जो वह पैदा कर रहा है। तो, नौकरी में इज़ाफा आम तौर पर उस उद्देश्य से किया जाता है; जाहिर है, एक समय वितरण होने जा रहा है ऐसा नहीं है कि अगर कार्यकर्ता को उपलब्ध कुल समय एक्स (X) है तो आप उसे कुछ ऐसा दे सकते हैं जो 2 एक्स (X) या 3 एक्स (X) है। तो, यह समय संतुलित होना चाहिए। लेकिन फिर आप उसे विभिन्न स्तरों पर हिस्सेदारी दे सकते हैं, जहां उसे लगता है कि वह क्या कर रहा है, उसी समय सीमा के भीतर उसे ऐसा लगता है कि वह ऐसा कर रहा है ताकि नौकरी में इज़ाफा हो, वह नौकरी में वृद्धि कर सकता है, जो ऊर्ध्वाधर वृद्धि के बारे में है। कार्य सामग्री मुझे लगता है कि मैंने इस क्षेत्र के बारे में पर्याप्त उल्लेख किया है। कार्य उपकरण वह पर्याप्त मशीनरी (machinery) सेट (set) करता है वह आपको निरीक्षण करता है कि आप जानते हैं, उसके मूल कार्य से जुड़ी ये सभी चीजें उपांग हैं जिनके लिए
माध्यम से एक कार्य प्रणाली को वर्गीकृत किया जा सकता है क्योंकि इसके बीच अपेक्षाकृत उच्च मनोबल है और यह मानव विषयों के बीच अपेक्षाकृत उच्च स्तर की नौकरी की संतुष्टि है। आप यह भी देख सकते हैं कि दूसरी तरफ क्या होता है, जब कार्य या कम मनोबल के साथ सामान्य असंतोष होता है तो हस्ताक्षर क्या जुड़े होते हैं। तो, वे बहुत कम उत्पादकता और उच्च लागत हो सकते हैं जो इंगित करता है कि लोग वास्तव में काम करने या कुछ करने के बारे में खुश नहीं हैं। उत्पादों और सेवाओं की खराब गुणवत्ता यह फिर से एक और बहुत ही दिलचस्प है जिसे आप नौकरी असंतोष का संकेत जानते हैं, या चोट दर या दुर्घटना दर आमतौर पर बढ़ सकती है क्योंकि वे खुश नहीं हैं। इसलिए, वे अपने मन की अच्छी स्थिति में नहीं होंगे और वे कुछ ऐसा करेंगे जो गैरअनुपालन है। और वे कुछ ऐसा करेंगे जो असुरक्षित है और इससे उच्च स्तर की चोटें या दुर्घटनाएँ हो सकती हैं। आम तौर पर गरीब हाउसकीपिंग हो सकती है, सभी सामग्री हैंडलिंग मुद्दों को सही समय पर उपलब्ध नहीं होती है क्योंकि वे कहीं रखे जाते हैं और उस समय का पता नहीं लगाया जा सकता है जब उन्हें जरूरत होती है। तो, ये सभी संकेतक आम तौर पर असंतुष्ट हैं या उनके पास एक निश्चित कार्य संरचना में काम करने का कम मनोबल है। इसके अलावा कभी-कभी जीवन और अंग कानून सहित कंपनी की संपत्ति में तोड़फोड़ के मामले भी हो सकते हैं क्योंकि इस तरह की तोड़फोड़ से लोग चीजों को जला सकते हैं या लोग नाराज़ हो सकते हैं या प्रशासन में लोगों को भीड़ सकते हैं ताकि फिर से मानव विषयों के बीच उच्च असंतोष का संकेत हो । जानते हैं, कार्य प्रणाली से जुड़े। समय-समय पर उच्च श्रम कारोबार या उच्च अनुपस्थिति हो सकती है। बस कार्य प्रणाली के कामकाज के पीछे समग्र नियमित प्रक्रियाओं को खतरे में डालना जो फिर से संकेतक भी हो सकते हैं । तो, ये कुछ हस्ताक्षर हैं जो यह इंगित करते हैं कि क्या लोग आमतौर पर संतुष्ट हैं या आम तौर पर एक निश्चित नौकरी के बारे में असंतुष्ट हैं जो वे प्रदर्शन कर रहे हैं। दूसरा मुद्दा जिसका मैं उल्लेख करना चाहूँगा वह है नौकरी विशेषज्ञता । और वास्तव में, यह एक संगठनात्मक सिद्धांत के संदर्भ में बहुत महत्वपूर्ण है जहां आप देखेंगे कि कुछ कार्यकर्ता हैं जो सीमित कार्यों में विशेषज्ञता प्राप्त करेंगे। समय देखेंः आठ:उन्नीस ) Job Specialization Important organization principle in which workers specialize in a limited range of tasks • Work content is simple, task time is short • High efficiency and productivity Often viewed negatively by workers because tasks tend to be routine, boring, unappealing, and unrewarding Alternatives to job specialization: • Job enlargement and job enrichment • Job rotation_ और आम तौर पर फिर से विशेषज्ञता यदि आप संगठन के डिज़ाइन या संरचनात्मक डिज़ाइन के सिद्धांतों को देखते हैं, तो मुझे लगता है कि मैंने इसे कुछ व्याख्यान पहले ही सचित्र कर दिया था। नौकरी की विशेषज्ञता भी एक संगठन संरचना बनाने का एक आधार हो सकती है। आप एक निश्चित अंतिम लक्ष्य या कार्य प्रणाली से जुड़े कार्य के एक निश्चित भाग के लिए समान कौशल सेट या समाजीकरण वाले लोगों को एक साथ समूहित करते हैं। इसलिए, जब हम नौकरी विशेषज्ञताओं के बारे में बात करते हैं, तो हमें यह पहचानना होगा कि कार्य सामग्री सरल कार्य समय कम है और इसका परिणाम उच्च दक्षता और उत्पादकता में हो सकता है यदि हम कार्य को वर्गीकृत या वर्गीकृत करने के सिद्धांत के रूप में नौकरी विशेषज्ञता का उपयोग करना चाहते हैं। समूहों में। तो, यह नहीं है कि यह अपनी कमियों है; हालांकि, ऐसा नहीं है कि विभिन्न कार्यों में मैन पावर के स्पेशलाइजेशन आधारित आवंटन से हमेशा उच्च स्तर की उत्पादकता या दक्षता प्राप्त होती है, क्योंकि इसे हमेशा कुछ श्रमिकों द्वारा नकारात्मक रूप से देखा जा सकता है, जो कहते हैं कि कुछ विशिष्ट जो आपके साथ एक अच्छा संबंध रखते हैं, जानते हैं उच्चतर प्रशासनिक नियंत्रकों के साथ अच्छे संबंध से विशेषज्ञता के आधार पर आसानी से काम मिल जाएगा। इसलिए, विशेषज्ञता को नकारात्मक रूप से व्यक्त किया जाता है और इसे कुछ चीजों के रूप में देखा जाता है, जो कि व्यक्तियों के समूह के पक्ष में दिया जाता है, यह कहकर कि वे विशेष हैं, इसलिए वे इस तरह के कार्य कर रहे हैं। इसलिए, और फिर विशेषज्ञता के पास कुछ अन्य कमियाँ भी हैं, अगर यह बहुत विशिष्ट है और संगठन संरचना को विशेषज्ञता के सिद्धांत पर डिज़ाइन किया गया है, तो बहुत अधिक रोज़गार नहीं हो सकते हैं। इसलिए, यदि एक निश्चित कार्यकर्ता या एक मानव विषय को कहने या ऑटोमोटिव में पेंट लगाने में विशेषज्ञता प्राप्त है, तो वह आवश्यक रूप से भागों या घटकों की मरम्मत में एक अच्छा फिट नहीं हो सकता है। इसलिए, सबसे अधिक जो कुछ कर सकता है, वह इस व्यक्ति को पेंट की मरम्मत के मुद्दों, या पोस्ट असेंबली दोषों से संबंधित मुद्दों के तनाव को हल कर सकता है जो पेंटेरा के छिलके के कारण उत्पन्न होते हैं। लेकिन फिर विधानसभा या वेल्ड संरचनाओं में पेंट से पूरी तरह से डोमेन बदलना बहुत अच्छा विचार नहीं हो सकता है। इसलिए, कभी-कभी यह बहुत नियमित हो जाता है कि आप जानते हैं कि कोई व्यक्ति या कार्यकर्ता क्या कर रहा है; दिनचर्या निश्चित रूप से अपील की ऊब में कमी लाती है। और फिर यह भी कि यदि नौकरियाँ अत्यधिक विशिष्ट हैं और वे एक क्रिस्क्रॉस खिलाड़ी के लिए सक्षम नहीं हैं, तो यह हमेशा एक ऐसी स्थिति में परिणाम होता है जहां आप इनाम नहीं दे सकते हैं, क्योंकि कुछ ऐसे लोगों के एक निश्चित समूह के लिए योजना बनाई गई है जो एक निश्चित क्षेत्र में विशिष्ट हैं। एक प्रणाली द्वारा उत्पन्न कार्य की आवश्यकता पर उन्हें काम करने के लिए आरंभ किया जाएगा। इसलिए, अगर उस क्षेत्र में आम तौर पर काम नियमित होता है, तो उच्च उत्पादकता या उच्च दक्षता का कोई सवाल ही नहीं था, क्योंकि सब कुछ एक संतुलन में है। और इसलिए, प्रक्रिया में शायद ही कोई कमी हो और सब कुछ बहुत, बहुत नियमित या मानक प्रतीत होता हो; हालाँकि, अगर कोई ऐसा मामला है जहाँ निश्चित रूप से किसी विशेष उत्पाद के कुछ क्षेत्र में कोई चुनौती है या हमें ऐसा संगठन कहना चाहिए जहाँ मैन पावर को स्थानांतरित करने की आवश्यकता है। और कुछ लोगों को काम करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है और वे इस विशेषज्ञता डोमेन को दूसरे क्षेत्र में जाने के लिए छोड़ देते हैं और फिर काम करते हैं जो निश्चित रूप से बहुत उत्पादक और कुशल कर्मचारी माना जाता है। तो, ये संगठनात्मक सिद्धांत, संरचना सिद्धांत के रूप में नौकरी विशेषज्ञता से जुड़े कुछ नकारात्मक संबंध हैं। और इसलिए, वहाँ कुछ विकल्प हैं जो नौकरी विशेषज्ञता के लिए हैं। उदाहरण के लिए, कोई नौकरी में इज़ाफा कर सकता है, और मैं निम्नलिखित स्लाइड्स में व्यक्तिगत रूप से इन विषयों का इलाज करने जा रहा हूं। किसी को निर्णय लेने के कुछ स्तर देकर आप लोगों की नौकरी को समृद्ध कर सकते हैं, एक वाहन के असेंबली लाइन पर हमें एक निश्चित घटक के फिट होने के साथ जुड़े कार्य करने के लिए कहते हैं, और एक कार्यकर्ता के रूप में आप जानते हैं कि इस विधानसभा में है लचीली प्रणाली जहां कई मॉडल होते हैं, और एक मिश्रण मॉडल का उत्पादन होता है। तो, हो सकता है कि आपके पास सामग्री के नियोजन से संबंधित निर्णय हो सकता है, जो आपके कार्य केंद्र में और आपके कार्य केंद्र के माध्यम से वाहन के लिए अग्रिम में विभिन्न मॉडलों के लिए होगा। इसलिए, यदि आप जानते हैं कि आज की विशेष पारी में तीस अलग-अलग वेरिएंट होंगे, तो ऑपरेटर को मीटर के पास सामग्री की उपलब्धता पर ध्यान देना बेहतर होगा और योजना बना सकते हैं कि इन वाहनों में विभिन्न प्रकार के तीस अलग-अलग घटक फिट किए जा रहे हैं । और यदि आप पारी की शुरुआत में सोचते हैं कि आपको लगता है कि वे सामग्री उपलब्ध नहीं हैं, तो वह हमेशा अपनी छाप देने के लिए एक अलार्म उठा सकता है कि हां मुझे एक निश्चित प्रकार की नौकरी के लिए एक निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए। इसलिए, आप मूल रूप से अधिक जिम्मेदारियां मान रहे हैं ताकि यह प्रणाली सुचारु रूप से चले, और यह कार्यकर्ता को फिर से प्रेरित करने का सवाल हो सकता है, यह फिर से कार्यकर्ता को पुरस्कृत करने का प्रश्न हो सकता है यदि इस तरह की समस्याएं नियमित आधार पर होती हैं। तो, आप अधिक से अधिक जिम्मेदारियों को देने या गुल्लक द्वारा ऊर्ध्वाधर स्तर पर नौकरी को समृद्ध कर रहे हैं। एक व्यक्ति जो एक उत्पाद की जांच के बाद असेंबली लाइन पर एक ऑपरेटर होता है और एक चीज के बारे में निरीक्षण करता है जो उसने किया है और एक रिकॉर्ड का रखरखाव करता है यह एक अतिरिक्त कर्तव्य है जिसे वह उस कार्य में अपनी नौकरी के संवर्धन के संदर्भ में मान रहा है जो वह है अन्यथा बाहर ले जाने, कुछ संगठन और कुछ मामलों में उद्योग के साथ उपलब्ध कठोर गुणवत्ता मानदंडों के कारण, लोगों को विभिन्न प्रकार के कार्यों में इस तरह के संवर्धन रणनीति पर ध्यान दिया जाएगा जो आपको तर्क करने और छह सिग्मा आधारित नियंत्रणों की प्रक्रिया में जाने में मदद करेंगे। उच्च गुणवत्ता। इसलिए, निश्चित रूप से, लोगों को विभिन्न विशिष्टताओं में घुमाने का एक और विकल्प हो सकता है। तो, यहाँ प्रशिक्षण का सवाल है और मानव कारणों से जुड़े सीखने की अवस्था का सवाल है। क्योंकि जाहिर है, अगर एक इंसान को एक निश्चित कार्य करने के लिए विशेष किया जाता है, और वह मान लेता है कि वह कार्य को बदल देता है और उसे फिर से पूरी दक्षता से एक अलग कार्य करना है। इसलिए, सभी लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए नहीं है कि लोगों को आपके बारे में जानने के लिए, भिन्न सीखने की प्रतिक्रियाएँ या सीखने की अवस्था हो सकती है और एक बार जिनके पास तेजी से प्रतिक्रियाएँ होती हैं, वे ऐसे रोटेशन के लिए अधिक अपनाने योग्य हो सकते हैं, जो उनके सीखने के संदर्भ में कम हैं। क्षमताओं। तो, इसलिए, स्क्रीनिंग का सवाल है कि हर किसी को घुमाया नहीं जा सकता, लेकिन कुछ को घुमाया जा सकता है। लेकिन तब आप जॉब स्पेशलाइजेशन के क्षेत्र से बाहर निकलते हैं, जब आप जॉब इज़ाफा जॉब संवर्धन और जॉब रोटेशन की ऐसी रणनीति पेश करते हैं। तो आइए हम व्यक्तिगत रूप से देखें कि उनका क्या मतलब है। समय देखेंः पंद्रह:पच्चीस ) Job Enlargement and Job Enrichment Job enlargement - horizontal increase in the number of activities included in the work, but the activities are still of the same type or level Example: worker assembles entire product module rather than just three parts in the module Job enrichment - vertical increase in work content, so that scope of responsibility is increased Example: worker plans, sets up, produces, and inspects parts rather than just produces इसलिए, जैसा कि मैंने आपको बताया था कि नौकरी में वृद्धि का मतलब आमतौर पर काम में शामिल गतिविधियों की संख्या में क्षैतिज वृद्धि होगी। लेकिन गतिविधियाँ अभी भी उसी प्रकार के स्तर के हैं उदाहरण के लिए, कार्यकर्ता केवल एक घटक या एक भाग को उत्पाद मॉड्यूल में इकट्ठा करने के बजाय, वह उन सभी घटकों को इकट्ठा करने के लिए जिम्मेदार है जो एक निश्चित मॉड्यूल में हैं। इसलिए, एक तरह से वह कार्यों का एक विस्तारित सेट प्राप्त करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वह उस निश्चित विधानसभा के पीछे जिम्मेदार हो रहा है जिसे वह एक निश्चित उत्पाद के लिए बना रहा है। इसलिए, एक बार नौकरी मॉड्यूल को बढ़ाकर उन्हें वह सम्मान या आदेश दें या हमें बताएं कि आप उस उत्पाद के पीछे एक स्वामित्व जानते हैं जो वह पैदा कर रहा है। तो, नौकरी में इज़ाफा आम तौर पर उस उद्देश्य से किया जाता है; जाहिर है, एक समय वितरण होने जा रहा है ऐसा नहीं है कि अगर कार्यकर्ता को उपलब्ध कुल समय एक्स है तो आप उसे कुछ ऐसा दे सकते हैं जो दो एक्स या तीन एक्स है। तो, यह समय संतुलित होना चाहिए। लेकिन फिर आप उसे विभिन्न स्तरों पर हिस्सेदारी दे सकते हैं, जहां उसे लगता है कि वह क्या कर रहा है, उसी समय सीमा के भीतर उसे ऐसा लगता है कि वह ऐसा कर रहा है ताकि नौकरी में इज़ाफा हो, वह नौकरी में वृद्धि कर सकता है, जो ऊर्ध्वाधर वृद्धि के बारे में है। कार्य सामग्री मुझे लगता है कि मैंने इस क्षेत्र के बारे में पर्याप्त उल्लेख किया है। कार्य उपकरण वह पर्याप्त मशीनरी सेट करता है वह आपको निरीक्षण करता है कि आप जानते हैं, उसके मूल कार्य से जुड़ी ये सभी चीजें उपांग हैं जिनके लिए
श्रुतस्कन्ध १ धूताख्यान अ ६ उ. ४ दति - गृह्णन्ति, यथा - ज्ञानलवं प्राप्य, तन्मदान्धाः परस्परं वाचनाप्रच्छनादिषु चदन्ति, 'भवता यन्निगद्यते नैतत् समीचीनं, अस्य शब्दस्य नायमर्थः, यथा मयोच्यते स एव सिद्धान्तः, शव्दार्थनिर्णयाय कश्चिदेवास्ति माहशः ' इत्यादिरूपं वचनपारुण्यं स्वीकुर्वन्ति ॥ सु०१ ॥ किञ्च - 'वसित्ता ' इत्यादि । सूलम् - वसित्ता बंभचेरंसि आणं तं नोत्ति मन्नमाणा ।। सू०२॥ छाया - उपित्वा ब्रह्मचर्ये आज्ञां तां नो इति मन्यमानाः ॥ सु० २ ॥ टीका - एके तु शिष्याः ब्रह्मचर्ये संयमे आचारार्थम् उपित्वा = स्थित्वा तामाज्ञां तीर्थङ्करोपदेशरूपां नो इति मन्यमानाः = देशतस्तीर्थक्रुदुपदेशं नाद्रियमाणाः सातागौरव प्रकर्पेणाऽज्ञातकुलादिप्वन्तप्रान्ताहारमाप्तिशङ्कया शरीरविभूपादिना चारित्रमालिन्यलक्षणं बाकु शिकत्वं प्रपद्यन्त इति भावः ॥ सू० २ ॥ करने लग जाते हैं । वे पल्लवग्राहिपाण्डित्यवाले शिष्यजन गर्वोन्मत्त वन - अहंकारसे फूल कर सूत्रोंकी वाचना एवं प्रच्छना आदि के समय यह कह दिया करते हैं कि " आप जो कुछ कह रहे हैं वह ठीक नहीं है, इस शब्दका यह अर्थ नहीं है " " जो कुछ मैं कहता हूं वही यथार्थ है - वही सुन्दर सिद्धान्त है, शब्द और अर्थका निर्णय मेरा जैसा कोई कर सकता है ! कोई नहीं" इत्यादि रूपसे अभिमानयुक्त वचन बोलते हैं । सू० १ ॥ तथा - "वसित्ता" इत्यादि । कोई एक शिष्यजन ब्रह्मचर्यका पालन करके तीर्थङ्कर उपदिष्ट आज्ञा का आदर नहीं करते हैं । एकदेशसे भी तीर्थङ्करके उपदेशको वे नहीं मानते हैं । सातागौरवके प्रकर्षसे "कदाचित् अज्ञातकुलादिकों में हमें अन्तप्रान्त आहार मिले ? " इस प्रकारकी शङ्कासे वे शारीरिक वेषકઠોર વ્યવહાર કરવા લાગે છે. તેવા પલ્લવગ્રાહિપાંડિત્યવાળા શિષ્યજન ગ - મત્ત બની અહંકારથી ફુલાઈ જઈ સૂત્રોની વાચના અથવા પ્રચ્છના આદિના સમયે એવુ કહી દે છે કે આપ જે કાંઈ કહેા છે એ ઠીક નથી, આ શબ્દને આ આ અર્થ નથી.' હું જે કાંઇ કહું છું તે ખરોખર છે. એ જ સુંદર સિદ્ધાન્ત છે, શબ્દ અને અા નિણૅય મારા જેવા કાઈ કરી શકે છે! કોઈ નહિ ઈત્યાદિ રૂપથી અભિમાનયુકત વચન ખેલે છે. (સૂ૦૧) तथा " वसित्ता " इत्यादि ! કોઈ એક શિષ્યજન બ્રહ્મચર્યનું પાલન કરી તીર્થંકરે ઉપદેશેલ આજ્ઞાને આદર ન કરે, એકદેશથી પણ તીર્થંકરના ઉપદેશને એ ન માને, સાતાગૌરવના
श्रुतस्कन्ध एक धूताख्यान अ छः उ. चार दति - गृह्णन्ति, यथा - ज्ञानलवं प्राप्य, तन्मदान्धाः परस्परं वाचनाप्रच्छनादिषु चदन्ति, 'भवता यन्निगद्यते नैतत् समीचीनं, अस्य शब्दस्य नायमर्थः, यथा मयोच्यते स एव सिद्धान्तः, शव्दार्थनिर्णयाय कश्चिदेवास्ति माहशः ' इत्यादिरूपं वचनपारुण्यं स्वीकुर्वन्ति ॥ सुएक ॥ किञ्च - 'वसित्ता ' इत्यादि । सूलम् - वसित्ता बंभचेरंसि आणं तं नोत्ति मन्नमाणा ।। सूदो॥ छाया - उपित्वा ब्रह्मचर्ये आज्ञां तां नो इति मन्यमानाः ॥ सुशून्य दो ॥ टीका - एके तु शिष्याः ब्रह्मचर्ये संयमे आचारार्थम् उपित्वा = स्थित्वा तामाज्ञां तीर्थङ्करोपदेशरूपां नो इति मन्यमानाः = देशतस्तीर्थक्रुदुपदेशं नाद्रियमाणाः सातागौरव प्रकर्पेणाऽज्ञातकुलादिप्वन्तप्रान्ताहारमाप्तिशङ्कया शरीरविभूपादिना चारित्रमालिन्यलक्षणं बाकु शिकत्वं प्रपद्यन्त इति भावः ॥ सूशून्य दो ॥ करने लग जाते हैं । वे पल्लवग्राहिपाण्डित्यवाले शिष्यजन गर्वोन्मत्त वन - अहंकारसे फूल कर सूत्रोंकी वाचना एवं प्रच्छना आदि के समय यह कह दिया करते हैं कि " आप जो कुछ कह रहे हैं वह ठीक नहीं है, इस शब्दका यह अर्थ नहीं है " " जो कुछ मैं कहता हूं वही यथार्थ है - वही सुन्दर सिद्धान्त है, शब्द और अर्थका निर्णय मेरा जैसा कोई कर सकता है ! कोई नहीं" इत्यादि रूपसे अभिमानयुक्त वचन बोलते हैं । सूशून्य एक ॥ तथा - "वसित्ता" इत्यादि । कोई एक शिष्यजन ब्रह्मचर्यका पालन करके तीर्थङ्कर उपदिष्ट आज्ञा का आदर नहीं करते हैं । एकदेशसे भी तीर्थङ्करके उपदेशको वे नहीं मानते हैं । सातागौरवके प्रकर्षसे "कदाचित् अज्ञातकुलादिकों में हमें अन्तप्रान्त आहार मिले ? " इस प्रकारकी शङ्कासे वे शारीरिक वेषકઠોર વ્યવહાર કરવા લાગે છે. તેવા પલ્લવગ્રાહિપાંડિત્યવાળા શિષ્યજન ગ - મત્ત બની અહંકારથી ફુલાઈ જઈ સૂત્રોની વાચના અથવા પ્રચ્છના આદિના સમયે એવુ કહી દે છે કે આપ જે કાંઈ કહેા છે એ ઠીક નથી, આ શબ્દને આ આ અર્થ નથી.' હું જે કાંઇ કહું છું તે ખરોખર છે. એ જ સુંદર સિદ્ધાન્ત છે, શબ્દ અને અા નિણૅય મારા જેવા કાઈ કરી શકે છે! કોઈ નહિ ઈત્યાદિ રૂપથી અભિમાનયુકત વચન ખેલે છે. तथा " वसित्ता " इत्यादि ! કોઈ એક શિષ્યજન બ્રહ્મચર્યનું પાલન કરી તીર્થંકરે ઉપદેશેલ આજ્ઞાને આદર ન કરે, એકદેશથી પણ તીર્થંકરના ઉપદેશને એ ન માને, સાતાગૌરવના
जोकोविच दाहिनी कोहनी में चोट के कारण तीन सप्ताह बाद कोर्ट पर वापसी कर रहे हैं। जोकोविच का अगला मुकाबला ग्रिगोर दिमित्रोव से होगा, जिन्होंने स्टेन वावरिंका को 6-4, 7-6 (3) से हराया। फ्रेंच ओपन की तैयारियों में जुटे सर्बियाई टेनिस स्टार नोवाक जोकोविच ने विश्व में 61वीं रैंकिंग के टॉमस मार्टिन एच्चेवेरी के खिलाफ संघर्षपूर्ण जीत दर्ज करके इटालियन ओपन टेनिस टूर्नामेंट के अगले दौर में प्रवेश किया। इस क्लेकोर्ट टूर्नामेंट में सातवां खिताब जीतने की कवायद में लगे जोकोविच ने एच्चेवेरी 7-6 (5), 6-2 से हराया। जोकोविच दाहिनी कोहनी में चोट के कारण तीन सप्ताह बाद कोर्ट पर वापसी कर रहे हैं। जोकोविच का अगला मुकाबला ग्रिगोर दिमित्रोव से होगा, जिन्होंने स्टेन वावरिंका को 6-4, 7-6 (3) से हराया। पुरुष वर्ग के अन्य मैचों में स्थानीय खिलाड़ी यानिक सिनर ने थानासी कोकिनाकिस को 6-1, 6-4 से, ऑस्ट्रेलियाई क्वालिफायर अलेक्सी पोपिरिन ने फेलिक्स ऑगर अलियासिम को 6-4, 4-6, 7-5 से, इटली के फैबियो फोगनिनी ने मिओमिर केकमानोविकच को 6-3, 7-6 (6) से और सातवीं वरीयता प्राप्त होल्गर रून ने आर्थर फिल्स को 6-3, 6-3 से हराया। महिलाओं के वर्ग में शीर्ष वरीयता प्राप्त इगा स्वियातेक ने अनास्तासिया पाव्लुचेनकोवा को 6-0, 6-0 से हराकर रोम में अपना तीसरा खिताब जीतने की तरफ मजबूत कदम बढ़ाए। अन्य मैचों में पाउला बडोसा ने पिछले साल की उपविजेता ओन्स जैबूर को 6-1, 6-4 से, नौवीं वरीयता प्राप्त मारिया सकारी ने बारबोरा स्ट्राइकोवा को 6-1, 6-3 से और करोलिना मुचोवा ने 18 वीं वरीयता प्राप्त मार्टिना ट्रेविसन को 3-6, 6-3, 7-5 से हराया। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
जोकोविच दाहिनी कोहनी में चोट के कारण तीन सप्ताह बाद कोर्ट पर वापसी कर रहे हैं। जोकोविच का अगला मुकाबला ग्रिगोर दिमित्रोव से होगा, जिन्होंने स्टेन वावरिंका को छः-चार, सात-छः से हराया। फ्रेंच ओपन की तैयारियों में जुटे सर्बियाई टेनिस स्टार नोवाक जोकोविच ने विश्व में इकसठवीं रैंकिंग के टॉमस मार्टिन एच्चेवेरी के खिलाफ संघर्षपूर्ण जीत दर्ज करके इटालियन ओपन टेनिस टूर्नामेंट के अगले दौर में प्रवेश किया। इस क्लेकोर्ट टूर्नामेंट में सातवां खिताब जीतने की कवायद में लगे जोकोविच ने एच्चेवेरी सात-छः , छः-दो से हराया। जोकोविच दाहिनी कोहनी में चोट के कारण तीन सप्ताह बाद कोर्ट पर वापसी कर रहे हैं। जोकोविच का अगला मुकाबला ग्रिगोर दिमित्रोव से होगा, जिन्होंने स्टेन वावरिंका को छः-चार, सात-छः से हराया। पुरुष वर्ग के अन्य मैचों में स्थानीय खिलाड़ी यानिक सिनर ने थानासी कोकिनाकिस को छः-एक, छः-चार से, ऑस्ट्रेलियाई क्वालिफायर अलेक्सी पोपिरिन ने फेलिक्स ऑगर अलियासिम को छः-चार, चार-छः, सात-पाँच से, इटली के फैबियो फोगनिनी ने मिओमिर केकमानोविकच को छः-तीन, सात-छः से और सातवीं वरीयता प्राप्त होल्गर रून ने आर्थर फिल्स को छः-तीन, छः-तीन से हराया। महिलाओं के वर्ग में शीर्ष वरीयता प्राप्त इगा स्वियातेक ने अनास्तासिया पाव्लुचेनकोवा को छः-शून्य, छः-शून्य से हराकर रोम में अपना तीसरा खिताब जीतने की तरफ मजबूत कदम बढ़ाए। अन्य मैचों में पाउला बडोसा ने पिछले साल की उपविजेता ओन्स जैबूर को छः-एक, छः-चार से, नौवीं वरीयता प्राप्त मारिया सकारी ने बारबोरा स्ट्राइकोवा को छः-एक, छः-तीन से और करोलिना मुचोवा ने अट्ठारह वीं वरीयता प्राप्त मार्टिना ट्रेविसन को तीन-छः, छः-तीन, सात-पाँच से हराया। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
उत्तरकाशी. उत्तराखंड में मौसम खराब चल रहा है. जगह जगह बारिश, हिमपात और भूस्खलन हो रहा है. खराब मौसम के कारण गंगोत्री हाइवे बंद पड़ा हुआ है. इससे सैकड़ों लोग यहां वहां फंस गए हैं. केदारघाटी में हेलि क्रैश होने के बाद वहां एनडीआरएफ की टीम पहुंच गयी है. भारी बारिश के बीच टीम बचाव कार्य में जुटी हैं. जनपद उत्तरक़ाशी में बन्दरकोट के पास पिछले 18 घण्टे से हाईवे बन्द है. यहां पर एक बार फिर भूस्खलन जोन सक्रिय होने से रास्ता बंद करना पड़ा. हाइवे बंद होने से बड़ी संख्या में यात्री या तो रास्ते में फंसे हुए हैं या फिर अपने होटल और घरों में रह गए हैं. आवागमन बंद होने से कोई एक से दूसरी जगह नहीं जा पा रहा है. मार्ग बंद हो जाने से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि कार्यदायी संस्था की मशीन हाइवे खोलने के काम में युद्धस्तर पर जुटी हुई है. खराब मौसम के कारण ही आज केदारघाटी में हेली क्रैश हो गया. जिस जगह दुर्घटना हुई वहां भारी बारिश हो रही थी. हादसे में पायलट सहित 7 यात्री मारे गए. सभी साउथ के बताए जा रहे हैं. मृतकों में दो महिलाएं भी हैं. दुर्घटनाग्रस्त हेलि आर्यन कंपनी का था जो मौसम खराब होने के बावजूद उड़ान भर रहा था. वो केदारनाथ धाम से यात्रियों को लेकर लौट रहा था. .
उत्तरकाशी. उत्तराखंड में मौसम खराब चल रहा है. जगह जगह बारिश, हिमपात और भूस्खलन हो रहा है. खराब मौसम के कारण गंगोत्री हाइवे बंद पड़ा हुआ है. इससे सैकड़ों लोग यहां वहां फंस गए हैं. केदारघाटी में हेलि क्रैश होने के बाद वहां एनडीआरएफ की टीम पहुंच गयी है. भारी बारिश के बीच टीम बचाव कार्य में जुटी हैं. जनपद उत्तरक़ाशी में बन्दरकोट के पास पिछले अट्ठारह घण्टे से हाईवे बन्द है. यहां पर एक बार फिर भूस्खलन जोन सक्रिय होने से रास्ता बंद करना पड़ा. हाइवे बंद होने से बड़ी संख्या में यात्री या तो रास्ते में फंसे हुए हैं या फिर अपने होटल और घरों में रह गए हैं. आवागमन बंद होने से कोई एक से दूसरी जगह नहीं जा पा रहा है. मार्ग बंद हो जाने से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि कार्यदायी संस्था की मशीन हाइवे खोलने के काम में युद्धस्तर पर जुटी हुई है. खराब मौसम के कारण ही आज केदारघाटी में हेली क्रैश हो गया. जिस जगह दुर्घटना हुई वहां भारी बारिश हो रही थी. हादसे में पायलट सहित सात यात्री मारे गए. सभी साउथ के बताए जा रहे हैं. मृतकों में दो महिलाएं भी हैं. दुर्घटनाग्रस्त हेलि आर्यन कंपनी का था जो मौसम खराब होने के बावजूद उड़ान भर रहा था. वो केदारनाथ धाम से यात्रियों को लेकर लौट रहा था. .
उनके अनुसार बुद्धिका जीवन अथवा नियमनिष्ठ जीवन ही योग्य जीवन है। यह लोकरीतियों और प्रचलनोंका विरोधी नहीं है क्योंकि मानवसमाजमें स्थापित नियमों और रीतियोंके रूप में ही सामान्य बुद्धि मूर्तिमान् होती है। मनुष्यका कर्त्तव्य उनके अनुरूप कर्म करना है, न कि उनके विपरीत । मानव-जीवन नियमसे मुक्त नहीं है । सच्चे नियमको समझना और उसका पालन करना ही मनुष्यका ध्येय है । स्टोइक्स यथार्थवाद और आदर्शवाद दोनों को ही अपना लेते हैं । यथार्थ ही को बौद्धिक भी मानते हुए वे कहते हैं कि भाग्यकी घटनाओंके प्रति उदासीन रहना चाहिये । परिवर्तनशील परिस्थितियोंसे प्रभावित न होकर दृढ़ एवं कठोर बने रहना चाहिये । किन्तु साथ ही वे यह भी मानते हैं कि सब वस्तुएँ मिलजुलकर शुभके लिए काम करती हैं । व्यक्ति विश्वका अङ्ग है, उसे जीवनकी घटनाओंको स्वीकार करना चाहिये ; क्योंकि व्यक्तिपर जो कुछ भी बीतता है वह विश्व के लिए शुभ है । वास्तवमें सुकरातके सभी अनुयायियोंने किसी न किसी रूपमें यह माना कि विश्वकी धारणा दिव्य विचारसे संघटित और व्यवस्थित है । कुछ दार्शनिक इस परिणामपर भी पहुँचे कि दिव्य विचार ही विश्वकी एकमात्र सत्य सत्ता है। यह सर्वेश्वरवाद है । स्टोइक्सके सिद्धान्तमें यह विचार मानव-शुभकी धारणासे युक्त हो गया है। वे कहते हैं कि विश्व ज़ैउस्से विकसित हुआ है और अन्तमें यह फिर उसीमें लीन हो जायगा । अपने मूलरूपमें दैवी होने के कारण विश्व पूर्ण है। उसके अङ्गों में जो त्रुटियाँ या खोट दिखाई पड़ते हैं उनका कारण यह है कि हम उन्हें समग्रतासे अलग करके देखते हैं । समग्रताके दृष्टिकोण से विश्व पूर्ण तथा शुभ है । भौतिक विश्व सम्बन्धी इस प्रकार के ईश्वरज्ञानने स्टोइक्सको यह बतलाया कि लौकिक सत्यके अनुसार विवेक मानव-कल्याण के लिए पूर्ण रूपसे पर्याप्त है । सार्वभौम लोग 'स और भगवान् एक ही हैं । अतः लोग स या बुद्धिके अनुरूप कर्म करना अन्तःस्थित भगवान्के अनुरूप कर्म करना है । जिस बुद्धिको उन्होंने सर्वोच्च कहा वह जेउसकी बुद्धि है, साथ ही देवताओं,
उनके अनुसार बुद्धिका जीवन अथवा नियमनिष्ठ जीवन ही योग्य जीवन है। यह लोकरीतियों और प्रचलनोंका विरोधी नहीं है क्योंकि मानवसमाजमें स्थापित नियमों और रीतियोंके रूप में ही सामान्य बुद्धि मूर्तिमान् होती है। मनुष्यका कर्त्तव्य उनके अनुरूप कर्म करना है, न कि उनके विपरीत । मानव-जीवन नियमसे मुक्त नहीं है । सच्चे नियमको समझना और उसका पालन करना ही मनुष्यका ध्येय है । स्टोइक्स यथार्थवाद और आदर्शवाद दोनों को ही अपना लेते हैं । यथार्थ ही को बौद्धिक भी मानते हुए वे कहते हैं कि भाग्यकी घटनाओंके प्रति उदासीन रहना चाहिये । परिवर्तनशील परिस्थितियोंसे प्रभावित न होकर दृढ़ एवं कठोर बने रहना चाहिये । किन्तु साथ ही वे यह भी मानते हैं कि सब वस्तुएँ मिलजुलकर शुभके लिए काम करती हैं । व्यक्ति विश्वका अङ्ग है, उसे जीवनकी घटनाओंको स्वीकार करना चाहिये ; क्योंकि व्यक्तिपर जो कुछ भी बीतता है वह विश्व के लिए शुभ है । वास्तवमें सुकरातके सभी अनुयायियोंने किसी न किसी रूपमें यह माना कि विश्वकी धारणा दिव्य विचारसे संघटित और व्यवस्थित है । कुछ दार्शनिक इस परिणामपर भी पहुँचे कि दिव्य विचार ही विश्वकी एकमात्र सत्य सत्ता है। यह सर्वेश्वरवाद है । स्टोइक्सके सिद्धान्तमें यह विचार मानव-शुभकी धारणासे युक्त हो गया है। वे कहते हैं कि विश्व ज़ैउस्से विकसित हुआ है और अन्तमें यह फिर उसीमें लीन हो जायगा । अपने मूलरूपमें दैवी होने के कारण विश्व पूर्ण है। उसके अङ्गों में जो त्रुटियाँ या खोट दिखाई पड़ते हैं उनका कारण यह है कि हम उन्हें समग्रतासे अलग करके देखते हैं । समग्रताके दृष्टिकोण से विश्व पूर्ण तथा शुभ है । भौतिक विश्व सम्बन्धी इस प्रकार के ईश्वरज्ञानने स्टोइक्सको यह बतलाया कि लौकिक सत्यके अनुसार विवेक मानव-कल्याण के लिए पूर्ण रूपसे पर्याप्त है । सार्वभौम लोग 'स और भगवान् एक ही हैं । अतः लोग स या बुद्धिके अनुरूप कर्म करना अन्तःस्थित भगवान्के अनुरूप कर्म करना है । जिस बुद्धिको उन्होंने सर्वोच्च कहा वह जेउसकी बुद्धि है, साथ ही देवताओं,
मुंबई. सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को उस वक्त शर्मिदगी महसूस करनी पड़ी जब उनके दोस्त के अंतिम संस्कार के समय ही लोग उनके साथ सेल्फी लेने लगे. अमिताभ ने कहा है कि लोग न मृत व्यक्ति का सम्मान कर रहे थे और न ही जीवित व्यक्ति का, जो वहां उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्र हुए थे. T 1918 -At cremation people taking selfies! Disgusting ! ! No respect for the departed, or for the moment !
मुंबई. सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को उस वक्त शर्मिदगी महसूस करनी पड़ी जब उनके दोस्त के अंतिम संस्कार के समय ही लोग उनके साथ सेल्फी लेने लगे. अमिताभ ने कहा है कि लोग न मृत व्यक्ति का सम्मान कर रहे थे और न ही जीवित व्यक्ति का, जो वहां उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्र हुए थे. T एक हज़ार नौ सौ अट्ठारह -At cremation people taking selfies! Disgusting ! ! No respect for the departed, or for the moment !
सामान्य तौर पर चार इंजनों वाले इस विमान का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय परिचालन या अति महत्वपूर्ण व्यक्तियों के आने-जाने में किया जाता है। मुंबई, एक अक्टूबरः सरकारी विमानन कंपनी त्योहारी मांग की पूर्ति के लिए 16 अक्टूबर से मुंबई और कोलकाता के लिए 423 सीटों वाला डबल-डेकर विमान जंबो जेट बोइंग 747 की सेवा शुरू करने वाली है। कंपनी ने जारी बयान में कहा कि 16 अक्टूबर से 21 अक्टूबर के बीच नई दिल्ली से कोलकाता और मुंबई के लिए जंबो जेट की रोज एक उड़ान होगी। इस विमान में प्रथम श्रेणी में 12 सीट, बिजनेस श्रेणी में 26 सीट जबकि इकोनॉमी श्रेणी में 385 सीट हैं। सामान्य तौर पर चार इंजनों वाले इस विमान का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय परिचालन या अति महत्वपूर्ण व्यक्तियों के आने-जाने में किया जाता है। घरेलू एयरलाइंस कंपनी स्पाइसजेट ने उड़ान योजना के तहत अहमदाबाद और सूरत से जैसलमेर के लिये नई उड़ान शुरू करने की है। साथ ही कंपनी ने आठ और नई उड़ानें भी शुरू की हैं। इसमें अहमदाबाद- जबलपुर, अहमदाबाद-देहरादून, अहमदाबाद-पटना, सूरत-उदयपुर और उदयपुर-वाराणसी शामिल हैं। कंपनी की अहमदाबाद-जैसलमेर-अहमदाबाद की सीधी उड़ान 31 अक्टूबर और सूरत-जैसलमेर-सूरत उड़ान 30 नवंबर से शुरू होगी।
सामान्य तौर पर चार इंजनों वाले इस विमान का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय परिचालन या अति महत्वपूर्ण व्यक्तियों के आने-जाने में किया जाता है। मुंबई, एक अक्टूबरः सरकारी विमानन कंपनी त्योहारी मांग की पूर्ति के लिए सोलह अक्टूबर से मुंबई और कोलकाता के लिए चार सौ तेईस सीटों वाला डबल-डेकर विमान जंबो जेट बोइंग सात सौ सैंतालीस की सेवा शुरू करने वाली है। कंपनी ने जारी बयान में कहा कि सोलह अक्टूबर से इक्कीस अक्टूबर के बीच नई दिल्ली से कोलकाता और मुंबई के लिए जंबो जेट की रोज एक उड़ान होगी। इस विमान में प्रथम श्रेणी में बारह सीट, बिजनेस श्रेणी में छब्बीस सीट जबकि इकोनॉमी श्रेणी में तीन सौ पचासी सीट हैं। सामान्य तौर पर चार इंजनों वाले इस विमान का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय परिचालन या अति महत्वपूर्ण व्यक्तियों के आने-जाने में किया जाता है। घरेलू एयरलाइंस कंपनी स्पाइसजेट ने उड़ान योजना के तहत अहमदाबाद और सूरत से जैसलमेर के लिये नई उड़ान शुरू करने की है। साथ ही कंपनी ने आठ और नई उड़ानें भी शुरू की हैं। इसमें अहमदाबाद- जबलपुर, अहमदाबाद-देहरादून, अहमदाबाद-पटना, सूरत-उदयपुर और उदयपुर-वाराणसी शामिल हैं। कंपनी की अहमदाबाद-जैसलमेर-अहमदाबाद की सीधी उड़ान इकतीस अक्टूबर और सूरत-जैसलमेर-सूरत उड़ान तीस नवंबर से शुरू होगी।
चार दिन पहले शंकराचार्य जयंती पर देशभर से जुटे 108 पंडितों ने सूर्यमंदिर पहुंचकर हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया। उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा भी आठ मई को मंदिर में नवग्रह अष्टमंगलम पूजा में शामिल हुए। कश्मीर में बदली फिजा के बीच अब फिर से मंत्रोच्चार गूंजने लगे हैं। हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ से भी वादियां गूंज रही हैं। आतंकवाद ग्रस्त रहे अनंतनाग के मट्टन स्थित मार्तंड सूर्यमंदिर में एक अनुमान के अनुसार लगभग सात सौ साल बाद इस साल से पूजन की पहल शुरू हुई है। अब तक तीन बार सामूहिक पूजा-अर्चना हो चुकी है। चार दिन पहले शंकराचार्य जयंती पर देशभर से जुटे 108 पंडितों ने सूर्यमंदिर पहुंचकर हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया। उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा भी आठ मई को मंदिर में नवग्रह अष्टमंगलम पूजा में शामिल हुए। हालांकि, मंदिर अभी आम लोगों के लिए नहीं खोला गया है। पुरातत्व विभाग मंदिर की देखरेख कर रहा है। मट्टन में मार्तंड तीर्थ से करीब एक किलोमीटर दूर मार्तंड सूर्य मंदिर है। इसे काराकोट राजवंश के महाराजा ललितादित्य ने आठवीं शताब्दी में बनवाया था। बताते हैं कि इस मंदिर को मुगल शासनकाल में सिकंदर शाह मीरी ने क्षतिग्रस्त कर दिया था। तब से पूजा पाठ बंद हो गया। अब भी यह मंदिर क्षतिग्रस्त स्थिति में है। पुरातत्व विभाग ने इस मंदिर को अपने अधीन ले रखा है और वो ही इसके सारे इंतजाम करता है। मार्तंड तीर्थ के पुजारी पंडित अजय शास्त्री बताते हैं कि इस साल मंदिर में पूजा-पाठ की पहल शुरू की गई है। अब तक तीन बार यहां पूजा अर्चना हो चुकी है। पहली बार आठ फरवरी को कर्नाटक के मैसूर स्थित अवधूता दत्ता पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी गणपति सच्चिदानंद ने पूजा अर्चना की। लघु रुद्राभिषेक, सत्यनारायण व भगवान भास्कर की पूजा के साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। इसके बाद शंकराचार्य जयंती पर छह मई को राजस्थान के करोली के स्वामी रुद्रनाथ महाराज के नेतृत्व में 108 ब्राह्मण पहुंचे। इनमें वृंदावन, मथुरा, काशी व ऋषिकेश समेत अन्य स्थानों के ब्राह्मण शामिल थे। सभी ने रुद्राभिषेक के साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ किया। सामूहिक रूप से 324 बार हनुमान चालीसा का पाठ हुआ। प्रत्येक ब्राह्मण ने तीन बार यह पाठ किया। उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने आठ मई को नवग्रह अष्टमंगलम पूजा की तो उस समय देशभर के संतों के साथ ही कश्मीरी पंडित समुदाय के लोगों के साथ स्थानीय निवासी भी मौजूद रहे। हर-हर महादेव के नारे लगाने के साथ ही शंखों की ध्वनि वातावरण में गूंजी। मंदिर में स्थित कुंड में भी जल भरा गया। कश्मीरी पंडित समुदाय से जुड़े पूर्व एमएलसी सुरिंदर अंबरदार उम्मीद जताते हैं कि उप-राज्यपाल के दौरे के बाद अब इस मंदिर की दशा सुधरेगी। साथ ही इस मंदिर में पूजा-पाठ नियमित रूप से हो सकेगी। मंदिर में 365 मूर्तियां परिक्रमा मार्ग में हैं। द्वारपाल जय-विजय के साथ गंगा व यमुना जी की मूर्ति भी है। इसके साथ ही गणपति, कृष्ण, हनुमान, शंकर समेत अन्य भगवानों की भी मूर्तियां हैं। हालांकि, ये मूर्तियां अब जर्जर स्थिति में हैं। किसी के हाथ गायब हैं तो किसी के मुंह। जर्जर हाल में इन मूर्तियों को भी अपने दिन बहुरने का इंतजार है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
चार दिन पहले शंकराचार्य जयंती पर देशभर से जुटे एक सौ आठ पंडितों ने सूर्यमंदिर पहुंचकर हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया। उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा भी आठ मई को मंदिर में नवग्रह अष्टमंगलम पूजा में शामिल हुए। कश्मीर में बदली फिजा के बीच अब फिर से मंत्रोच्चार गूंजने लगे हैं। हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ से भी वादियां गूंज रही हैं। आतंकवाद ग्रस्त रहे अनंतनाग के मट्टन स्थित मार्तंड सूर्यमंदिर में एक अनुमान के अनुसार लगभग सात सौ साल बाद इस साल से पूजन की पहल शुरू हुई है। अब तक तीन बार सामूहिक पूजा-अर्चना हो चुकी है। चार दिन पहले शंकराचार्य जयंती पर देशभर से जुटे एक सौ आठ पंडितों ने सूर्यमंदिर पहुंचकर हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया। उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा भी आठ मई को मंदिर में नवग्रह अष्टमंगलम पूजा में शामिल हुए। हालांकि, मंदिर अभी आम लोगों के लिए नहीं खोला गया है। पुरातत्व विभाग मंदिर की देखरेख कर रहा है। मट्टन में मार्तंड तीर्थ से करीब एक किलोमीटर दूर मार्तंड सूर्य मंदिर है। इसे काराकोट राजवंश के महाराजा ललितादित्य ने आठवीं शताब्दी में बनवाया था। बताते हैं कि इस मंदिर को मुगल शासनकाल में सिकंदर शाह मीरी ने क्षतिग्रस्त कर दिया था। तब से पूजा पाठ बंद हो गया। अब भी यह मंदिर क्षतिग्रस्त स्थिति में है। पुरातत्व विभाग ने इस मंदिर को अपने अधीन ले रखा है और वो ही इसके सारे इंतजाम करता है। मार्तंड तीर्थ के पुजारी पंडित अजय शास्त्री बताते हैं कि इस साल मंदिर में पूजा-पाठ की पहल शुरू की गई है। अब तक तीन बार यहां पूजा अर्चना हो चुकी है। पहली बार आठ फरवरी को कर्नाटक के मैसूर स्थित अवधूता दत्ता पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी गणपति सच्चिदानंद ने पूजा अर्चना की। लघु रुद्राभिषेक, सत्यनारायण व भगवान भास्कर की पूजा के साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। इसके बाद शंकराचार्य जयंती पर छह मई को राजस्थान के करोली के स्वामी रुद्रनाथ महाराज के नेतृत्व में एक सौ आठ ब्राह्मण पहुंचे। इनमें वृंदावन, मथुरा, काशी व ऋषिकेश समेत अन्य स्थानों के ब्राह्मण शामिल थे। सभी ने रुद्राभिषेक के साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ किया। सामूहिक रूप से तीन सौ चौबीस बार हनुमान चालीसा का पाठ हुआ। प्रत्येक ब्राह्मण ने तीन बार यह पाठ किया। उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने आठ मई को नवग्रह अष्टमंगलम पूजा की तो उस समय देशभर के संतों के साथ ही कश्मीरी पंडित समुदाय के लोगों के साथ स्थानीय निवासी भी मौजूद रहे। हर-हर महादेव के नारे लगाने के साथ ही शंखों की ध्वनि वातावरण में गूंजी। मंदिर में स्थित कुंड में भी जल भरा गया। कश्मीरी पंडित समुदाय से जुड़े पूर्व एमएलसी सुरिंदर अंबरदार उम्मीद जताते हैं कि उप-राज्यपाल के दौरे के बाद अब इस मंदिर की दशा सुधरेगी। साथ ही इस मंदिर में पूजा-पाठ नियमित रूप से हो सकेगी। मंदिर में तीन सौ पैंसठ मूर्तियां परिक्रमा मार्ग में हैं। द्वारपाल जय-विजय के साथ गंगा व यमुना जी की मूर्ति भी है। इसके साथ ही गणपति, कृष्ण, हनुमान, शंकर समेत अन्य भगवानों की भी मूर्तियां हैं। हालांकि, ये मूर्तियां अब जर्जर स्थिति में हैं। किसी के हाथ गायब हैं तो किसी के मुंह। जर्जर हाल में इन मूर्तियों को भी अपने दिन बहुरने का इंतजार है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
दिल्ली में आज न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। देश के विभिन्न हिस्सों में बारिश की वजह से पुछले कुछ दिनों में मौसम सुहाना बना हुआ है। अप्रैल के महीने की शुरुआत से ही उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक मौसम में बदलाव देखने को मिल है। मौसम का मिजाज बदलने से लोगों की गर्मी से राहत मिली है। मौसम विभाग ने मौसम को लेकर एक नया अपडेट जारी किया है। आईएमडी के मुताबिक हिमालय क्षेत्र एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने वाला है जिसके कारण देश के कई इलाकों में बारिश, आंधी-तूफान हो सकती है। मौसम विभगा के अनुसार 3 अप्रैल और 5 अप्रैल तक कई जगहों पर गरज के साथ भारी वर्षा होने की संभावना है। इसके अलावा ओले गरिने का भी अनुमान है। वहीं आईएमडी ने जानकारी दी कि पश्चिमी विक्षोभ की वजह से 3 और 4 अप्रैल के बीच गरज के साथ बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को देश की राजधानी दिल्ली समेत एनसीआर में बादल गरजने के साथ बारिश होने का अनुमान है। इसके अलावा दिल्ली में आज न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। आईएमडी के अनुसार दिल्ली में मंगलवार 4 अप्रैल को भी हल्की बारिश हो सकती है। इसके बाद राजधानी के तापमान में बढ़ोत्तरी होगी और गर्मी लोगों को सताएगी। मौसम विभाग के अनुसार 3 और 4 अप्रैल को उत्तर पश्चिमी भारत के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदलेगा। इसके बाद पंजाब, राजस्थान व पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हल्की बारिश हो सकती है। वहीं उत्तराखंड में इस दौरान ओलावृष्टि का अनुमान है। हिमाचल प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में ओले गिर सकते हैं। मौसम विभगा के मुताबिक सोमवार 3 अप्रैल को पंजाब, पश्चिमी यूपी, राजस्थान के साथ दिल्ली-एनसीआर के कुछ हिस्सो में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इतना ही नहीं इसद दौरान आकाश में बिजली चमकने और बादल गरजने की संभावना है। आपको बता दें कि आईएमडी ने हिमाचल प्रदेश में बारिश और ओलावृष्टि का येलो अलर्ट जारी किया है। आंधी तूफान के साथ हिमाचल प्रदेश में बारिश हो सकती है।
दिल्ली में आज न्यूनतम तापमान सोलह डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान बत्तीस डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। देश के विभिन्न हिस्सों में बारिश की वजह से पुछले कुछ दिनों में मौसम सुहाना बना हुआ है। अप्रैल के महीने की शुरुआत से ही उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक मौसम में बदलाव देखने को मिल है। मौसम का मिजाज बदलने से लोगों की गर्मी से राहत मिली है। मौसम विभाग ने मौसम को लेकर एक नया अपडेट जारी किया है। आईएमडी के मुताबिक हिमालय क्षेत्र एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने वाला है जिसके कारण देश के कई इलाकों में बारिश, आंधी-तूफान हो सकती है। मौसम विभगा के अनुसार तीन अप्रैल और पाँच अप्रैल तक कई जगहों पर गरज के साथ भारी वर्षा होने की संभावना है। इसके अलावा ओले गरिने का भी अनुमान है। वहीं आईएमडी ने जानकारी दी कि पश्चिमी विक्षोभ की वजह से तीन और चार अप्रैल के बीच गरज के साथ बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को देश की राजधानी दिल्ली समेत एनसीआर में बादल गरजने के साथ बारिश होने का अनुमान है। इसके अलावा दिल्ली में आज न्यूनतम तापमान सोलह डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान बत्तीस डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। आईएमडी के अनुसार दिल्ली में मंगलवार चार अप्रैल को भी हल्की बारिश हो सकती है। इसके बाद राजधानी के तापमान में बढ़ोत्तरी होगी और गर्मी लोगों को सताएगी। मौसम विभाग के अनुसार तीन और चार अप्रैल को उत्तर पश्चिमी भारत के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदलेगा। इसके बाद पंजाब, राजस्थान व पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हल्की बारिश हो सकती है। वहीं उत्तराखंड में इस दौरान ओलावृष्टि का अनुमान है। हिमाचल प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में ओले गिर सकते हैं। मौसम विभगा के मुताबिक सोमवार तीन अप्रैल को पंजाब, पश्चिमी यूपी, राजस्थान के साथ दिल्ली-एनसीआर के कुछ हिस्सो में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इतना ही नहीं इसद दौरान आकाश में बिजली चमकने और बादल गरजने की संभावना है। आपको बता दें कि आईएमडी ने हिमाचल प्रदेश में बारिश और ओलावृष्टि का येलो अलर्ट जारी किया है। आंधी तूफान के साथ हिमाचल प्रदेश में बारिश हो सकती है।
धन प्राप्ति के साधनों पर विचार कीजिये । भाग्य से भी धन मिलता हुआ देखा जाता है, परन्तु भाग्य एक ऐसा बल है जिसपर किसी का स्व तन्त्र अधिकार नहीं होता। अतएव भाग्य के भरोसे अकर्मण्य बनना ठीक नहीं । तुलसी का मत है कि घर में कल्पतरु एवं कामधेनु के चित्र टाँगने से विपत्ति नाश नही होता - "चित्र कल्पतरु कामधेनु गृह लिखे न विपति नसावै ।" कौटिल्य का भी मत है कि धन, धन से हो पैदा होता है, तारे बेचारे क्या सहायता करेगे - "अर्थो ह्यर्थस्य नक्षत्रं किं करिष्यति तारकाः ।' हमें यही मानना चाहिए कि बुद्धिमत्तापूर्ण कार्य से धन पैदा होता है और पैदा होने पर उससे उसी की वृद्धि होती है। परिश्रम पैसे का पिता है । कार्य या परिश्रम व्यापार के रूप में भी हो सकता है और नौकरी के रूप में भी । सेवा-वृत्ति को शास्त्रों ने हेय माना है। इसमें सन्देह नहीं कि यथेच्छ धन का अर्जन और उपभोग व्यापार से ही हो सकता है। जो सम्पत्ति का पूर्ण उपभोग करना चाहे, उसे व्यवसाय को ही धनागम का साधन बनाना चाहिये । व्यवसाय चाहे छोटा ही हो, नौकरी से अधिक फलप्रद और आशाप्रद होता है। दासता में पराधीनता रहती है, इसलिये अपने को दूसरों के अनुकूल बनाने में बड़ा कृत्रिम रूप बनाना पड़ता है। इन बातों को ध्यान में रखिये परिस्थितिवश आप चाहे व्यापार करें या नौकरी, यदि आप उन्नति करना चाहते हैं तो इन बातों को ध्यान में रखिये - १ - किसी के हाथ अपने मामा और अपनी नैतिकता को न वेचिये । चाहे आप नौकरी या व्यापार करते हों करने निकले हों, अपने मनुष्योचित आदर्शों को न भूलिये । नैतिक पतन होते ही मनुष्यता पतित हो जाती है । ऐसा कार्य न कीजिये जो आत्मा के प्रतिकूल हो । धन से सब-कुछ खरीदा जा सकता है, परन्तु किसी भले आदमी की मान मर्यादा नहीं खरीदी जा सकती है । २ - दूसरों की दया कृम पर अवलम्बित न रहिये - दूसरों मे हम भाग्य को भी लेते है । भाग्य से अनौकरी मिल सकती है, अथवा व्यापार के लिये अच्छा अवसर प्राप्त हो सकता है, पर उसके उपयोग में उसकी ( भाग्य की ) सहायता काम नहीं देगी। आत्म-योग्यता से ही अच्छे पद या अच्छे अवसर का लाभ लिया जा सकता है। दूसरों में हम मित्रों और बड़े आदमियों को भी लेते हैं। वे एक सीमा तक ही आप के सहायक हो सकते हैं। यदि आप में आत्म-समर्थता न होगी तो वे परीढ़ नहीं बन सकते । अंग्रेजी मे एक कहावत है कि भगवान् उन्हीं को सहायता देता है जो स्वावलम्बी होते है --'God helps those who help themselves.' एक सुप्रसिद्ध विलायती विचारक (Sir Willam Temple) का यह अनुभवात्मक कथन इस सम्बन्ध में याद रखने योग्य है - "A man that only translates shall never be a poet, nor a painter that only copies, noi a swimmer that swims always with bladder, so people that trust wholly on otheis' chality and without industry of their own will always be poor" ( भावार्थ - ऐसा व्यक्ति जो केवल ग्रन्थों का अनुवाद करता है, कभी कवि अर्थात् मेधावी नहीं हो सकता, ऐसा व्यक्ति जो केवल दूसरों के चित्रो के आधार पर चित्र बनाता है कभी चित्रकार अर्थात् कलाकार नहीं हो सकता, ऐसा व्यक्ति जो केवल वायुगर्भित रबर की थैली के सहारे तैरता है कभी तैराक अर्थात् पारंगत नहीं हो सकता, उसी तरह जो लोग अपने व्यवसाय अर्थात् परिश्रम पर अवलम्बित न होकर केवल दूसरों की सहायता के भरोसे रहते है, वे सदैव दरिद्र अथवा द्रव्य - सकट में ही रहेगे ।) - "काकी प्रभुता नहिं घटी पर घर गये रहीम ।" अतएव स्वावलम्बी बनिये; दूसरों का मुँह न ताकिये; दूसरों का मुँह ताकना श्वान-वृत्ति है। मुँह देखने का आनन्द तभी आता है, जब दोनों ओर से हो अर्थात् कोई आपकी उपयोगिता को देखे और आप उसकी जेब को सच्ची नज़र से देखें । ३ - भूलकर भी संतोष न कीजिये - साधुओं की दृष्टि में 'संतोषः परमं सुखम्' एक अच्छा सिद्धान्त हो सकता है, परन्तु सांसारिक मनुष्य के लिए संतोष करने का अर्थ है जड़ होकर बैठ जाना । जड़ता या स्थिरता कम-से-कम लक्ष्मी को प्रिय नहीं है, वे महाचंचला हैं। उनके साथ दौड़ने पर ही उनका साहचर्य प्राप्त होता है। उसी से आशा बनी रहती है और आशामय जीवन ही सबसे सुखी जीवन है। संतोषी होकर निराशावादी या निराशावादी होकर संतोषी न बनिये । इच्छा शक्ति को प्रबल और चैतन्य रखिये । ४ - भविष्य को देखिये - यदि आप में आशा की एक भी चिनगारी है तो भविष्य को देखिये क्योंकि आज के बाद का प्रत्येक क्षण आपको उसी में बिताना है। उस पर आपका कुछ अधिकार है। और वह आपके बनाने से बन भी सकता है । समय से आगे सोचने-विचारने वाला ही नेता, अग्रगामी माना जाता है। अतएव यदि आप अपने क्षेत्र के नेता बनना चाहते है तो आज से दस वर्ष बाद का कार्यक्रम बनाकर तब चलिये; उसी तरह चलिये जैसे एक स्थान से दूसरे स्थान की रेल यात्रा करते समय आप मार्ग की सारी तैयारी करके और निश्चित स्थान का टिकट लेकर चलते हैं। भविष्य को देखिये, परन्तु अधकारमय भविष्य को नहीं । ५ - समय को पकड़िये -- समय सबसे बड़ा सेठ है । वह एक ऐसा सेठ है जो बड़ी-बड़ी जुल्फें रखकर चलता है और पीछे से खल्वाट है - 'क्वचित् खल्वाट निर्धनः'- कोई गंजा - शायद ही निर्धन मिले। सामने से पकड़ने पर ही वह पकड़ में आता है। उसके पीछे दौड़ने से अवसर हाथ से निकल जाता है और समय के पीछे रहने वाला व्यक्ति बैठकर पछताने के सिवा कुछ नहीं कर सकता । अंग्रेजी में एक कहावत है कि समय ही धन है - Time 1s money. हमारे शास्त्रों में भी महाकाल की बड़ी महिमा गाई गई है । उसका अभिप्राय यही है कि समय बड़ा बली है, उसका सम्मान करना चाहिए। सम्मान स्वागत आगे बढ़कर ही किया जाता है । पीठ पीछे प्रायः निन्दा ही होती है। समय की बलवत्ता इससे सिद्ध होती है कि वह सबको परिवर्तित एवं व्यतीत करता है । वह आयु को भोगता है । काल-स्वामी सूर्य प्रत्येक दिन सबकी आयु का एक भाग लेकर तभी अस्त होता है। जब वह आपसे कुछ लेता है तो बुद्धिमानी इसी में है कि आप भी उससे अपनी आयु का उचित मूल्य लें, अपनी वस्तु को व्यर्थ न जाने दें । अतएव एक-एक घण्टा और एक-एक क्षण को पकड़िये । पकड़ने का अर्थ है प्रत्येक क्षण कुछ-न-कुछ करते रहना । कुछ करते रहने का अर्थ खुराफात करना नहीं, बल्कि कोई-न-कोई उपयोगी कार्य करना । वे क्षण ही आपके लिए मूल्यवान हो जाएँगे। बुद्धिमान् का एक घण्टे का जीवन मूर्ख के सम्पूर्ण जीवन के बराबर माना जाता है, क्योंकि बुद्धिमान् व्यक्ति उस एक घण्टे का उचित उपयोग करना जानता है और करता भी है। अ एक मिनट को भी व्यर्थ व्यतीत न होने दीजिये । आवश्यक कार्यों में 'कभी' की अपेक्षा अधिक महत्त्व दीजिये । दुनिया बड़ी तेजी से भागती है; एक मिनट में वह कहीं-से-कहीं एक दूसरे वातावरण में चली जाती है। अतएव यथासंभव कामों को वादे पर न टालिये । तत्काल करने योग्य कर्मों को तत्काल कीजिये । कल का दिन अपने अनेक भंझटों को लेकर आयेगा, यही मानिये । 'शुभस्य शीघ्रम् ' की नीति को अपनाइये । स्वर्ण - संयोग की प्रतीक्षा न कीजिये । स्वर्ण-संयोग अपने आप नहीं आ सकता । उसका बीज यदि आज बोइयेगा तभी वह कल फला हुआ मिल सकता है । यही प्रकृति का नियम है । 'कल' का विधाता या पिता 'आज' ही निर्बल होगा तो उसका पुत्र 'कल' भी जन्म से निर्बल होगा । भविष्य के भरोसे बैठना मुर्खता है । भविष्य का थोड़ा भाग तो आपको प्रत्येक क्षण और प्रत्ये घण्टे के बाद तत्काल प्राप्त होता है । उसको अपने से दूर न मानना चाहिए और अपने लक्ष्य पर वहीं से चल पड़ना चाहिए जहाँ आप खड़े हैं। एक विद्वान् ने कहा है कि जीवन-यात्रा का मार्ग ठीक वहीं से प्रारम्भ होता है, जहाँ खड़े हैं। भविष्य स्वर्ण अवसर तभी बन सकता है जब कि आप स्वयं उसके लिये तैयार मिलें । इंग्लैण्ड के भूतपूर्व प्रधानमन्त्री डिज़रायली ने कहा है कि जब अवसर आये तब उसके लिये तैयार मिलना ही मनुष्य की सफलता का गुप्त रहस्य है"The secret of success for a man is to be ready fot his opportunity when it comes.' ." - Disraeli. यह तैयारी आज ही से शुरू करने से पूरी हो सकती है। आग लगने पर आपकुँआ खोदने दौड़ेंगे तो उससे आपका घर नहीं बच सकता । परिस्थिति के पूर्व तैयार रहने ही में बुद्धिमानी है। साधनों का संचय आजही से करने से ठीक अवसर पर उनका उपयोग हो सकता है। अव दूरदर्शी बनिये । आँखें इतनी ऊँचाई पर इसीलिये रक्खी गई हैं कि मनुष्य दूर तक देख सके । -समय को पहचानिये - समय का सम्मान करने के साथ ही उसको पहचानने का भी अभ्यास कीजिये । समय को पहचानना या पढ़ना सरल नहीं है, क्योंकि वह सर्वदा एक-सा नहीं रहता, बदलता रहता है। पंचांग, कैलेण्डर या घड़ी के सहारे नहीं, बल्कि उसके प्रभाव के आधार पर उसकी गति को पहचानिये । कालज्ञ होना एक महान गुण है, इसीलिये प्राचीन विद्वानों को काल-दर्शी या त्रिकालदर्शी कहा जाता था । समय को पहचानकर उसके अनुसार आचरण करने वाला ही सर्व सफल होता है। समय को, परिस्थिति को, शीघ्र पहचानने वाला ही प्रत्युत्पन्नमति होता है। उसको ठीक पहचानकर उसके अनुकूल अपने जीवन में परिवर्तन करना चाहिये । इसका अर्थवादी होना नहीं, बल्कि कालानुवर्त्ती बनना है। समयानुसार विचार करना, व्यवहार करना और कर्म करना, सफलता का साधक होता है। समय को पढ़िये । उसको पढ़ने का मुख्य साधन है आपका विवेक; बाह्य साधन है, अखबार । पञ्चांग से काल- ज्ञान प्राप्त करने की अपेक्षा अखबार से प्राप्त कीजिये ।
धन प्राप्ति के साधनों पर विचार कीजिये । भाग्य से भी धन मिलता हुआ देखा जाता है, परन्तु भाग्य एक ऐसा बल है जिसपर किसी का स्व तन्त्र अधिकार नहीं होता। अतएव भाग्य के भरोसे अकर्मण्य बनना ठीक नहीं । तुलसी का मत है कि घर में कल्पतरु एवं कामधेनु के चित्र टाँगने से विपत्ति नाश नही होता - "चित्र कल्पतरु कामधेनु गृह लिखे न विपति नसावै ।" कौटिल्य का भी मत है कि धन, धन से हो पैदा होता है, तारे बेचारे क्या सहायता करेगे - "अर्थो ह्यर्थस्य नक्षत्रं किं करिष्यति तारकाः ।' हमें यही मानना चाहिए कि बुद्धिमत्तापूर्ण कार्य से धन पैदा होता है और पैदा होने पर उससे उसी की वृद्धि होती है। परिश्रम पैसे का पिता है । कार्य या परिश्रम व्यापार के रूप में भी हो सकता है और नौकरी के रूप में भी । सेवा-वृत्ति को शास्त्रों ने हेय माना है। इसमें सन्देह नहीं कि यथेच्छ धन का अर्जन और उपभोग व्यापार से ही हो सकता है। जो सम्पत्ति का पूर्ण उपभोग करना चाहे, उसे व्यवसाय को ही धनागम का साधन बनाना चाहिये । व्यवसाय चाहे छोटा ही हो, नौकरी से अधिक फलप्रद और आशाप्रद होता है। दासता में पराधीनता रहती है, इसलिये अपने को दूसरों के अनुकूल बनाने में बड़ा कृत्रिम रूप बनाना पड़ता है। इन बातों को ध्यान में रखिये परिस्थितिवश आप चाहे व्यापार करें या नौकरी, यदि आप उन्नति करना चाहते हैं तो इन बातों को ध्यान में रखिये - एक - किसी के हाथ अपने मामा और अपनी नैतिकता को न वेचिये । चाहे आप नौकरी या व्यापार करते हों करने निकले हों, अपने मनुष्योचित आदर्शों को न भूलिये । नैतिक पतन होते ही मनुष्यता पतित हो जाती है । ऐसा कार्य न कीजिये जो आत्मा के प्रतिकूल हो । धन से सब-कुछ खरीदा जा सकता है, परन्तु किसी भले आदमी की मान मर्यादा नहीं खरीदी जा सकती है । दो - दूसरों की दया कृम पर अवलम्बित न रहिये - दूसरों मे हम भाग्य को भी लेते है । भाग्य से अनौकरी मिल सकती है, अथवा व्यापार के लिये अच्छा अवसर प्राप्त हो सकता है, पर उसके उपयोग में उसकी सहायता काम नहीं देगी। आत्म-योग्यता से ही अच्छे पद या अच्छे अवसर का लाभ लिया जा सकता है। दूसरों में हम मित्रों और बड़े आदमियों को भी लेते हैं। वे एक सीमा तक ही आप के सहायक हो सकते हैं। यदि आप में आत्म-समर्थता न होगी तो वे परीढ़ नहीं बन सकते । अंग्रेजी मे एक कहावत है कि भगवान् उन्हीं को सहायता देता है जो स्वावलम्बी होते है --'God helps those who help themselves.' एक सुप्रसिद्ध विलायती विचारक का यह अनुभवात्मक कथन इस सम्बन्ध में याद रखने योग्य है - "A man that only translates shall never be a poet, nor a painter that only copies, noi a swimmer that swims always with bladder, so people that trust wholly on otheis' chality and without industry of their own will always be poor" - "काकी प्रभुता नहिं घटी पर घर गये रहीम ।" अतएव स्वावलम्बी बनिये; दूसरों का मुँह न ताकिये; दूसरों का मुँह ताकना श्वान-वृत्ति है। मुँह देखने का आनन्द तभी आता है, जब दोनों ओर से हो अर्थात् कोई आपकी उपयोगिता को देखे और आप उसकी जेब को सच्ची नज़र से देखें । तीन - भूलकर भी संतोष न कीजिये - साधुओं की दृष्टि में 'संतोषः परमं सुखम्' एक अच्छा सिद्धान्त हो सकता है, परन्तु सांसारिक मनुष्य के लिए संतोष करने का अर्थ है जड़ होकर बैठ जाना । जड़ता या स्थिरता कम-से-कम लक्ष्मी को प्रिय नहीं है, वे महाचंचला हैं। उनके साथ दौड़ने पर ही उनका साहचर्य प्राप्त होता है। उसी से आशा बनी रहती है और आशामय जीवन ही सबसे सुखी जीवन है। संतोषी होकर निराशावादी या निराशावादी होकर संतोषी न बनिये । इच्छा शक्ति को प्रबल और चैतन्य रखिये । चार - भविष्य को देखिये - यदि आप में आशा की एक भी चिनगारी है तो भविष्य को देखिये क्योंकि आज के बाद का प्रत्येक क्षण आपको उसी में बिताना है। उस पर आपका कुछ अधिकार है। और वह आपके बनाने से बन भी सकता है । समय से आगे सोचने-विचारने वाला ही नेता, अग्रगामी माना जाता है। अतएव यदि आप अपने क्षेत्र के नेता बनना चाहते है तो आज से दस वर्ष बाद का कार्यक्रम बनाकर तब चलिये; उसी तरह चलिये जैसे एक स्थान से दूसरे स्थान की रेल यात्रा करते समय आप मार्ग की सारी तैयारी करके और निश्चित स्थान का टिकट लेकर चलते हैं। भविष्य को देखिये, परन्तु अधकारमय भविष्य को नहीं । पाँच - समय को पकड़िये -- समय सबसे बड़ा सेठ है । वह एक ऐसा सेठ है जो बड़ी-बड़ी जुल्फें रखकर चलता है और पीछे से खल्वाट है - 'क्वचित् खल्वाट निर्धनः'- कोई गंजा - शायद ही निर्धन मिले। सामने से पकड़ने पर ही वह पकड़ में आता है। उसके पीछे दौड़ने से अवसर हाथ से निकल जाता है और समय के पीछे रहने वाला व्यक्ति बैठकर पछताने के सिवा कुछ नहीं कर सकता । अंग्रेजी में एक कहावत है कि समय ही धन है - Time एक सेकंड money. हमारे शास्त्रों में भी महाकाल की बड़ी महिमा गाई गई है । उसका अभिप्राय यही है कि समय बड़ा बली है, उसका सम्मान करना चाहिए। सम्मान स्वागत आगे बढ़कर ही किया जाता है । पीठ पीछे प्रायः निन्दा ही होती है। समय की बलवत्ता इससे सिद्ध होती है कि वह सबको परिवर्तित एवं व्यतीत करता है । वह आयु को भोगता है । काल-स्वामी सूर्य प्रत्येक दिन सबकी आयु का एक भाग लेकर तभी अस्त होता है। जब वह आपसे कुछ लेता है तो बुद्धिमानी इसी में है कि आप भी उससे अपनी आयु का उचित मूल्य लें, अपनी वस्तु को व्यर्थ न जाने दें । अतएव एक-एक घण्टा और एक-एक क्षण को पकड़िये । पकड़ने का अर्थ है प्रत्येक क्षण कुछ-न-कुछ करते रहना । कुछ करते रहने का अर्थ खुराफात करना नहीं, बल्कि कोई-न-कोई उपयोगी कार्य करना । वे क्षण ही आपके लिए मूल्यवान हो जाएँगे। बुद्धिमान् का एक घण्टे का जीवन मूर्ख के सम्पूर्ण जीवन के बराबर माना जाता है, क्योंकि बुद्धिमान् व्यक्ति उस एक घण्टे का उचित उपयोग करना जानता है और करता भी है। अ एक मिनट को भी व्यर्थ व्यतीत न होने दीजिये । आवश्यक कार्यों में 'कभी' की अपेक्षा अधिक महत्त्व दीजिये । दुनिया बड़ी तेजी से भागती है; एक मिनट में वह कहीं-से-कहीं एक दूसरे वातावरण में चली जाती है। अतएव यथासंभव कामों को वादे पर न टालिये । तत्काल करने योग्य कर्मों को तत्काल कीजिये । कल का दिन अपने अनेक भंझटों को लेकर आयेगा, यही मानिये । 'शुभस्य शीघ्रम् ' की नीति को अपनाइये । स्वर्ण - संयोग की प्रतीक्षा न कीजिये । स्वर्ण-संयोग अपने आप नहीं आ सकता । उसका बीज यदि आज बोइयेगा तभी वह कल फला हुआ मिल सकता है । यही प्रकृति का नियम है । 'कल' का विधाता या पिता 'आज' ही निर्बल होगा तो उसका पुत्र 'कल' भी जन्म से निर्बल होगा । भविष्य के भरोसे बैठना मुर्खता है । भविष्य का थोड़ा भाग तो आपको प्रत्येक क्षण और प्रत्ये घण्टे के बाद तत्काल प्राप्त होता है । उसको अपने से दूर न मानना चाहिए और अपने लक्ष्य पर वहीं से चल पड़ना चाहिए जहाँ आप खड़े हैं। एक विद्वान् ने कहा है कि जीवन-यात्रा का मार्ग ठीक वहीं से प्रारम्भ होता है, जहाँ खड़े हैं। भविष्य स्वर्ण अवसर तभी बन सकता है जब कि आप स्वयं उसके लिये तैयार मिलें । इंग्लैण्ड के भूतपूर्व प्रधानमन्त्री डिज़रायली ने कहा है कि जब अवसर आये तब उसके लिये तैयार मिलना ही मनुष्य की सफलता का गुप्त रहस्य है"The secret of success for a man is to be ready fot his opportunity when it comes.' ." - Disraeli. यह तैयारी आज ही से शुरू करने से पूरी हो सकती है। आग लगने पर आपकुँआ खोदने दौड़ेंगे तो उससे आपका घर नहीं बच सकता । परिस्थिति के पूर्व तैयार रहने ही में बुद्धिमानी है। साधनों का संचय आजही से करने से ठीक अवसर पर उनका उपयोग हो सकता है। अव दूरदर्शी बनिये । आँखें इतनी ऊँचाई पर इसीलिये रक्खी गई हैं कि मनुष्य दूर तक देख सके । -समय को पहचानिये - समय का सम्मान करने के साथ ही उसको पहचानने का भी अभ्यास कीजिये । समय को पहचानना या पढ़ना सरल नहीं है, क्योंकि वह सर्वदा एक-सा नहीं रहता, बदलता रहता है। पंचांग, कैलेण्डर या घड़ी के सहारे नहीं, बल्कि उसके प्रभाव के आधार पर उसकी गति को पहचानिये । कालज्ञ होना एक महान गुण है, इसीलिये प्राचीन विद्वानों को काल-दर्शी या त्रिकालदर्शी कहा जाता था । समय को पहचानकर उसके अनुसार आचरण करने वाला ही सर्व सफल होता है। समय को, परिस्थिति को, शीघ्र पहचानने वाला ही प्रत्युत्पन्नमति होता है। उसको ठीक पहचानकर उसके अनुकूल अपने जीवन में परिवर्तन करना चाहिये । इसका अर्थवादी होना नहीं, बल्कि कालानुवर्त्ती बनना है। समयानुसार विचार करना, व्यवहार करना और कर्म करना, सफलता का साधक होता है। समय को पढ़िये । उसको पढ़ने का मुख्य साधन है आपका विवेक; बाह्य साधन है, अखबार । पञ्चांग से काल- ज्ञान प्राप्त करने की अपेक्षा अखबार से प्राप्त कीजिये ।
पुणे : महाराष्ट्र के अहमदनगर में शनिवार को एक सरकारी अस्पताल के आईसीयू वार्ड में भीषण आग लगने से 11 कोविड मरीजों की मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। नयी दिल्लीः दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार ने मुफ्त राशन देने की अपनी योजना छह महीने के लिए मई 2022 तक बढ़ा दी है। औरैया/इटावा (उप्र) : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को सरदार पटेल की तुलना जिन्ना से करने वाले राजनीतिक दल को आड़े हाथों लेते हुए लोगों को ऐसे दलों से सतर्क रहने की अपील की और कहा कि एक (पटेल) देश को जोड़ने वाला था तो दूसरा (जिन्ना) देश को तोड़ने वाला था। मुंबई : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को एक विशेष अदालत को बताया कि महाराष्ट्र के तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख के निर्देश पर मुंबई के पुलिस अधिकारी सचिन वाजे ने पद पर रहते हुए बार मालिकों से "रिश्वत" एकत्र करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। नयी दिल्ली : भारत और फ्रांस ने महत्त्वपूर्ण कदम उठाते हुए खुफिया एवं सूचना साझेदारी, आपसी क्षमताओं को, सैन्य अभ्यास को बढ़ाकर और समुद्री, अंतरिक्ष तथा साइबर क्षेत्र में नई पहल करके रक्षा और सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति जताई है। नयी दिल्ली : कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चीन को दी गई 'क्लीनचिट' वापस लेते हुए माफी मांगनी चाहिए और देश को यह बताना चाहिए कि चीन के साथ लगी सीमाओं पर अप्रैल, 2020 की यथास्थिति कब तक बहाल होगी। नयी दिल्ली, छह नवंबर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शनिवार को छठ पूजा को लेकर राजनीति उस वक्त और तेज हो गयी जब आम आदमी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी पर पूर्वांचलियों को पूजा के लिये जरूरी घाट तैयार नहीं करने देने का आरोप लगाया। फ्रीटाउन (सिएरा लियोन) : अफ्रीकी देश सिएरा लियोन की राजधानी फ्रीटाउन के निकट एक तेल टैंकर में विस्फोट में कम से कम 92 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गये। अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
पुणे : महाराष्ट्र के अहमदनगर में शनिवार को एक सरकारी अस्पताल के आईसीयू वार्ड में भीषण आग लगने से ग्यारह कोविड मरीजों की मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। नयी दिल्लीः दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार ने मुफ्त राशन देने की अपनी योजना छह महीने के लिए मई दो हज़ार बाईस तक बढ़ा दी है। औरैया/इटावा : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को सरदार पटेल की तुलना जिन्ना से करने वाले राजनीतिक दल को आड़े हाथों लेते हुए लोगों को ऐसे दलों से सतर्क रहने की अपील की और कहा कि एक देश को जोड़ने वाला था तो दूसरा देश को तोड़ने वाला था। मुंबई : प्रवर्तन निदेशालय ने शनिवार को एक विशेष अदालत को बताया कि महाराष्ट्र के तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख के निर्देश पर मुंबई के पुलिस अधिकारी सचिन वाजे ने पद पर रहते हुए बार मालिकों से "रिश्वत" एकत्र करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। नयी दिल्ली : भारत और फ्रांस ने महत्त्वपूर्ण कदम उठाते हुए खुफिया एवं सूचना साझेदारी, आपसी क्षमताओं को, सैन्य अभ्यास को बढ़ाकर और समुद्री, अंतरिक्ष तथा साइबर क्षेत्र में नई पहल करके रक्षा और सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति जताई है। नयी दिल्ली : कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चीन को दी गई 'क्लीनचिट' वापस लेते हुए माफी मांगनी चाहिए और देश को यह बताना चाहिए कि चीन के साथ लगी सीमाओं पर अप्रैल, दो हज़ार बीस की यथास्थिति कब तक बहाल होगी। नयी दिल्ली, छह नवंबर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शनिवार को छठ पूजा को लेकर राजनीति उस वक्त और तेज हो गयी जब आम आदमी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी पर पूर्वांचलियों को पूजा के लिये जरूरी घाट तैयार नहीं करने देने का आरोप लगाया। फ्रीटाउन : अफ्रीकी देश सिएरा लियोन की राजधानी फ्रीटाउन के निकट एक तेल टैंकर में विस्फोट में कम से कम बानवे लोगों की मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गये। अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
आईपीएल 2023 का 64वां मैच बुधवार को खेला गया। इस मैच में आईपीएल के प्ले ऑफ़ की रेस से बाहर हुई दिल्ली कैपिटल्स और प्ले ऑफ की रेस में पहुंचने की कोशिश में लगी पंजाब किंग्स की टीम आमने सामने थी। आईपीएल 2023 का 64वां मैच बुधवार को खेला गया। इस मैच में आईपीएल के प्ले ऑफ़ की रेस से बाहर हुई दिल्ली कैपिटल्स और प्ले ऑफ की रेस में पहुंचने की कोशिश में लगी पंजाब किंग्स की टीम आमने सामने थी। दोनों ही टीमें अपनी अपनी जगह पर 100 फीसदी देना चाहती थी ये जानते हुए कि दिल्ली की टीम एलिमिनेट हो चुकी है प्ले ऑफ़ से फिर भी वो पूरे ज़ज़्बे के साथ मैदान में उतरी। दिल्ली की टीम ने ऐसा खेल दिखाया कि पूरी पंजाब किंग्स की टीम हिल गयी। दरहसल, दिल्ली कैपिटल्स की टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया और बड़े लंबे समय से बाहर चल रहे पृथ्वी शॉ और डेविड वार्नर की जोड़ी दिल्ली के लिए ओपनिंग करने उतरी। पृथ्वी और वार्नर ने ताबड़तोड़ अंदाज़ में खेलते हुए पंजाब के गेंदबाजों की बखिया उखेड़ दी। वार्नर ने 31 गेंदो में 46 रनों की पारी खेली तो वही 38 गेंदो में 54 रनों की पारी खेल पृथ्वी शॉ ने भी दिल्ली की टीम को एक शानदार शुरुआत दी। पर इन सब में दिल्ली के एक खिलाड़ी ने पंजाब की टीम से मैच कोसो दूर कर दिया और दिल्ली के स्कोर को 200 रनों के पार कर दिया। रुसो ने 37 गेंदो में 82 रनों की पारी खेली जिसमे 6 चौके और 6 छक्के शामिल थे। रूसो ने न केवल शानदार पारी खेली बल्कि अंत तक नाबाद भी रहे जिसकी बदौलत दिल्ली कैपिटल्स ने 20 ओवरों में 2 विकेट खोकर 213 रन बना डाले। अब पंजाब किंग्स को प्ले ऑफ़ की रेस में अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए 214 रनों की जरुरत थी। पंजाब किंग्स की शुरुआत अच्छी नही हुई और दिल्ली के इशांत शर्मा ने शिखर धवन को शून्य पर पवेलियन भेज दिया। इसके बाद प्रभसिमरन सिंह भी 22 रनों पर आउट हो गये। पंजाब किंग्स की मुश्किलें और भी बड़ गयी जब टीम को रनों का अकाल पड़ गया। अथर्व ने भले ही 55 रनों की पारी खेली लेकिन वो भी कारगर साबित नही हुई। उम्मीद इंग्लैंड के लियाम लिविंगस्टोन ने जगाई और उन्होंने पंजाब की टीम के लिए अंत तक लड़ाई लड़ी और 94 रनों की शानदार पारी खेली। पर ये पारी भी पंजाब किंग्स को जीत तक नही पहुंचा सकी क्योंकि टीम का मिडिल और लोअर ऑर्डर काफी कमजोर था। लिविंगस्टोन पूरी तरह अकेले पड़ गए और पंजाब किंग्स 20 ओवरों में 8 विकेट खोकर 198 रन ही बना सकी। इस तरह दिल्ली की टीम ने पंजाब को 15 रनों से हराया और 2 पॉइंट्स हासिल किये। दिल्ली की टीम अब अंक तालिका में 9वें पायदान पर पहुंच गयी है तो वही पंजाब किंग्स की टीम के लिए प्ले ऑफ़ की राह मुश्किल हो गयी है क्योंकि अब उसको दूसरी टीमों के नतीजों पर निर्भर रहना पड़ेगा। पंजाब किंग्स की टीम के 13 मैचों में 12 पॉइंट्स है और मुंबई इंडियंस कोलकाता, नाईट राइडर्स, और कई टीमो की भी यही स्थिति है। आज गुरुवार को रॉयल चैलेंजर बंगलौर का मुकाबला सनराइजिस हैदराबाद से होगा जो बंगलौर के लिए काफी अहम है अगर वो जीतती है तो पॉइंट्स टेबल कही हद तक और भी दिलचस्प हो जायेगी और अगर वो हार जाती है तो दो टीमें लखनऊ सुपर जायंट्स और चेन्नई सुपर किंग्स प्ले ऑफ़ में पहुंच जायेगी।
आईपीएल दो हज़ार तेईस का चौंसठवां मैच बुधवार को खेला गया। इस मैच में आईपीएल के प्ले ऑफ़ की रेस से बाहर हुई दिल्ली कैपिटल्स और प्ले ऑफ की रेस में पहुंचने की कोशिश में लगी पंजाब किंग्स की टीम आमने सामने थी। आईपीएल दो हज़ार तेईस का चौंसठवां मैच बुधवार को खेला गया। इस मैच में आईपीएल के प्ले ऑफ़ की रेस से बाहर हुई दिल्ली कैपिटल्स और प्ले ऑफ की रेस में पहुंचने की कोशिश में लगी पंजाब किंग्स की टीम आमने सामने थी। दोनों ही टीमें अपनी अपनी जगह पर एक सौ फीसदी देना चाहती थी ये जानते हुए कि दिल्ली की टीम एलिमिनेट हो चुकी है प्ले ऑफ़ से फिर भी वो पूरे ज़ज़्बे के साथ मैदान में उतरी। दिल्ली की टीम ने ऐसा खेल दिखाया कि पूरी पंजाब किंग्स की टीम हिल गयी। दरहसल, दिल्ली कैपिटल्स की टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया और बड़े लंबे समय से बाहर चल रहे पृथ्वी शॉ और डेविड वार्नर की जोड़ी दिल्ली के लिए ओपनिंग करने उतरी। पृथ्वी और वार्नर ने ताबड़तोड़ अंदाज़ में खेलते हुए पंजाब के गेंदबाजों की बखिया उखेड़ दी। वार्नर ने इकतीस गेंदो में छियालीस रनों की पारी खेली तो वही अड़तीस गेंदो में चौवन रनों की पारी खेल पृथ्वी शॉ ने भी दिल्ली की टीम को एक शानदार शुरुआत दी। पर इन सब में दिल्ली के एक खिलाड़ी ने पंजाब की टीम से मैच कोसो दूर कर दिया और दिल्ली के स्कोर को दो सौ रनों के पार कर दिया। रुसो ने सैंतीस गेंदो में बयासी रनों की पारी खेली जिसमे छः चौके और छः छक्के शामिल थे। रूसो ने न केवल शानदार पारी खेली बल्कि अंत तक नाबाद भी रहे जिसकी बदौलत दिल्ली कैपिटल्स ने बीस ओवरों में दो विकेट खोकर दो सौ तेरह रन बना डाले। अब पंजाब किंग्स को प्ले ऑफ़ की रेस में अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए दो सौ चौदह रनों की जरुरत थी। पंजाब किंग्स की शुरुआत अच्छी नही हुई और दिल्ली के इशांत शर्मा ने शिखर धवन को शून्य पर पवेलियन भेज दिया। इसके बाद प्रभसिमरन सिंह भी बाईस रनों पर आउट हो गये। पंजाब किंग्स की मुश्किलें और भी बड़ गयी जब टीम को रनों का अकाल पड़ गया। अथर्व ने भले ही पचपन रनों की पारी खेली लेकिन वो भी कारगर साबित नही हुई। उम्मीद इंग्लैंड के लियाम लिविंगस्टोन ने जगाई और उन्होंने पंजाब की टीम के लिए अंत तक लड़ाई लड़ी और चौरानवे रनों की शानदार पारी खेली। पर ये पारी भी पंजाब किंग्स को जीत तक नही पहुंचा सकी क्योंकि टीम का मिडिल और लोअर ऑर्डर काफी कमजोर था। लिविंगस्टोन पूरी तरह अकेले पड़ गए और पंजाब किंग्स बीस ओवरों में आठ विकेट खोकर एक सौ अट्ठानवे रन ही बना सकी। इस तरह दिल्ली की टीम ने पंजाब को पंद्रह रनों से हराया और दो पॉइंट्स हासिल किये। दिल्ली की टीम अब अंक तालिका में नौवें पायदान पर पहुंच गयी है तो वही पंजाब किंग्स की टीम के लिए प्ले ऑफ़ की राह मुश्किल हो गयी है क्योंकि अब उसको दूसरी टीमों के नतीजों पर निर्भर रहना पड़ेगा। पंजाब किंग्स की टीम के तेरह मैचों में बारह पॉइंट्स है और मुंबई इंडियंस कोलकाता, नाईट राइडर्स, और कई टीमो की भी यही स्थिति है। आज गुरुवार को रॉयल चैलेंजर बंगलौर का मुकाबला सनराइजिस हैदराबाद से होगा जो बंगलौर के लिए काफी अहम है अगर वो जीतती है तो पॉइंट्स टेबल कही हद तक और भी दिलचस्प हो जायेगी और अगर वो हार जाती है तो दो टीमें लखनऊ सुपर जायंट्स और चेन्नई सुपर किंग्स प्ले ऑफ़ में पहुंच जायेगी।
पीएम मोदी 14 जुलाई को इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका के नेताओं के साथ I2U2 के पहले नेताओं के शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। पीएम मोदी 14 जुलाई को इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका के नेताओं के साथ I2U2 के पहले नेताओं के शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। I2U2 का उद्देश्य पानी, ऊर्जा, परिवहन, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा जैसे छह पारस्परिक रूप से पहचाने गए क्षेत्रों में संयुक्त निवेश को प्रोत्साहित करना है। I2U2 का पहला लीडर्स समिट आज लगभग 4 बजे आयोजित किया जाएगा। 12U2 का उद्देश्य पानी, एनर्जी, ट्रांसपोर्टेशन, स्पेस, हेल्थ और फूड सिक्योरिटी जैसे 6 पारस्परिक रूप से पहचाने गए क्षेत्रों में मिलकर इन्वेस्ट और प्रोत्साहित करना है। यह इन्फ्रास्ट्रक्चर के मार्डनाइजेशन, हमारी इंडस्ट्रीज के लिए लो कार्बन डेवलपमेंट पाथवे, पब्लिक हेल्थ में सुधार और महत्वपूर्ण रूप से ग्रीन टेक्नोलॉजी के विकास को बढ़ावा देने में मदद करने के लिए प्राइवेट सेक्टर से इन्वेस्ट और विशेषज्ञता जुटाने का इरादा रखता है। इस समिट में नेता संबंधित क्षेत्रों और उससे आगे व्यापार और निवेश में आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए 12U2 के इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ एक-दूसरे के हितों से जुड़े अन्य सामान्य क्षेत्रों के भीतर संभावित ज्वाइंट प्रोजेक्ट्स पर चर्चा करेंगे। ये प्रोजेक्ट्स आर्थिक सहयोग के लिए एक मॉडल के रूप में काम कर सकते हैं। ये प्रोजेक्ट बिजनेस फील्ड से जुड़े लोगों और वर्कर्स के लिए नए अवसर मुहैया कराएंगे। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी-7 देशों के 48वें शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए 26-27 जून को जर्मनी गए थे। वे 28 जून को यूएई भी पहुंचे थे। दोनों दिन शिखर सम्मेलन में शामिल होने के साथ मोदी ने साइडलाइन में 12 से अधिक विश्व नेताओं के साथ बैठक की थी। इस सम्मेलन में पर्यावरण, ऊर्जा, जलवायु, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, आतंकवाद का मुकाबला, लैंगिक समानता और लोकतंत्र जैसे सामयिक मुद्दों पर G7 भागीदार देशों और अतिथि अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ विचार शेयर किए थे। भारतीय विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को आगामी बैठक के बारे में जो जानकारी दी है उससे इसी बात का अंदाजा लगता है कि अभी यह आर्थिक, सामाजिक व ढांचागत सहयोग को ही बढ़ावा देगा। विदेश मंत्रालय ने बताया है कि, पीएम नरेन्द्र मोदी पहली आइ2यू2 (I2U2) बैठक में इजरायल के पीएम येर लापिड, यूएई के प्रसिडेंट शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान और अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन हिस्सा लेंगे। आइ2यू2 को लेकर उक्त चारों देशों के विदेश मंत्रियों की 18 अक्टूबर, 2021 को हुई बैठक में फैसला किया गया था। इसके बाद चारों देशों के बीच शेरपा स्तर की भी बातचीत लगातार हो रही है। इस बैठक में छह प्रमुख मुद्दों पर बात होने की संभावना है। इनमें ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा मुख्य तौर पर शामिल होगा। बैठक में यह भी एक बड़ा मुद्दा होगा कि किस तरह से प्रमुख आर्थिक चुनौतियों का सामना करने के लिए इन चार देशों की कंपनियों के बीच साझेदारी को आगे बढ़ाया जाए। विदेश मंत्रालय के अनुसार यह बैठक वर्चुअल होगी। काफी पहले चार देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान इसकी परिकल्पना की गई थी। इसके अलावा प्रत्येक देश में सहयोग के संभावित क्षेत्रों पर चर्चा करने के लिए नियमित रूप से शेरपा स्तर की बातचीत भी होती है।
पीएम मोदी चौदह जुलाई को इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका के नेताओं के साथ IदोUदो के पहले नेताओं के शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। पीएम मोदी चौदह जुलाई को इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका के नेताओं के साथ IदोUदो के पहले नेताओं के शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। IदोUदो का उद्देश्य पानी, ऊर्जा, परिवहन, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा जैसे छह पारस्परिक रूप से पहचाने गए क्षेत्रों में संयुक्त निवेश को प्रोत्साहित करना है। IदोUदो का पहला लीडर्स समिट आज लगभग चार बजे आयोजित किया जाएगा। बारहUदो का उद्देश्य पानी, एनर्जी, ट्रांसपोर्टेशन, स्पेस, हेल्थ और फूड सिक्योरिटी जैसे छः पारस्परिक रूप से पहचाने गए क्षेत्रों में मिलकर इन्वेस्ट और प्रोत्साहित करना है। यह इन्फ्रास्ट्रक्चर के मार्डनाइजेशन, हमारी इंडस्ट्रीज के लिए लो कार्बन डेवलपमेंट पाथवे, पब्लिक हेल्थ में सुधार और महत्वपूर्ण रूप से ग्रीन टेक्नोलॉजी के विकास को बढ़ावा देने में मदद करने के लिए प्राइवेट सेक्टर से इन्वेस्ट और विशेषज्ञता जुटाने का इरादा रखता है। इस समिट में नेता संबंधित क्षेत्रों और उससे आगे व्यापार और निवेश में आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए बारहUदो के इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ एक-दूसरे के हितों से जुड़े अन्य सामान्य क्षेत्रों के भीतर संभावित ज्वाइंट प्रोजेक्ट्स पर चर्चा करेंगे। ये प्रोजेक्ट्स आर्थिक सहयोग के लिए एक मॉडल के रूप में काम कर सकते हैं। ये प्रोजेक्ट बिजनेस फील्ड से जुड़े लोगों और वर्कर्स के लिए नए अवसर मुहैया कराएंगे। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी-सात देशों के अड़तालीसवें शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए छब्बीस-सत्ताईस जून को जर्मनी गए थे। वे अट्ठाईस जून को यूएई भी पहुंचे थे। दोनों दिन शिखर सम्मेलन में शामिल होने के साथ मोदी ने साइडलाइन में बारह से अधिक विश्व नेताओं के साथ बैठक की थी। इस सम्मेलन में पर्यावरण, ऊर्जा, जलवायु, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, आतंकवाद का मुकाबला, लैंगिक समानता और लोकतंत्र जैसे सामयिक मुद्दों पर Gसात भागीदार देशों और अतिथि अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ विचार शेयर किए थे। भारतीय विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को आगामी बैठक के बारे में जो जानकारी दी है उससे इसी बात का अंदाजा लगता है कि अभी यह आर्थिक, सामाजिक व ढांचागत सहयोग को ही बढ़ावा देगा। विदेश मंत्रालय ने बताया है कि, पीएम नरेन्द्र मोदी पहली आइदोयूदो बैठक में इजरायल के पीएम येर लापिड, यूएई के प्रसिडेंट शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान और अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन हिस्सा लेंगे। आइदोयूदो को लेकर उक्त चारों देशों के विदेश मंत्रियों की अट्ठारह अक्टूबर, दो हज़ार इक्कीस को हुई बैठक में फैसला किया गया था। इसके बाद चारों देशों के बीच शेरपा स्तर की भी बातचीत लगातार हो रही है। इस बैठक में छह प्रमुख मुद्दों पर बात होने की संभावना है। इनमें ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा मुख्य तौर पर शामिल होगा। बैठक में यह भी एक बड़ा मुद्दा होगा कि किस तरह से प्रमुख आर्थिक चुनौतियों का सामना करने के लिए इन चार देशों की कंपनियों के बीच साझेदारी को आगे बढ़ाया जाए। विदेश मंत्रालय के अनुसार यह बैठक वर्चुअल होगी। काफी पहले चार देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान इसकी परिकल्पना की गई थी। इसके अलावा प्रत्येक देश में सहयोग के संभावित क्षेत्रों पर चर्चा करने के लिए नियमित रूप से शेरपा स्तर की बातचीत भी होती है।
वर्ष २३ अंक ४२ ) द्यौः पिता पृथिवी माता वह द्यो परमात्मा हमारा सब का पिता है, रक्षक है, पालन करने वाला है और यह विशाल प्रथिवो धरती हमारी सब की माता निर्माता है । अनादि विविध वस्तओं से पोषगा करती है हम सारे भाई हैं- फिर वैर क्यों ? यथा अभिचक्र देवाः देवाः- दिव्यगुणों वाले देवयथा - -जैसे श्रमिचक्र - जीवन का व्यवहार करते आये हैं। देवलोग भी यही कहते हैं कि प्रभु सत्र का पिता और धरती सब की मां है । हम सारे परम्पर भाई भाई हैं हम एक ही विशाल परिवार हैं। तथाप कणुता पुनः हे विश्व के लोगो । उसी प्रकार आप लोग भी करते रहो मारे पापस में भाई बहिन बन कर रहो या वैर विरोध, लड़ाई झगडा कर बुरा करते हो। सब एक हो । प्रश्र वं वेद विष्ठाता-संतोषराज मभा मंत्री टेलीफोन न० ३०५७ [आर्यप्रादेशिक प्रतिनिधि सभा पंजाब जालन्धर का साप्ताहिक मुखपत्र ] रविवार ४ कार्तिक २०२०-२० अक्तूबर १९६३ दयानन्दाब्द १३९ म नः पवस्व शं गवे शं जनाय शमर्वते । शं राजन्नोष धीभ्यः ।। साम० उ० प्र० १ म० अर्थ - (सः) वह परमेश्वर (न.) हमें (पवस्व ) प्रदान कर' (शं) कल्याण (गवे) हमारे गोधन के लिए तथा (श) कल्याण करे ( जनाय) सारे जनसमाज के लिए एवं (शं) सुखी करो (अर्वते) अश्व मंडल के लिए । सुग्व और कल्याण करो (राजन्) हे प्रकाशमय प्रभो । ( श्रोषधीभ्य.) तमाम ओषधियों और वनस्पतियों के लिए। हमारे लिए गाँव, जनसमाज, अश्व पशु तथा सारी श्रोषधियां हमें सुख देने वाली हो । भाव ~ परमात्मन । आपने अपनी दया, अनुकम्पा से हमें क्या सुन्दर पाथ प्रदान नहीं किया। अमृतमय मीठा दूध देने वाली गौएं प्रदान की। कितना जनसमाज फैला दिया। यह तेज चलने वाले अभी तो हमारे निमित्त ही तो आपने दिये। नाना प्रकार की विविध तथा विचित्र २ जड़ी बूटियां वनस्पतियां औषधियां भी तो आपकी कृपा का ही प्रसाद हैं। इन से हमारा कितना महान लाभ होता है। सब कुछ हमारे लिए है। किन्तु हे देव ! श्राप से यह भी प्रार्थना करते हैं कि ये सारे पदार्थ हमारे जीवन के लिए शांतिदायक हों, सुख देने वाले बनें तथा इन के द्वारा सदा हम कल्याण प्राप्त करते हैं। इमें ऐसी ज्ञान बुद्धि प्रदान करें जिस से हम इन का भली प्रकार उपयोग कर सकें । से अपना तथा समाज का भला ही करते रहें -सं० Regd No. P. 121 ( नार 'प्रादेशिक' जालन्धर ब्रह्म अनन्त है । उस भगवान् का उस की महिमा तथा उस के ऐश्वर्य का पार, अन्त कौन पा सकता है। जिस का अन्त होगा वह सान्न् होता है। किन्तु ब्रह्म तो म एव दघे इस मारे विशाल, विविध रूप श्रह्माण्ड को वही भगवान धारण करता है। सर्वाधार तथा वही सब का धारक भी वही परमेश्वर है। उस के सिवा और कोई नहीं धारण कर सकता - अस्य सर्वस्याध्यक्षः इस सारे विश्व का अध्यक्ष भी वही प्रभु है, वही सब का एक मात्र स्वामी है। प्रजापति है हम सब उस की प्रजा हैं। अमृत सन्तान है। वही हमारा अध्यक्ष है। भाध्य भ मि का सम्पादक - त्रिलोक चन्द्र शास्त्र
वर्ष तेईस अंक बयालीस ) द्यौः पिता पृथिवी माता वह द्यो परमात्मा हमारा सब का पिता है, रक्षक है, पालन करने वाला है और यह विशाल प्रथिवो धरती हमारी सब की माता निर्माता है । अनादि विविध वस्तओं से पोषगा करती है हम सारे भाई हैं- फिर वैर क्यों ? यथा अभिचक्र देवाः देवाः- दिव्यगुणों वाले देवयथा - -जैसे श्रमिचक्र - जीवन का व्यवहार करते आये हैं। देवलोग भी यही कहते हैं कि प्रभु सत्र का पिता और धरती सब की मां है । हम सारे परम्पर भाई भाई हैं हम एक ही विशाल परिवार हैं। तथाप कणुता पुनः हे विश्व के लोगो । उसी प्रकार आप लोग भी करते रहो मारे पापस में भाई बहिन बन कर रहो या वैर विरोध, लड़ाई झगडा कर बुरा करते हो। सब एक हो । प्रश्र वं वेद विष्ठाता-संतोषराज मभा मंत्री टेलीफोन नशून्य तीन हज़ार सत्तावन [आर्यप्रादेशिक प्रतिनिधि सभा पंजाब जालन्धर का साप्ताहिक मुखपत्र ] रविवार चार कार्तिक दो हज़ार बीस-बीस अक्तूबर एक हज़ार नौ सौ तिरेसठ दयानन्दाब्द एक सौ उनतालीस म नः पवस्व शं गवे शं जनाय शमर्वते । शं राजन्नोष धीभ्यः ।। सामशून्य उशून्य प्रशून्य एक मशून्य अर्थ - वह परमेश्वर हमें प्रदान कर' कल्याण हमारे गोधन के लिए तथा कल्याण करे सारे जनसमाज के लिए एवं सुखी करो अश्व मंडल के लिए । सुग्व और कल्याण करो हे प्रकाशमय प्रभो । तमाम ओषधियों और वनस्पतियों के लिए। हमारे लिए गाँव, जनसमाज, अश्व पशु तथा सारी श्रोषधियां हमें सुख देने वाली हो । भाव ~ परमात्मन । आपने अपनी दया, अनुकम्पा से हमें क्या सुन्दर पाथ प्रदान नहीं किया। अमृतमय मीठा दूध देने वाली गौएं प्रदान की। कितना जनसमाज फैला दिया। यह तेज चलने वाले अभी तो हमारे निमित्त ही तो आपने दिये। नाना प्रकार की विविध तथा विचित्र दो जड़ी बूटियां वनस्पतियां औषधियां भी तो आपकी कृपा का ही प्रसाद हैं। इन से हमारा कितना महान लाभ होता है। सब कुछ हमारे लिए है। किन्तु हे देव ! श्राप से यह भी प्रार्थना करते हैं कि ये सारे पदार्थ हमारे जीवन के लिए शांतिदायक हों, सुख देने वाले बनें तथा इन के द्वारा सदा हम कल्याण प्राप्त करते हैं। इमें ऐसी ज्ञान बुद्धि प्रदान करें जिस से हम इन का भली प्रकार उपयोग कर सकें । से अपना तथा समाज का भला ही करते रहें -संशून्य Regd No. P. एक सौ इक्कीस ( नार 'प्रादेशिक' जालन्धर ब्रह्म अनन्त है । उस भगवान् का उस की महिमा तथा उस के ऐश्वर्य का पार, अन्त कौन पा सकता है। जिस का अन्त होगा वह सान्न् होता है। किन्तु ब्रह्म तो म एव दघे इस मारे विशाल, विविध रूप श्रह्माण्ड को वही भगवान धारण करता है। सर्वाधार तथा वही सब का धारक भी वही परमेश्वर है। उस के सिवा और कोई नहीं धारण कर सकता - अस्य सर्वस्याध्यक्षः इस सारे विश्व का अध्यक्ष भी वही प्रभु है, वही सब का एक मात्र स्वामी है। प्रजापति है हम सब उस की प्रजा हैं। अमृत सन्तान है। वही हमारा अध्यक्ष है। भाध्य भ मि का सम्पादक - त्रिलोक चन्द्र शास्त्र
पंजाब के सहकारिता मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने बुधवार को कहा कि केंद्र सरकार द्वारा घोषित गन्ने के उचित और पारिश्रमिक मूल्य (FRP) में "कम" बढ़ोतरी हुई है। एक विज्ञप्ति में, उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को गन्ना किसानों को बचाने के लिए पहले से घोषित मूल्य के अलावा 70 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बोनस की घोषणा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बोनस को सीधे किसानों के खातों में जमा किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार ने बुधवार को अक्टूबर 2020 से शुरू होने वाले अगले विपणन वर्ष के लिए गन्ना मूल्य (FRP) 10 रुपये बढ़ाकर 285 रुपये प्रति क्विंटल करने का फैसला किया है। मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की बैठक में यह निर्णय लिया गया था। यह न्यूज़ सुनने के लिए प्ले बटन को दबाये.
पंजाब के सहकारिता मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने बुधवार को कहा कि केंद्र सरकार द्वारा घोषित गन्ने के उचित और पारिश्रमिक मूल्य में "कम" बढ़ोतरी हुई है। एक विज्ञप्ति में, उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को गन्ना किसानों को बचाने के लिए पहले से घोषित मूल्य के अलावा सत्तर रुपयापये प्रति क्विंटल की दर से बोनस की घोषणा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बोनस को सीधे किसानों के खातों में जमा किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार ने बुधवार को अक्टूबर दो हज़ार बीस से शुरू होने वाले अगले विपणन वर्ष के लिए गन्ना मूल्य दस रुपयापये बढ़ाकर दो सौ पचासी रुपयापये प्रति क्विंटल करने का फैसला किया है। मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया था। यह न्यूज़ सुनने के लिए प्ले बटन को दबाये.
त्रिपोली। अमरीकी सेना द्वारा पश्चिमी लीबिया के शबराता शहर में आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट के प्रशिक्षण शिविरों को लक्ष्य करके किए गए हवाई हमले में 47 लोगों की मौत हो जाने की पुष्टि स्थानीय सूत्रों के अनुसार हुई है। लीबिया ने फोटो जारी कर वहां हुई भारी तबाही को दिखाया है। इस संबंध में शबराता के मेयर हुसैन अल-थॉडी ने मीडिया को बताया कि विमान ने विदेशी नागरिकों की बहुलता वाले कसर तलील जिले के इमारतों पर हमला किया गया था। वहीं, निगम अधिकारियों द्वारा जारी बयान में कहा है कि यह हमला पश्चिमी जिले के आवासीय परिसर पर हुआ है। दूसरी ओर अमेरिकी अधिकारियों में व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जोश अर्नेस्ट ने कहा कि वह इस हवाई हमले में मारे गए लोगों की पुष्टि नहीं कर सकते। लेकिन इतना जरूर बताना चाहेंगे कि यह हमला इस्लामिक स्टेट के खिलाफ कहें या आतंकवाद के विरोध में कहा जाए अमरीका की दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है। जोश अर्नेस्ट ने यह भी कहा है कि अमेरिका द्वारा की जा रही यह हमलावर कार्रवाही दर्शाती है कि हमारे राष्ट्रपति किसी भी तरह के प्रभावशाली और निर्णायक कदम उठाने में हिचकेंगे नहीं। वे आगे भी आईएस और सभी आतंकवादी संगठनों के खिलाफ मानवता के हित में इसी प्रकार के प्रभावी कदम उठाते रहेंगे।
त्रिपोली। अमरीकी सेना द्वारा पश्चिमी लीबिया के शबराता शहर में आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट के प्रशिक्षण शिविरों को लक्ष्य करके किए गए हवाई हमले में सैंतालीस लोगों की मौत हो जाने की पुष्टि स्थानीय सूत्रों के अनुसार हुई है। लीबिया ने फोटो जारी कर वहां हुई भारी तबाही को दिखाया है। इस संबंध में शबराता के मेयर हुसैन अल-थॉडी ने मीडिया को बताया कि विमान ने विदेशी नागरिकों की बहुलता वाले कसर तलील जिले के इमारतों पर हमला किया गया था। वहीं, निगम अधिकारियों द्वारा जारी बयान में कहा है कि यह हमला पश्चिमी जिले के आवासीय परिसर पर हुआ है। दूसरी ओर अमेरिकी अधिकारियों में व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जोश अर्नेस्ट ने कहा कि वह इस हवाई हमले में मारे गए लोगों की पुष्टि नहीं कर सकते। लेकिन इतना जरूर बताना चाहेंगे कि यह हमला इस्लामिक स्टेट के खिलाफ कहें या आतंकवाद के विरोध में कहा जाए अमरीका की दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है। जोश अर्नेस्ट ने यह भी कहा है कि अमेरिका द्वारा की जा रही यह हमलावर कार्रवाही दर्शाती है कि हमारे राष्ट्रपति किसी भी तरह के प्रभावशाली और निर्णायक कदम उठाने में हिचकेंगे नहीं। वे आगे भी आईएस और सभी आतंकवादी संगठनों के खिलाफ मानवता के हित में इसी प्रकार के प्रभावी कदम उठाते रहेंगे।
भरवां मछली के लिए पकाने की विधि हर महिला नहीं जानता है। इस स्थिति में सुधार करने के लिए, हम आप स्वादिष्ट और हार्दिक भोजन है कि न केवल एक परिवार के रात के खाने के लिए, बल्कि उत्सव तालिका के लिए परोसा जा सकता है तैयार करने के लिए कुछ तरीके पेश करने के लिए फैसला किया। आधुनिक रसोइयों ओवन में कितनी तेजी से और स्वादिष्ट पके हुए मछली पर तरीके के सैकड़ों पता है। ताकि आप इन कौशल में महारत हासिल है, हम कैसे पूरे परिवार के लिए एक सरल लेकिन हार्दिक भोजन बनाने के बारे में बात करेंगे। इससे पहले कि आप gefilte मछली तैयार, के रूप में इस तरह के अवयवों द्वारा आरक्षित किया जाना चाहिएः - बड़े ताजा कार्प - 1 पीसी;। - आयोडीन युक्त नमक, काली मिर्च और सुगंधित मसालों है कि मछली के लिए विशेष रूप से डिजाइन कर रहे हैं - स्वाद के लिए जोड़ सकते हैं; - नींबू - फल का 2/3; - गाजर मध्यम आकार - 1 पीसी;। - मीठा प्याज - 2 सिर; - साग, डिल और अजमोद बल्कि - छोटे बंडलों के लिए; - रिफाइंड जैतून का तेल - 60 मिली; - वसा मेयोनेज़ - 120 ग्राम; - आलू - 3-4 पीसी। (वैकल्पिक)। प्रस्तुत नुस्खा भरवां मछली कार्प के रूप में जैसे ही आवेदन के लिए प्रदान नहीं करता है। सब के बाद, इसके बजाय आप किसी भी अन्य उत्पाद (उदाहरण, ट्राउट, सामन, कार्प, आदि के लिए) का उपयोग कर सकते हैं। कुंजी इस के लिए -, बड़ी मछली का चयन इतना है कि यह सामान सुविधाजनक था। इस प्रकार, कार्प के अधिग्रहण में अच्छी तरह से धोया जाना चाहिए, तराजू के साफ, पंख और सिर (यदि आप चाहते हैं, आप छोड़ सकते हैं) में कटौती, और फिर सभी धर्मशाला को हटाने और एक बार फिर कुल्ला। इलाज किया मछली ताजा निचोड़ा नींबू का रस और एक छोटे से जैतून का तेल के साथ आवश्यक है काली मिर्च, नमक और स्वाद। यह कार्प रचना 30-45 मिनट के लिए कमरे के तापमान पर छोड़ देना चाहिए। इस समय के दौरान, मछली अच्छी तरह से खटाई में डालना, यह अधिक नरम और रसदार हो जाएगा। इसके अलावा कार्प से, नुस्खा भरवां मछली और सब्जियों जैसे गाजर, आलू कंद और प्याज के रूप में के उपयोग के लिए प्रदान करता है। इन सभी अवयवों छील और बहुत पतली स्लाइस / छल्ले में कटौती की जरूरत है। इसके बाद, वे स्वाद नमक और मेयोनेज़, अच्छी तरह से मिश्रित और फिर (अलग से) होना चाहिए। भरवां मछली (समाप्त व्यंजनों की तस्वीरों के साथ व्यंजनों इस लेख में प्रस्तुत कर रहे हैं) तो स्वादिष्ट और रसदार है कि यह आपके परिवार के किसी सदस्य से मना करने में सक्षम नहीं होगा प्राप्त की है। के लिए अपने गठन के एक बड़े पैन लेना चाहिए, उसका खाना पकाने पन्नी प्रशस्त जिस पर यह वांछनीय है बाद में आलू स्लाइस, मसालेदार मेयोनेज़ अग्रिम डाल करने के लिए। सब्जियों के शीर्ष पर मसालेदार कार्प डाल करने के लिए की जरूरत है। मछली की अगली फट पेट खोलने के लिए और बारी-बारी से प्याज, गाजर और ताजा जड़ी बूटी डाल करने के लिए संभव हो जाना चाहिए। करने के लिए के दौरान गर्मी उपचार कार्प नहीं खुला था, जगह में कटौती toothpicks ठीक करने के लिए सिफारिश की है। ओवन में मछली भरवां, नुस्खा जिनमें से हम विचार कर रहे हैं, लगभग 1 घंटे में पकाया जाता है। लेकिन उससे पहले, सब्जियों के साथ भरवां कार्प कसकर पन्नी खाना पकाने में लिपटे किया जाना चाहिए। 40 मिनट के बाद मछली धीरे सिफारिश (इसकी अखंडता को नुकसान पहुँचाए बिना) का खुलासा, और फिर मेयोनेज़ के अर्द्ध भोजन अच्छा जाल की सतह के लिए लागू होता है। कार्प की ऐसी हालत में 20-24 मिनट के लिए बेक करने की जरूरत है। अब आप भरवां मछली के लिए एक सरल नुस्खा पता है। एक बार पूरी तरह से पकवान पकाया जाता है, कार्प ध्यान से पन्नी को हटाने और एक बड़ी थाली पर जगह चाहिए। एक गार्निश के रूप पार्श्व कांच के बने पदार्थ आलू जो ताजा कटा हुआ जड़ी बूटियों छिड़क कर सकते हैं डाल करने के लिए सिफारिश की है। मछली खाना पकाने बहुत पिछले एक से अधिक जटिल की इस तरह की एक विधि। हालांकि, यह अंत पूरी तरह से उचित में समय और प्रयास खर्च किए। सब के बाद, इस व्यंजन एक पूरी खुशी अपने सभी आमंत्रित अतिथियों और परिवार के सदस्यों को आ जाएगा। तो, हम की जरूरत हैः - बड़े ताजा कार्प - के बारे में 2-किलो वजन; - सूजी - 2 बड़े चम्मच; - बड़ा अंडा - 1 पीसी;। - मक्खन - 50 ग्राम; - मीठा प्याज - 4 पीसी;। - काली मिर्च, iodized नमक और खुशबूदार जड़ी बूटियों - स्वाद के लिए जोड़ सकते हैं; - छोटे चुकंदर - 2 पीसी;। - जैतून का तेल - 70 मिलीलीटर। कैसे "ओडेसा" gefilte मछली पकाने के लिए? व्यंजनों की तस्वीरों के साथ कदम नुस्खा से कदम का कहना है कि इस तरह के एक रात के खाने के निर्माण के मुख्य कार्प का सही उपयोग होता है। यह अच्छी तरह से धोया जाना चाहिए, तराजू और हिम्मत की साफ किया और फिर धीरे से (यह अभी भी हमारे लिए उपयोगी है) सिर काट दिया। इसके बाद आप जब मछली की त्वचा का उपयोग कर देखभाल करने के लिए चाहते हैं। उस पर एक ही समय में मांस की एक निश्चित राशि ही रहना चाहिए। यदि आवश्यक हो, रेंज और पंख में जगह पाक कैंची का उपयोग कर काटा जा सकता है। लेकिन यह वांछनीय है कि इतनी के रूप में मछली की अखंडता को नुकसान न करना है। एक बार जब त्वचा कार्प के साथ एक साथ खींच लिया जाता है, को दूर पट्टिका मीठा प्याज के 2 सिर के साथ एक ब्लेंडर में उपलब्ध बीज और पीसने के पूरी तरह से साफ किया जाना चाहिए। इसके बाद आप कीमा बनाया हुआ अंडा, सूजी, नमक, खुशबूदार जड़ी-बूटियों को जोड़ने की जरूरत है, मक्खन और काली मिर्च नरम। एक चम्मच के साथ सभी सामग्री को मिला है, तो आप एक समान और काफी मोटी जन निकलना है। "ओडेसा" gefilte मछली तैयार किया जाता है न केवल सिल्वर कार्प के उपयोग के साथ, लेकिन यह भी इस तरह के प्याज और बीट के रूप में सब्जियों के साथ। वे साफ किया जाना चाहिए, पतली छल्ले / हलकों स्वाद और नमक में कटौती। आखिर मुख्य घटकों के लिए तैयार हैं, तो आप बर्तन के गठन के लिए सीधे आगे बढ़ सकते हैं। नमक के साथ मछली त्वचा स्वाद के लिए ऐसा करने के लिए, और फिर मजबूती से पूरे पकाया भरने के अंदर रखा। इसके अलावा एक पीतल चादर उसके घने पन्नी vystelit लेने के लिए और आधा हिस्सा प्याज और चुकंदर डाल करने की आवश्यकता है। उसके बाद, सब्जियों भरवां कार्प रखा जाना चाहिए, और फिर पहले से कटे हुए सिर को इसे स्थापित। मछली शेष सब्जियों के साथ कवर किया जाना चाहिए के अंत में, परिष्कृत जैतून का तेल डालना और कसकर पन्नी में लपेटा। पूरी तरह से पकवान आप ओवन में डाल करना चाहते हैं, 180 डिग्री के लिए छोड़ देते गठन किया था। इस राज्य में मछली यह वांछनीय है के बारे में 20 मिनट का सामना करने के। इसके बाद, तापमान 140 डिग्री को धीमा और के बारे में आधे घंटे के लिए पकवान बेक चाहिए। इस समय के बाद, भरवां कार्प पूरी तरह से, मुलायम रसीले और बहुत स्वादिष्ट बनने के लिए तैयार होना चाहिए। कैसे छुट्टी तालिका के लिए मछली खिलाने के लिए? समाप्त पकवान सिर्फ पन्नी दूर करने के लिए गर्म और खूबसूरती से एक बड़े और फ्लैट प्लेट पर स्थित होना चाहिए। बीट और प्याज एक गार्निश के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन अगर इन सब्जियों आप के अनुरूप नहीं है, यह एक crumpled आलू, उपयोग करने के लिए अनुमति है उबले हुए चावल या अन्य अनाजों। इस व्यंजन के अलावा यह ताजा खीरे, टमाटर और जड़ी बूटियों लागू करने के लिए वांछनीय है। कुक gefilte मछली एक डबल बायलर में, उदाहरण के लिए ओवन में न केवल, लेकिन यह भी हो सकता है। इस मामले में, पकवान अधिक उपयोगी और कम पौष्टिक हो जाएगा। इसके अलावा, अनुभवी रसोइयों अक्सर एक फ्राइंग पैन में भरवां मछली भून और फिर एक हार्दिक और स्वादिष्ट गार्निश के साथ तालिका में सेवा करते हैं।
भरवां मछली के लिए पकाने की विधि हर महिला नहीं जानता है। इस स्थिति में सुधार करने के लिए, हम आप स्वादिष्ट और हार्दिक भोजन है कि न केवल एक परिवार के रात के खाने के लिए, बल्कि उत्सव तालिका के लिए परोसा जा सकता है तैयार करने के लिए कुछ तरीके पेश करने के लिए फैसला किया। आधुनिक रसोइयों ओवन में कितनी तेजी से और स्वादिष्ट पके हुए मछली पर तरीके के सैकड़ों पता है। ताकि आप इन कौशल में महारत हासिल है, हम कैसे पूरे परिवार के लिए एक सरल लेकिन हार्दिक भोजन बनाने के बारे में बात करेंगे। इससे पहले कि आप gefilte मछली तैयार, के रूप में इस तरह के अवयवों द्वारा आरक्षित किया जाना चाहिएः - बड़े ताजा कार्प - एक पीसी;। - आयोडीन युक्त नमक, काली मिर्च और सुगंधित मसालों है कि मछली के लिए विशेष रूप से डिजाइन कर रहे हैं - स्वाद के लिए जोड़ सकते हैं; - नींबू - फल का दो/तीन; - गाजर मध्यम आकार - एक पीसी;। - मीठा प्याज - दो सिर; - साग, डिल और अजमोद बल्कि - छोटे बंडलों के लिए; - रिफाइंड जैतून का तेल - साठ मिली; - वसा मेयोनेज़ - एक सौ बीस ग्राम; - आलू - तीन-चार पीसी। । प्रस्तुत नुस्खा भरवां मछली कार्प के रूप में जैसे ही आवेदन के लिए प्रदान नहीं करता है। सब के बाद, इसके बजाय आप किसी भी अन्य उत्पाद का उपयोग कर सकते हैं। कुंजी इस के लिए -, बड़ी मछली का चयन इतना है कि यह सामान सुविधाजनक था। इस प्रकार, कार्प के अधिग्रहण में अच्छी तरह से धोया जाना चाहिए, तराजू के साफ, पंख और सिर में कटौती, और फिर सभी धर्मशाला को हटाने और एक बार फिर कुल्ला। इलाज किया मछली ताजा निचोड़ा नींबू का रस और एक छोटे से जैतून का तेल के साथ आवश्यक है काली मिर्च, नमक और स्वाद। यह कार्प रचना तीस-पैंतालीस मिनट के लिए कमरे के तापमान पर छोड़ देना चाहिए। इस समय के दौरान, मछली अच्छी तरह से खटाई में डालना, यह अधिक नरम और रसदार हो जाएगा। इसके अलावा कार्प से, नुस्खा भरवां मछली और सब्जियों जैसे गाजर, आलू कंद और प्याज के रूप में के उपयोग के लिए प्रदान करता है। इन सभी अवयवों छील और बहुत पतली स्लाइस / छल्ले में कटौती की जरूरत है। इसके बाद, वे स्वाद नमक और मेयोनेज़, अच्छी तरह से मिश्रित और फिर होना चाहिए। भरवां मछली तो स्वादिष्ट और रसदार है कि यह आपके परिवार के किसी सदस्य से मना करने में सक्षम नहीं होगा प्राप्त की है। के लिए अपने गठन के एक बड़े पैन लेना चाहिए, उसका खाना पकाने पन्नी प्रशस्त जिस पर यह वांछनीय है बाद में आलू स्लाइस, मसालेदार मेयोनेज़ अग्रिम डाल करने के लिए। सब्जियों के शीर्ष पर मसालेदार कार्प डाल करने के लिए की जरूरत है। मछली की अगली फट पेट खोलने के लिए और बारी-बारी से प्याज, गाजर और ताजा जड़ी बूटी डाल करने के लिए संभव हो जाना चाहिए। करने के लिए के दौरान गर्मी उपचार कार्प नहीं खुला था, जगह में कटौती toothpicks ठीक करने के लिए सिफारिश की है। ओवन में मछली भरवां, नुस्खा जिनमें से हम विचार कर रहे हैं, लगभग एक घंटाटे में पकाया जाता है। लेकिन उससे पहले, सब्जियों के साथ भरवां कार्प कसकर पन्नी खाना पकाने में लिपटे किया जाना चाहिए। चालीस मिनट के बाद मछली धीरे सिफारिश का खुलासा, और फिर मेयोनेज़ के अर्द्ध भोजन अच्छा जाल की सतह के लिए लागू होता है। कार्प की ऐसी हालत में बीस-चौबीस मिनट के लिए बेक करने की जरूरत है। अब आप भरवां मछली के लिए एक सरल नुस्खा पता है। एक बार पूरी तरह से पकवान पकाया जाता है, कार्प ध्यान से पन्नी को हटाने और एक बड़ी थाली पर जगह चाहिए। एक गार्निश के रूप पार्श्व कांच के बने पदार्थ आलू जो ताजा कटा हुआ जड़ी बूटियों छिड़क कर सकते हैं डाल करने के लिए सिफारिश की है। मछली खाना पकाने बहुत पिछले एक से अधिक जटिल की इस तरह की एक विधि। हालांकि, यह अंत पूरी तरह से उचित में समय और प्रयास खर्च किए। सब के बाद, इस व्यंजन एक पूरी खुशी अपने सभी आमंत्रित अतिथियों और परिवार के सदस्यों को आ जाएगा। तो, हम की जरूरत हैः - बड़े ताजा कार्प - के बारे में दो-किलो वजन; - सूजी - दो बड़े चम्मच; - बड़ा अंडा - एक पीसी;। - मक्खन - पचास ग्राम; - मीठा प्याज - चार पीसी;। - काली मिर्च, iodized नमक और खुशबूदार जड़ी बूटियों - स्वाद के लिए जोड़ सकते हैं; - छोटे चुकंदर - दो पीसी;। - जैतून का तेल - सत्तर मिलीलीटर। कैसे "ओडेसा" gefilte मछली पकाने के लिए? व्यंजनों की तस्वीरों के साथ कदम नुस्खा से कदम का कहना है कि इस तरह के एक रात के खाने के निर्माण के मुख्य कार्प का सही उपयोग होता है। यह अच्छी तरह से धोया जाना चाहिए, तराजू और हिम्मत की साफ किया और फिर धीरे से सिर काट दिया। इसके बाद आप जब मछली की त्वचा का उपयोग कर देखभाल करने के लिए चाहते हैं। उस पर एक ही समय में मांस की एक निश्चित राशि ही रहना चाहिए। यदि आवश्यक हो, रेंज और पंख में जगह पाक कैंची का उपयोग कर काटा जा सकता है। लेकिन यह वांछनीय है कि इतनी के रूप में मछली की अखंडता को नुकसान न करना है। एक बार जब त्वचा कार्प के साथ एक साथ खींच लिया जाता है, को दूर पट्टिका मीठा प्याज के दो सिर के साथ एक ब्लेंडर में उपलब्ध बीज और पीसने के पूरी तरह से साफ किया जाना चाहिए। इसके बाद आप कीमा बनाया हुआ अंडा, सूजी, नमक, खुशबूदार जड़ी-बूटियों को जोड़ने की जरूरत है, मक्खन और काली मिर्च नरम। एक चम्मच के साथ सभी सामग्री को मिला है, तो आप एक समान और काफी मोटी जन निकलना है। "ओडेसा" gefilte मछली तैयार किया जाता है न केवल सिल्वर कार्प के उपयोग के साथ, लेकिन यह भी इस तरह के प्याज और बीट के रूप में सब्जियों के साथ। वे साफ किया जाना चाहिए, पतली छल्ले / हलकों स्वाद और नमक में कटौती। आखिर मुख्य घटकों के लिए तैयार हैं, तो आप बर्तन के गठन के लिए सीधे आगे बढ़ सकते हैं। नमक के साथ मछली त्वचा स्वाद के लिए ऐसा करने के लिए, और फिर मजबूती से पूरे पकाया भरने के अंदर रखा। इसके अलावा एक पीतल चादर उसके घने पन्नी vystelit लेने के लिए और आधा हिस्सा प्याज और चुकंदर डाल करने की आवश्यकता है। उसके बाद, सब्जियों भरवां कार्प रखा जाना चाहिए, और फिर पहले से कटे हुए सिर को इसे स्थापित। मछली शेष सब्जियों के साथ कवर किया जाना चाहिए के अंत में, परिष्कृत जैतून का तेल डालना और कसकर पन्नी में लपेटा। पूरी तरह से पकवान आप ओवन में डाल करना चाहते हैं, एक सौ अस्सी डिग्री के लिए छोड़ देते गठन किया था। इस राज्य में मछली यह वांछनीय है के बारे में बीस मिनट का सामना करने के। इसके बाद, तापमान एक सौ चालीस डिग्री को धीमा और के बारे में आधे घंटे के लिए पकवान बेक चाहिए। इस समय के बाद, भरवां कार्प पूरी तरह से, मुलायम रसीले और बहुत स्वादिष्ट बनने के लिए तैयार होना चाहिए। कैसे छुट्टी तालिका के लिए मछली खिलाने के लिए? समाप्त पकवान सिर्फ पन्नी दूर करने के लिए गर्म और खूबसूरती से एक बड़े और फ्लैट प्लेट पर स्थित होना चाहिए। बीट और प्याज एक गार्निश के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन अगर इन सब्जियों आप के अनुरूप नहीं है, यह एक crumpled आलू, उपयोग करने के लिए अनुमति है उबले हुए चावल या अन्य अनाजों। इस व्यंजन के अलावा यह ताजा खीरे, टमाटर और जड़ी बूटियों लागू करने के लिए वांछनीय है। कुक gefilte मछली एक डबल बायलर में, उदाहरण के लिए ओवन में न केवल, लेकिन यह भी हो सकता है। इस मामले में, पकवान अधिक उपयोगी और कम पौष्टिक हो जाएगा। इसके अलावा, अनुभवी रसोइयों अक्सर एक फ्राइंग पैन में भरवां मछली भून और फिर एक हार्दिक और स्वादिष्ट गार्निश के साथ तालिका में सेवा करते हैं।
निर्वाचन क्षेत्रः सिकंदराबाद (तेलंगाना) धारित महत्वपूर्ण पदः 1982: जिलाध्यक्ष, भारतीय जनता युवा मोर्चा (बी.जे.वाई.एम.) 2004 - 2014: सदस्य, आंध्र प्रदेश विधान सभा (दो कार्यकाल), लेखक और प्रकाशितः i) सीमा सुरक्षा, ii) जागरण यात्रा, २०००, तेलुगु, iii) "सीमा पार आतंकवाद और घुसपैठ" के बारे में जागरूकता लाने के लिए आठ राज्यों को कवर करने वाली मेरी "31 दिवसीय" यात्रा के बारे में बुक करें। यूनिसेफ द्वारा प्रदान किया गया (i) बेस्ट चाइल्ड फ्रेंडली लेजिस्लेटिव अवार्ड (आंध्र प्रदेश विधानसभा), (ii) मैरी लैंड इंडिया बिजनेस राउंड टेबल (MIBRT) द्वारा उत्कृष्ट युवा नेतृत्व पुरस्कार, 2009, (iii) 'ग्लोरी ऑफ ऑनर' शीर्षक और पदक द्वारा बल्गेरियाई कमांडो का संघ। सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन; 2018 और 2019 में गणतंत्र दिवस पर भारत मठ महा हराती; विभिन्न राज्यों की सामाजिक-संस्कृति और परंपराओं को प्रदर्शित करने वाले एक कार्यक्रम का आयोजन किया। अमेरिकन काउंसिल ऑफ यंग लीडर्स (अमेरिकी सरकार) के निमंत्रण पर श्री नरेंद्र मोदीजी के साथ पांच युवा (एसीवाईपीएल) राजनीतिक नेताओं के समूह के सदस्य के रूप में 1994 में यूएसए का दौरा किया। भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय युवा सम्मेलन आतंकवाद (IYCT), 2003; 195 प्रतिनिधियों ने लगभग 60 देशों के सम्मेलन में भाग लिया; संयुक्त राष्ट्र ने सम्मेलन के लिए एक विशेष प्रतिनिधि भेजा; वर्ल्ड यूथ काउंसिल अगेंस्ट टेररिज्म (WYCAT) का गठन इस सम्मेलन के दौरान किया गया था, WYCAT अब लगभग 18 देशों में है; WYCAT ने आतंकवाद के प्रभाव के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए शैक्षिक गतिविधियों का आयोजन संगोष्ठियों का आयोजन किया।
निर्वाचन क्षेत्रः सिकंदराबाद धारित महत्वपूर्ण पदः एक हज़ार नौ सौ बयासी: जिलाध्यक्ष, भारतीय जनता युवा मोर्चा दो हज़ार चार - दो हज़ार चौदह: सदस्य, आंध्र प्रदेश विधान सभा , लेखक और प्रकाशितः i) सीमा सुरक्षा, ii) जागरण यात्रा, दो हज़ार, तेलुगु, iii) "सीमा पार आतंकवाद और घुसपैठ" के बारे में जागरूकता लाने के लिए आठ राज्यों को कवर करने वाली मेरी "इकतीस दिवसीय" यात्रा के बारे में बुक करें। यूनिसेफ द्वारा प्रदान किया गया बेस्ट चाइल्ड फ्रेंडली लेजिस्लेटिव अवार्ड , मैरी लैंड इंडिया बिजनेस राउंड टेबल द्वारा उत्कृष्ट युवा नेतृत्व पुरस्कार, दो हज़ार नौ, 'ग्लोरी ऑफ ऑनर' शीर्षक और पदक द्वारा बल्गेरियाई कमांडो का संघ। सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन; दो हज़ार अट्ठारह और दो हज़ार उन्नीस में गणतंत्र दिवस पर भारत मठ महा हराती; विभिन्न राज्यों की सामाजिक-संस्कृति और परंपराओं को प्रदर्शित करने वाले एक कार्यक्रम का आयोजन किया। अमेरिकन काउंसिल ऑफ यंग लीडर्स के निमंत्रण पर श्री नरेंद्र मोदीजी के साथ पांच युवा राजनीतिक नेताओं के समूह के सदस्य के रूप में एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में यूएसए का दौरा किया। भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय युवा सम्मेलन आतंकवाद , दो हज़ार तीन; एक सौ पचानवे प्रतिनिधियों ने लगभग साठ देशों के सम्मेलन में भाग लिया; संयुक्त राष्ट्र ने सम्मेलन के लिए एक विशेष प्रतिनिधि भेजा; वर्ल्ड यूथ काउंसिल अगेंस्ट टेररिज्म का गठन इस सम्मेलन के दौरान किया गया था, WYCAT अब लगभग अट्ठारह देशों में है; WYCAT ने आतंकवाद के प्रभाव के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए शैक्षिक गतिविधियों का आयोजन संगोष्ठियों का आयोजन किया।
दायित्व अनेक क्षेत्रो में है । आपका अपने निर्वाचन क्षेत्रो मे, जिनके हितों की रक्षा करने के लिए आप यहा आये है, व्यक्तिगत उत्तरदायित्व होगा । लेकिन उस उत्तरदायित्व के साथ-साथ इस तथ्य को भी हृदयगम करना है कि एक निकाय के रूप मे विधान-सभा का उद्देश्य अपेक्षाकृत अधिक उच्च है और वह है सामूहिक रूप से तथा शासन के साथ मिल-जुलकर राज्य की भलाई के लिए कार्य करना । राज्य और जनता के हित समान होते है । लेकिन अंश पूर्ण रूप से सदैव छोटा ही रहता है । कोई भी इकाई अकेली चाहे कितनी भी बड़ी और महत्त्वपूर्ण क्यों न हो, पर वह राज्य की वरावरी नही कर सकती। अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्र से आने पर भी आपको पूरे राज्य की भलाई के लिए उपाय खोज निकालने होगे । दूसरे शब्दों में अधिकतम लोगो की अधिकतम भलाई के लिए प्रयत्न करना होगा ।" श्री बापना ने जो सलाह उस समय दी थी, वह आज भी पूरी तरह सार्थक है । नाबालिग शासन के समय से ही वापनाजी द्वारा अपनाई गई दूरदर्शितापूर्ण विदेश नीति के परिणामस्वरूप १९३१ मे इदौर रेजीडेन्स बाजार राज्य को वापस दे दिया गया और राज्य के चादगढ पर दावे के बदले मानपुर परगना भारत सरकार द्वारा होल्कर राज्य को सौप दिया गया। विदेशी नीति के क्षेत्र में श्री बापना की ये महान् सफलताए थी । तत्कालीन वायसराय और गवर्नर जनरल र्ड विलिंग्डन ने कहा था कि इन दोनो ही मामलो में उन क्षेत्रों के निवासियों ने ब्रिटिश अधिकार क्षेत्र से इदौर शासन के अंतर्गत जाना प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार कर लिया । यह इस बात का परिचायक है कि उस समय इन्दौर के लोग बड़े सतुष्ट थे । उनके प्रयत्नो से पोलिटिकल डिपार्टमेट द्वारा दिल्ली में स्थित वायसराय के कोर्ट मे होल्कर राज्य का एक प्रतिनिधि भेजने का अधिकार स्वीकार कर लिया गया । किसी अन्य राज्य किसी अन्य राज्य को यह अधिकार प्राप्त नही था । राज्य का एक वरिष्ठ मंत्री इस प्रयोजन से दिल्ली रखा गया । बापनासाहब का अपने ढंग से इस ओर भी ध्यान गया था कि गावों में सदियों से चले आ रहे शिल्प-उद्योग-धंधो का विकास हो ।
दायित्व अनेक क्षेत्रो में है । आपका अपने निर्वाचन क्षेत्रो मे, जिनके हितों की रक्षा करने के लिए आप यहा आये है, व्यक्तिगत उत्तरदायित्व होगा । लेकिन उस उत्तरदायित्व के साथ-साथ इस तथ्य को भी हृदयगम करना है कि एक निकाय के रूप मे विधान-सभा का उद्देश्य अपेक्षाकृत अधिक उच्च है और वह है सामूहिक रूप से तथा शासन के साथ मिल-जुलकर राज्य की भलाई के लिए कार्य करना । राज्य और जनता के हित समान होते है । लेकिन अंश पूर्ण रूप से सदैव छोटा ही रहता है । कोई भी इकाई अकेली चाहे कितनी भी बड़ी और महत्त्वपूर्ण क्यों न हो, पर वह राज्य की वरावरी नही कर सकती। अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्र से आने पर भी आपको पूरे राज्य की भलाई के लिए उपाय खोज निकालने होगे । दूसरे शब्दों में अधिकतम लोगो की अधिकतम भलाई के लिए प्रयत्न करना होगा ।" श्री बापना ने जो सलाह उस समय दी थी, वह आज भी पूरी तरह सार्थक है । नाबालिग शासन के समय से ही वापनाजी द्वारा अपनाई गई दूरदर्शितापूर्ण विदेश नीति के परिणामस्वरूप एक हज़ार नौ सौ इकतीस मे इदौर रेजीडेन्स बाजार राज्य को वापस दे दिया गया और राज्य के चादगढ पर दावे के बदले मानपुर परगना भारत सरकार द्वारा होल्कर राज्य को सौप दिया गया। विदेशी नीति के क्षेत्र में श्री बापना की ये महान् सफलताए थी । तत्कालीन वायसराय और गवर्नर जनरल र्ड विलिंग्डन ने कहा था कि इन दोनो ही मामलो में उन क्षेत्रों के निवासियों ने ब्रिटिश अधिकार क्षेत्र से इदौर शासन के अंतर्गत जाना प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार कर लिया । यह इस बात का परिचायक है कि उस समय इन्दौर के लोग बड़े सतुष्ट थे । उनके प्रयत्नो से पोलिटिकल डिपार्टमेट द्वारा दिल्ली में स्थित वायसराय के कोर्ट मे होल्कर राज्य का एक प्रतिनिधि भेजने का अधिकार स्वीकार कर लिया गया । किसी अन्य राज्य किसी अन्य राज्य को यह अधिकार प्राप्त नही था । राज्य का एक वरिष्ठ मंत्री इस प्रयोजन से दिल्ली रखा गया । बापनासाहब का अपने ढंग से इस ओर भी ध्यान गया था कि गावों में सदियों से चले आ रहे शिल्प-उद्योग-धंधो का विकास हो ।
Dilip Kumar Film Festival: दिलीप कुमार (Dilip Kumar ) एक ऐसा नाम हैं, एक ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने भारतीय सिनेमा को ना सिर्फ एक नई पहचान दी बल्कि हर पीढ़ी के दर्शक उनके अभिनय के दीवाने हैं. हाल ही में दिलीप कुमार की 100वीं जयंती पर एक फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया गया. PVR सिनेमा और फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन की तरफ से आयोजित 'दिलीप कुमारः हीरो ऑफ हीरोज' के नाम से फिल्म फेस्टिवल के जरिए उनको ट्रिब्यूट दिया गया. ये फेस्टिवल देश के 30 शहरों में आयोजित किया जा रहा है. इसी को लेकर मुंबई में जुहू के PVR में दिलीप कुमार की 1952 में रिलीज हुई फिल्म आन की स्क्रीनिंग की गई. जिसमें दिलीप साहब की पत्नी सायरा बानो समेत इंडस्ट्री के दिग्गज एक्टर्स ने हिस्सा लिया. शाम के वक्त शुरू हुए इस कार्यक्रम में सबसे पहले सायरा बानो पहुंचीं और इस दौरान उन्होंने दिलीप साहब के पोस्टर को प्यार के साथ छुआ तो हर किसी की आंखें नम हो गईं. इसके अलावा स्क्रीनिंग के दौरान प्रेम चोपड़ा, जयश्री, टी रमेश सिप्पी, किरण जुनेजा, अयूब खान और अनीस बज्मी समेत बहुत सी फिल्मी हस्तियां पहुंचीं. इस दौरान रमेश सिप्पी जिन्होंने दिलीप कुमार और अमिताभ बच्चन की फिल्म शक्ति का निर्देशन किया था, उन्होंने कहा कि शक्ति मेरे करियर की सबसे ज्यादा संतुष्टि देने वाली फिल्म रही है. मैंने युसूफ साहब से बहुत कुछ सीखा है और मैं इसके लिए उनका आभारी हूं. वहीं इस दौरान सायरा बानो ने कहा कि अमिताभ बच्चन दिलीप साहब को अपनी एक्टिंग का ऱेफरेंस प्वॉन्ट कहते हैं. अब आगे कभी कोई दिलीप कुमार नहीं होगा. कभी नहीं.
Dilip Kumar Film Festival: दिलीप कुमार एक ऐसा नाम हैं, एक ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने भारतीय सिनेमा को ना सिर्फ एक नई पहचान दी बल्कि हर पीढ़ी के दर्शक उनके अभिनय के दीवाने हैं. हाल ही में दिलीप कुमार की एक सौवीं जयंती पर एक फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया गया. PVR सिनेमा और फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन की तरफ से आयोजित 'दिलीप कुमारः हीरो ऑफ हीरोज' के नाम से फिल्म फेस्टिवल के जरिए उनको ट्रिब्यूट दिया गया. ये फेस्टिवल देश के तीस शहरों में आयोजित किया जा रहा है. इसी को लेकर मुंबई में जुहू के PVR में दिलीप कुमार की एक हज़ार नौ सौ बावन में रिलीज हुई फिल्म आन की स्क्रीनिंग की गई. जिसमें दिलीप साहब की पत्नी सायरा बानो समेत इंडस्ट्री के दिग्गज एक्टर्स ने हिस्सा लिया. शाम के वक्त शुरू हुए इस कार्यक्रम में सबसे पहले सायरा बानो पहुंचीं और इस दौरान उन्होंने दिलीप साहब के पोस्टर को प्यार के साथ छुआ तो हर किसी की आंखें नम हो गईं. इसके अलावा स्क्रीनिंग के दौरान प्रेम चोपड़ा, जयश्री, टी रमेश सिप्पी, किरण जुनेजा, अयूब खान और अनीस बज्मी समेत बहुत सी फिल्मी हस्तियां पहुंचीं. इस दौरान रमेश सिप्पी जिन्होंने दिलीप कुमार और अमिताभ बच्चन की फिल्म शक्ति का निर्देशन किया था, उन्होंने कहा कि शक्ति मेरे करियर की सबसे ज्यादा संतुष्टि देने वाली फिल्म रही है. मैंने युसूफ साहब से बहुत कुछ सीखा है और मैं इसके लिए उनका आभारी हूं. वहीं इस दौरान सायरा बानो ने कहा कि अमिताभ बच्चन दिलीप साहब को अपनी एक्टिंग का ऱेफरेंस प्वॉन्ट कहते हैं. अब आगे कभी कोई दिलीप कुमार नहीं होगा. कभी नहीं.
पटना. बिहार में शिक्षा कि जर्जर हालत किसी से छिपी नहीं है लेकिन इस बार ऐसा मामला सामने आया जो आपको हैरान कर देगा. यहां जांच के दौरान मिली संस्कृत की एक उत्तर पुस्तिका की फोटो वायरल हुई है. इस उत्तर पुस्तिका में छात्र ने कुछ सवालों के जवाब तो दिए हैं, लेकिन एक जगह छात्र ने लिखा है कि किताब नहीं मिला है जी. इससे शिक्षा विभाग के उस दावे की भी पोल खुल गई है, जिसमें उसने 33 फीसदी बच्चों को किताबें उपलब्ध करा देने का दावा किया था. इससे यह साफ पता चलता है कि स्कूल के बच्चो को किताबे मुहैया नहीं कराई गई. तो बच्चे कैसे परीक्षा देंगे. लगातार शिक्षक से किताब मांगने पर बहाना बनाने के बाद जब परीक्षा शुरू हुई तो एक परीक्षार्थी ने अपने पेपर में लिखा कि हम क्या लिखें, अब तक तो किताब मिला ही नहीं. बता दे कि बिहार के सरकारी स्कूल में बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के द्वारा आयोजित अर्धवार्षिक मूल्यांकन परीक्षा खत्म हो गया जिसके बाद कॉपी जांच की प्रक्रिया शुरू हुई और इसी जांच के दौरान एक ऐसी उत्तर पुस्तिका हाथ लगी है जिसमें छात्रों ने स्कूल व्यवस्था की पूरी पोल खोलकर रख दी. राज्य के प्रारंभिक स्कूलों में अर्धवार्षिक मूल्यांकन परीक्षा 5 से 11 अक्टूबर तक हुई थी.
पटना. बिहार में शिक्षा कि जर्जर हालत किसी से छिपी नहीं है लेकिन इस बार ऐसा मामला सामने आया जो आपको हैरान कर देगा. यहां जांच के दौरान मिली संस्कृत की एक उत्तर पुस्तिका की फोटो वायरल हुई है. इस उत्तर पुस्तिका में छात्र ने कुछ सवालों के जवाब तो दिए हैं, लेकिन एक जगह छात्र ने लिखा है कि किताब नहीं मिला है जी. इससे शिक्षा विभाग के उस दावे की भी पोल खुल गई है, जिसमें उसने तैंतीस फीसदी बच्चों को किताबें उपलब्ध करा देने का दावा किया था. इससे यह साफ पता चलता है कि स्कूल के बच्चो को किताबे मुहैया नहीं कराई गई. तो बच्चे कैसे परीक्षा देंगे. लगातार शिक्षक से किताब मांगने पर बहाना बनाने के बाद जब परीक्षा शुरू हुई तो एक परीक्षार्थी ने अपने पेपर में लिखा कि हम क्या लिखें, अब तक तो किताब मिला ही नहीं. बता दे कि बिहार के सरकारी स्कूल में बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के द्वारा आयोजित अर्धवार्षिक मूल्यांकन परीक्षा खत्म हो गया जिसके बाद कॉपी जांच की प्रक्रिया शुरू हुई और इसी जांच के दौरान एक ऐसी उत्तर पुस्तिका हाथ लगी है जिसमें छात्रों ने स्कूल व्यवस्था की पूरी पोल खोलकर रख दी. राज्य के प्रारंभिक स्कूलों में अर्धवार्षिक मूल्यांकन परीक्षा पाँच से ग्यारह अक्टूबर तक हुई थी.
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। क्वीन्स पार्क (अंग्रेज़ीः Queen's Park) एक केन्द्रीय लंदन में सिटी ऑफ़ वेस्टमिंस्टर बरो का जिला है। क्वीन पार्क पार्क और वेस्टमिंस्टर के शहर लंदन बरो के बीच की सीमा पर स्थित उत्तर पश्चिमी लंदन का एक क्षेत्र और नागरिक पल्ली है। . सूडान के एक ग्रामीण विद्यालय का दृष्य विद्यालय वह स्थल है जहाँ शिक्षा प्रदान की जाती है। ""विद्यालय एक ऐसी संस्था है जहाँ बच्चों के शारीरिक,मानसिक,बौधिक एवं नैतिक गुणों का विकास होता है। ' विद्यालय' शब्द के लिए आंग्ल भाषा में 'स्कूल' शब्द का प्रयोग होता है, जिसकी उत्पत्ति ग्रीक शब्द 'Skohla'या 'Skhole' से हुई है, जिस से तात्पर्य है- 'अवकाश'. क्वीन्स पार्क, लंदन और विद्यालय आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। क्वीन्स पार्क, लंदन 6 संबंध है और विद्यालय 0 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (6 + 0)। यह लेख क्वीन्स पार्क, लंदन और विद्यालय के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। क्वीन्स पार्क एक केन्द्रीय लंदन में सिटी ऑफ़ वेस्टमिंस्टर बरो का जिला है। क्वीन पार्क पार्क और वेस्टमिंस्टर के शहर लंदन बरो के बीच की सीमा पर स्थित उत्तर पश्चिमी लंदन का एक क्षेत्र और नागरिक पल्ली है। . सूडान के एक ग्रामीण विद्यालय का दृष्य विद्यालय वह स्थल है जहाँ शिक्षा प्रदान की जाती है। ""विद्यालय एक ऐसी संस्था है जहाँ बच्चों के शारीरिक,मानसिक,बौधिक एवं नैतिक गुणों का विकास होता है। ' विद्यालय' शब्द के लिए आंग्ल भाषा में 'स्कूल' शब्द का प्रयोग होता है, जिसकी उत्पत्ति ग्रीक शब्द 'Skohla'या 'Skhole' से हुई है, जिस से तात्पर्य है- 'अवकाश'. क्वीन्स पार्क, लंदन और विद्यालय आम में शून्य बातें हैं । क्वीन्स पार्क, लंदन छः संबंध है और विद्यालय शून्य है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख क्वीन्स पार्क, लंदन और विद्यालय के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
आज समाज डिजिटल, पानीपत : पानीपत। डॉ. एमकेके आर्य मॉडल स्कूल में सोमवार को कक्षा नर्सरी 'ए' व 'बी' के विद्यार्थियों द्वारा स्वास्थ्य ही धन है। विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के आयोजन में कक्षा अध्यापिका अदिति व टीना ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रार्थना की मधुर गूंज से किया गया। मंच संचालन का कार्य अदिति द्वारा किया गया। इसके उपरांत गुरप्रीत, समायरा, शुभम, केल्विन, बलजोत, देवांश ध्रुव, लविश, दिव्या ने अपने भाषणों में बताया कि स्वास्थ्य ही धन है"। क्योंकि, हमारा शरीर ही हमारी अच्छी और बुरी सभी तरह की परिस्थितियों में हमारे साथ रहता है। इस संसार में कोई भी हमारे बुरे समय में मदद नहीं कर सकता है। इसलिए, यदि हमारा स्वास्थ्य ठीक है, तो हम अपने जीवन में किसी भी बुरी परिस्थिति का सामना कर सकते हैं। यदि कोई स्वस्थ नहीं है, तो वह अवश्य ही जीवन का आनंद लेने के स्थान पर जीवन में स्वास्थ्य संबंधी या अन्य परेशानियों से पीड़ित होगा। संतुलित आहार लेना, व्यायाम करना और भरपूर आराम अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने की कुंजी है। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है। इसलिए हमें आसपास साफ-सफाई व स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए। इसके उपरांत अर्णव, दृष्टि, जतिन, विहान कृष्णा, भूमि, कियारा, दैविक, राइमा, सौरिस, तेजस लावण्या सानवी ने अपनी कविताओं की प्रस्तुतियों के माध्यम से बताया कि हम सबको मिलकर सफाई करनी चाहिए, ताकि हमारा शरीर स्वच्छ रहे। हमें फलों का सेवन करना चाहिए। कक्षा के विद्यार्थियों द्वारा विषय से संबंधित सामूहिक गान व नृत्य की सुंदर प्रस्तुति दी गई। साथ ही साथ दीक्षांत, राक्षिक, कियारा, सायशा, समर्थ, सृष्टि, युवराज ने विषय से संबंधित अपने अपने विचारों की अभिव्यक्ति की। अंत में बच्चों द्वारा प्रस्तुत प्रश्नोत्तरी ज्ञानवर्धक रही। इस अवसर पर विद्यालय के निर्देशक रोशन लाल सैनी, प्रधानाचार्य मधुप परासर, भाषा व गतिविधि प्रभारी मीरा मारवाह एवं विद्यालय की शैक्षिक सलाहकार मंजू सेतिया ने विद्यालय के विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए संदेश दिया कि किसी भी कार्य को करने के लिए हमारा स्वास्थ्य सही होना चाहिए तभी हम मन से कार्य कर सकेंगे। जो व्यक्ति अच्छे जीवन शैली का पालन करता है वह जीवन में हमेशा स्वस्थ रहता है। जो व्यक्ति अपने खानपान और रहन-सहन आदि का ख्याल नहीं रखता वह बीमार हो जाता है। हमें संतुलित आहार में लेना चाहिए।
आज समाज डिजिटल, पानीपत : पानीपत। डॉ. एमकेके आर्य मॉडल स्कूल में सोमवार को कक्षा नर्सरी 'ए' व 'बी' के विद्यार्थियों द्वारा स्वास्थ्य ही धन है। विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के आयोजन में कक्षा अध्यापिका अदिति व टीना ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रार्थना की मधुर गूंज से किया गया। मंच संचालन का कार्य अदिति द्वारा किया गया। इसके उपरांत गुरप्रीत, समायरा, शुभम, केल्विन, बलजोत, देवांश ध्रुव, लविश, दिव्या ने अपने भाषणों में बताया कि स्वास्थ्य ही धन है"। क्योंकि, हमारा शरीर ही हमारी अच्छी और बुरी सभी तरह की परिस्थितियों में हमारे साथ रहता है। इस संसार में कोई भी हमारे बुरे समय में मदद नहीं कर सकता है। इसलिए, यदि हमारा स्वास्थ्य ठीक है, तो हम अपने जीवन में किसी भी बुरी परिस्थिति का सामना कर सकते हैं। यदि कोई स्वस्थ नहीं है, तो वह अवश्य ही जीवन का आनंद लेने के स्थान पर जीवन में स्वास्थ्य संबंधी या अन्य परेशानियों से पीड़ित होगा। संतुलित आहार लेना, व्यायाम करना और भरपूर आराम अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने की कुंजी है। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है। इसलिए हमें आसपास साफ-सफाई व स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए। इसके उपरांत अर्णव, दृष्टि, जतिन, विहान कृष्णा, भूमि, कियारा, दैविक, राइमा, सौरिस, तेजस लावण्या सानवी ने अपनी कविताओं की प्रस्तुतियों के माध्यम से बताया कि हम सबको मिलकर सफाई करनी चाहिए, ताकि हमारा शरीर स्वच्छ रहे। हमें फलों का सेवन करना चाहिए। कक्षा के विद्यार्थियों द्वारा विषय से संबंधित सामूहिक गान व नृत्य की सुंदर प्रस्तुति दी गई। साथ ही साथ दीक्षांत, राक्षिक, कियारा, सायशा, समर्थ, सृष्टि, युवराज ने विषय से संबंधित अपने अपने विचारों की अभिव्यक्ति की। अंत में बच्चों द्वारा प्रस्तुत प्रश्नोत्तरी ज्ञानवर्धक रही। इस अवसर पर विद्यालय के निर्देशक रोशन लाल सैनी, प्रधानाचार्य मधुप परासर, भाषा व गतिविधि प्रभारी मीरा मारवाह एवं विद्यालय की शैक्षिक सलाहकार मंजू सेतिया ने विद्यालय के विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए संदेश दिया कि किसी भी कार्य को करने के लिए हमारा स्वास्थ्य सही होना चाहिए तभी हम मन से कार्य कर सकेंगे। जो व्यक्ति अच्छे जीवन शैली का पालन करता है वह जीवन में हमेशा स्वस्थ रहता है। जो व्यक्ति अपने खानपान और रहन-सहन आदि का ख्याल नहीं रखता वह बीमार हो जाता है। हमें संतुलित आहार में लेना चाहिए।
मॉस्को/इस्लामाबाद, 21 फरवरीः पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान 23-24 फरवरी को रूस का दौरा करेंगे, आधिकारिक रूसी मीडिया ने बताया है कि 23 वर्षों में किसी पाकिस्तानी प्रधान मंत्री द्वारा मास्को की पहली यात्रा का संकेत दिया गया है। आपको बता दें कि रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने पुष्टि की कि प्रधान मंत्री खान की यात्रा की तैयारी चल रही थी, एक राजनयिक सूत्र ने बताया, "यह यात्रा 23-24 फरवरी को होगी। " खान की यात्रा की आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान और रूस ने घोषणा नहीं की है। पाकिस्तान के सूत्रों ने पहले कहा था कि खान के रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करने की उम्मीद है। पाकिस्तान और रूस के यात्रा के दौरान बड़े सौदे करने की उम्मीद है, जिसमें 2 बिलियन अमरीकी डालर की गैस पाइपलाइन के निर्माण के लिए रूसी निवेश पर एक आंदोलन शामिल है, पाकिस्तानी मीडिया ने पिछले सप्ताह रिपोर्ट किया था। खान की यात्रा के दौरान पाकिस्तानी नेतृत्व रूस के साथ एक वाणिज्यिक समझौते पर हस्ताक्षर करना चाहता है। एक अन्य परियोजना जिसके एजेंडे में होने की संभावना है, वह है कजाकिस्तान से गैस पाइपलाइन।
मॉस्को/इस्लामाबाद, इक्कीस फरवरीः पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान तेईस-चौबीस फरवरी को रूस का दौरा करेंगे, आधिकारिक रूसी मीडिया ने बताया है कि तेईस वर्षों में किसी पाकिस्तानी प्रधान मंत्री द्वारा मास्को की पहली यात्रा का संकेत दिया गया है। आपको बता दें कि रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने पुष्टि की कि प्रधान मंत्री खान की यात्रा की तैयारी चल रही थी, एक राजनयिक सूत्र ने बताया, "यह यात्रा तेईस-चौबीस फरवरी को होगी। " खान की यात्रा की आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान और रूस ने घोषणा नहीं की है। पाकिस्तान के सूत्रों ने पहले कहा था कि खान के रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करने की उम्मीद है। पाकिस्तान और रूस के यात्रा के दौरान बड़े सौदे करने की उम्मीद है, जिसमें दो बिलियन अमरीकी डालर की गैस पाइपलाइन के निर्माण के लिए रूसी निवेश पर एक आंदोलन शामिल है, पाकिस्तानी मीडिया ने पिछले सप्ताह रिपोर्ट किया था। खान की यात्रा के दौरान पाकिस्तानी नेतृत्व रूस के साथ एक वाणिज्यिक समझौते पर हस्ताक्षर करना चाहता है। एक अन्य परियोजना जिसके एजेंडे में होने की संभावना है, वह है कजाकिस्तान से गैस पाइपलाइन।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी कठोर ठंड में भी सिर्फ आधी बाजू की टी-शर्ट पहनकर अपनी भारत जोड़ो यात्रा को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कडाके की ठंड में भी सिर्फ सफेद टी-शर्ट और पतलून में भारत जोड़ो यात्रा का नेतृत्व कर रहे है। इसको लेकर अलग-अलग तरह की टिप्पणियां की गईं। सुबह के समय घने कोहरे और सर्द मौसम के बीच राहुल गांधी का सिर्फ एक टी-शर्ट में यात्रा में चलना भी चर्चा का विषय बना रहा। राहुल गांधी के आगे डीजे पर उनके समर्थक नाचते गाते चल रहे है। राहुल गांधी के चारों तरफ पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा घेरा बनाया हुआ है। जिसके अंदर ही राहुल गांधी समर्थकों से बात करते और सड़क के दोनों और खड़े लोगों का अभिवादन स्वीकार करते चल रहे है।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी कठोर ठंड में भी सिर्फ आधी बाजू की टी-शर्ट पहनकर अपनी भारत जोड़ो यात्रा को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कडाके की ठंड में भी सिर्फ सफेद टी-शर्ट और पतलून में भारत जोड़ो यात्रा का नेतृत्व कर रहे है। इसको लेकर अलग-अलग तरह की टिप्पणियां की गईं। सुबह के समय घने कोहरे और सर्द मौसम के बीच राहुल गांधी का सिर्फ एक टी-शर्ट में यात्रा में चलना भी चर्चा का विषय बना रहा। राहुल गांधी के आगे डीजे पर उनके समर्थक नाचते गाते चल रहे है। राहुल गांधी के चारों तरफ पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा घेरा बनाया हुआ है। जिसके अंदर ही राहुल गांधी समर्थकों से बात करते और सड़क के दोनों और खड़े लोगों का अभिवादन स्वीकार करते चल रहे है।
सुधार के बाद रूसी विशेष बलों का भविष्य क्या है? सशस्त्र बलों में सुधार लाने और उन्हें एक नए रूप में लाने के संदर्भ में सैन्य खुफिया और विशेष बलों को पुनर्गठित करने की समस्या शायद समाज में सबसे अधिक चर्चा में है। इसी समय, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इस मुद्दे पर राय विभाजित हैंः जनसंख्या का एक हिस्सा सुधारों का समर्थन करता है, लेकिन अधिक लोग अभी भी नवाचारों के बारे में बहुत गंभीर रूप से बोलते हैं। द्वारा और बड़े, इस रवैये का मुख्य कारण प्रशंसनीय जानकारी की कमी है, हालांकि विशेष बलों, परिभाषा के अनुसार, अपनी योजनाओं को जनता को समर्पित नहीं करना चाहिए। लेकिन आज, समय के साथ तालमेल बनाए रखते हुए, सैन्य सुधार की समस्या पर चर्चा करना काफी तर्कसंगत लगता है। सैन्य विषय में रुचि रखने वाले लोगों में, अफवाहें हैं कि रूसी विशेष बलों की गुप्त इकाइयां दुनिया भर में गुप्त विशेष अभियान चला रही हैं। लेकिन इस जानकारी को नौसेना खुफिया के 1 रैंक के कप्तान द्वारा मना कर दिया गया था बेड़ा जी। सिज़िकोव। उनके मुताबिक, मयूर काल में इस तरह के ऑपरेशन करने की जरूरत नहीं होती है। बेशक, सैन्य नेतृत्व एक संभावित दुश्मन के बारे में विश्वसनीय डेटा के लिए बाध्य है, लेकिन साधारण स्काउट्स इस कार्य के साथ काफी सामना कर सकते हैं। आज भी, रूसी विशेष बलों के पास एक अधिक महत्वपूर्ण कार्य है - प्रबंधन प्रणाली का पुनर्गठन। सुधार की आवश्यकता को बड़ी संख्या में तथ्यों से संकेत मिलता है। इसलिए, उदाहरण के लिए, विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया के अन्य राज्यों के उदाहरण के बाद, रूसी विशेष संचालन बलों का आधुनिकीकरण करना आवश्यक है। लेकिन साथ ही, रूसी विशेष बलों को इस तरह से आधुनिक बनाने में स्पष्ट अनिच्छा या अक्षमता है कि यह आधुनिकता की आवश्यकताओं को पूरा करती है। इस तथ्य के बावजूद कि रूस में विशेष संचालन बलों के निर्माण के संबंध में निर्णय अभी भी किया गया था, इसके कार्यान्वयन के पहले चरण स्पष्ट रूप से आश्चर्यजनक हैं। इसलिए, यह स्पष्ट नहीं है कि विशेष बलों के अलग ब्रिगेड को अलग क्यों करें या उन्हें अन्य विभागों में अधीनस्थ करें। अक्सर ऐसा होता है कि विशेष बल इकाइयां तैनाती के अपने स्थानों को बदलने के लिए बाध्य होती हैं। इसी समय, राय काफी गंभीरता से व्यक्त की जाती है कि जो लोग सैन्य विभाग के नेतृत्व के फैसलों का समर्थन नहीं करते हैं और जो सशस्त्र बलों में सुधार करना पसंद नहीं करते हैं, उनका कोई स्थान नहीं है। और कभी-कभी स्थिति बेतुकी बात पर खुलकर आती हैः असंतुष्टों को लगभग पूरी तरह से सेना और राज्य के पतन के लिए दोषी ठहराया जाता है। इस तरह के निर्णय से बड़ी संख्या में प्रश्न उत्पन्न हुए हैं, जिनके उत्तर नहीं हैं। यदि यह निर्णय राजनीति से संबंधित है, तो इसकी शीघ्रता को कैसे समझाया जा सकता है? दरअसल, ब्रिगेड के स्थानांतरण के मामले में, उलान-उडे से नोवोसिबिर्स्क तक के क्षेत्र में, और एक सीधी रेखा में इस एक्सएनयूएमएक्स किलोमीटर में एक भी सैन्य इकाई या इकाई नहीं होगी? यदि निर्णय में सैन्य जड़ें हैं, तो कैसे और क्या समझा जाए कि राज्य का एक चौथाई क्षेत्र, जो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है (यह वह जगह है जहां बैकल स्थित है - ताजे पानी का स्रोत), रक्षाहीन है। और सशस्त्र बलों की गतिशीलता कैसे हासिल की जाएगी और संचालन रणनीतिक कमान के पदों की स्थापना की जाएगी, अगर निकटतम सैन्य इकाई XNUMM00 किलोमीटर से अधिक है? इसके मूल में, विशेष बल सेना के विशेष रूप से बनाए गए, प्रशिक्षित और सुसज्जित इकाइयाँ हैं, जिन्हें युद्ध में और युद्धकाल में राजनीतिक, सैन्य और अन्य लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कुछ कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। लेकिन सोवियत विशेष बलों के खाते में सफल संचालन की एक बड़ी संख्या थी। उनका सबसे अच्छा समय वह समय माना जाता है जब अफगानिस्तान में सैन्य अभियान चलाए जाते थे। उस समय, विशेष बलों में एक्सएनयूएमएक्स अलग ब्रिगेड, दो प्रशिक्षण रेजिमेंट, एक्सएनयूएमएक्स के आदेश में, अलग-अलग कंपनियां शामिल थीं। जब अफगानिस्तान में शत्रुता शुरू हुई, तो यह विशेष बल थे जिन्होंने 14 और 30 को विशेष बलों के अलग-अलग ब्रिगेड बनाने का आधार बनाया, जो संघर्ष क्षेत्र में संचालित थे। युद्ध के वर्षों के दौरान वहां किए गए सभी ऑपरेशनों में से तीन-चौथाई विशेष बलों की सक्रिय भागीदारी के बिना नहीं गए, भले ही उनकी संख्या सोवियत सेना की कुल संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक न हो। चेचन्या में युद्ध के वर्षों के दौरान, जीआरयू विशेष बलों ने भी विशेष अभियान चलाने में सक्रिय भाग लिया। इस अवधि के दौरान, 29 विशेष बलों ने रूस के नायकों का खिताब प्राप्त किया, और 2002 के लिए एक वर्ष के लिए 2 के बारे में हजारों विशेष बलों को लड़ाकू पदक और आदेश दिए गए। इसके अलावा, क्रास्नोडार क्षेत्र में पूर्ण कर्मचारियों को प्राप्त करने के लिए, 10-I विशेष बल विशेष (विशेष) ब्रिगेड को अतिरिक्त रूप से बनाया गया था, जो यूएसएसआर के दौरान क्रीमिया में तैनात था। इस प्रकार, रूसी सशस्त्र बलों के सुधार की शुरुआत के समय, विशेष बलों के पास एक्सएनयूएमएक्स विशेष ब्रिगेड थे। उनमें सोवियत संघ के 9 हीरोज़ और रूस के 5 हीरोज़ शामिल थे। यह इस बात का एक ज्वलंत प्रमाण है कि न केवल विशेष बल के सैनिक अपने विशेष साहस और देश के प्रति वफादारी से प्रतिष्ठित हैं, बल्कि यह भी है कि उनके पास अत्यधिक पेशेवर कौशल और युद्ध के अनुभव का एक बड़ा सौदा है। सभी छह सैन्य जिलों में विशेष बल ब्रिगेड वितरित किए गए। 2005-2007 में, 2, 16, 10 और 22 ब्रिगेड को फेडरल टारगेट प्रोग्राम ट्रांजिशन टू कॉन्ट्रैक्ट के हिस्से के रूप में धन आवंटित किया गया था। 24 और 14 टीमों के लिए पर्याप्त धन नहीं था। 67 विशेष बल विशेष बल ब्रिगेड की स्थिति अत्यंत कठिन थी, क्योंकि कई वर्षों तक इसके रखरखाव और विकास के लिए कोई धन आवंटित नहीं किया गया था। केवल एक चीज जो अपनी तैनाती के स्थान पर की गई थी, वह बैरक का एक प्रमुख ओवरहाल था। इसके अलावा, यदि हम 2003-2010 की अवधि पर विचार करते हैं, तो दोनों टीमों - 14 और 24 - को 3 मिलियन रूबल (! ) के लिए कुल बेस बेस, इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रेनिंग ग्राउंड के विकास के लिए मिला। 2007 में, 67-I विशेष बल विशेष बल ब्रिगेड, जो चेचन्या में संचालन करने में लगे हुए थे, को भंग कर दिया गया था। प्रारंभ में, यह माना गया था कि इसकी व्यवस्था के लिए धन आवंटित किया जाएगा, लेकिन फिर अचानक इसे भंग करने का आदेश मिला। इस प्रकार, विशेष बल, जिनके पास व्यापक युद्ध का अनुभव था, राज्य और सरकार के लिए बेकार हो गया। अधिकांश सेनानियों ने छोड़ दिया, कुछ पीछे की समर्थन इकाइयों तक, अन्य सैन्य इकाइयों में सेवा करने के लिए चले गए। और अब "हाथ पहुंच गए हैं" और 24 ब्रिगेड के लिए। प्रारंभ में, यूनिट उलान-उडे में तैनात था। एक अच्छा प्रशिक्षण आधार था, जिसने मुकाबला प्रशिक्षण को सबसे प्रभावी रूप से संचालित करना संभव बना दिया। और चूंकि ब्रिगेड एयरफील्ड से बहुत दूर नहीं थी, इसलिए यह कहना सुरक्षित है कि यह वास्तव में मोबाइल सैन्य इकाई थी। लगभग सभी कर्मियों को आवास प्रदान किए गए थे। और सैन्य आधार और उसके संचार के बुनियादी ढांचे ने नवीनतम विश्व मानकों के अनुसार ब्रिगेड को लैस करने के लिए बहुत अधिक खर्च किए बिना इसे संभव बना दिया। अचानक, सैन्य नेतृत्व ने इसके कारणों को बताए बिना, इरकुत्स्क को ब्रिगेड को स्थानांतरित करने का फैसला किया। इसके अलावा, "पुनर्वास" के लिए कोई धनराशि आवंटित नहीं की गई थी, इसलिए इकाई को अपने दम पर फिर से तैयार करने के लिए मजबूर किया गया था (और यह एक्सएनयूएमएक्स किलोमीटर है)। इस तरह की व्यवस्थाओं से जीता गया सैन्य विभाग पूरी तरह से समझ में नहीं आता है, क्योंकि नई जगह पर न तो एक उपयुक्त प्रशिक्षण आधार था, न ही एक प्रशिक्षण मैदान जहां वे मुकाबला प्रशिक्षण और शूटिंग में लगे हो सकते हैं। इसके अलावा, लड़ाकू, प्रशिक्षण के बजाय, यूनिट की व्यवस्था करने के लिए और अपने खर्च पर मजबूर थे। लेकिन तमाम मुश्किलों के बावजूद, सेना की घटनाओं में उच्च पुरस्कार लेते हुए, 24-I ब्रिगेड शीर्ष पर रही। नई जगह 24 स्पेशल फोर्सेस ब्रिगेड की विकास संभावनाएं बहुत ज्यादा नहीं हैं। नए आंदोलन में फिर से कीमती समय लगता है जिसे युद्ध प्रशिक्षण पर खर्च किया जा सकता है। इसके बजाय, सेनानियों को एक विशाल क्षेत्र की सुरक्षा, बुनियादी ढांचे के विकास के लिए मजबूर किया जाएगा। ब्रिगेड पूर्ण रूप से युद्ध प्रशिक्षण भी नहीं कर पाएगी, क्योंकि सैन्य इकाई का क्षेत्र खुद शहर के केंद्र में स्थित है, लेकिन प्रशिक्षण का कोई आधार नहीं है। इसके अलावा, नए स्थान पर सैनिकों के जीवन स्तर में काफी गिरावट आएगी, क्योंकि उनके परिवार के सदस्य फिर से बेरोजगार हो जाएंगे और उन्हें बसने के तरीकों की तलाश करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, क्योंकि रक्षा मंत्रालय उनके लिए काम खोजने में सहायता प्रदान करने का कार्य नहीं करता है। अगर इसी तरह की स्थिति में विकास जारी रहा, तो बहुत जल्द रूस को विशेष बलों के बारे में भूलना होगा। या विशेष बलों के संबंध में नीति को बदलना आवश्यक है। वर्तमान में, विशेष बलों के लड़ाकों का भविष्य केवल राज्य के प्रमुख पर निर्भर करता है, कि वह अंतर्राष्ट्रीय हितों में देश के राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा करने में सक्षम बल के अस्तित्व में कितना रुचि रखता है। ऐसा करने के लिए, कार्यों की एक बहुत विस्तृत श्रृंखला के कार्यान्वयन की निगरानी करना आवश्यक है जो वास्तव में विशेष बलों को सुधारने में मदद करेंगे, इसे युद्ध के लिए तैयार, पेशेवर, मोबाइल, कॉम्पैक्ट, अच्छी तरह से सुसज्जित और प्रशिक्षित बल में बदल देंगे। प्रयुक्त सामग्रीः - लेखकः
सुधार के बाद रूसी विशेष बलों का भविष्य क्या है? सशस्त्र बलों में सुधार लाने और उन्हें एक नए रूप में लाने के संदर्भ में सैन्य खुफिया और विशेष बलों को पुनर्गठित करने की समस्या शायद समाज में सबसे अधिक चर्चा में है। इसी समय, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इस मुद्दे पर राय विभाजित हैंः जनसंख्या का एक हिस्सा सुधारों का समर्थन करता है, लेकिन अधिक लोग अभी भी नवाचारों के बारे में बहुत गंभीर रूप से बोलते हैं। द्वारा और बड़े, इस रवैये का मुख्य कारण प्रशंसनीय जानकारी की कमी है, हालांकि विशेष बलों, परिभाषा के अनुसार, अपनी योजनाओं को जनता को समर्पित नहीं करना चाहिए। लेकिन आज, समय के साथ तालमेल बनाए रखते हुए, सैन्य सुधार की समस्या पर चर्चा करना काफी तर्कसंगत लगता है। सैन्य विषय में रुचि रखने वाले लोगों में, अफवाहें हैं कि रूसी विशेष बलों की गुप्त इकाइयां दुनिया भर में गुप्त विशेष अभियान चला रही हैं। लेकिन इस जानकारी को नौसेना खुफिया के एक रैंक के कप्तान द्वारा मना कर दिया गया था बेड़ा जी। सिज़िकोव। उनके मुताबिक, मयूर काल में इस तरह के ऑपरेशन करने की जरूरत नहीं होती है। बेशक, सैन्य नेतृत्व एक संभावित दुश्मन के बारे में विश्वसनीय डेटा के लिए बाध्य है, लेकिन साधारण स्काउट्स इस कार्य के साथ काफी सामना कर सकते हैं। आज भी, रूसी विशेष बलों के पास एक अधिक महत्वपूर्ण कार्य है - प्रबंधन प्रणाली का पुनर्गठन। सुधार की आवश्यकता को बड़ी संख्या में तथ्यों से संकेत मिलता है। इसलिए, उदाहरण के लिए, विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया के अन्य राज्यों के उदाहरण के बाद, रूसी विशेष संचालन बलों का आधुनिकीकरण करना आवश्यक है। लेकिन साथ ही, रूसी विशेष बलों को इस तरह से आधुनिक बनाने में स्पष्ट अनिच्छा या अक्षमता है कि यह आधुनिकता की आवश्यकताओं को पूरा करती है। इस तथ्य के बावजूद कि रूस में विशेष संचालन बलों के निर्माण के संबंध में निर्णय अभी भी किया गया था, इसके कार्यान्वयन के पहले चरण स्पष्ट रूप से आश्चर्यजनक हैं। इसलिए, यह स्पष्ट नहीं है कि विशेष बलों के अलग ब्रिगेड को अलग क्यों करें या उन्हें अन्य विभागों में अधीनस्थ करें। अक्सर ऐसा होता है कि विशेष बल इकाइयां तैनाती के अपने स्थानों को बदलने के लिए बाध्य होती हैं। इसी समय, राय काफी गंभीरता से व्यक्त की जाती है कि जो लोग सैन्य विभाग के नेतृत्व के फैसलों का समर्थन नहीं करते हैं और जो सशस्त्र बलों में सुधार करना पसंद नहीं करते हैं, उनका कोई स्थान नहीं है। और कभी-कभी स्थिति बेतुकी बात पर खुलकर आती हैः असंतुष्टों को लगभग पूरी तरह से सेना और राज्य के पतन के लिए दोषी ठहराया जाता है। इस तरह के निर्णय से बड़ी संख्या में प्रश्न उत्पन्न हुए हैं, जिनके उत्तर नहीं हैं। यदि यह निर्णय राजनीति से संबंधित है, तो इसकी शीघ्रता को कैसे समझाया जा सकता है? दरअसल, ब्रिगेड के स्थानांतरण के मामले में, उलान-उडे से नोवोसिबिर्स्क तक के क्षेत्र में, और एक सीधी रेखा में इस एक्सएनयूएमएक्स किलोमीटर में एक भी सैन्य इकाई या इकाई नहीं होगी? यदि निर्णय में सैन्य जड़ें हैं, तो कैसे और क्या समझा जाए कि राज्य का एक चौथाई क्षेत्र, जो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है , रक्षाहीन है। और सशस्त्र बलों की गतिशीलता कैसे हासिल की जाएगी और संचालन रणनीतिक कमान के पदों की स्थापना की जाएगी, अगर निकटतम सैन्य इकाई XNUMMशून्य किलोग्राममीटर से अधिक है? इसके मूल में, विशेष बल सेना के विशेष रूप से बनाए गए, प्रशिक्षित और सुसज्जित इकाइयाँ हैं, जिन्हें युद्ध में और युद्धकाल में राजनीतिक, सैन्य और अन्य लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कुछ कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। लेकिन सोवियत विशेष बलों के खाते में सफल संचालन की एक बड़ी संख्या थी। उनका सबसे अच्छा समय वह समय माना जाता है जब अफगानिस्तान में सैन्य अभियान चलाए जाते थे। उस समय, विशेष बलों में एक्सएनयूएमएक्स अलग ब्रिगेड, दो प्रशिक्षण रेजिमेंट, एक्सएनयूएमएक्स के आदेश में, अलग-अलग कंपनियां शामिल थीं। जब अफगानिस्तान में शत्रुता शुरू हुई, तो यह विशेष बल थे जिन्होंने चौदह और तीस को विशेष बलों के अलग-अलग ब्रिगेड बनाने का आधार बनाया, जो संघर्ष क्षेत्र में संचालित थे। युद्ध के वर्षों के दौरान वहां किए गए सभी ऑपरेशनों में से तीन-चौथाई विशेष बलों की सक्रिय भागीदारी के बिना नहीं गए, भले ही उनकी संख्या सोवियत सेना की कुल संख्या के पंद्रह प्रतिशत से अधिक न हो। चेचन्या में युद्ध के वर्षों के दौरान, जीआरयू विशेष बलों ने भी विशेष अभियान चलाने में सक्रिय भाग लिया। इस अवधि के दौरान, उनतीस विशेष बलों ने रूस के नायकों का खिताब प्राप्त किया, और दो हज़ार दो के लिए एक वर्ष के लिए दो के बारे में हजारों विशेष बलों को लड़ाकू पदक और आदेश दिए गए। इसके अलावा, क्रास्नोडार क्षेत्र में पूर्ण कर्मचारियों को प्राप्त करने के लिए, दस-I विशेष बल विशेष ब्रिगेड को अतिरिक्त रूप से बनाया गया था, जो यूएसएसआर के दौरान क्रीमिया में तैनात था। इस प्रकार, रूसी सशस्त्र बलों के सुधार की शुरुआत के समय, विशेष बलों के पास एक्सएनयूएमएक्स विशेष ब्रिगेड थे। उनमें सोवियत संघ के नौ हीरोज़ और रूस के पाँच हीरोज़ शामिल थे। यह इस बात का एक ज्वलंत प्रमाण है कि न केवल विशेष बल के सैनिक अपने विशेष साहस और देश के प्रति वफादारी से प्रतिष्ठित हैं, बल्कि यह भी है कि उनके पास अत्यधिक पेशेवर कौशल और युद्ध के अनुभव का एक बड़ा सौदा है। सभी छह सैन्य जिलों में विशेष बल ब्रिगेड वितरित किए गए। दो हज़ार पाँच-दो हज़ार सात में, दो, सोलह, दस और बाईस ब्रिगेड को फेडरल टारगेट प्रोग्राम ट्रांजिशन टू कॉन्ट्रैक्ट के हिस्से के रूप में धन आवंटित किया गया था। चौबीस और चौदह टीमों के लिए पर्याप्त धन नहीं था। सरसठ विशेष बल विशेष बल ब्रिगेड की स्थिति अत्यंत कठिन थी, क्योंकि कई वर्षों तक इसके रखरखाव और विकास के लिए कोई धन आवंटित नहीं किया गया था। केवल एक चीज जो अपनी तैनाती के स्थान पर की गई थी, वह बैरक का एक प्रमुख ओवरहाल था। इसके अलावा, यदि हम दो हज़ार तीन-दो हज़ार दस की अवधि पर विचार करते हैं, तो दोनों टीमों - चौदह और चौबीस - को तीन मिलियन रूबल के लिए कुल बेस बेस, इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रेनिंग ग्राउंड के विकास के लिए मिला। दो हज़ार सात में, सरसठ-I विशेष बल विशेष बल ब्रिगेड, जो चेचन्या में संचालन करने में लगे हुए थे, को भंग कर दिया गया था। प्रारंभ में, यह माना गया था कि इसकी व्यवस्था के लिए धन आवंटित किया जाएगा, लेकिन फिर अचानक इसे भंग करने का आदेश मिला। इस प्रकार, विशेष बल, जिनके पास व्यापक युद्ध का अनुभव था, राज्य और सरकार के लिए बेकार हो गया। अधिकांश सेनानियों ने छोड़ दिया, कुछ पीछे की समर्थन इकाइयों तक, अन्य सैन्य इकाइयों में सेवा करने के लिए चले गए। और अब "हाथ पहुंच गए हैं" और चौबीस ब्रिगेड के लिए। प्रारंभ में, यूनिट उलान-उडे में तैनात था। एक अच्छा प्रशिक्षण आधार था, जिसने मुकाबला प्रशिक्षण को सबसे प्रभावी रूप से संचालित करना संभव बना दिया। और चूंकि ब्रिगेड एयरफील्ड से बहुत दूर नहीं थी, इसलिए यह कहना सुरक्षित है कि यह वास्तव में मोबाइल सैन्य इकाई थी। लगभग सभी कर्मियों को आवास प्रदान किए गए थे। और सैन्य आधार और उसके संचार के बुनियादी ढांचे ने नवीनतम विश्व मानकों के अनुसार ब्रिगेड को लैस करने के लिए बहुत अधिक खर्च किए बिना इसे संभव बना दिया। अचानक, सैन्य नेतृत्व ने इसके कारणों को बताए बिना, इरकुत्स्क को ब्रिगेड को स्थानांतरित करने का फैसला किया। इसके अलावा, "पुनर्वास" के लिए कोई धनराशि आवंटित नहीं की गई थी, इसलिए इकाई को अपने दम पर फिर से तैयार करने के लिए मजबूर किया गया था । इस तरह की व्यवस्थाओं से जीता गया सैन्य विभाग पूरी तरह से समझ में नहीं आता है, क्योंकि नई जगह पर न तो एक उपयुक्त प्रशिक्षण आधार था, न ही एक प्रशिक्षण मैदान जहां वे मुकाबला प्रशिक्षण और शूटिंग में लगे हो सकते हैं। इसके अलावा, लड़ाकू, प्रशिक्षण के बजाय, यूनिट की व्यवस्था करने के लिए और अपने खर्च पर मजबूर थे। लेकिन तमाम मुश्किलों के बावजूद, सेना की घटनाओं में उच्च पुरस्कार लेते हुए, चौबीस-I ब्रिगेड शीर्ष पर रही। नई जगह चौबीस स्पेशल फोर्सेस ब्रिगेड की विकास संभावनाएं बहुत ज्यादा नहीं हैं। नए आंदोलन में फिर से कीमती समय लगता है जिसे युद्ध प्रशिक्षण पर खर्च किया जा सकता है। इसके बजाय, सेनानियों को एक विशाल क्षेत्र की सुरक्षा, बुनियादी ढांचे के विकास के लिए मजबूर किया जाएगा। ब्रिगेड पूर्ण रूप से युद्ध प्रशिक्षण भी नहीं कर पाएगी, क्योंकि सैन्य इकाई का क्षेत्र खुद शहर के केंद्र में स्थित है, लेकिन प्रशिक्षण का कोई आधार नहीं है। इसके अलावा, नए स्थान पर सैनिकों के जीवन स्तर में काफी गिरावट आएगी, क्योंकि उनके परिवार के सदस्य फिर से बेरोजगार हो जाएंगे और उन्हें बसने के तरीकों की तलाश करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, क्योंकि रक्षा मंत्रालय उनके लिए काम खोजने में सहायता प्रदान करने का कार्य नहीं करता है। अगर इसी तरह की स्थिति में विकास जारी रहा, तो बहुत जल्द रूस को विशेष बलों के बारे में भूलना होगा। या विशेष बलों के संबंध में नीति को बदलना आवश्यक है। वर्तमान में, विशेष बलों के लड़ाकों का भविष्य केवल राज्य के प्रमुख पर निर्भर करता है, कि वह अंतर्राष्ट्रीय हितों में देश के राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा करने में सक्षम बल के अस्तित्व में कितना रुचि रखता है। ऐसा करने के लिए, कार्यों की एक बहुत विस्तृत श्रृंखला के कार्यान्वयन की निगरानी करना आवश्यक है जो वास्तव में विशेष बलों को सुधारने में मदद करेंगे, इसे युद्ध के लिए तैयार, पेशेवर, मोबाइल, कॉम्पैक्ट, अच्छी तरह से सुसज्जित और प्रशिक्षित बल में बदल देंगे। प्रयुक्त सामग्रीः - लेखकः
मनु ( ११ः२६१-२६२), वमिष्ठ (२७७१-३), अगिरा (१०१) आदि का कथन है कि जिस प्रकार अधिक वेगवनी अग्नि हरी घाम को भी जलावर भस्म कर देती है, उसी प्रकार वेदाध्ययन की अग्नि दुष्कर्मों से प्राप्त अपराध को जला डालती है या वह ब्राह्मण, जो (पढे हुए) ऋग्वेद का स्मरण रखता है, अपराध से अछूता रहता है, भले ही उसने तीनो लोको का नाश कर दिया हो या उसने किसी का भी दिया हुआ भोजन कर लिया हो । किन्तु ये वचन केवल अर्थवाद (प्रशसामय) हैं और इन्हें गम्भीरता से या गान्दिव अर्थ में नहीं लेना चाहिए, जैसा कि वसिष्ठ (२७१४ = अगिरा १०२) ने सावधान किया है - "वेद की सामर्थ्य का सहारा लेकर पापकर्म का लाभ नहीं उठाना चाहिए (जैसा कि कुछ स्मृतियों ने वह डाला है), केवल अज्ञान एवं प्रमाद से किये गये दुष्कर्म ही वेदाध्ययन से नष्ट होते हैं न कि अन्य दुष्कर्म (जो जान बूझकर किये जाते हैं ) । बहुत-सी स्मृनियो, यथा--मनु ( ११ । २४९-२५७ = विष्णु० २१७४१४-१३), वसिष्ठ० (२६।५-७ एव २८।१०-१५), विष्णु० (५६१३ २७ ), शख (अध्याय ११ वसिष्ठ० २८११०-१५), सवतं ( २२७-२२८), बौघा० ध० सू० (४१२१४-५, ४८३१८, ४२४१२ - ५ ), याज्ञ० (३१३०२-३०५) ने पापमोचन के लिए कतिपय वैदिव सूत्रतो, पृथक्-पृथक् वैदिक मन्नो या गद्य-वचना के पाठ का निर्देश किया है। स्थानाभाव से हम उन्हें यहाँ उद्धृत नहीं करेंगे। ऋग्वद के मन्त्रो को इतनी रहस्यात्मक महत्ता प्रदान की गयी है कि शौनक के ऋविधान (जो मनुस्मृति के उपरान्त प्रणीत हुआ ) ने बहुत मे रोगो, पापो एवं शत्रु-विजय के लिए कतिपय ऋडमन्त्रों के जप की व्यवस्था बतलायी है। सामविधान ब्राह्मण ( ११५१२ ) का कथन है कि जहां सामान्यत किन्ही विशिष्ट वैदिक मुक्तो के पाठ की व्यवस्था न हुई हो, एमे स्थल में चाहे जो कोई वैदिक मन्त्र पापो को दूर करने में समर्थ होता है। ऐसे मन्त्र तप के साथ पविनीकरण में सहायक हात हैं। इसी प्रकार अभीष्ट उद्देश्य के प्रायश्चित्त के लिए सामो का जप कम-से-कम दम से लेकर सौ बार करना चाहिए। गौतम (१९।१३) ने जप के समय भोजन की व्यवस्था यो दी है- केवल दूध पर रहना, केवल शाक्-भाजी खाना, केवल फल खाना, एक मुटठी जौ वा सत्तू या लपसी खाना, केवल सोना खाना (घृत मे बुद्ध सोना घिसकर खाना ), वेवल घृत खाना, सोम पीना आदि। गौतम ( १९९१४) ने कहा है कि सभी पर्वत, सभी नदियाँ, पविन भरोवर, तोयं, ऋपियो के आश्रम, गोशालाएँ, देव मन्दिर पाप के नाशक हैं । सूनशद में या उसके उपरान्त वेवर तीन उच्च वर्णों का पुरुष वर्ग ही वेदाध्ययन कर सकता था, अत. शूद्रो द्वारा पाप-मोचन के लिए वैदिक वचना का जप सम्भव नही था । इसलिए मिनाक्षरा ( याज्ञ० ३।२६२ ) का कथन है कि यद्यपि शूद्र ( एव स्त्रिया और प्रतिलोम विवाहों से उत्पन्न लोगो) को गायत्री एवं अन्य वैदिक मन्त्रो वे जप का अधि वार नही प्राप्त है, तथापि शूद्र एव स्त्रियां देवता के नाम को सम्प्रदान (चतुर्थी) वारक मे रम्पवर उसका मानस जप कर सकते हैं। शूद्र केवल 'नमो नम' वह सकता है 'ओम्' आदि नही (गौ० १०१६६-६७ एव याज० ११ १२१) । आप० ६० सू० (१४।१३१६) के मत से 'ओम' यह रहम्यामन शब्द स्वर्ग का द्वार है और प्रत्यक वंदिन वचन वे जप के पूर्व उमका उच्चारण होना चाहिए । योगसूत्र ( ११२७) वा दृढतापूर्वक कथन है कि ओम् (जिमे प्रणव की सज्ञा मिगे है) परमात्मा की भावना वा द्योतक है और इसके जप तथा मन में इसके अर्थ को सपने में ध्यान बंघ जाता है। * ३. न वेदवलमाश्रित्य पापकमंरतिर्भवेत् । अज्ञानाच्च प्रमादाच्च दह्यते कर्म नेतरम् ॥ वसिष्ठ (२७१४) एवं अगिरा (१०२) । ४. ओ द्वारा स्वर्गद्वार तस्माद् ब्रह्माध्येय्यमाण एतदादि प्रतिपद्येत । आप० ० ० (११४।१३(६) ; सस्य वाचवः प्रणव 1 तज्जपस्तदर्थ भावनम् । योगसूत्र (११२७-२८); वाचस्पति की व्याख्या है - प्रणवस्य जप प्रणवाभिधेयस्य घेश्वरस्य भावनम् । सदस्य योगिन प्रणव जपत. प्रणवार्षं ध भावयतश्चित्तमेशाप्र सम्पद्यते ।
मनु , वमिष्ठ , अगिरा आदि का कथन है कि जिस प्रकार अधिक वेगवनी अग्नि हरी घाम को भी जलावर भस्म कर देती है, उसी प्रकार वेदाध्ययन की अग्नि दुष्कर्मों से प्राप्त अपराध को जला डालती है या वह ब्राह्मण, जो ऋग्वेद का स्मरण रखता है, अपराध से अछूता रहता है, भले ही उसने तीनो लोको का नाश कर दिया हो या उसने किसी का भी दिया हुआ भोजन कर लिया हो । किन्तु ये वचन केवल अर्थवाद हैं और इन्हें गम्भीरता से या गान्दिव अर्थ में नहीं लेना चाहिए, जैसा कि वसिष्ठ ने सावधान किया है - "वेद की सामर्थ्य का सहारा लेकर पापकर्म का लाभ नहीं उठाना चाहिए , केवल अज्ञान एवं प्रमाद से किये गये दुष्कर्म ही वेदाध्ययन से नष्ट होते हैं न कि अन्य दुष्कर्म । बहुत-सी स्मृनियो, यथा--मनु , वसिष्ठशून्य , विष्णुशून्य , शख , सवतं , बौघाशून्य धशून्य सूशून्य , याज्ञशून्य ने पापमोचन के लिए कतिपय वैदिव सूत्रतो, पृथक्-पृथक् वैदिक मन्नो या गद्य-वचना के पाठ का निर्देश किया है। स्थानाभाव से हम उन्हें यहाँ उद्धृत नहीं करेंगे। ऋग्वद के मन्त्रो को इतनी रहस्यात्मक महत्ता प्रदान की गयी है कि शौनक के ऋविधान ने बहुत मे रोगो, पापो एवं शत्रु-विजय के लिए कतिपय ऋडमन्त्रों के जप की व्यवस्था बतलायी है। सामविधान ब्राह्मण का कथन है कि जहां सामान्यत किन्ही विशिष्ट वैदिक मुक्तो के पाठ की व्यवस्था न हुई हो, एमे स्थल में चाहे जो कोई वैदिक मन्त्र पापो को दूर करने में समर्थ होता है। ऐसे मन्त्र तप के साथ पविनीकरण में सहायक हात हैं। इसी प्रकार अभीष्ट उद्देश्य के प्रायश्चित्त के लिए सामो का जप कम-से-कम दम से लेकर सौ बार करना चाहिए। गौतम ने जप के समय भोजन की व्यवस्था यो दी है- केवल दूध पर रहना, केवल शाक्-भाजी खाना, केवल फल खाना, एक मुटठी जौ वा सत्तू या लपसी खाना, केवल सोना खाना , वेवल घृत खाना, सोम पीना आदि। गौतम ने कहा है कि सभी पर्वत, सभी नदियाँ, पविन भरोवर, तोयं, ऋपियो के आश्रम, गोशालाएँ, देव मन्दिर पाप के नाशक हैं । सूनशद में या उसके उपरान्त वेवर तीन उच्च वर्णों का पुरुष वर्ग ही वेदाध्ययन कर सकता था, अत. शूद्रो द्वारा पाप-मोचन के लिए वैदिक वचना का जप सम्भव नही था । इसलिए मिनाक्षरा का कथन है कि यद्यपि शूद्र को गायत्री एवं अन्य वैदिक मन्त्रो वे जप का अधि वार नही प्राप्त है, तथापि शूद्र एव स्त्रियां देवता के नाम को सम्प्रदान वारक मे रम्पवर उसका मानस जप कर सकते हैं। शूद्र केवल 'नमो नम' वह सकता है 'ओम्' आदि नही । आपशून्य साठ सूशून्य के मत से 'ओम' यह रहम्यामन शब्द स्वर्ग का द्वार है और प्रत्यक वंदिन वचन वे जप के पूर्व उमका उच्चारण होना चाहिए । योगसूत्र वा दृढतापूर्वक कथन है कि ओम् परमात्मा की भावना वा द्योतक है और इसके जप तथा मन में इसके अर्थ को सपने में ध्यान बंघ जाता है। * तीन. न वेदवलमाश्रित्य पापकमंरतिर्भवेत् । अज्ञानाच्च प्रमादाच्च दह्यते कर्म नेतरम् ॥ वसिष्ठ एवं अगिरा । चार. ओ द्वारा स्वर्गद्वार तस्माद् ब्रह्माध्येय्यमाण एतदादि प्रतिपद्येत । आपशून्य शून्य शून्य ; सस्य वाचवः प्रणव एक तज्जपस्तदर्थ भावनम् । योगसूत्र ; वाचस्पति की व्याख्या है - प्रणवस्य जप प्रणवाभिधेयस्य घेश्वरस्य भावनम् । सदस्य योगिन प्रणव जपत. प्रणवार्षं ध भावयतश्चित्तमेशाप्र सम्पद्यते ।
लूंकी करतां पूंछ लांबी ! लोमड़ी से भी पूँछ लंबी ! -किसी बड़े आदमी को आमंत्रित करने पर उसके साथ कई व्यक्ति चले आएँ, तब... । -मूल से भी अधिक ब्याज बढ जाये, तब...। लूंकी चढ़गी बांस, उतरै चौथै मास । लामडी चढ़ गई बॉस, उतरेगी चोथे मास । सदर्भ-कथा : एक लोमड़ी किसी तालाब पर पानी पीने गई तो वहाँ एक सियार पद्मासन लगाये बैठा था। धूर्त का क्या भरोसा । कब अचीता झपट पड़े। उसने विनम्रता से अगले पॉव जोडते कहा, 'सियार मामा, प्यास के मारे गला सूख रहा है, पानी पीने की इजाजत दें तो आपके नाम की माला झपूँगी ।' उस सियार को अपनी प्रशसा सुनना बहुत सुहाता था। उसने कहा, 'तू मेरी प्रशंसा पानी पीने दूँगा' लोमड़ी को सचमुच प्यास लगी थी। क्या करती ? उसने सियार का हुलिया देखकर उसी वक्त बात बनाई, 'वाह! क्या रूप है आपका भी । चाँदी का चूबतरा, जिस पर सोने का पतरा चढ़ा है। कानों में सोने के कुंडल चमक रहे है। ऐसा लगता है कि जगल का राजा अपने सिहासन पर बैठा है।' सियार ने खुश होकर पानी पीने की इजाजत दे दी तो लोमडी ने डटकर अपनी प्यास बुझाई । सियार का बहुत बहुत एहमान मानकर चलने लगी तो सियार ने कहा, 'यो ही चली जाएगी पानी नहीं पीने देता तो तेरी प्यास कैसे बुझती ? अब सच्ची-सच्ची बात और बतादे । पहिले तूने कुछ ज्यादा ही तारीफ कर दी ।' तब लोमडी ने कहा, 'जैसी आपकी इच्छा । तो सुनो, गोबर-मिट्टी का चबूतरा, कानों मे उपलो के कुंडल, जैसे कोई रैगर जूते गाँठ रहा हो ।' सुनते ही सियार आग-बडूला होकर लोमड़ी पर झपटा । लोमडी ने आव देखा न ताव, पास ही बॉस का झुरमुट था, उस पर चढ़ गई । सियार दाँत पीसता हुआ नीचे बैठ गया। लोमडी ने उसे धत्ता पिलाते कहा, 'मैं तो बॉस पर आराम से बैठी हूँ । चार महीनों के बाद उतरूँगी । तुम मजे से माला झपते रहो ।' सियार भी कम चालाक नही था। उसने भी बात बनाई, गीदड़ ने मारी पालथी, मेह गरजने पर हिलेगा । देखता हूँ, कब तक बॉस पर बैठी रहेगी।' लोमड़ी दुविधा में फँस गई । बॉस पर बैठे रहना सचमुच मुश्किल था। उसने दिमाग लड़ाया। थोड़ी देर बाद चौंककर कहा, 'मामा, मामा उधर देखना । चार कालो-कबल वाले सपेरे आ रहे हैं। उनके पीछे नाहर जैसे राजस्थानी हिदी कहावत कोश * ३२१३ चार कुत्ते हैं। मेरी रक्षा करना। ऐसा न हो कि भाग जाओ।' सँपेरे और कुत्तों का नाम सुनते ही पहिले तो सियार घबराया। तत्पश्चात् अगले ही क्षण पूँछ उठाकर भागा। लोमड़ी ठहाका मारकर हँसी । हँसते-हँसते ही बोली, 'मामा यूँ क्या, मैं तो मजाक कर रही हूँ, मजाक । जरा रुको तो !' सियार और जोर से भागा। पीछे मुड़कर देखने की भी हिम्मत नहीं हुई। - जब दो चालाक आदमी एक दूसरे को चकमा देकर ठगना चाहें, तब... । लूंकी रा लख मारग । लोमडी के लाख रास्ते । - लोमड़ी के उनमान जो व्यक्ति चाहे जिस मार्ग से निकल भागे और जिसे ढूँढ़ना बहुत मुश्किल हो । - जो चालाक व्यक्ति बहुत से हथकंडे जानता हो । लूंकी रै मूंडै नारेळ कुण राखै ? लोमड़ी के मुँह नारियल कौन रहने दे ? -गरीब व्यक्ति सभी तरह की सुविधाओं से वंचित रहता है। - गरीब को कोई भी सुख से नहीं रहने देता। लूंकी लोई म्हारी पूंछ खांचै कोई । लोमड़ी लोई मेरी पूँछ खीचे कोई । संदर्भ-कथा : एक सियार और लोमड़ी में मित्रता थी। एक दिन सियार ने मौज में आकर लोमड़ी से कहा, 'चलो, गाँव की सैर कर आएँ। साँझ की वेला कहीं गरमा-गरम ब्यालू कर आएँ ।' लोमड़ी ने अपने मन की आशंका दरसाई, 'यदि कुत्ते पीछे पड़ गये तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी।' सियार ने लापरवाही से कहा, 'मुझे सब पता है। कल ही शेर महाराजा ने मुझे इस गाँव का पट्टा दिया है। हमें कोई रोकने वाला नहीं ?' लोमड़ी ने खुश होकर कहा, ' तब आपके रहते मुझे क्या डर, चलिए ।' दोनों गाँव की ओर मुँह करके चलने लगे । लोमड़ी आगे और सियार पीछे। बस्ती के पास जाते ही कुत्तों को सियार की बास आई तो भोंकते हुए उधर राजस्थानी हिंदी कहावत कोश * ३२१४ ही भागे। लोमड़ी के पास तो पट्टा था नहीं। पूँछ दबाकर जंगल की ओर भागी। सामने ही एक बिल नजर आया तो उसमें घुस गई । सियार ने भी घुसने की चेष्टा की । पर घुस नहीं सका । बिल छोटा था । तब तक कुत्ते लपककर सिंयार के पास पहुॅचे। एक कुत्ते ने उसकी पूँछ पकड़ली । सियार ने चिंचियाते कहा, 'लोमड़ी लोई, मेरी पूँछ खींचे कोई ।' लोमड़ी ने बिल के भीतर से ही जवाब दिया, 'अब तो जो होना है होगा वो ही।' वापस लोमड़ी को कुछ भी जवाब सुनाई नहीं दिया । -जो व्यक्ति दूसरों को चकमा देकर फँसाना चाहता है, अंततः वह स्वयं ही उसमें फँसकर अपने प्राण गँवाता है। लूंकी वाळौ घर मंडण । लोमड़ी वाला गृह निर्माण । संदर्भ-कथाः एक नोमड़ी मौत नहीं आने की वजह से बस, जी भर रही थी । अव्वल दर्जे की आलसी थी । सर्दियों के दिनों में साँझ होते ही संकल्प करती कि कल तो दिन में जरूर एक लंबा बिल खोदकर उसमें ठाट से निवास कर लेगी। वह जस-तस एक झाड़ी में दुबककर रात बिता लेती । सूर्योदय होने पर रात जैसी ठंडक नहीं लगती, तो वह दिन भर इधर-उधर घूमती । धूप में सो जाती । और गॉझ को वही दृढ़ संकल्प कि जरूर लंबा बिल खोदकर ठाट से निवास करुँगी । पर वह कभी अपने संकल्प को क्रियान्वित नहीं कर सकी । एक रात भयंकर पाला पड़ा तो वह झाड़ी से बाहर ही नहीं निकल पाई। मरने के बाद ही सर्दी-गर्मी से मुक्त हुई । - जो निकम्मी सरकार और निकम्मे अधिकारी जनता से नित्य नये वायदों का एलान करते हैं, उन्हें पूरा करने को सपने में भी चिंता नहीं करते । लूखौ गवूं अर भूखौ ठाकर। रूखा गेहूँ और भूखा ठाकुर। - रूखा गेहूँ बादी करता है और भूखा ठाकुर रैयत को परेशान करता है। किसी-न-किसी बहाने माँगता ही रहता है । इसलिए दोनों ही बुरे हैं। जहाँ तक बने गेहूँ की रूखी चपाती नहीं खानी चाहिए और जहाँ तक बन पड़े भूखे ठाकुर के सामने नहीं जाना चाहिए । नीति की बात यही है । राजस्थानी हिंदी कहावत कोश * ३२१५
लूंकी करतां पूंछ लांबी ! लोमड़ी से भी पूँछ लंबी ! -किसी बड़े आदमी को आमंत्रित करने पर उसके साथ कई व्यक्ति चले आएँ, तब... । -मूल से भी अधिक ब्याज बढ जाये, तब...। लूंकी चढ़गी बांस, उतरै चौथै मास । लामडी चढ़ गई बॉस, उतरेगी चोथे मास । सदर्भ-कथा : एक लोमड़ी किसी तालाब पर पानी पीने गई तो वहाँ एक सियार पद्मासन लगाये बैठा था। धूर्त का क्या भरोसा । कब अचीता झपट पड़े। उसने विनम्रता से अगले पॉव जोडते कहा, 'सियार मामा, प्यास के मारे गला सूख रहा है, पानी पीने की इजाजत दें तो आपके नाम की माला झपूँगी ।' उस सियार को अपनी प्रशसा सुनना बहुत सुहाता था। उसने कहा, 'तू मेरी प्रशंसा पानी पीने दूँगा' लोमड़ी को सचमुच प्यास लगी थी। क्या करती ? उसने सियार का हुलिया देखकर उसी वक्त बात बनाई, 'वाह! क्या रूप है आपका भी । चाँदी का चूबतरा, जिस पर सोने का पतरा चढ़ा है। कानों में सोने के कुंडल चमक रहे है। ऐसा लगता है कि जगल का राजा अपने सिहासन पर बैठा है।' सियार ने खुश होकर पानी पीने की इजाजत दे दी तो लोमडी ने डटकर अपनी प्यास बुझाई । सियार का बहुत बहुत एहमान मानकर चलने लगी तो सियार ने कहा, 'यो ही चली जाएगी पानी नहीं पीने देता तो तेरी प्यास कैसे बुझती ? अब सच्ची-सच्ची बात और बतादे । पहिले तूने कुछ ज्यादा ही तारीफ कर दी ।' तब लोमडी ने कहा, 'जैसी आपकी इच्छा । तो सुनो, गोबर-मिट्टी का चबूतरा, कानों मे उपलो के कुंडल, जैसे कोई रैगर जूते गाँठ रहा हो ।' सुनते ही सियार आग-बडूला होकर लोमड़ी पर झपटा । लोमडी ने आव देखा न ताव, पास ही बॉस का झुरमुट था, उस पर चढ़ गई । सियार दाँत पीसता हुआ नीचे बैठ गया। लोमडी ने उसे धत्ता पिलाते कहा, 'मैं तो बॉस पर आराम से बैठी हूँ । चार महीनों के बाद उतरूँगी । तुम मजे से माला झपते रहो ।' सियार भी कम चालाक नही था। उसने भी बात बनाई, गीदड़ ने मारी पालथी, मेह गरजने पर हिलेगा । देखता हूँ, कब तक बॉस पर बैठी रहेगी।' लोमड़ी दुविधा में फँस गई । बॉस पर बैठे रहना सचमुच मुश्किल था। उसने दिमाग लड़ाया। थोड़ी देर बाद चौंककर कहा, 'मामा, मामा उधर देखना । चार कालो-कबल वाले सपेरे आ रहे हैं। उनके पीछे नाहर जैसे राजस्थानी हिदी कहावत कोश * तीन हज़ार दो सौ तेरह चार कुत्ते हैं। मेरी रक्षा करना। ऐसा न हो कि भाग जाओ।' सँपेरे और कुत्तों का नाम सुनते ही पहिले तो सियार घबराया। तत्पश्चात् अगले ही क्षण पूँछ उठाकर भागा। लोमड़ी ठहाका मारकर हँसी । हँसते-हँसते ही बोली, 'मामा यूँ क्या, मैं तो मजाक कर रही हूँ, मजाक । जरा रुको तो !' सियार और जोर से भागा। पीछे मुड़कर देखने की भी हिम्मत नहीं हुई। - जब दो चालाक आदमी एक दूसरे को चकमा देकर ठगना चाहें, तब... । लूंकी रा लख मारग । लोमडी के लाख रास्ते । - लोमड़ी के उनमान जो व्यक्ति चाहे जिस मार्ग से निकल भागे और जिसे ढूँढ़ना बहुत मुश्किल हो । - जो चालाक व्यक्ति बहुत से हथकंडे जानता हो । लूंकी रै मूंडै नारेळ कुण राखै ? लोमड़ी के मुँह नारियल कौन रहने दे ? -गरीब व्यक्ति सभी तरह की सुविधाओं से वंचित रहता है। - गरीब को कोई भी सुख से नहीं रहने देता। लूंकी लोई म्हारी पूंछ खांचै कोई । लोमड़ी लोई मेरी पूँछ खीचे कोई । संदर्भ-कथा : एक सियार और लोमड़ी में मित्रता थी। एक दिन सियार ने मौज में आकर लोमड़ी से कहा, 'चलो, गाँव की सैर कर आएँ। साँझ की वेला कहीं गरमा-गरम ब्यालू कर आएँ ।' लोमड़ी ने अपने मन की आशंका दरसाई, 'यदि कुत्ते पीछे पड़ गये तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी।' सियार ने लापरवाही से कहा, 'मुझे सब पता है। कल ही शेर महाराजा ने मुझे इस गाँव का पट्टा दिया है। हमें कोई रोकने वाला नहीं ?' लोमड़ी ने खुश होकर कहा, ' तब आपके रहते मुझे क्या डर, चलिए ।' दोनों गाँव की ओर मुँह करके चलने लगे । लोमड़ी आगे और सियार पीछे। बस्ती के पास जाते ही कुत्तों को सियार की बास आई तो भोंकते हुए उधर राजस्थानी हिंदी कहावत कोश * तीन हज़ार दो सौ चौदह ही भागे। लोमड़ी के पास तो पट्टा था नहीं। पूँछ दबाकर जंगल की ओर भागी। सामने ही एक बिल नजर आया तो उसमें घुस गई । सियार ने भी घुसने की चेष्टा की । पर घुस नहीं सका । बिल छोटा था । तब तक कुत्ते लपककर सिंयार के पास पहुॅचे। एक कुत्ते ने उसकी पूँछ पकड़ली । सियार ने चिंचियाते कहा, 'लोमड़ी लोई, मेरी पूँछ खींचे कोई ।' लोमड़ी ने बिल के भीतर से ही जवाब दिया, 'अब तो जो होना है होगा वो ही।' वापस लोमड़ी को कुछ भी जवाब सुनाई नहीं दिया । -जो व्यक्ति दूसरों को चकमा देकर फँसाना चाहता है, अंततः वह स्वयं ही उसमें फँसकर अपने प्राण गँवाता है। लूंकी वाळौ घर मंडण । लोमड़ी वाला गृह निर्माण । संदर्भ-कथाः एक नोमड़ी मौत नहीं आने की वजह से बस, जी भर रही थी । अव्वल दर्जे की आलसी थी । सर्दियों के दिनों में साँझ होते ही संकल्प करती कि कल तो दिन में जरूर एक लंबा बिल खोदकर उसमें ठाट से निवास कर लेगी। वह जस-तस एक झाड़ी में दुबककर रात बिता लेती । सूर्योदय होने पर रात जैसी ठंडक नहीं लगती, तो वह दिन भर इधर-उधर घूमती । धूप में सो जाती । और गॉझ को वही दृढ़ संकल्प कि जरूर लंबा बिल खोदकर ठाट से निवास करुँगी । पर वह कभी अपने संकल्प को क्रियान्वित नहीं कर सकी । एक रात भयंकर पाला पड़ा तो वह झाड़ी से बाहर ही नहीं निकल पाई। मरने के बाद ही सर्दी-गर्मी से मुक्त हुई । - जो निकम्मी सरकार और निकम्मे अधिकारी जनता से नित्य नये वायदों का एलान करते हैं, उन्हें पूरा करने को सपने में भी चिंता नहीं करते । लूखौ गवूं अर भूखौ ठाकर। रूखा गेहूँ और भूखा ठाकुर। - रूखा गेहूँ बादी करता है और भूखा ठाकुर रैयत को परेशान करता है। किसी-न-किसी बहाने माँगता ही रहता है । इसलिए दोनों ही बुरे हैं। जहाँ तक बने गेहूँ की रूखी चपाती नहीं खानी चाहिए और जहाँ तक बन पड़े भूखे ठाकुर के सामने नहीं जाना चाहिए । नीति की बात यही है । राजस्थानी हिंदी कहावत कोश * तीन हज़ार दो सौ पंद्रह
नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने सोमवार को अनुच्छेद 370 हटा दिया। अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश होंगे। इसके लिए गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में अनुच्छेद 370 हटाने के लिए संकल्प पेश किया। शाह के संसद में प्रस्ताव रखने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अनुच्छेद 370 हटाने के लिए संविधान आदेश (जम्मू-कश्मीर के लिए) 2019 के तहत अधिसूचना जारी कर दी। इससे पहले जब राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो सभापति एम वेंकैया नायडू ने शाह से जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक पेश करने को कहा। इस पर विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कश्मीर में कर्फ्यू है। तीन पूर्व मुख्यमंत्री नजरबंद कर दिए गए हैं। राज्य में हालात वैसे ही हैं, जैसे जंग के वक्त होते हैं। विधेयक तो पारित हो जाएगा। हम विधेयक के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हमें पहले कश्मीर के हालात पर चर्चा करनी चाहिए। हमने इसी को लेकर नोटिस भी दिया है। एक घंटे उस पर चर्चा होनी चाहिए। आजाद के बयान पर शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर हर जवाब देने को तैयार हूं और यह विधेयक भी कश्मीर के संबंध में ही है। पीडीपी सांसदों को बाहर जाने को कहाचर्चा के दौरान पीडीपी के सांसद मीर फैयाज और नजीर अहमद लावे संविधान का उल्लंघन कर रहे थे, जिसके चलते नायडू ने दोनों को सदन से बाहर जाने को कहा।संसद पहुंचने पर मुस्कुराए थे शाहसंसद भवन पहुंचने पर पत्रकारों ने शाह से कश्मीर पर बड़े फैसले को लेकर सवाल पूछा, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और मुस्कुरा कर अंदर चले गए। कांग्रेस ने दोनों सदनों में स्थगन नोटिस दिया और कार्यवाही से पहले गुलाम नबी आजाद के चेंबर में बैठक की। इसके अलावा महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी, एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी, माकपा समेत कई दलों के नेता संसद में कश्मीर का मुद्दा उठाएंगे।अमित शाह जम्मू-कश्मीर आरक्षण विधेयक भी पेश करेंगेगृह मंत्री ने राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर में आर्थिक पिछड़े वर्गों काे 10% आरक्षण संबंधी बिल भी पेश करेंगे। यह बिल 28 जून में लोकसभा से पास हो चुका है। मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन बिल 2019 में कश्मीर में सीमा से सटे इलाकों के नागरिकों को विशेष आरक्षण देने का प्रावधान किया है। ताकि उन्हें भी आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक तौर पर बराबरी का मौका मिल सके। शाह ने लोकसभा में कहा था कि नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रहने वाले लोगों को शेल्टर होम में रहना पढ़ता है। कई दिनों तक बच्चों को यहां रहना पड़ता है। स्कूल बंद रहते हैं। उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। इसलिए उन्हें आरक्षण दिया जा रहा है। इससे साढ़े तीन लाख लोगों को फायदा होगा। जम्मू-कश्मीर के हर वर्ग को आरक्षण का लाभ मिलेगागृह मंत्रालय द्वारा पेश किए गए बिल के तहत जम्मू-कश्मीर आरक्षण अधिनियम 2004 में संशोधन किया गया है। राज्यसभा में बिल पास होने से अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास रहने वाले लोगों को भी आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। आरक्षण नियम में संशोधन कहता है कि कोई भी व्यक्ति जो पिछड़े क्षेत्रों, नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अंतराष्ट्रीय सीमा (आईबी) से सुरक्षा कारणों से चला गया हो उसे भी आरक्षण का फायदा मिल सकेगा।
नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने सोमवार को अनुच्छेद तीन सौ सत्तर हटा दिया। अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश होंगे। इसके लिए गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में अनुच्छेद तीन सौ सत्तर हटाने के लिए संकल्प पेश किया। शाह के संसद में प्रस्ताव रखने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अनुच्छेद तीन सौ सत्तर हटाने के लिए संविधान आदेश दो हज़ार उन्नीस के तहत अधिसूचना जारी कर दी। इससे पहले जब राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो सभापति एम वेंकैया नायडू ने शाह से जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक पेश करने को कहा। इस पर विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कश्मीर में कर्फ्यू है। तीन पूर्व मुख्यमंत्री नजरबंद कर दिए गए हैं। राज्य में हालात वैसे ही हैं, जैसे जंग के वक्त होते हैं। विधेयक तो पारित हो जाएगा। हम विधेयक के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हमें पहले कश्मीर के हालात पर चर्चा करनी चाहिए। हमने इसी को लेकर नोटिस भी दिया है। एक घंटे उस पर चर्चा होनी चाहिए। आजाद के बयान पर शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर हर जवाब देने को तैयार हूं और यह विधेयक भी कश्मीर के संबंध में ही है। पीडीपी सांसदों को बाहर जाने को कहाचर्चा के दौरान पीडीपी के सांसद मीर फैयाज और नजीर अहमद लावे संविधान का उल्लंघन कर रहे थे, जिसके चलते नायडू ने दोनों को सदन से बाहर जाने को कहा।संसद पहुंचने पर मुस्कुराए थे शाहसंसद भवन पहुंचने पर पत्रकारों ने शाह से कश्मीर पर बड़े फैसले को लेकर सवाल पूछा, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और मुस्कुरा कर अंदर चले गए। कांग्रेस ने दोनों सदनों में स्थगन नोटिस दिया और कार्यवाही से पहले गुलाम नबी आजाद के चेंबर में बैठक की। इसके अलावा महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी, एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी, माकपा समेत कई दलों के नेता संसद में कश्मीर का मुद्दा उठाएंगे।अमित शाह जम्मू-कश्मीर आरक्षण विधेयक भी पेश करेंगेगृह मंत्री ने राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर में आर्थिक पिछड़े वर्गों काे दस% आरक्षण संबंधी बिल भी पेश करेंगे। यह बिल अट्ठाईस जून में लोकसभा से पास हो चुका है। मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन बिल दो हज़ार उन्नीस में कश्मीर में सीमा से सटे इलाकों के नागरिकों को विशेष आरक्षण देने का प्रावधान किया है। ताकि उन्हें भी आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक तौर पर बराबरी का मौका मिल सके। शाह ने लोकसभा में कहा था कि नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रहने वाले लोगों को शेल्टर होम में रहना पढ़ता है। कई दिनों तक बच्चों को यहां रहना पड़ता है। स्कूल बंद रहते हैं। उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। इसलिए उन्हें आरक्षण दिया जा रहा है। इससे साढ़े तीन लाख लोगों को फायदा होगा। जम्मू-कश्मीर के हर वर्ग को आरक्षण का लाभ मिलेगागृह मंत्रालय द्वारा पेश किए गए बिल के तहत जम्मू-कश्मीर आरक्षण अधिनियम दो हज़ार चार में संशोधन किया गया है। राज्यसभा में बिल पास होने से अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास रहने वाले लोगों को भी आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। आरक्षण नियम में संशोधन कहता है कि कोई भी व्यक्ति जो पिछड़े क्षेत्रों, नियंत्रण रेखा और अंतराष्ट्रीय सीमा से सुरक्षा कारणों से चला गया हो उसे भी आरक्षण का फायदा मिल सकेगा।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
मुंबई । सीबीआई ने बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान ड्रग्स केस से संबंधित । जबरन वसूली मामले में मुंबई में नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के पूर्व जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े से शनिवार को 5 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की। समीर आर्यन को कॉर्डेलिया क्रूज जहाज पर 'ड्रग' लने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। शुक्रवार को बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार, वानखेड़े शनिवार सुबह करीब 11 बजे अपना बयान दर्ज कराने के लिए बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में सीबीआई के क्षेत्रीय मुख्यालय पहुंचे थे। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि उन्हें पूछताछ के दौरान लंच के लिए ब्रेक दिया गया। वह कई घटों की पूछताछ के बाद करीब 4. 30 बजे सीबीआई के कार्यलय से बाहर निकले। बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को समीर को 22 मई तक किसी भी कठोर कार्रवाई से राहत दी थी। 2 अक्टूबर 2021 को कॉर्डेलिया क्रूज जहाज पर छापेमारी के दौरान 2008 बैच के एक आईआरएस अधिकारी वानखेड़े की भूमिका सीबीआई के रडार पर आ गई है। गौरतलब है कि पिछली महा विकास आघाड़ी सरकार में मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता नवाब मलिक और क्रूज छापे में एक गवाह प्रभाकर सेल (जिनकी पिछले साल मौत हो गई थी) ने वानखेड़े और छापेमारी टीम के खिलाफ भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाए थे। हालांकि, वानखेड़े ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों का खंडन किया है और उन्होंने न्याय दिलाने के लिए न्यायपालिका, केंद्र सरकार और सीबीआई पर पूरा भरोसा जताया है। इसके बाद, वानखेड़े को क्रूज छापेमारी मामले से मुक्त कर दिया गया था और बाद में उन पर लगे आरोपों के संबंध में एक आंतरिक जांच की गई थी। यहां तक कि एनसीबी ने आर्यन खान को मई 2022 में उनके खिलाफ सबूतों की कमी के लिए 'क्लीन चिट' दे दी थी। सीबीआई ने वानखेड़े के अलावा एनसीबी के दो अन्य अधिकारियों विश्व विजय सिंह और आशीष रंजन, और शिप मामले में गवाह केपी गोसावी और सनविले डिसूजा पर मामला दर्ज किया। इस बीच, बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को आगे की सुनवाई के लिए वानखेड़े की याचिका पोस्ट की है।
मुंबई । सीबीआई ने बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान ड्रग्स केस से संबंधित । जबरन वसूली मामले में मुंबई में नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के पूर्व जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े से शनिवार को पाँच घंटाटे से अधिक समय तक पूछताछ की। समीर आर्यन को कॉर्डेलिया क्रूज जहाज पर 'ड्रग' लने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। शुक्रवार को बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार, वानखेड़े शनिवार सुबह करीब ग्यारह बजे अपना बयान दर्ज कराने के लिए बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में सीबीआई के क्षेत्रीय मुख्यालय पहुंचे थे। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि उन्हें पूछताछ के दौरान लंच के लिए ब्रेक दिया गया। वह कई घटों की पूछताछ के बाद करीब चार. तीस बजे सीबीआई के कार्यलय से बाहर निकले। बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को समीर को बाईस मई तक किसी भी कठोर कार्रवाई से राहत दी थी। दो अक्टूबर दो हज़ार इक्कीस को कॉर्डेलिया क्रूज जहाज पर छापेमारी के दौरान दो हज़ार आठ बैच के एक आईआरएस अधिकारी वानखेड़े की भूमिका सीबीआई के रडार पर आ गई है। गौरतलब है कि पिछली महा विकास आघाड़ी सरकार में मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता नवाब मलिक और क्रूज छापे में एक गवाह प्रभाकर सेल ने वानखेड़े और छापेमारी टीम के खिलाफ भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाए थे। हालांकि, वानखेड़े ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों का खंडन किया है और उन्होंने न्याय दिलाने के लिए न्यायपालिका, केंद्र सरकार और सीबीआई पर पूरा भरोसा जताया है। इसके बाद, वानखेड़े को क्रूज छापेमारी मामले से मुक्त कर दिया गया था और बाद में उन पर लगे आरोपों के संबंध में एक आंतरिक जांच की गई थी। यहां तक कि एनसीबी ने आर्यन खान को मई दो हज़ार बाईस में उनके खिलाफ सबूतों की कमी के लिए 'क्लीन चिट' दे दी थी। सीबीआई ने वानखेड़े के अलावा एनसीबी के दो अन्य अधिकारियों विश्व विजय सिंह और आशीष रंजन, और शिप मामले में गवाह केपी गोसावी और सनविले डिसूजा पर मामला दर्ज किया। इस बीच, बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को आगे की सुनवाई के लिए वानखेड़े की याचिका पोस्ट की है।
कई बार कुछ खाने-पीने के दौरान यह जानने की इच्छा होती है कि फलां डिश का इतिहास क्या है? यह कैसे बनी होगी? कैसे हुई होगी इसकी शुरुआत? फिलवक़्त दिसंबर का महीना है और क्रिसमस नजदीक आ रहा है। क्रिसमस वाले इस महीने की शुरुआत में ही केक बनने लगते हैं। इस सीजन जब आप केक खा रहे होंगे और मन में क्रिसमस पुडिंग के बारे में जानने का ख्याल आएगा, तो सोचेंगे कि इसके बारे में पूछें किससे? यह कहानी फिर आपके लिए ही है। क्रिसमस पुडिंग का चलन अब यूरोप ही नहीं, भारत में भी है। इसका आनंद उठाने के लिए इंग्लैंड में होने की ज़रूरत नहीं। बीते कुछ बरसों से बेकरीज़ और रेस्तरां में सूखे मेवों से भरे और ब्रांडी में तैयार किए गए केक मिलने लगे हैं। ठीक इसी तरह के केक या पुडिंग इंग्लैंड और आयरलैंड में मिलते हैं। भारत में यह थोड़ा अलग है। यहां ब्रांडी की जगह इस्तेमाल में आती है रम। नवंबर के अंत में केक मिक्सिंग सेरेमनी भी आयोजित होने लगी है। यह एक पुरानी अंग्रेज़ी परंपरा 'स्टिर अप संडे' से मिलती-जुलती है। 'स्टिर अप संडे' में होता यह है कि एक परिवार के सभी लोग केक बैटर को घड़ी की उल्टी दिशा में पूर्व से पश्चिम की ओर हिलाते या यूं कहें चलाते हैं। विक्टोरियन दौर में केक बैटर को प्लम पुडिंग भी कहा जाता था। कहानी के मुताबिक, बेथलहम के तारे का अनुसरण करते हुए ईस्ट की दिशा से बेबी जीसस को देखने आए थे वाइजमैन। यही वजह है कि बर्तन में रखे केक के बैटर को ईस्ट से वेस्ट के क्रम में चलाया जाता है। क्रिसमस केक को प्लम पुडिंग कहा जाता है। अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यों? तो इसे समझने के लिए हमें क्रिसमस केक या पुडिंग के इतिहास के बारे में थोड़ा जानना होगा। ओवन और बेकिंग की इजाद से पहले कुकिंग की सामान्य तकनीक थी स्टीमिंग यानी भाप से पकाना। आटा, मांस, मक्खन या चर्बी, मसाले, चीनी और नमक को अक्सर एक साथ मिलाया जाता दलिया की तरह और फिर उबाल दिया जाता। सर्द महीनों में पोषण और गर्मी के लिए खाते थे इसे। मध्यकाल के यूरोप में तो पुडिंग मीट से ही बनती थी। इसे खराब होने से बचाए रखने के लिए इसमें चीनी भी डालते। धनी लोग मक्खन के साथ अनाज और सूखे मेवे भी मिला देते थे। यहीं से क्रिसमस के आसपास यानी जब सर्दी चरम पर हो, तो पुडिंग बनाने की शुरुआत हुई। 18वीं और 19वीं शताब्दी में इसे बनाने के तरीके में थोड़ा बदलाव आया। बैटर को कपड़े में बांधकर भाप से पकाया जाने लगा। विक्टोरियन युग के आगमन के साथ जैसे-जैसे अंग्रेज़ों का साम्राज्य बढ़ा, वैसे-वैसे क्रिसमस पुडिंग स्पेशल आइटम होती गई। इसे बनाना भी महंगा हुआ। बैटर में सूखे मेवे और किशमिश डाले जाने लगे। बड़े परिवारों में क्रिसमस से पहले पुडिंग तैयार होने लगी। पहले ही पुडिंग बनाए जाने की हालत में इसे बार-बार गरम करना पड़ता। इसके लिए इसे दोबारा स्टीम करते, ऊपर थोड़ी ब्रान्डी डालते और आग लगा देते। आजकल इसे ही हम फ्लेमबिइंग कहते हैं। फिर साल 1927 में चीज़ें और बदलीं। एम्पायर मार्केटिंग बोर्ड एक प्लान के साथ आया, जिससे कि अंग्रेज़ी उपनिवेशों में उगाई जा रही चीज़ों की मांग बढ़ाई जा सके। शाही परिवार से राजा और रानी के लिए बनने वाली पुडिंग की रेसिपी मांगी गई। इसके बाद आठ लोगों के लिए एक नुस्खा प्रकाशित किया गया। वैसे शाही घराने की रेसिपी 40 लोगों के लिए थी। इस रेसिपी में यह भी बताया गया था कि इंग्लैंड के किस उपनिवेश का क्या सामान इस्तेमाल करना है 'एम्पायर क्रिसमस पुडिंग' के लिए। साइप्रस से ब्रांडी, वेस्टइंडीज से जायफल, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीक की किशमिश, कनाडा का सेब, जमैका की रम, इंग्लैंड की बीयर और भारत या सीलोन यानी श्रीलंका से पिसी हुई दालचीनी जैसी चीज़ें इसमें शामिल थीं। वक़्त के साथ स्टीमिंग का भी तरीका बदला। विक्टोरियन लोगों ने डबल बॉयलर तकनीक का उपयोग करना शुरू किया। बैटर को एक गोल केक टिन में भरकर पानी में रखते और कम आंच पर घंटों तक गर्म किया जाता। आज भले ही किचन में उपलब्ध अलग-अलग मशीनों के कारण यह प्रक्रिया छोटी हो गई हो, लेकिन सबसे अच्छी पुडिंग अब भी डबल बॉयलर पर बेक या स्टीम करके ही बनाई जाती है।
कई बार कुछ खाने-पीने के दौरान यह जानने की इच्छा होती है कि फलां डिश का इतिहास क्या है? यह कैसे बनी होगी? कैसे हुई होगी इसकी शुरुआत? फिलवक़्त दिसंबर का महीना है और क्रिसमस नजदीक आ रहा है। क्रिसमस वाले इस महीने की शुरुआत में ही केक बनने लगते हैं। इस सीजन जब आप केक खा रहे होंगे और मन में क्रिसमस पुडिंग के बारे में जानने का ख्याल आएगा, तो सोचेंगे कि इसके बारे में पूछें किससे? यह कहानी फिर आपके लिए ही है। क्रिसमस पुडिंग का चलन अब यूरोप ही नहीं, भारत में भी है। इसका आनंद उठाने के लिए इंग्लैंड में होने की ज़रूरत नहीं। बीते कुछ बरसों से बेकरीज़ और रेस्तरां में सूखे मेवों से भरे और ब्रांडी में तैयार किए गए केक मिलने लगे हैं। ठीक इसी तरह के केक या पुडिंग इंग्लैंड और आयरलैंड में मिलते हैं। भारत में यह थोड़ा अलग है। यहां ब्रांडी की जगह इस्तेमाल में आती है रम। नवंबर के अंत में केक मिक्सिंग सेरेमनी भी आयोजित होने लगी है। यह एक पुरानी अंग्रेज़ी परंपरा 'स्टिर अप संडे' से मिलती-जुलती है। 'स्टिर अप संडे' में होता यह है कि एक परिवार के सभी लोग केक बैटर को घड़ी की उल्टी दिशा में पूर्व से पश्चिम की ओर हिलाते या यूं कहें चलाते हैं। विक्टोरियन दौर में केक बैटर को प्लम पुडिंग भी कहा जाता था। कहानी के मुताबिक, बेथलहम के तारे का अनुसरण करते हुए ईस्ट की दिशा से बेबी जीसस को देखने आए थे वाइजमैन। यही वजह है कि बर्तन में रखे केक के बैटर को ईस्ट से वेस्ट के क्रम में चलाया जाता है। क्रिसमस केक को प्लम पुडिंग कहा जाता है। अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यों? तो इसे समझने के लिए हमें क्रिसमस केक या पुडिंग के इतिहास के बारे में थोड़ा जानना होगा। ओवन और बेकिंग की इजाद से पहले कुकिंग की सामान्य तकनीक थी स्टीमिंग यानी भाप से पकाना। आटा, मांस, मक्खन या चर्बी, मसाले, चीनी और नमक को अक्सर एक साथ मिलाया जाता दलिया की तरह और फिर उबाल दिया जाता। सर्द महीनों में पोषण और गर्मी के लिए खाते थे इसे। मध्यकाल के यूरोप में तो पुडिंग मीट से ही बनती थी। इसे खराब होने से बचाए रखने के लिए इसमें चीनी भी डालते। धनी लोग मक्खन के साथ अनाज और सूखे मेवे भी मिला देते थे। यहीं से क्रिसमस के आसपास यानी जब सर्दी चरम पर हो, तो पुडिंग बनाने की शुरुआत हुई। अट्ठारहवीं और उन्नीसवीं शताब्दी में इसे बनाने के तरीके में थोड़ा बदलाव आया। बैटर को कपड़े में बांधकर भाप से पकाया जाने लगा। विक्टोरियन युग के आगमन के साथ जैसे-जैसे अंग्रेज़ों का साम्राज्य बढ़ा, वैसे-वैसे क्रिसमस पुडिंग स्पेशल आइटम होती गई। इसे बनाना भी महंगा हुआ। बैटर में सूखे मेवे और किशमिश डाले जाने लगे। बड़े परिवारों में क्रिसमस से पहले पुडिंग तैयार होने लगी। पहले ही पुडिंग बनाए जाने की हालत में इसे बार-बार गरम करना पड़ता। इसके लिए इसे दोबारा स्टीम करते, ऊपर थोड़ी ब्रान्डी डालते और आग लगा देते। आजकल इसे ही हम फ्लेमबिइंग कहते हैं। फिर साल एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस में चीज़ें और बदलीं। एम्पायर मार्केटिंग बोर्ड एक प्लान के साथ आया, जिससे कि अंग्रेज़ी उपनिवेशों में उगाई जा रही चीज़ों की मांग बढ़ाई जा सके। शाही परिवार से राजा और रानी के लिए बनने वाली पुडिंग की रेसिपी मांगी गई। इसके बाद आठ लोगों के लिए एक नुस्खा प्रकाशित किया गया। वैसे शाही घराने की रेसिपी चालीस लोगों के लिए थी। इस रेसिपी में यह भी बताया गया था कि इंग्लैंड के किस उपनिवेश का क्या सामान इस्तेमाल करना है 'एम्पायर क्रिसमस पुडिंग' के लिए। साइप्रस से ब्रांडी, वेस्टइंडीज से जायफल, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीक की किशमिश, कनाडा का सेब, जमैका की रम, इंग्लैंड की बीयर और भारत या सीलोन यानी श्रीलंका से पिसी हुई दालचीनी जैसी चीज़ें इसमें शामिल थीं। वक़्त के साथ स्टीमिंग का भी तरीका बदला। विक्टोरियन लोगों ने डबल बॉयलर तकनीक का उपयोग करना शुरू किया। बैटर को एक गोल केक टिन में भरकर पानी में रखते और कम आंच पर घंटों तक गर्म किया जाता। आज भले ही किचन में उपलब्ध अलग-अलग मशीनों के कारण यह प्रक्रिया छोटी हो गई हो, लेकिन सबसे अच्छी पुडिंग अब भी डबल बॉयलर पर बेक या स्टीम करके ही बनाई जाती है।
TV पर क्या देखें? पेंशन बिल पर ममता बेनर्जी ने फिर अड़ंगा लगा दिया है। इस वजह से यह बिल भी लटक गया है। क्या है आपकी Choice? वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) भारत की पहली व्हीलचेयर मॉडल विराली मोदी कैसे समाज को और अधिक समावेशी बना रही हैं? ममता के बयान पर NDTV से बोले अधीर रंजन चौधरी -"कांग्रेस किसी की दया पर चुनाव नहीं लड़ती. . ": । © Copyright NDTV Convergence Limited 2023. All rights reserved.
TV पर क्या देखें? पेंशन बिल पर ममता बेनर्जी ने फिर अड़ंगा लगा दिया है। इस वजह से यह बिल भी लटक गया है। क्या है आपकी Choice? वृत्तचित्र भारत की पहली व्हीलचेयर मॉडल विराली मोदी कैसे समाज को और अधिक समावेशी बना रही हैं? ममता के बयान पर NDTV से बोले अधीर रंजन चौधरी -"कांग्रेस किसी की दया पर चुनाव नहीं लड़ती. . ": । © Copyright NDTV Convergence Limited दो हज़ार तेईस. All rights reserved.
मशहूर टीवी शो 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' की लीड एक्ट्रेस 'दयाबेन' यानी दिशा वकानी मां बनने वाली हैं। हाल ही मुंबई के पोवई स्थित उनके घर में गोदभराई की रस्म पूरी की गई है। बेबी शावर सेरिमनी में दिशा ने फूल गहना और पारंपरिक साड़ी पहनी थी। इस साल दिसंबर में उनकी डिलीवरी की उम्मीद है। दिशा वकानी के बेबी शावर में करीबी रिश्तेदार और दोस्तों के अलावा टीवी शो 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के एक्टर्स भी नजर आए। मिली जानकारी के अनुसार दिशा वकानी की गोदभराई की रस्म दो दिनों तक चली। पहले दिन सांझी सेरिमनी हुई, दूसरे दिन श्रीमंत हुआ। दिशा वकानी ने 24 नवंबर 2015 को अकाउंटेंट मयूर पांड्या से शादी की थी।
मशहूर टीवी शो 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' की लीड एक्ट्रेस 'दयाबेन' यानी दिशा वकानी मां बनने वाली हैं। हाल ही मुंबई के पोवई स्थित उनके घर में गोदभराई की रस्म पूरी की गई है। बेबी शावर सेरिमनी में दिशा ने फूल गहना और पारंपरिक साड़ी पहनी थी। इस साल दिसंबर में उनकी डिलीवरी की उम्मीद है। दिशा वकानी के बेबी शावर में करीबी रिश्तेदार और दोस्तों के अलावा टीवी शो 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के एक्टर्स भी नजर आए। मिली जानकारी के अनुसार दिशा वकानी की गोदभराई की रस्म दो दिनों तक चली। पहले दिन सांझी सेरिमनी हुई, दूसरे दिन श्रीमंत हुआ। दिशा वकानी ने चौबीस नवंबर दो हज़ार पंद्रह को अकाउंटेंट मयूर पांड्या से शादी की थी।
बलरामपुर। परिवार नियोजन के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए इस बार विश्व जनसंख्या दिवस दो चरणों में मनाया जाएगा। पहले चरण में 10 जुलाई तक दंपती संपर्क पखवाड़ा और दूसरे चरण में 11 से 31 जुलाई तक सेवा प्रदायगी जनसंख्या स्थिरता पखवाड़े का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के कर्मी घर-घर जाकर लोगों को परिवार नियोजन के साधनों की जानकारी देते हुए जागरूक करेंगे। एसीएमओ व आरसीएच के नोडल अफसर डॉ. बीपी सिंह ने बताया कि कोविड-19 महामारी में भी जनसंख्या नियंत्रण के लिए परिवार नियोजन कार्यक्रम को गति प्रदान की जाएगी। दोनों पखवाड़ों के माध्यम से जन साधारण को परिवार नियोजन के साधनों की जानकारी देते हुए उसे अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सामाजिक एवं व्यक्तिगत दूरी का ध्यान रखते हुए परिवार नियोजन का व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार किया जाएगा। सार्वजनिक स्थानों और स्वास्थ्य केंद्रों पर परिवार नियोजन से संबंधित पोस्टर व बैनर लगाए जाएंगे। जगह-जगह वॉलपेंटिंग भी कराई जाएगी। पखवाड़े के दौरान लाभार्थियों को गर्भनिरोधक इंजेक्शन अंतरा तथा प्रसव पश्चात आईयूसीडी सेवाओं को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर परिवार नियोजन के सभी साधन मुफ्त उपलब्ध रहेंगे। जिन अस्पतालों में ऑपरेशन थियेटर की सुविधा उपलब्ध है वहां कोरोना प्रोटोकॉल के साथ नियत सेवा दिवस संपादित करते हुए नसबंदी की जाएंगी। नसबंदी कराने वालों को निर्धारित प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। एसीएमओ ने बताया कि नसबंदी कराने वाले पुरुषों को तीन हजार और महिलाओं को दो हजार रुपये प्रोत्साहन राशि मिलेगी। इसके अतिरिक्त प्रसव के तुरंत बाद नसबंदी कराने वाली महिला को भी तीन हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। कॉपर-टी के लिए तीन सौ रुपये और अंतरा इंजेक्शन लगवाने पर महिला को 100 रुपये प्रति डोज के हिसाब से प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
बलरामपुर। परिवार नियोजन के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए इस बार विश्व जनसंख्या दिवस दो चरणों में मनाया जाएगा। पहले चरण में दस जुलाई तक दंपती संपर्क पखवाड़ा और दूसरे चरण में ग्यारह से इकतीस जुलाई तक सेवा प्रदायगी जनसंख्या स्थिरता पखवाड़े का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के कर्मी घर-घर जाकर लोगों को परिवार नियोजन के साधनों की जानकारी देते हुए जागरूक करेंगे। एसीएमओ व आरसीएच के नोडल अफसर डॉ. बीपी सिंह ने बताया कि कोविड-उन्नीस महामारी में भी जनसंख्या नियंत्रण के लिए परिवार नियोजन कार्यक्रम को गति प्रदान की जाएगी। दोनों पखवाड़ों के माध्यम से जन साधारण को परिवार नियोजन के साधनों की जानकारी देते हुए उसे अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सामाजिक एवं व्यक्तिगत दूरी का ध्यान रखते हुए परिवार नियोजन का व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार किया जाएगा। सार्वजनिक स्थानों और स्वास्थ्य केंद्रों पर परिवार नियोजन से संबंधित पोस्टर व बैनर लगाए जाएंगे। जगह-जगह वॉलपेंटिंग भी कराई जाएगी। पखवाड़े के दौरान लाभार्थियों को गर्भनिरोधक इंजेक्शन अंतरा तथा प्रसव पश्चात आईयूसीडी सेवाओं को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर परिवार नियोजन के सभी साधन मुफ्त उपलब्ध रहेंगे। जिन अस्पतालों में ऑपरेशन थियेटर की सुविधा उपलब्ध है वहां कोरोना प्रोटोकॉल के साथ नियत सेवा दिवस संपादित करते हुए नसबंदी की जाएंगी। नसबंदी कराने वालों को निर्धारित प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। एसीएमओ ने बताया कि नसबंदी कराने वाले पुरुषों को तीन हजार और महिलाओं को दो हजार रुपये प्रोत्साहन राशि मिलेगी। इसके अतिरिक्त प्रसव के तुरंत बाद नसबंदी कराने वाली महिला को भी तीन हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। कॉपर-टी के लिए तीन सौ रुपये और अंतरा इंजेक्शन लगवाने पर महिला को एक सौ रुपयापये प्रति डोज के हिसाब से प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
Kiriburu: सारंडा जंगल के किरीबुरु स्थित ससंगदा रेंज कार्यालय से महज कुछ दूरी पर ही किरीबुरु-बड़ाजामदा मुख्य सड़क मार्ग के किनारे सखुआ का एक विशाल पेड़ लकड़ी माफिया द्वारा आरी मशीन से काट कर गिरा दिया गया. उक्त पेड़ के काटे जाने तक की जानकारी काफी देर तक वन विभाग को नहीं होना भी आश्चर्य की बात है. यह कहना गलत नहीं होगा की उक्त पेड़ को काट लकड़ी माफिया ने वन विभाग की आंख से काजल चुराने का काम किया है. उल्लेखनीय है कि एक जून को हीं लगातार न्यूज ने इसी क्षेत्र की तस्वीर के साथ खबर लगाई थी. जिसमें कहा गया था कि वन विभाग ने यहां 19,500 पौधे लगाए थे जिसमें एक भी पौधा नहीं लग पाया. अब दो जून को लकड़ी माफिया ने इस क्षेत्र में बचे कुछ पुराने सखुआ के पेड़ों में से एक को काटकर वन विभाग को खुली चुनौती दे डाली है. सबसे बड़ी बात यह है कि इस पेड़ को काटने में आरी का प्रयोग किया गया है. पेड़ की डाली को भी आरी से काटा गया है. स्वाभाविक है कि ऐसा करने में घंटों समय लगा होगा तथा पेड़ गिरने की आवाज दूर तक गई होगी.
Kiriburu: सारंडा जंगल के किरीबुरु स्थित ससंगदा रेंज कार्यालय से महज कुछ दूरी पर ही किरीबुरु-बड़ाजामदा मुख्य सड़क मार्ग के किनारे सखुआ का एक विशाल पेड़ लकड़ी माफिया द्वारा आरी मशीन से काट कर गिरा दिया गया. उक्त पेड़ के काटे जाने तक की जानकारी काफी देर तक वन विभाग को नहीं होना भी आश्चर्य की बात है. यह कहना गलत नहीं होगा की उक्त पेड़ को काट लकड़ी माफिया ने वन विभाग की आंख से काजल चुराने का काम किया है. उल्लेखनीय है कि एक जून को हीं लगातार न्यूज ने इसी क्षेत्र की तस्वीर के साथ खबर लगाई थी. जिसमें कहा गया था कि वन विभाग ने यहां उन्नीस,पाँच सौ पौधे लगाए थे जिसमें एक भी पौधा नहीं लग पाया. अब दो जून को लकड़ी माफिया ने इस क्षेत्र में बचे कुछ पुराने सखुआ के पेड़ों में से एक को काटकर वन विभाग को खुली चुनौती दे डाली है. सबसे बड़ी बात यह है कि इस पेड़ को काटने में आरी का प्रयोग किया गया है. पेड़ की डाली को भी आरी से काटा गया है. स्वाभाविक है कि ऐसा करने में घंटों समय लगा होगा तथा पेड़ गिरने की आवाज दूर तक गई होगी.
तुर्की रेलवे अकादमी के विशेषज्ञों ने रेलवे व्यावसायिक शिक्षा के डिजिटलीकरण (DigiRailVET) परियोजना के दायरे में 19-21 जुलाई 2022 को फ्रांस में चौथी भागीदारी बैठक में भाग लिया। चौथी पार्टनरशिप मीटिंग, डिजीरेलवेट प्रोजेक्ट के दायरे में, टीसीडीडी तासमासिलिक एŞ, सर्टिफ़र एसए और ज़ाग्रेब यूनिवर्सिटी (क्रोएशिया) की साझेदारी में, तुर्की राज्य रेलवे गणराज्य (टीसीडीडी) के समन्वय के तहत वैलेंसिएनेस, फ़्रांस में आयोजित की गई थी। TCDD और TCDD Taşımacılık AŞ विशेषज्ञों के अलावा, Certifer तुर्की के महाप्रबंधक Ercan Yıldırım, फ़्रांस के महाप्रबंधक पियरे कादज़ियोला और ज़ाग्रेब विश्वविद्यालय के संबंधित व्याख्याताओं ने बैठक में भाग लिया। बैठक में, रेलवे व्यवसायों के लिए मिश्रित प्रशिक्षण कार्यक्रम, जो परियोजना के O2 बौद्धिक आउटपुट हैं, का मूल्यांकन किया गया और डिजिटल शिक्षण सामग्री की तैयारी पर पहला अध्ययन भागीदारों के साथ साझा किया गया। बैठक में तैयार होने वाली नई प्रशिक्षण सामग्री की बुनियादी रूपरेखा भी तय की गई। साथ ही बैठक के साथ, इरास्मस + व्यावसायिक शिक्षा प्रत्यायन के ढांचे के भीतर, यूरोपीय संघ के विनियम और ईसीएम प्रशिक्षण TCDD Taşımacılık AŞ के 4 कर्मियों की चौथी गतिशीलता के रूप में भागीदारी के साथ आयोजित किया गया था और CERTIFER तुर्की विशेषज्ञों द्वारा दिया गया था। इरास्मस + व्यावसायिक शिक्षा प्रत्यायन के ढांचे के भीतर, व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में इरास्मस प्रत्यायन कंसोर्टियम के एक समझौता ज्ञापन पर TCDD, TCDD तसीमैसिलिक, CERTIFER SA और CERTIFER तुर्की के प्रतिनिधियों के बीच हस्ताक्षर किए गए थे। परियोजना भागीदारों के साथ सीईएफ रेलवे परीक्षण केंद्र का तकनीकी दौरा कर कार्यक्रम को पूरा किया गया। Bu slayt gösterisi için जावास्क्रिप्ट gerekir।
तुर्की रेलवे अकादमी के विशेषज्ञों ने रेलवे व्यावसायिक शिक्षा के डिजिटलीकरण परियोजना के दायरे में उन्नीस-इक्कीस जुलाई दो हज़ार बाईस को फ्रांस में चौथी भागीदारी बैठक में भाग लिया। चौथी पार्टनरशिप मीटिंग, डिजीरेलवेट प्रोजेक्ट के दायरे में, टीसीडीडी तासमासिलिक एŞ, सर्टिफ़र एसए और ज़ाग्रेब यूनिवर्सिटी की साझेदारी में, तुर्की राज्य रेलवे गणराज्य के समन्वय के तहत वैलेंसिएनेस, फ़्रांस में आयोजित की गई थी। TCDD और TCDD Taşımacılık AŞ विशेषज्ञों के अलावा, Certifer तुर्की के महाप्रबंधक Ercan Yıldırım, फ़्रांस के महाप्रबंधक पियरे कादज़ियोला और ज़ाग्रेब विश्वविद्यालय के संबंधित व्याख्याताओं ने बैठक में भाग लिया। बैठक में, रेलवे व्यवसायों के लिए मिश्रित प्रशिक्षण कार्यक्रम, जो परियोजना के Oदो बौद्धिक आउटपुट हैं, का मूल्यांकन किया गया और डिजिटल शिक्षण सामग्री की तैयारी पर पहला अध्ययन भागीदारों के साथ साझा किया गया। बैठक में तैयार होने वाली नई प्रशिक्षण सामग्री की बुनियादी रूपरेखा भी तय की गई। साथ ही बैठक के साथ, इरास्मस + व्यावसायिक शिक्षा प्रत्यायन के ढांचे के भीतर, यूरोपीय संघ के विनियम और ईसीएम प्रशिक्षण TCDD Taşımacılık AŞ के चार कर्मियों की चौथी गतिशीलता के रूप में भागीदारी के साथ आयोजित किया गया था और CERTIFER तुर्की विशेषज्ञों द्वारा दिया गया था। इरास्मस + व्यावसायिक शिक्षा प्रत्यायन के ढांचे के भीतर, व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में इरास्मस प्रत्यायन कंसोर्टियम के एक समझौता ज्ञापन पर TCDD, TCDD तसीमैसिलिक, CERTIFER SA और CERTIFER तुर्की के प्रतिनिधियों के बीच हस्ताक्षर किए गए थे। परियोजना भागीदारों के साथ सीईएफ रेलवे परीक्षण केंद्र का तकनीकी दौरा कर कार्यक्रम को पूरा किया गया। Bu slayt gösterisi için जावास्क्रिप्ट gerekir।
विशेषणों से काम लेता है, उसी प्रकार सीता की माता ने राम के लिए वही विशेषण प्रयुक्त किये हैं, जो बहुत हो हलके हैं, और जो ब्रह्मत्व सम्बन्धी किसी निश्चय की सूचना नहीं देते। येशप्रेमा' सासु अपने किसी भी रामचन्द्रजो जैसे प्रभावशाली चक्रवर्ती राजा के पुत्र जामातृ से कह सकती है, और तब ये शब्द किसी प्रकार का ब्रह्मत्व प्रतिपादन नहीं कर सकते । रामचन्द्रजी के पैरों में गिरना आर्द्रता की पराकाष्ठा है; यह ब्रह्मत्व की प्रबल ज्ञान सम्पन्नता के कारण नहीं । जनकर्जी जानते हैं कि राम ब्रह्म हैं, और शिव-धनुष तोड़ने पर उन्हें वास्तव में पूर्ण विश्वास हो जाता है । वे अपनी शनियों की अपेक्षा अधिक ज्ञानवान हैं- उन्होंने जो शब्द राम के लिए कहे हैं, उनसे रानियों के वचनों की तुलना की जाय तो विदित हो जायगा कि रामचन्द्रजी के ब्रह्मत्व के सम्बन्ध में उनके मस्तिष्क में निश्चय की बहुत कमी थी । इसी कारण वे राम को निश्चय ही ब्रह्मत्वबोधक विशेषणों के द्वारा सम्बोधन नहीं कर सक । इसी जागृत-अनन्तत्व और सुपुस- अनन्तत्व का परिचय सीतास्वयम्बर में भी दिखायी पड़ता है । स्वयम्बर में सभी प्रकार के राजा एकत्र हुए है, इसे तुलसीदासजी बहुत ही भली प्रकार बताया है। उन्होंने उपस्थित समाज को भले और बुरे राजाओं में चाँट दिया है। भले राजा शीघ्र ही राम को पहचान लेते है और कहते हैं--- जगत पिता रघुपतिहिं विचारी । भरि लोचन छवि लेहु निहारी ।। वी मूढ राजा यह भी कहते हैं-एक बार कालहु किन होऊ । सिय दित समर जितब हम सोक ।। यदि यहाँ रामचन्द्रजी का तत्व पूर्ण उद्भासित होता तो सम्भव है राम का मूढ़ राजाओं पर भी छा जाता, पर वह यहाँ अर्द्धजागृत अवस्था में है, उसमें पूर्ण नियात्मकता नहीं । यदि और गम्भीरता से विचार किया जाय तो यह स्पष्ट परिलक्षित हो जायगा कि इन राजाओं को यह कैसे हो गया और कथा के प्रवाह का ध्यान रक्खा जाय तो यह भो विदित हो जायगा कि क्यों इन राजाओं के द्वारा राम की पूजा अर्चना कराके शिथिलता नहीं लायी गयी, केवल शब्दों में ही सत्र कुछ व्यक्त कर दिया गया है। फिर तलसीदासजी की आचार-दृष्टि ( Ethical theory ) में भक्तों को श्रेणियाँ बनी हुई हैं। राजा की भक्ति सत्र में होती है। सभी उनके चरण भी छूना चाहें तो क्या कहीं कभी ऐसा देखा गया है कि सबको अवसर मिला हो । अतः से देखकर हो सन्तुष्ट रहते हैं । अत्यन्त निकट के व्यक्तियों को वह सौभाग्य भी प्राप्त हो जाता है, और तुलसीदास के सिद्धान्त से सभी राम के चरण छूने के भागी नहीं, अतः उनमें अपनी कोटि की ही उत्सुकता पैदा होती है । फिर मूढ़ों में तो वह भी नहीं होती । मूरख हृदय न चेत, जो गुरु मिलहिं विरंचि सम । फूलहि फलहि न वेत, जदपि सुधा बरसहिं जल ।। राम का अनन्तत्व अस्फुट था, और साथ ही राजा मूढ़ ये, अतः तुलसीदासजी ने दिखनाया कि उन राजाओं पर भले राजाओं का कोई प्रभाव नहीं पड़ा । तीसरे वह पुरुष हैं, जो उनके अपने हैं। उनके सामने राम अपना रूप खोल कर रख देते हैं। उनके सामने वे मनुष्य की तरह नहीं, ब्रह्म की तरह बोलते हैं, उन्हें अपना धाम देते हैं। ऐसे लोग है 'अनन्य भक्त' । अन्तरसान्त का संयोजन इन्हीं तीन सीमा के भीतर होने से स्वाभाविकता के घेरे में रह सकता है, अन्यथा रूप अस्वाभाविक और अकलात्मक हो जायगा । विशेषणों से काम लेता है, उसी प्रकार सीता को माता ने राम के लिए वही विशेषण प्रयुक्त किये हैं, जो बहुत ही हलके हैं और जो ब्रह्मत्व सम्बन्धी किसो निश्चय की सूचना नहीं देते। ये शत्यन्त प्रेमाद्र सामु ने किसी भी रामचन्द्रजी जैसे प्रभावशालो चक्रवर्ती राजा के पुत्र जामातृ से कह सकती है, और तब ये शब्द किसी प्रकार का ब्रह्मत्व प्रतिपादन नहीं कर सकते । रामचन्द्रजी के पैरों में गिरना आद्रता की पराकाष्ठा है; यह ब्रह्मत्व की प्रबल ज्ञान सम्पन्नता के कारण नहीं । जनकजी जानते हैं कि राम ब्रह्म हैं, और शिव-धनुष तोड़ने पर उन्हें वास्तव में पूर्ण विश्वास हो जाता है । वे अपनी शनियों की अपेक्षा अधिक ज्ञानवान है - उन्होंने जो शब्द राम के लिए कहे हैं, उनसे रानियों के वचनों की तुलना की जाय तो विदित हो जायगा कि रामचन्द्रजी के ब्रह्मत्व के सम्बन्ध में उनके मस्तिष्क में निश्चय की बहुत कमी थी । इसी कारण वे राम को निश्चय ही ब्रह्मत्व-चोधक विशेषणों के द्वारा सम्बोधन नहीं कर सकीं। इसी जागृत - अनन्तल और नुपुप्त अनन्तत्व का परिचय सीतास्वयम्वर में भी दिखायी पड़ता है । स्वयम्बर में सभी प्रकार के राजा एकत्र हुए है, इसे तुलसीदासजी ने बहुत ही भली प्रकार बताया है। उन्होंने उपस्थित समाज को भले और बुरे गजाधों में चाँट दिया है। भले राजा शीघ्र ही राम को पहचान लेते हैं और कहते हैंजगन पिता पतिहिं विचारी । भरि लोचन छवि लेहु निहारी ।। नहीं मूढ राजा यह भी कहते हैंएक बार कालहु किन होऊ । सिय दिन समर जितब हम सोऊ ।।
विशेषणों से काम लेता है, उसी प्रकार सीता की माता ने राम के लिए वही विशेषण प्रयुक्त किये हैं, जो बहुत हो हलके हैं, और जो ब्रह्मत्व सम्बन्धी किसी निश्चय की सूचना नहीं देते। येशप्रेमा' सासु अपने किसी भी रामचन्द्रजो जैसे प्रभावशाली चक्रवर्ती राजा के पुत्र जामातृ से कह सकती है, और तब ये शब्द किसी प्रकार का ब्रह्मत्व प्रतिपादन नहीं कर सकते । रामचन्द्रजी के पैरों में गिरना आर्द्रता की पराकाष्ठा है; यह ब्रह्मत्व की प्रबल ज्ञान सम्पन्नता के कारण नहीं । जनकर्जी जानते हैं कि राम ब्रह्म हैं, और शिव-धनुष तोड़ने पर उन्हें वास्तव में पूर्ण विश्वास हो जाता है । वे अपनी शनियों की अपेक्षा अधिक ज्ञानवान हैं- उन्होंने जो शब्द राम के लिए कहे हैं, उनसे रानियों के वचनों की तुलना की जाय तो विदित हो जायगा कि रामचन्द्रजी के ब्रह्मत्व के सम्बन्ध में उनके मस्तिष्क में निश्चय की बहुत कमी थी । इसी कारण वे राम को निश्चय ही ब्रह्मत्वबोधक विशेषणों के द्वारा सम्बोधन नहीं कर सक । इसी जागृत-अनन्तत्व और सुपुस- अनन्तत्व का परिचय सीतास्वयम्बर में भी दिखायी पड़ता है । स्वयम्बर में सभी प्रकार के राजा एकत्र हुए है, इसे तुलसीदासजी बहुत ही भली प्रकार बताया है। उन्होंने उपस्थित समाज को भले और बुरे राजाओं में चाँट दिया है। भले राजा शीघ्र ही राम को पहचान लेते है और कहते हैं--- जगत पिता रघुपतिहिं विचारी । भरि लोचन छवि लेहु निहारी ।। वी मूढ राजा यह भी कहते हैं-एक बार कालहु किन होऊ । सिय दित समर जितब हम सोक ।। यदि यहाँ रामचन्द्रजी का तत्व पूर्ण उद्भासित होता तो सम्भव है राम का मूढ़ राजाओं पर भी छा जाता, पर वह यहाँ अर्द्धजागृत अवस्था में है, उसमें पूर्ण नियात्मकता नहीं । यदि और गम्भीरता से विचार किया जाय तो यह स्पष्ट परिलक्षित हो जायगा कि इन राजाओं को यह कैसे हो गया और कथा के प्रवाह का ध्यान रक्खा जाय तो यह भो विदित हो जायगा कि क्यों इन राजाओं के द्वारा राम की पूजा अर्चना कराके शिथिलता नहीं लायी गयी, केवल शब्दों में ही सत्र कुछ व्यक्त कर दिया गया है। फिर तलसीदासजी की आचार-दृष्टि में भक्तों को श्रेणियाँ बनी हुई हैं। राजा की भक्ति सत्र में होती है। सभी उनके चरण भी छूना चाहें तो क्या कहीं कभी ऐसा देखा गया है कि सबको अवसर मिला हो । अतः से देखकर हो सन्तुष्ट रहते हैं । अत्यन्त निकट के व्यक्तियों को वह सौभाग्य भी प्राप्त हो जाता है, और तुलसीदास के सिद्धान्त से सभी राम के चरण छूने के भागी नहीं, अतः उनमें अपनी कोटि की ही उत्सुकता पैदा होती है । फिर मूढ़ों में तो वह भी नहीं होती । मूरख हृदय न चेत, जो गुरु मिलहिं विरंचि सम । फूलहि फलहि न वेत, जदपि सुधा बरसहिं जल ।। राम का अनन्तत्व अस्फुट था, और साथ ही राजा मूढ़ ये, अतः तुलसीदासजी ने दिखनाया कि उन राजाओं पर भले राजाओं का कोई प्रभाव नहीं पड़ा । तीसरे वह पुरुष हैं, जो उनके अपने हैं। उनके सामने राम अपना रूप खोल कर रख देते हैं। उनके सामने वे मनुष्य की तरह नहीं, ब्रह्म की तरह बोलते हैं, उन्हें अपना धाम देते हैं। ऐसे लोग है 'अनन्य भक्त' । अन्तरसान्त का संयोजन इन्हीं तीन सीमा के भीतर होने से स्वाभाविकता के घेरे में रह सकता है, अन्यथा रूप अस्वाभाविक और अकलात्मक हो जायगा । विशेषणों से काम लेता है, उसी प्रकार सीता को माता ने राम के लिए वही विशेषण प्रयुक्त किये हैं, जो बहुत ही हलके हैं और जो ब्रह्मत्व सम्बन्धी किसो निश्चय की सूचना नहीं देते। ये शत्यन्त प्रेमाद्र सामु ने किसी भी रामचन्द्रजी जैसे प्रभावशालो चक्रवर्ती राजा के पुत्र जामातृ से कह सकती है, और तब ये शब्द किसी प्रकार का ब्रह्मत्व प्रतिपादन नहीं कर सकते । रामचन्द्रजी के पैरों में गिरना आद्रता की पराकाष्ठा है; यह ब्रह्मत्व की प्रबल ज्ञान सम्पन्नता के कारण नहीं । जनकजी जानते हैं कि राम ब्रह्म हैं, और शिव-धनुष तोड़ने पर उन्हें वास्तव में पूर्ण विश्वास हो जाता है । वे अपनी शनियों की अपेक्षा अधिक ज्ञानवान है - उन्होंने जो शब्द राम के लिए कहे हैं, उनसे रानियों के वचनों की तुलना की जाय तो विदित हो जायगा कि रामचन्द्रजी के ब्रह्मत्व के सम्बन्ध में उनके मस्तिष्क में निश्चय की बहुत कमी थी । इसी कारण वे राम को निश्चय ही ब्रह्मत्व-चोधक विशेषणों के द्वारा सम्बोधन नहीं कर सकीं। इसी जागृत - अनन्तल और नुपुप्त अनन्तत्व का परिचय सीतास्वयम्वर में भी दिखायी पड़ता है । स्वयम्बर में सभी प्रकार के राजा एकत्र हुए है, इसे तुलसीदासजी ने बहुत ही भली प्रकार बताया है। उन्होंने उपस्थित समाज को भले और बुरे गजाधों में चाँट दिया है। भले राजा शीघ्र ही राम को पहचान लेते हैं और कहते हैंजगन पिता पतिहिं विचारी । भरि लोचन छवि लेहु निहारी ।। नहीं मूढ राजा यह भी कहते हैंएक बार कालहु किन होऊ । सिय दिन समर जितब हम सोऊ ।।
पंजाब के अमृतसर में सुल्तानविंड रोड स्थित एक जूतों-चप्पलों के शोरूम में रात 10 बजे आग लग गई। पड़ोसी दुकानदार ने इसकी सूचना दमकल विभाग और शोरूम मालिक को फोन पर दी, जिसके बाद दमकल विभाग की गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर आग को काबू किया। फिलहाल आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। रिलैक्सो शोरूम में यह आग लगी। दुकान के मालिक शोरूम को बंद कर रात 8 बजे ही घर चले गए थे। लेकिन आसपास के दुकानदारों ने इसकी सूचना उन्हें फोन पर दी। दुकानदारों ने ही दमकल विभाग को इसके बारे में बताया। मौके पर फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां पहुंच गई थी। लेकिन दमकल की चार गाड़ियों ने 1 घंटे में आग पर काबू पा लिया। जूतों व चप्पलों का शोरूम होने के कारण आग तेजी से भड़की। शोरूम में जहां रबड़ व लैदर के जूते थे, वहीं जूतों के गत्ते के बॉक्स भी थे। जिस कारण आग तेजी से फैली और उस पर काबू पाना मुश्किल हो रहा था। शोरूम बंद होने के कारण कोई जानी नुकसान नहीं पहुंचा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
पंजाब के अमृतसर में सुल्तानविंड रोड स्थित एक जूतों-चप्पलों के शोरूम में रात दस बजे आग लग गई। पड़ोसी दुकानदार ने इसकी सूचना दमकल विभाग और शोरूम मालिक को फोन पर दी, जिसके बाद दमकल विभाग की गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर आग को काबू किया। फिलहाल आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। रिलैक्सो शोरूम में यह आग लगी। दुकान के मालिक शोरूम को बंद कर रात आठ बजे ही घर चले गए थे। लेकिन आसपास के दुकानदारों ने इसकी सूचना उन्हें फोन पर दी। दुकानदारों ने ही दमकल विभाग को इसके बारे में बताया। मौके पर फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां पहुंच गई थी। लेकिन दमकल की चार गाड़ियों ने एक घंटाटे में आग पर काबू पा लिया। जूतों व चप्पलों का शोरूम होने के कारण आग तेजी से भड़की। शोरूम में जहां रबड़ व लैदर के जूते थे, वहीं जूतों के गत्ते के बॉक्स भी थे। जिस कारण आग तेजी से फैली और उस पर काबू पाना मुश्किल हो रहा था। शोरूम बंद होने के कारण कोई जानी नुकसान नहीं पहुंचा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
देश में 200 करोड़ रुपये की लागत से 42 मेगाफूड पार्क स्थापित किए जाएंगे। इनमें पांच तैयार हो चुके हैं, जिसमें फाजिल्का में बनाया गया फूड पार्क भी शामिल है जबकि लुधियाना और कपूरथला में कार्य जारी है। यह अगले दो वर्षों में पूरा कर लिया जाएगा। इसकी जानकारी केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने डेराबस्सी के समीप गांव बेहड़ा में एलएम थापर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट थापर विश्वविद्यालय डेराबस्सी कैंपस में सेंटर फॉर लर्निंग रिसोर्स डेवलपमेंट का उद्घाटन करने के बाद पंजाब में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने के विषय पर आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते हुए दी। उन्होंने मुख्य संसदीय सचिव व हलका विधायक एनके शर्मा की मांग पर लालड़ू में भी मेगा फूड पार्क स्थापित करने के लिए अपनी सहमति दे दी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मेगा फूड पार्कों में जहां उत्पादन, प्रोसेसिंग प्लांट, कोल्ड स्टोर, कलेक्शन सेंटर, परिवहन आदि की व्यवस्था होगी, वहीं फूड पार्क स्थापित होने वाले क्षेत्र में किसानों को उनके उत्पादन के वाजिब मूल्य मिलेंगे। देश में अनाज की बर्बादी को केवल खाद्य प्रसंस्करण से ही समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमारी रिवायती फसलें गेहूं और धान अब लाभप्रद नही रहीं। किसानों को बाहर आने की जरूरत है। पंजाब के किसानों को अब रिवायती फसलों की बजाय लाभप्रद फसलें फल, फूल, सब्जियां आदि की काश्त करनी चाहिए इससे उनकी आय में बढ़ोतरी होगी। सेमिनार को संबोधित करते हुए पंजाब स्टेट फार्मज आयोग के चेयरमैन और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस चांसलर डॉ. जी एस कालकट ने भूजल की घट रही सतह पर चिंता जाहिर करते राज्य के किसानों को फल, फूल और सब्जियों की काश्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस मौके नगर परिषद डेराबस्सी के प्रधान भूपिंदर सैणी व जीरकपुर के प्रधान कुलविंदर सिंह सोही सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
देश में दो सौ करोड़ रुपये की लागत से बयालीस मेगाफूड पार्क स्थापित किए जाएंगे। इनमें पांच तैयार हो चुके हैं, जिसमें फाजिल्का में बनाया गया फूड पार्क भी शामिल है जबकि लुधियाना और कपूरथला में कार्य जारी है। यह अगले दो वर्षों में पूरा कर लिया जाएगा। इसकी जानकारी केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने डेराबस्सी के समीप गांव बेहड़ा में एलएम थापर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट थापर विश्वविद्यालय डेराबस्सी कैंपस में सेंटर फॉर लर्निंग रिसोर्स डेवलपमेंट का उद्घाटन करने के बाद पंजाब में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने के विषय पर आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते हुए दी। उन्होंने मुख्य संसदीय सचिव व हलका विधायक एनके शर्मा की मांग पर लालड़ू में भी मेगा फूड पार्क स्थापित करने के लिए अपनी सहमति दे दी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मेगा फूड पार्कों में जहां उत्पादन, प्रोसेसिंग प्लांट, कोल्ड स्टोर, कलेक्शन सेंटर, परिवहन आदि की व्यवस्था होगी, वहीं फूड पार्क स्थापित होने वाले क्षेत्र में किसानों को उनके उत्पादन के वाजिब मूल्य मिलेंगे। देश में अनाज की बर्बादी को केवल खाद्य प्रसंस्करण से ही समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमारी रिवायती फसलें गेहूं और धान अब लाभप्रद नही रहीं। किसानों को बाहर आने की जरूरत है। पंजाब के किसानों को अब रिवायती फसलों की बजाय लाभप्रद फसलें फल, फूल, सब्जियां आदि की काश्त करनी चाहिए इससे उनकी आय में बढ़ोतरी होगी। सेमिनार को संबोधित करते हुए पंजाब स्टेट फार्मज आयोग के चेयरमैन और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस चांसलर डॉ. जी एस कालकट ने भूजल की घट रही सतह पर चिंता जाहिर करते राज्य के किसानों को फल, फूल और सब्जियों की काश्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस मौके नगर परिषद डेराबस्सी के प्रधान भूपिंदर सैणी व जीरकपुर के प्रधान कुलविंदर सिंह सोही सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
मेघालय बोर्ड ने बुधवार (25 मई) को 12वीं आर्ट्स (कला) का परिणाम घोषित कर दिया है। परीक्षार्थी बोर्ड की आधिकारिक वेब साइट megresults. nic. in पर अपना रिजल्ट देख सकते हैं। मेघालय बोर्ड ने हर साल की तरह इस साल भी 12वीं की परीक्षाएं फरवरी से मार्च के दौरान आयोजित कराई थी। इस बार बारहवीं क्लास के एग्जाम में करीब 21,000 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया था। मेघालय बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन से करीब 1300 से अधिक स्कूल जुड़े हुए हैं। सबसे खास बात तो यह है है कि मेघालय बोर्ड के 12वीं के रिजल्ट देशभर में और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्य होते हैं।
मेघालय बोर्ड ने बुधवार को बारहवीं आर्ट्स का परिणाम घोषित कर दिया है। परीक्षार्थी बोर्ड की आधिकारिक वेब साइट megresults. nic. in पर अपना रिजल्ट देख सकते हैं। मेघालय बोर्ड ने हर साल की तरह इस साल भी बारहवीं की परीक्षाएं फरवरी से मार्च के दौरान आयोजित कराई थी। इस बार बारहवीं क्लास के एग्जाम में करीब इक्कीस,शून्य छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया था। मेघालय बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन से करीब एक हज़ार तीन सौ से अधिक स्कूल जुड़े हुए हैं। सबसे खास बात तो यह है है कि मेघालय बोर्ड के बारहवीं के रिजल्ट देशभर में और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्य होते हैं।
साम्प्रदायिक मंदिर "श्री कृष्ण प्रणाम मंदिर" के नाम से हो, विशेषतः प्रमिहित होते हैं। इन मंदिरों की यथाप्राप्त सूची इस प्रकार है-सौराष्ट्र-गुजरात जामनगर, हपंदपुर, चेलाचागा, जोड़िया, धाफा, चित्रावड़, राजकोट, मेमणी, उपलेटा, तरणसवा, पोरबदर, जूनागढ, दात्राणा, आबलीवा, मैयारी, प्रवाणिया, मेदरडा, गोरड्डमतिया, साजीश्रावदर, चाडोमा, प्रमृतपुर, हीपावडली, अमृतबेल, वाकवाडा, दीवबंदर, मार्गरोल, बंगला, अंजार, सिनोगरा, भद्रेश्वर, भेजपुर, मुद्रा, सूरत, संभात, लाखावाड, वेडा, वरशोला, लीगड़ा, पीपलता, करणजरी, चोखोदरा, टीस्बा, गोधरा, हरकुडी, सुदलपुर, जैसापुर, सोहोरा, बेचरी, कालोल, प्रजुपुर, माघरोली, प्रजरपुरा, अरेश, महेमदावाद ( माकवा), वडयाल, जाणिया, सिंहुज, रुद्ररणा, वासरणा, अहमदाबाद, सोजीत्रा, बालिन्टा, भिलोड़ा, मालावाड़ा, सोउपुर, प्रवारी आमली, मित्राल, रास, अद्रिा, प्रोड, नार, धर्मज, बड़ोदरा, हेरफतेपुर, (सोनामण), सीमरडा, माछेल, जसपुरा, कुडाशल, बागोदरा, गणदेवी, भरोडा, बलसाड, नातू दमण, बंबई, सोनगीर - धुलिया । जयपुर, डूंगरपुर (तलोद स्टेशन), पदमपुर, सूरतगढ, चूनावड, श्रीकर्णपुर, मेडता, नागौर, उदयपुर, कुडावड, ईसरवास, श्रजमेर ! पन्ना, रानीपुर, मुकरवा, महेवा, भाडेर, सतना, ग्राम दुवगमाकुटी, नूडा, उज्जैन, इन्दौर, रतलाम । अमृतसर, अम्बाला, फाजिलका, करनाल, फिरजपुर, जलघर ।
साम्प्रदायिक मंदिर "श्री कृष्ण प्रणाम मंदिर" के नाम से हो, विशेषतः प्रमिहित होते हैं। इन मंदिरों की यथाप्राप्त सूची इस प्रकार है-सौराष्ट्र-गुजरात जामनगर, हपंदपुर, चेलाचागा, जोड़िया, धाफा, चित्रावड़, राजकोट, मेमणी, उपलेटा, तरणसवा, पोरबदर, जूनागढ, दात्राणा, आबलीवा, मैयारी, प्रवाणिया, मेदरडा, गोरड्डमतिया, साजीश्रावदर, चाडोमा, प्रमृतपुर, हीपावडली, अमृतबेल, वाकवाडा, दीवबंदर, मार्गरोल, बंगला, अंजार, सिनोगरा, भद्रेश्वर, भेजपुर, मुद्रा, सूरत, संभात, लाखावाड, वेडा, वरशोला, लीगड़ा, पीपलता, करणजरी, चोखोदरा, टीस्बा, गोधरा, हरकुडी, सुदलपुर, जैसापुर, सोहोरा, बेचरी, कालोल, प्रजुपुर, माघरोली, प्रजरपुरा, अरेश, महेमदावाद , वडयाल, जाणिया, सिंहुज, रुद्ररणा, वासरणा, अहमदाबाद, सोजीत्रा, बालिन्टा, भिलोड़ा, मालावाड़ा, सोउपुर, प्रवारी आमली, मित्राल, रास, अद्रिा, प्रोड, नार, धर्मज, बड़ोदरा, हेरफतेपुर, , सीमरडा, माछेल, जसपुरा, कुडाशल, बागोदरा, गणदेवी, भरोडा, बलसाड, नातू दमण, बंबई, सोनगीर - धुलिया । जयपुर, डूंगरपुर , पदमपुर, सूरतगढ, चूनावड, श्रीकर्णपुर, मेडता, नागौर, उदयपुर, कुडावड, ईसरवास, श्रजमेर ! पन्ना, रानीपुर, मुकरवा, महेवा, भाडेर, सतना, ग्राम दुवगमाकुटी, नूडा, उज्जैन, इन्दौर, रतलाम । अमृतसर, अम्बाला, फाजिलका, करनाल, फिरजपुर, जलघर ।
नई दिल्लीः कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' पर तंज कसा है। रविवार को एक ट्वीट में राहुल गांधी ने लिखा है कि राष्ट्र रक्षा और सुरक्षा की बात कब होगी। मालूम हो कि आज ही पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात में देश की जनता को संबोधित किया। इससे पहले शनिवार को उन्होंने देश में बढ़ रहे कोरोना के मरीजों पर मोदी सरकार पर निशाना साधा था। राहुल गांधी ने ट्वीट किया, 'कोरोना वायरस देश के नए हिस्सों में तेजी से फैल रहा है। भारत सरकार के पास इससे निपटने का कोई प्लान नहीं है। प्रधानमंत्री खामोश हैं। उन्होंने महामारी के सामने आत्मसमर्पण और इससे निपटने से इंकार कर दिया है। ' राहुल गांधी ने कोरोना वायरस के मसले पर मोदी सरकार पर ऐसे समय निशाना साधा जब देश में संक्रमित मरीजों का आंकड़ा भी पांच लाख से ज्यादा हो चुका है। वहीं प्रधानमंत्री मोदी भी कह चुके हैं कि पता नहीं इससे बीमारी से कब निजात मिलेगी। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, "मन की बात' में अनेक विषयों पर बात की गई। महामारी पर भी खूब बातें हुईं। लोग चर्चा कर रहे हैं कि आखिर यह साल कब बीतेगा? लोग दोस्तों से कह रहे हैं यह साल अच्छा नहीं है, 2020 शुभ नहीं है। ' पीएम मोदी ने परेशानियों का जिक्र करते हुए कहा कि हो सकता है ऐसी बातचीत के कुछ कारण भी हों। हम कहां जानते थे कि कोरोना जैसा संकट आएगा। देश में नित नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। देश के पूर्वी छोर पर तूफान आया। किसान भाई बहन टिड्डी दल के हमले से परेशान हैं। देश में छोटे-छोटे भूकंप आ रहे हैं। इन सब के बीच पड़ोसी जो कर रहे हैं देश उससे भी निपट रहा है। ' कोरोना वायरस का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। देश में इस घातक वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या 5 लाख 28 हजार से ऊपर पहुंच गई है। वही, मौतों का 16 हजार, एक सौ पहुंचने वाला है। पिछले 24 घंटों के दौरान रिकॉर्ड मामले सामने आए हैं और 410 लोगों की मौत हुई है। बता दें, देश में 25 मार्च से लागू लॉकडाउन से चरणबद्ध तरीके से बाहर निकलने के प्रयास में सरकार ने एक जून से 'अनलॉक-1' शुरू किया, जिसके बाद कोरोना के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
नई दिल्लीः कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' पर तंज कसा है। रविवार को एक ट्वीट में राहुल गांधी ने लिखा है कि राष्ट्र रक्षा और सुरक्षा की बात कब होगी। मालूम हो कि आज ही पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात में देश की जनता को संबोधित किया। इससे पहले शनिवार को उन्होंने देश में बढ़ रहे कोरोना के मरीजों पर मोदी सरकार पर निशाना साधा था। राहुल गांधी ने ट्वीट किया, 'कोरोना वायरस देश के नए हिस्सों में तेजी से फैल रहा है। भारत सरकार के पास इससे निपटने का कोई प्लान नहीं है। प्रधानमंत्री खामोश हैं। उन्होंने महामारी के सामने आत्मसमर्पण और इससे निपटने से इंकार कर दिया है। ' राहुल गांधी ने कोरोना वायरस के मसले पर मोदी सरकार पर ऐसे समय निशाना साधा जब देश में संक्रमित मरीजों का आंकड़ा भी पांच लाख से ज्यादा हो चुका है। वहीं प्रधानमंत्री मोदी भी कह चुके हैं कि पता नहीं इससे बीमारी से कब निजात मिलेगी। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, "मन की बात' में अनेक विषयों पर बात की गई। महामारी पर भी खूब बातें हुईं। लोग चर्चा कर रहे हैं कि आखिर यह साल कब बीतेगा? लोग दोस्तों से कह रहे हैं यह साल अच्छा नहीं है, दो हज़ार बीस शुभ नहीं है। ' पीएम मोदी ने परेशानियों का जिक्र करते हुए कहा कि हो सकता है ऐसी बातचीत के कुछ कारण भी हों। हम कहां जानते थे कि कोरोना जैसा संकट आएगा। देश में नित नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। देश के पूर्वी छोर पर तूफान आया। किसान भाई बहन टिड्डी दल के हमले से परेशान हैं। देश में छोटे-छोटे भूकंप आ रहे हैं। इन सब के बीच पड़ोसी जो कर रहे हैं देश उससे भी निपट रहा है। ' कोरोना वायरस का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। देश में इस घातक वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या पाँच लाख अट्ठाईस हजार से ऊपर पहुंच गई है। वही, मौतों का सोलह हजार, एक सौ पहुंचने वाला है। पिछले चौबीस घंटाटों के दौरान रिकॉर्ड मामले सामने आए हैं और चार सौ दस लोगों की मौत हुई है। बता दें, देश में पच्चीस मार्च से लागू लॉकडाउन से चरणबद्ध तरीके से बाहर निकलने के प्रयास में सरकार ने एक जून से 'अनलॉक-एक' शुरू किया, जिसके बाद कोरोना के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor), आलिया भट्ट ( Alia Bhatt) अमिताभ बच्चन, (Amitabh Bachchan) , मौनी रॉय (Mouni Roy) और नागार्जुन ( Nagarjuna) की अपकमिंग फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' (Brahmastra) के 'केसरिया' ('Kesariya) गाने के बाद फिल्म के निर्माताओं ने साइंस-फिक्शन ड्रामा के दूसरे 'देवा देवा' ('Deva Deva) गाने का टीज़र आज जारी कर दिया है। यह टीजर आप यहाँ देख सकते हैं। जी दरअसल डायरेक्टर अयान मुखर्जी (Ayan Mukerji) ने गाने के टीजर को अपने इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए बताया कि फिल्म का पूरा गाना 8 अगस्त दिन सोमवार को रिलीज कर दिया जाएगा। आप सभी को हम यह भी बता दें कि 'देवा देवा' गाने को सिंगर अरिजीत सिंह (Arijit Singh) ने गाया है। इसे प्रीतम (Pritam) ने कंपोज किया है और बोल अमिताभ भट्टाचार्य (Amitabh Bhattacharya) ने लिखे हैं। जी हाँ और यह गाना पूरी तरह से रणबीर कपूर पर बेस्ड हैं। गाने के टीजर में रणबीर आग के साथ खेलते हुए दिख रहे हैं। आप देख सकते हैं इस वीडियो में रणबीर उर्फ शिव भगवान से प्रार्थना करते नजर आ रहे हैं और वह ईशा (आलिया भट्ट) को रोशनी का कॉन्सेप्ट बताते हैं। इस गाने में अमिताभ बच्चन के साथ शिव की अपनी अग्नि शक्ति की खोज करते हुए विभिन्न झलकियां भी दिखाई गई हैं। इसी के साथ इस गाने में बहुत कुछ रोमांचक है और इसी वजह से टीजर देख दर्शकों का उत्साह बढ़ गया है। हालाँकि पूरे गाने के लिए आपको 8 अगस्त तक का इंतज़ार करना होगा, और हमे यकीन है पूरा गाना धमाकेदार होगा।
रणबीर कपूर , आलिया भट्ट अमिताभ बच्चन, , मौनी रॉय और नागार्जुन की अपकमिंग फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' के 'केसरिया' गाने के बाद फिल्म के निर्माताओं ने साइंस-फिक्शन ड्रामा के दूसरे 'देवा देवा' गाने का टीज़र आज जारी कर दिया है। यह टीजर आप यहाँ देख सकते हैं। जी दरअसल डायरेक्टर अयान मुखर्जी ने गाने के टीजर को अपने इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए बताया कि फिल्म का पूरा गाना आठ अगस्त दिन सोमवार को रिलीज कर दिया जाएगा। आप सभी को हम यह भी बता दें कि 'देवा देवा' गाने को सिंगर अरिजीत सिंह ने गाया है। इसे प्रीतम ने कंपोज किया है और बोल अमिताभ भट्टाचार्य ने लिखे हैं। जी हाँ और यह गाना पूरी तरह से रणबीर कपूर पर बेस्ड हैं। गाने के टीजर में रणबीर आग के साथ खेलते हुए दिख रहे हैं। आप देख सकते हैं इस वीडियो में रणबीर उर्फ शिव भगवान से प्रार्थना करते नजर आ रहे हैं और वह ईशा को रोशनी का कॉन्सेप्ट बताते हैं। इस गाने में अमिताभ बच्चन के साथ शिव की अपनी अग्नि शक्ति की खोज करते हुए विभिन्न झलकियां भी दिखाई गई हैं। इसी के साथ इस गाने में बहुत कुछ रोमांचक है और इसी वजह से टीजर देख दर्शकों का उत्साह बढ़ गया है। हालाँकि पूरे गाने के लिए आपको आठ अगस्त तक का इंतज़ार करना होगा, और हमे यकीन है पूरा गाना धमाकेदार होगा।
करण की यह क्लोथिंग लाइन उनके ड्रेसिंग और उनकी शैली से प्रेरित होगी। बॉलीवुड एक्टर करण सिंह ग्रोवर को उनकी एक्टिंग और उनके मस्कुलर फिजिक, सिक्स पैक एब्स के लिए मशहूर उनकी यही ख़ूबिया उन्हें बी-टाउन का हॉटेस्ट हंक माना जाता है। अपनी बॉडी की वजह से करण अक्सर सुर्ख़ियों में बने होते हैं। जबसे करण की शादी हुई है वो बिपाशा के कारण भी सुर्खियाँ बटोरते रहते हैं। लेकिन इस बार करण किसी और वजह से ख़बरों की शोभा बढ़ा रहे हैं। करण एक्टिंग के साथ अपनी क्लोथिंग लाइन को लॉन्च करनेवाले हैं। करण सिंह ग्रोवर लंबे समय से अपना क्लोथिंग लाइन लॉन्च करने सोच रहे थे और अब उन्होंने यह फैसला किया है की वे अपनी क्लोथिंग इसी साल लॉन्च करेंगे। अभी किसी के साथ सहयोग करने की कोई योजना नहीं है, और फ़िलहाल वो अपने क्लोथिंग लाइन के डिटेल्स पर काम कर रहे हैं।" देखते हैं करण की यह क्लोथिंग लाइन उनके फैन्स को कितना पसंद आती है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
करण की यह क्लोथिंग लाइन उनके ड्रेसिंग और उनकी शैली से प्रेरित होगी। बॉलीवुड एक्टर करण सिंह ग्रोवर को उनकी एक्टिंग और उनके मस्कुलर फिजिक, सिक्स पैक एब्स के लिए मशहूर उनकी यही ख़ूबिया उन्हें बी-टाउन का हॉटेस्ट हंक माना जाता है। अपनी बॉडी की वजह से करण अक्सर सुर्ख़ियों में बने होते हैं। जबसे करण की शादी हुई है वो बिपाशा के कारण भी सुर्खियाँ बटोरते रहते हैं। लेकिन इस बार करण किसी और वजह से ख़बरों की शोभा बढ़ा रहे हैं। करण एक्टिंग के साथ अपनी क्लोथिंग लाइन को लॉन्च करनेवाले हैं। करण सिंह ग्रोवर लंबे समय से अपना क्लोथिंग लाइन लॉन्च करने सोच रहे थे और अब उन्होंने यह फैसला किया है की वे अपनी क्लोथिंग इसी साल लॉन्च करेंगे। अभी किसी के साथ सहयोग करने की कोई योजना नहीं है, और फ़िलहाल वो अपने क्लोथिंग लाइन के डिटेल्स पर काम कर रहे हैं।" देखते हैं करण की यह क्लोथिंग लाइन उनके फैन्स को कितना पसंद आती है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
ऑस्कर की रेस में शामिल हुई नीना गुप्ता की फिल्म 'द लास्ट कलर', निर्देशक विकास खन्ना ने फिल्म को बताया 'विश्वास का जादू' विकास खन्ना द्वारा निर्देशित फ़िल्म 'The Last Color' में नीना गुप्ता मुख्य भूमिका में हैं। बॉलीवुड एक्ट्रेस नीना गुप्ता की फिल्म 'द लास्ट कलर' को बेस्ट फीचर्स फिल्म्स 2019 की श्रेणी में रखा गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह फिल्म ऑस्कर अवॉर्ड की रेस में शामिल हो गई है। इस फिल्म को शेफ और फिल्ममेकर विकास खन्ना ने निर्देशित किया है। साथ ही उन्होंने इस फिल्म को 'विश्वास का जादू' कहा है। एक्ट्रेस नीना गुप्ता इस फिल्म को लेकर काफी एक्साइटेड हैं। उन्होंने अपनी इस खुशी को सोशल मीडिया पर शेयर किया है। विकास खन्ना ने सोशल मीडिया पर ऑस्कर्स की लिस्ट शेयर करते हुए अपनी खुशी जताई है। उन्होंने अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट पर इस लिस्ट को शेयर किया है। विकास ने अपने ट्वीट में लिखा, "मुझे नहीं पता कि इस पल के बाद क्या होता है। लेकिन यह पल ही सब कुछ है। उन्होंने अपने एक और ट्वीट में लिखा, "To live for this moment. Absolutly yesssss. @Neenagupta001", my heart is dancing. साथ ही उन्होंने लिखा की मेरी विनम्र कहानी पर विश्वास करने के लिए नीना जी धन्यवाद। नीना गुप्ता ने भी इसका जवाब देते हुए अपनी खुशी को व्यक्त किया है। भारत के सबसे पॉपुलर सेलिब्रिटी शेफ और फिल्ममेकर विकास खन्ना ने एक फिल्म बनाने की कोशिश की थी और अब लगता है उनकी मेहनत रंग लाई है। एक्ट्रेस नीना गुप्ता स्टारर विकास खन्ना की फिल्म 'द लास्ट कलर' ऑस्कर अवॉर्ड्स की फीचर फिल्म्स की लिस्ट में जगह बना चुकी है। ऑस्कर अवॉर्ड्स फरवरी 2020 में होने वाले हैं। इस फिल्म की कहानी वाराणसी में रहने वाली विधवा औरतों की जिंदगी पर आधारित है। इस फिल्म को हर जगह पसंद किया गया है। फिल्म 'द लास्ट कलर' ने डलास इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट फीचर फिल्म का अवॉर्ड जीता था। फिल्म की कहानी एक 9 साल के बच्चे के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक विधवा से दोस्ती करता है और उसके जीवन में रंग जोड़ने का वादा करता है। बॅालीवुड एक्टर नीना गुप्ता और निर्देशक विकास खन्ना की फिल्म 'द लास्ट कलर' को यूएसए के 30वें पाम स्प्रिंग्स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में 4 जनवरी 2019 को रिलीज किया गया था। वहीं मुंबई फिल्म फेस्टिवल 2019 में इसकी स्क्रीनिंग रखी गई थी।
ऑस्कर की रेस में शामिल हुई नीना गुप्ता की फिल्म 'द लास्ट कलर', निर्देशक विकास खन्ना ने फिल्म को बताया 'विश्वास का जादू' विकास खन्ना द्वारा निर्देशित फ़िल्म 'The Last Color' में नीना गुप्ता मुख्य भूमिका में हैं। बॉलीवुड एक्ट्रेस नीना गुप्ता की फिल्म 'द लास्ट कलर' को बेस्ट फीचर्स फिल्म्स दो हज़ार उन्नीस की श्रेणी में रखा गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह फिल्म ऑस्कर अवॉर्ड की रेस में शामिल हो गई है। इस फिल्म को शेफ और फिल्ममेकर विकास खन्ना ने निर्देशित किया है। साथ ही उन्होंने इस फिल्म को 'विश्वास का जादू' कहा है। एक्ट्रेस नीना गुप्ता इस फिल्म को लेकर काफी एक्साइटेड हैं। उन्होंने अपनी इस खुशी को सोशल मीडिया पर शेयर किया है। विकास खन्ना ने सोशल मीडिया पर ऑस्कर्स की लिस्ट शेयर करते हुए अपनी खुशी जताई है। उन्होंने अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट पर इस लिस्ट को शेयर किया है। विकास ने अपने ट्वीट में लिखा, "मुझे नहीं पता कि इस पल के बाद क्या होता है। लेकिन यह पल ही सब कुछ है। उन्होंने अपने एक और ट्वीट में लिखा, "To live for this moment. Absolutly yesssss. @Neenaguptaएक", my heart is dancing. साथ ही उन्होंने लिखा की मेरी विनम्र कहानी पर विश्वास करने के लिए नीना जी धन्यवाद। नीना गुप्ता ने भी इसका जवाब देते हुए अपनी खुशी को व्यक्त किया है। भारत के सबसे पॉपुलर सेलिब्रिटी शेफ और फिल्ममेकर विकास खन्ना ने एक फिल्म बनाने की कोशिश की थी और अब लगता है उनकी मेहनत रंग लाई है। एक्ट्रेस नीना गुप्ता स्टारर विकास खन्ना की फिल्म 'द लास्ट कलर' ऑस्कर अवॉर्ड्स की फीचर फिल्म्स की लिस्ट में जगह बना चुकी है। ऑस्कर अवॉर्ड्स फरवरी दो हज़ार बीस में होने वाले हैं। इस फिल्म की कहानी वाराणसी में रहने वाली विधवा औरतों की जिंदगी पर आधारित है। इस फिल्म को हर जगह पसंद किया गया है। फिल्म 'द लास्ट कलर' ने डलास इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट फीचर फिल्म का अवॉर्ड जीता था। फिल्म की कहानी एक नौ साल के बच्चे के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक विधवा से दोस्ती करता है और उसके जीवन में रंग जोड़ने का वादा करता है। बॅालीवुड एक्टर नीना गुप्ता और निर्देशक विकास खन्ना की फिल्म 'द लास्ट कलर' को यूएसए के तीसवें पाम स्प्रिंग्स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में चार जनवरी दो हज़ार उन्नीस को रिलीज किया गया था। वहीं मुंबई फिल्म फेस्टिवल दो हज़ार उन्नीस में इसकी स्क्रीनिंग रखी गई थी।
कभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बिजनेस पार्टनर रहे भारतीय मूल के होटल व्यवसायी दिनेश चावला को अमेरिका के एक हवाई अड्डे पर सामान चुराने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। कभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (America President Donald Trump) के साथ बिजनेस पार्टनर रहे भारतीय मूल के होटल व्यवसायी दिनेश चावला (Dinesh Chawla) को अमेरिका के एक हवाई अड्डे पर सामान चुराने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार चावला होटल्स के सीईओ को पिछले हफ्ते मेम्फिस इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Memphis International Airport) पर किसी दूसरे का सामान चोरी करते देखा गया। इस मामले के बाद वहां कि पुलिस ने चावला के खिलाफ केस दर्ज किया। दिनेश चावला के गाड़ी की तलाश की गई तो चोरी किया गया सूटकेस उन्हीं की गाड़ी से मिला, साथ ही पिछले एक महीने पहले चोरी हुए कुछ और सामान भी बरामद किए गए। चोरी के कुल सामानों की कीमत 4000 डॉलर के आसपास है। पुलिस ने बताया कि पूछताछ में दिनेश ने लंबे समय से चोरी करने की बात को कबूल किया है। लेकिन पहले चोरी किए गए सामान के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। दिनेश चावला को ये बात पता है कि चोरी करना गलत बात है पर मजे और संस्पेंस के लिए वह इस अपनी इस आदत से बाज नहीं आ रहे हैं। दिनेश चावला डोनाल्ड ट्रंप के बाद उनके भाई डोनाल्ड ट्रंप जूनियर के साथ काम कर रहे थे लेकिन पिछले इसी साल के फरवरी में वह बिजनेस से अलग हो गए।
कभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बिजनेस पार्टनर रहे भारतीय मूल के होटल व्यवसायी दिनेश चावला को अमेरिका के एक हवाई अड्डे पर सामान चुराने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। कभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बिजनेस पार्टनर रहे भारतीय मूल के होटल व्यवसायी दिनेश चावला को अमेरिका के एक हवाई अड्डे पर सामान चुराने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार चावला होटल्स के सीईओ को पिछले हफ्ते मेम्फिस इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर किसी दूसरे का सामान चोरी करते देखा गया। इस मामले के बाद वहां कि पुलिस ने चावला के खिलाफ केस दर्ज किया। दिनेश चावला के गाड़ी की तलाश की गई तो चोरी किया गया सूटकेस उन्हीं की गाड़ी से मिला, साथ ही पिछले एक महीने पहले चोरी हुए कुछ और सामान भी बरामद किए गए। चोरी के कुल सामानों की कीमत चार हज़ार डॉलर के आसपास है। पुलिस ने बताया कि पूछताछ में दिनेश ने लंबे समय से चोरी करने की बात को कबूल किया है। लेकिन पहले चोरी किए गए सामान के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। दिनेश चावला को ये बात पता है कि चोरी करना गलत बात है पर मजे और संस्पेंस के लिए वह इस अपनी इस आदत से बाज नहीं आ रहे हैं। दिनेश चावला डोनाल्ड ट्रंप के बाद उनके भाई डोनाल्ड ट्रंप जूनियर के साथ काम कर रहे थे लेकिन पिछले इसी साल के फरवरी में वह बिजनेस से अलग हो गए।